[12 Mar 2010 | 13 Comments | ]
वैदिक बोले, आरक्षण में आरक्षण से राबड़ीवाद दन्‍नाता

आईबीएन में छंटनी

[12 March 2010 | Read Comments | ]

IBN Lokmat front

डेस्‍क ♦ कुछ ही महीने पहले आवाज के ढाई सौ कर्मियों को सड़क का रास्‍ता दिखाने के बाद टीवी 18 ग्रुप ने अब लोकमत के 70 कर्मियों को निकाल दिया है।

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चमेली पुरस्‍कार घोषित

[12 March 2010 | Read Comments | ]

Shoma Chaudhury front

डेस्‍क ♦ 2009 का चमेली देवी जैन पुरस्‍कार तहलका की कार्यकारी संपादक शोमा चौधुरी और नागालैंड पेज की संपादक मोनालिसा को देने का एलान किया गया है।

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वेदप्रताप वैदिक ♦ आरक्षण में यदि आरक्षण दे भी दिया गया होता, तो क्या होता? राबड़ीवाद दन्नाता। सर्वथा अयोग्य महिलाओं को पकड़ कर गद्दी पर बैठा दिया जाता। वे क्या खाक कानून बनातीं?
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sanjay kumar tiwari on womens reservation bill

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[11 Mar 2010 | 4 Comments | ]
रोड टू संगम : एक अच्‍छी फिल्‍म की अकाल मौत

मधुकर पांडेय ♦ इस फिल्म को सारे देश में मनोरंजन कर से मुक्त कर देना चाहिए था। लेकिन न तो यूपी में ऐसा हुआ और न ही गांधी को अपनी व्यक्तिगत विरासत मानने वाली कांग्रेस ने उसके द्वारा शासित किसी भी राज्य में इसे मनोरंजन कर मुक्ति की सुविधा प्रदान की। बेसिरपैर एवं वाहियात फिल्मों के दौर में इस फिल्म का विषय सोचना तथा इसका बनना एक बहुत बड़ी सुखद घटना है। अफ़सोस है कि लोग विदेशों में अपने को “खान” एवं अमेरिकी राष्ट्रभक्त नागरिक साबित करने वाली फिल्मों पर 80-90 करोड़ खर्च कर देते हैं लेकिन अपने ही देश में इस संवेदनशील फिल्म का वो शायद नाम भी नहीं जानते होंगे।

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[11 Mar 2010 | 2 Comments | ]
पूंजीवादी व्‍यवस्‍था में पूंजीवादी महिलाओं के लिए आरक्षण

संजय कुमार तिवारी ♦ ज्‍यादातर महिलाएं अब भी हाशिये पर हैं। अभिजात घरों में काम करने वाली महिलाओं पर बढ़ते अत्‍याचार की खबरें आये दिन हम पढ़ते-सुनते हैं। इन घरों की महिलाएं पुरुषों के साथ मिलकर सदियों से विकृत विषमता को संचालित करती आयी हैं – और आज ये चाहती हैं कि सत्ता में इनकी जगह सुनिश्चित हो जाए। यही पूंजीवादी महिलाएं समाज में उस जड़ को खाद-पानी देती रही हैं, जिससे विषमतावादी समाज का विकास होता रहा है। इसलिए नीचे तबके की महिलाओं के लिए आरक्षण होना चाहिए। न कि उनके लिए जो बढ़ती विषमता की जकड़न को मजबूत करती रही हैं और महिला जाति का ही शोषण करती रही हैं।

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[10 Mar 2010 | One Comment | ]
हिमालय की वादी में यात्रा, पेंग्विन और दून लाइब्रेरी का शब्‍द मेला

डेस्‍क ♦ उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड, गेल (इंडिया) लिमिटेड और पेंगुइन बुक्स इंडिया के सहयोग से यात्रा बुक्स और दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर, ‘दून रीडिंग्सः हिमालय की गूंज’ कार्यक्रम के दूसरे आयोजन में 2, 3 और 4 अप्रैल को देहरादून में करने जा रहा है। पहली बार मई 2008 में इस तरह का आयोजना शुरू हुआ था और उसकी मास अपील शानदार रही थी। इस वर्ष साहित्योत्सव मुख्य रूप से उत्तराखंड पर केंद्रित है। राज्य भर के कवियों के काव्य पाठ और गायकों के गायन के साथ साहित्योत्सव शुरू होगा। लीलाधर जगूड़ी, मंगलेश डबराल, गिरदा, शेखर पाठक, नरेंद्र नेगी, बटरोही, डॉ अतुल शर्मा, जगदीश जोशी सरीखे कुछ जाने-माने उत्तरांचली लेखकों, कवियों और गायकों समेत गीतकार, पटकथा लेखक और एड गुरु प्रसून जोशी देहरादून के इस तीन दिवसीय साहित्योत्सव में शिरकत करेंगे।

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[8 Mar 2010 | 4 Comments | ]
एक कोने में गुमसुम, रजिया सुल्‍तान का मजार

ब्रजेश कुमार झा ♦ चांदनी चौक के नजदीक तुर्कमान गेट से एक पतला रास्ता बुलबुली खान की तरफ जाता है। यही वह इलाका है जहां रजिया सुल्तान यानी इतिहास की पहली महिला सुल्तान को दफनाया गया था। आज इस कब्रगाह की हालत देखेंगे तो महिला दिवस का डंका बजाने वालों की हकीकत समझ में आएगी। देखिए, देश के सबसे बड़े ओहदे पर महिला है। सरकार के भी कान खींच-खींचकर फिलहाल उसे एक महिला ही चला रही है। उस पर से दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का रुतबा देख लें। इनके राज में इल्तुतमिश की बेटी और एक जमाने की क्रांतिकारी महिला की कब्र उपेक्षित है। वह एक गौरवशाली इतिहास लिये लेटी है। अपनी कब्र पर एक छत को तरसती हुई।

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[8 Mar 2010 | 2 Comments | ]
“मीडिया महिलाओं के मसले मर्द के चश्‍मे से देखता है”

शीबा असलम फहमी ♦ आधुनिकता क्या केवल वस्त्रों में दिखनी चाहिए, या फिर वह हमारे भीतर विचारों के स्तर पर उतरने का पर्याय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला दिवस का सौवां साल हमारे लिए महत्त्वपूर्ण होना चाहिए, लेकिन अगर दलित समाज की महिलाएं पच्चीस दिसंबर को अपना महिला दिवस अलग से मनाती हैं, तो क्या हमें उन तक नहीं पहुंचना चाहिए। बहुत आधुनिक हो चुके हमारे मीडिया में खासतौर पर अल्पसंख्यकों के मुद्दे को एक फैशन की तरह लिया जाता है।

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[8 Mar 2010 | No Comment | ]
‘द हर्ट लॉकर’ जिंदाबाद, छह ऑस्‍कर झटके

कैथरीन बिग्लो ने ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्हें फ़िल्म द हर्ट लॉकर के लिए ये पुरस्कार दिया गया है। 82वें ऑस्कर समारोह में द हर्ट लॉकर ने कुल छह पुरस्कार जीते जबकि ऑस्कर की बड़ी दावेदार माने जाने वाली अवतार की झोली में तीन ऑस्कर गए। ऑस्कर पुरस्कारों के इतिहास में अभी तक सिर्फ़ चार महिलाओं को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक श्रेणी में नामांकन मिला था लेकिन पहली बार ऑस्कर जीतने का गौरव मिला है कैथरीन बिग्लो को। हॉलीवुड के कोडक थिएटर में हुए समारोह में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जेफ़ ब्रिजिज़ के नाम रहा है. उन्होंने ये अवॉर्ड फ़िल्म क्रेज़ी हार्ट के लिए जीता. वहीं सेंड्रा बुलोक सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री बनीं ( फ़िल्म द ब्लाइंड साइड)।

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[8 Mar 2010 | 2 Comments | ]
अज्ञेय की जन्‍मशती : कवि की कविता, कवि की आवाज़

डेस्‍क ♦ अज्ञेय को उनकी आवाज़ में सुनना एक आह्लादकारी अनुभव था। सात मार्च, रविवार की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के एनेक्‍सी सभागार में उनकी कविताओं को सुनने के लिए लगभग सौ बुद्धिजीवी, लेखक, कलाकार, संगीतकार, नाट्यकर्मी और पत्रकार जुटे थे। अज्ञेय के श्‍वेत-श्‍याम चित्रों एक एक करके पर्दे पर आ रहे थे और पार्श्‍व से उनकी विनम्र आवाज़ हॉल के अंधेरे में फैल रही थी। उनकी आवाज़ को रिकॉर्ड किया था ओम थानवी ने और चित्र भी उनके निजी अलबम के थे, जिसको मिला कर एक स्टिल वीडियो फिल्‍म तैयार की गयी थी। अज्ञेय की जन्‍मशती का यह पहला आयोजन था। इस तरह का आयोजन साल भर तक चलेगा।

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[8 Mar 2010 | 10 Comments | ]
गौरीनाथ को खगेंद्र ठाकुर ने भेजा कानूनी नोटिस

डेस्‍क ♦ मोहल्‍ला लाइव पर छपी कथाकार गौरीनाथ की एक प्रतिक्रिया के लिए उन्‍हें कानूनी नोटिस भेजी गयी है। यह प्रतिक्रिया गौरीनाथ ने खगेंद्र ठाकुर के उस आलेख पर दी थी, जिसमें उन्‍होंने गौरीनाथ को इशारों इशारों में अवसरवादी कहा था और इस अवसरवादिता के एक उदाहरण के तौर पर उन्‍होंने बताया था कि पटना पुस्‍तक मेले में मंच पर आकर गौरीनाथ ने आलोचक नामवर‍ सिंह के पांव छूए। यह आलेख खगेंद्र ठाकुर ने रविवार डॉट कॉम के लिए लिखा था। इसकी प्रतिक्रिया गौरीनाथ ने मोहल्‍ला लाइव डॉट कॉम को दी। इस प्रतिक्रिया से ति‍लमिला कर खगेंद्र ठाकुर ने अपने वकील के जरिये गौरीनाथ को कानूनी नोटिस भेजी है और चरित्र हनन का आरोप लगाया है।