[8 Feb 2010 | 17 Comments | ]
अनिल चमड़‍िया को निकाल कर गलती सुधार ली : विभूति

नक्‍सली कहा, पकड़ लिया

[8 Feb 2010 | Read Comments | ]

human rights logo

आवेश ♦ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता सीमा, उनके पति को नक्‍सली कह कर गिरफ्तार कर लिया गया। ये घटना बताती है कि यूपी में मानवाधिकार लहूलुहान है।

Read the full story »

जा‍ति क्‍यों नहीं जाती?

[8 Feb 2010 | Read Comments | ]

karunyakara

प्रो एल कारुण्‍यकारा ♦ जबसे आप वीसी बने हैं, तब से आपने चार नोटिस जारी किये हैं और चारों नोटिस दलित शिक्षकों को जारी किये गये हैं।

Read the full story »

विभूति नारायण राय ♦ अनिल चमड़िया साहित्य या दूसरे सब्‍जेक्‍ट के प्रोफेसर हो सकते थे, मास कॉम के नहीं। हमने गलती से उन्‍हें बुला लिया और सलेक्शन कमेटी ने उनको सलेक्ट भी कर लिया।
Read the full story »

मीडिया मंडी, समाचार »

[8 Feb 2010 | 6 Comments | ]

पीयूसीएल ♦ इलाहाबाद की पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता व पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टिज (पीयूसीएल) की राज्य कार्यकारिणी सदस्य व संगठन मंत्री सीमा आजाद, उनके पति पूर्व छात्रनेता विश्वविजय व साथी आशा को शनिवार को पुलिस ने इलाहाबाद जंक्‍शन रेलवे स्टेशन से बिना कोई कारण बताये उठा लिया है। ये दोनों मानवाधिकार कार्यकर्ता नयी दिल्ली से विश्व पुस्तक मेले में भाग लेकर रीवांचल एक्सप्रेस से इलाहाबाद लौट रहे थे। पुलिस का कहना है की ये लोग नक्सली हैं।

नज़रिया, शब्‍द संगत, समाचार »

[2 Feb 2010 | 2 Comments | ]
कथाकारों ने वर्धा में विभूति के प्रयासों की सराहना की

♦ सूरज प्रकाश कथा समय 2010 का उदघाटन 29 जनवरी की शाम सुप्रसिद्ध कथाकार सेरा यात्री ने किया। इस सत्र की अध्यक्षता विभूति नारायण राय ने की, जबकि बीज वक्तव्‍य असग़र वजाहत ने दिया। कार्यक्रम का संचालन राकेश श्रीवास्तव ने किया और साहित्य विद्यापीठ के डीन सूरज पालीवाल ने स्वागत भाषण में इस संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर विभूति नारायण राय ने तेजेंद्र शर्मा के कहानी संकलन का लोकार्पण किया। इसी मौक़े पर हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति विभूति नारायण राय की सराहना करते हुए कहा तेजेंद्र शर्मा ने कहा कि उनके प्रयासों से यहां साहित्यिक सांस्कृतिक गतिविधियों को नया आयाम मिला है।

नज़रिया, मीडिया मंडी, मोहल्ला दिल्ली, स्‍मृति »

[29 Jan 2010 | 6 Comments | ]
पुरुष पंडितों ने सभा की, पंडित प्रभाष जोशी को याद किया

समरेंद्र ♦ दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में प्रभाष जोशी पर लिखी गयी पुस्तक का लोकार्पण हुआ। इसे आप महज संयोग कहेंगे या क्‍या कहेंगे कि उस लोकार्पण में जितने लोगों ने प्रभाष जोशी के बारे में अपनी राय रखी, उनमें से एक को छोड़ कर कोई भी गैर ब्राह्मण नहीं था। जो अकेला शख्‍स गैरब्राह्मण था, वो भी एक ऐसी जाति से ताल्लुक रखता था जो खुद को ब्राह्मण होने का दावा करती रही है। यहां तक कि हद से अनहद गये का प्रकाशक भी ब्राह्मण ही है। इसे भी आप महज संयोग कहेंगे या फिर क्‍या कहेंगे कि मंच पर आकर प्रभाष जोशी को महान बताने वालों में एक भी महिला नहीं थी।

पुस्‍तक मेला, मीडिया मंडी, मोहल्ला दिल्ली, स्‍मृति »

[29 Jan 2010 | 2 Comments | ]
“प्रभाष जी गांधीवादी निर्भयता के आखिरी प्रवक्ता थे”

मोहल्‍ला लाइव संवाददाता ♦ अशोक वाजपेयी ने प्रभाषजी को याद करते हुए कहा कि प्रभाषजी उन गिने चुने पत्रकारों में थे, जिनकी आवाज साहित्यिक जगत तक में साफ सुनी जाती थी। उन्होंने राम मनोहर लोहिया और राजेंद्र माथुर के साथ प्रभाषजी की तुलना करते हुए कहा कि ये वे लोग थे, जिन्होंने हिंदी की नयी शैली विकिसत की और हिंदी वालों को उनका उचित सम्मान दिलाने में पूरी कोशिश की। उन्होंने ये भी कहा कि प्रभाषजी जैसा पत्रकार पैदा नहीं हुआ, जो हिंदीभाषी पूरे समाज का प्रवक्ता बन गया हो। वाजपेयी ने कहा कि प्रभाष जी संभवत: गांधीवादी निर्भयता के आखिरी प्रवक्ता थे।

नज़रिया, स्‍मृति »

[28 Jan 2010 | 4 Comments | ]
ज्‍योति बसु ने हमें आजादी के मायने समझाये

श्रीराम तिवारी ♦ कॉ ज्योति बसु ने भारतीय जन-गण और खास तौर से बंगाल की मेहनतकश जनता को वास्तविक आजादी से अवगत कराया। 1940 से ही वे परिपक्व कम्युनिस्ट विचारक के तौर पर विख्यात हो चुके थे। उन्होंने नैतिक मूल्यों को सम्मान दिलाते हुए, पूंजीवादी प्रजातंत्र के अंतर्गत ही एक राज्य विशष में कम्युनिस्ट पार्टी की अनवरत 23 साल तक सरकार चला कर विश्व कीर्ति मान स्थापित किया। उनके नेतृत्व में पश्चिम बंगाल सरकार ने वहां जो जो कार्य किये हैं उसकी जानकारी सभा को है फिर भी कुछ काम ऐसे हैं कि सारे देश और सारी दुनिया में प्रसिद्ध है।

समाचार »

[27 Jan 2010 | 4 Comments | ]
बोफोर्स से भी बड़ा है पद्म भूषण चटवाल का घोटाला

आलोक तोमर ♦ 1996 में चटवाल जब सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किया गया, तो उसने कहा कि उसके नाम पर खाते में सिर्फ 2600 डॉलर हैं और उसके पास कोई क्रेडिट कार्ड नहीं है। 1996 में ही अमेरिका के फैडरल बीमा निगम ने फस्र्ट न्यूयॉर्क बैंक से चटवाल द्वारा 2 करोड़ 50 लाख डॉलर ले कर हड़पने का आरोप लगाया था। चटवाल खुद इस बैंक का डायरेक्टर था और खुद अपने आपको कर्ज दे डाला। इस कर्ज की किसी ने कोई गारंटी भी नहीं दी थी। चटवाल ने ऐसे फर्जी कर्ज इतने दिलवाये कि बैंक ही डूब गया और चटवाल हमारे पद्म भूषण हैं।

समाचार »

[27 Jan 2010 | 6 Comments | ]
ठग है, दीवालिया है, झूठा है और पद्म भूषण है

आलोक तोमर ♦ अमेरिका के बैंकों का कहना है कि चटवाल बैंकों के पैसे हजम करने के लिए अपने आपको बार-बार दीवालिया घोषित करता है। भारत के कई बैंकों के साथ भी वह यही हरकत कर चुका है और इसी सिलसिले में सीबीआई ने उस पर मुकदमा चलाया था। बाद में चटवाल के संपर्कों के कारण यह मुकदमा वापस ले लिया गया। भारतीय बैंकों का करोड़ों रुपये आज भी उस पर उधार है। पद्म पुरस्कारों का नियम है कि पुरस्कार पाने वाले पर कोई आपराधिक मुकदमा नहीं चल रहा हो, उसने अपने जीवन परिचय में सही जानकारी दी हो, कभी दीवालिया या पागल न हुआ हो, दुनिया की किसी अदालत में दोषी न हो और आयकर का नियमित भुगतान कर रहा हो। इनमें से पागल होने के प्रावधान के अलावा सारे प्रतिबंध संत सिंह चटवाल लागू होते हैं। इतना ही नहीं संत सिंह चटवाल ने अपना कारोबार सुरक्षित रखने के लिए होटलों की एक शृंखला अपने बेटे विक्रम के नाम खोल दी है और विक्रम का नाम भी इतनी कम उम्र में उसके प्रेम प्रसंगों और नंगी तस्वीरों के लिए कुख्यात हो चुका है।

रिपोर्ताज, स्‍मृति »

[24 Jan 2010 | 3 Comments | ]
विकास का पहिया

ओम थानवी ♦ मुख्य सड़कों के समांतर बनी ये सड़कें लगभग आठ फुट चौड़ी होंगी। सड़कों पर तीन साइकिल सवार एक साथ गुजर सकते हैं। कार वाले साइकिल सवार के लिए अदब से रुक जाते हैं। साइकिल वाले पैदल चलने वाले के लिए। साइकिल पथ पर कई जगह अब लाल-हरी बत्तियां भी लगा दी गयी हैं। बत्तियों से पहले रेलिंग लगी हैं। इन पर लिखा है, ‘जनाब, यहां पांव रख कर सुस्ताएं। और शहर में साइकिल सवारी के लिए शुक्रिया।’ मुख्य सड़कों के हाशिये पर चौड़े से स्तंभ स्थापित हैं। इनमें लगा उपकरण पास से गुजरने वाली साइकिलों की गणना करता है। शहर के तापमान और वक्त के साथ आप देख सकते हैं कि उस रोज और महीने में अब तक कितने साइकिल सवार वहां से गुजर चुके हैं।