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आइए, खांडेकर के बिहार विरोध का विरोध करें

19 June 2009 24 Comments

दैनिक भास्‍कर के मध्‍यप्रदेश स्‍टेट हेड अभिलाष खांडेकर नस्‍लवाद से पीड़‍ित शख्‍स हैं। रंगभेदी हैं। क्षेत्रवादी हैं। उनके आचरण से यह हमेशा से ज़ाहिर होता रहा है, लेकिन आज जो उन्‍होंने किया है, वह हिंदी पत्रकारिता के लिए एक बड़ी शर्म है। मुंबई की लड़की से भोपाल में गैंगरेप होता है और अपने शहर की व्‍यवस्‍था से नाराज़ खांडेकर संपादकीय लिखते हैं, भोपाल को बिहार होने से बचाइए। बिहार के खिलाफ़ शिवसेना और एमएनएस मार्का मराठियों की गोलबंदी को खांडेकर जैसे लोग वैचारिक नेतृत्‍व प्रदान करते हैं। आइए, हम खांडेकर जैसों की मानसिकता का विरोध करें।

khandekar-marathi1आज दैनिक भास्‍कर के भोपाल संस्‍करण में फ्रंट पेज पर एक ख़बर है। ख़बर में रिपोर्टरद्वय सुनील सक्‍सेना और विहंग सालगट ने निष्क्रिय पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए महिलाओं से अपील की है कि वे पुलिस पर भरोसा न करें, अपनी हिफ़ाज़त ख़ुद करें। इस हताश अपील में भास्‍कर के एमपी स्‍टेट हेड अभिलाष खांडेकर ने एक बॉक्‍स संपादकीय लिखा है, जिसमें उन्‍होंने पता नहीं किससे गुज़ारिश की है कि भोपाल को बिहार होने से बचाएं। पूरे संपादकीय में बिहार में अपराध से जुड़े तथ्‍यों का कोई हवाला नहीं है और जाहिर तौर पर बिहार विरोधी मानसिकता को संपादकीय का आधार बनाया गया है। भोपाल गवाह है कि पिछले साल भर के डीबीस्‍टार ने शहर की भ्रष्‍ट आबोहवा की परतें उधेड़ दीं और बताया कि अपराध और भ्रष्‍टाचार के मामले में तालाबों का यह शहर कितना अपडेट है। ये अलग बात है कि स्‍टेट का मुखपत्र बना भोपाल दैनिक भास्‍कर शहर की सच्‍ची तस्‍वीर दिखाने से हमेशा बचता रहा। यह पहली बार है, जब भास्‍कर ने एक प्रशासन के खिलाफ़ कलम चलायी है – लेकिन उस कलम को अपने संकीर्ण और लिजलिजे शब्‍दों से खांडेकर ने अपवित्र कर दिया है।

अभिलाष खांडेकर

अभिलाष खांडेकर

होना तो यह चाहिए कि खांडेकर के संपादकीय के विरोध में बिहार के पत्रकारों को वहां एकजुट होकर प्रबंधन से बात करनी चाहिए और अगर प्रबंधन सुनने से इनक़ार करता है तो सामूहिक इस्‍तीफ़े की पेशकश करनी चाहिए। क्‍योंकि यह सिर्फ़ एक क्षेत्र की अस्मिता और उस पर टिप्‍पणी का मामला नहीं है – अगर होता तो एक संपादक की मूढ़मति समझ कर उसे नज़रअंदाज़ किया जा सकता था – दरअसल यह पत्रकारिता के मूल्‍यों पर हमला है।

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24 Comments »

  • Rajkumar said:

    btw… its not Bihar where gang rapes take place…Madhya Pradesh has been on the top of the charts for several years according to Crime Records Bureau… if looked at recent cases, once again it happens in Delhi and sometimes in Mumbai…

  • uday shankar khaware said:

    दरअसल जो बिहार को समझते ही नहीं उनके बारे में क्या कहना..एसी चेम्बर में बैठ कर लिखना आसन है पर सच्चाई जाने बिना किसी राज्य के बारे में ऐसी टीप्पणी कदाचित बर्दास्त योग्य नहीं है..लेखक को माफी मंगनी चाहिए

  • सुील कुमार said:

    आीषखांडेकर ी मुम्बई के शिव सेना प्रमुख के naati नाी बनना चाहते हैं क्या?्ीस्वस्थ पत्रकारिता का ्लक्षण है? हादसा और अपराध तो हर जगह होी है पर इस पर बिहार को बदनाम क्योंकरते ये लोग?

  • सुील कुमार said:

    आीषखांडेकर ी मुम्बई के शिव सेना प्रमुख के naati नाी बनना चाहते हैं क्या?्ीस्वस्थ पत्रकारिता का ्लक्षण है? हादसा और अपराध तो हर जगह होता है पर इस पर बिहार को बदनाम क्योंकरते ये लोग?

  • सुशील कुमार said:

    अभिलाष खांडेकर को मालुम नहीं कि बिहार की परम्परा में स्त्रियों की कितनी इज्जत है? ऐसे लोग कैसे पत्रकारिता में घुस आते हैं। इनकी तो बिहार आने पर पीटाई भी की जायेगी।क्षेत्रवाद को हवा देने वाले पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिये।

  • Anil Dubey said:

    national crime record bureau ka record to kuchh aur hi kahani kahta hai…nischit roop se khandekar jee ne facts ko bhi dhyan me nahi rakha hai.NCRB par crime ke 2007 tak ke aankade maijood hain.jara is par bhi nazar daalen….
    city-Wise Victims Of Rape Cases (Total) During 2007(NCRB)

    DELHI – 530
    Mumbai-177
    INDORE-74
    Pune-67
    Bhopal-62
    Jaipur -62
    bangaluru-62
    Hyderabad-58
    Nagpur-51
    Ludhiyana-52
    kolakatta-44
    Patna-42

    State wise Victims Of Rape Cases (Total) During 2007(NCRB)

    MADHYA PRADESH -3010
    WEST BENGAL -2106
    UTTAR PRADESH -1648
    BIHAR-1555
    MAHARASHTRA-1457
    ASSAM -1437
    RAJASTHAN -1240
    ANDHRA PRADESH -1070
    CHHATTISGARH -982
    DELHI -602

  • Chinmay said:

    अरे भई सच कहने पर इतनी मिर्ची लगती है तो जा कर बिहारियों को क्यूँ नही कहते की जागरूक बनो? एक साहब ने क्राइम केसस की स्टॅटिस्टिक्स जाहिर कर दीं तो साहब यह बताना सही होगा की ज़रूरी नही हर गुनाह की रपट पुलिस में लोग लिखाएँ वैसे भी बिहार जैसे राज्यों में जहाँ अधिकतर अपराधी राजनैतिक पार्टी के सदस्य होते हैं , उनके खिलाफ कौन रिपोर्ट लिखाने की हिम्मत करेगा? बिहारी यह खुद सोचें की चंद्रगुप्त मौर्य , सम्राट अशोक का बिहार आज शहबुद्दीन और लालुओं के नाम से क्यूँ जाना जाता है? बिहार की बदहाली के लिए खुद बिहारी ज़िम्मेदार हैं , बिहार आज बदहाल है यह एक सचाई है इसको आप नज़रअंदाज़ नही कर सकते फिर सच कहने पर इतना बवाल क्यूँ? आप पंजाब हरियाणा , कश्मीर और दिल्ली जाइए और देखिए वहाँ के रहवासी बिहारियों को किस तरह ट्रीट करते हैं यहाँ अगर कोई पत्रकार शहर की बिगड़ती क़ानून व्यवस्था पर चिंता जतारहा है तो रीजनलिज़म को हवा देने का क्या मतलब?

  • पूरे देश से माफी मांगे अभिलाष खांडेकर : Janatantra.com said:

    [...] मोहल्ला लाइव पर मौजूद एक ख़बर पर मेरी नज़र पड़ी। [...]

  • विनीत कुमार said:

    अभिलाष खांडेकर जब भोपाल को बिहार होने से बचाइए जैसी लाइन लिख रहे होंगे तो यही समझ रहे होंगे कि वो पत्रकारिता की दुनिया में एक नया मुहावरा, एक नया मेटाफर गढ़ने जा रहे हैं। उन्हें अपराध औऱ व्यवस्था के लिजलिजेपन की अभिव्यक्ति देने के लिए अब तक के मौजूदा सारे शब्द पुराने और असमर्थ जान पड़ रहे होंगे। लेकिन सवाल है कि क्या खांडेकर ये शब्द सिर्फ औऱ सिर्फ अपराध और अव्यवस्था को व्यक्त करने के लिहाज से प्रयोग कर रहे हैं। अगर ऐसा है तो हम इस बात पर सिर्फ अफसोस जाहिर कर सकते हैं कि खांडेकर जैसे पत्रकार की शब्द सम्पदा कितनी सीमित हैं और भाषा के मामले में कितने लाचार पत्रकार हैं।
    लेकिन नहीं,दूसरी स्थिति ये भी है कि ये भाषाई प्रयोग और मेटाफर गढ़ने की आपाधापी नहीं है। निजी समाचार चैनलों की तर्ज पर खांडेकर ने जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया है वो उनकी बिहार को लेकर व्यक्तिगत मानसिकता को स्पष्ट करता है। ये बताने के लिए कि वो एक खास तरह के क्षेत्रवादी मानसिकता से लैस पत्रकार हैं,ये लाइन पर्याप्त है। अपने पत्रकारीय जीवन में चाहे वो लाख बौद्धिकता का लबादा ओढ़े फिरते रहें लेकिन इस लाइन के प्रयोग से ये लबादा भी अब जगह-जगह से मसक गया है। अब उसके भीतर से जो कुछ भी झांक रहा है वो इतना खतरनाक,घृणित औऱ परेशान करनेवाला है कि इसे जगह-जगह से ढंकने के बजाय पूरे लबादे को चीरकर खांडेकर के असली चेहरे को पाठक को सामने लाकर पटक देना ही बेहतर होगा।
    पत्रकारिता की दुनिया में ऐसे कामों के लिए व्यक्तिगत स्तर पर माफी मांगने और नैतिकता के आधार पर क्षमा करने की कहीं कोई गुंजाइश नहीं है। जो पत्रकार भोपाल में बैठकर ये मानकर चल रहा हो कि बिहार को लेकर अनर्गल लिखने से भोपाल के पाठक खुश होंगे,उनके उपर नैतिकता आधारित बातें करने के बजाय कानूनी स्तर की कार्यवाही अनिवार्य है। ये सिर्फ अभिव्यक्ति के स्तर पर हेरा-फेरी का मामला नहीं है बल्कि पत्रकारिता के नाम पर जान-बूझकर पक्षपात करने और घृणा फैलाने का दुष्चक्र है। खांडेकर को कानूनी धाराओं के अन्तर्गत सजा मिलनी चाहिए। पत्रकारों को जितना हो सके,इसके लिए प्रयासरत हों।..

  • Prashant (PD) said:

    ab “bhaskar” ka link kam nahi kar raha hai..

  • शशि सिंह said:

    बिहार की वकालत करने बैठ जाऊं तो सवेरे से सांझ हो जाये। बिहार या भारत के किसी भी हिस्से के बारे ऐसी ओछी टिप्पणी करने का किसी को कोई हक़ नहीं है। ऐसा करने वालों की कड़े शब्दों में निंदा होनी चाहिये। अभिलाष खांडेकर शब्दों से बेहद दरिद्र और अभिव्यक्ति में बेहद कमजोर मालूम पड़ते हैं। लेकिन पत्रकारिता में जिस मुकाम पर विराजे हैं उसे जानकर डर लग रहा है। ऐसे लोग समाज को बेहद क्षति पहुंचा सकते हैं।

  • chandan said:

    ये तो बस मानसिक दिवालिएपन का ही दोष है, हम ऑस्ट्रेलिया में हो रहे भारतीय पर हमले की बात करते हैं तो क्या है????????

  • Dr. Aazad Singh said:

    अविनाश भैया, काहे बौरा रहे हो। अरे खांडेकर ने आईना ही तो दिखाया है। अपनी निजी खुन्नस और कहीं जाकर निकालो।

  • ashish jha said:

    khash yah aalekh bar-bar chapa jay . hum bihari ko yah samajhana hoga ki desh bnane se pahale hame bihar bnana chahiye tha. uprastrawad se bacna hum bihariyu ki sab se badi bhool thi.
    jay bihar, jay bharat

  • Girjesh said:

    खांडेकर जी, आप भोपाल में बैठकर आप जिस खुशफहमी में जी रहे है, यह आप की गलती नही बल्कि…. बौद्धिक मानसिकता का परिचायक है. आपको अपनी गलतफहमी दूर करने के लिए एक बार बिहार जरूर जाना चाहिए, तो शायद वास्तविकता का एहसास हो जाए. बिहार तेजी से बदल रहा है.बिहार में अपराध को झांकने के पहले मध्यप्रदेश की… आबोहवा पर भी नजरेइनायत कर लें तो बडी खुशी होगी. एक पुरानी कहावत है कि जिनके घर शीशे के होते है वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते. बढ रही अपराध की फेहरिस्त पर गौर करे तो पता चलता है कि बिहार बारहवें पायदान पर है जबकि आप का शांतिप्रिय भोपाल पांचवें नम्बर पर बिराजमान है. महोदय आप किस दुनिया में रहते है ? आप का सामान्य ज्ञान जान कर जैसे मैं व्यथित हुआ हू शायद ऐसे ही बहुत लोगों को भी ठेस पहुंची होगी बिहार के लिए ऐसा जहर उगलने के पहले अपने पाठकों का तनिक ख्याल किया होता कि देश भर के अलावां वहां भी भास्कर के बिहारी पाठक मौजूद है. उनका सहयोग भी आप के अखबार के उतना ही जरूरी है जितना भोपाल की आवाम का है.

  • दैनिक भास्कर की चोरी, ऊपर से सीनाजोरी : Janatantra.com said:

    [...] के एडिशन में की गई उनकी विशेष टिप्पणी (भोपाल को बिहार होने से बचाएं) को राष्ट्रीय संस्करण में हू-ब-हू छाप [...]

  • munna k pandey said:

    bina ground reality jaane aur khali kuchhek rapaton aur suni suani baaton ko saathi anil dubey ne nahi likha hai..khali bihar jaise jagahon par hi criminals rajneta bane baithe hain ye kahna uchit nahi jaan padta fir jis tarah se chinmay ji ko chhatpataahat hui hai(anil ke report data se)usse to yahi jaahir hota hai ki bihar me crime hota hai par koi report nahi darz ki jaati maane ye ki m.p. mein police itni imaandaar hai ki crime ki report badi imaandaari aur shiddat se darz karti hai.iska matlab ye hua ki bhale hi crime level m.p ka badh gaya ho par dosh police prasashan ka nhai hai..aisa bihar effect ke kaaran hai.sharm aani chahiye ki ek ki moorkhbayani ko sachchaaee ka zaamaa pahnaane aur use sahi saabit karne ki choinmay jaiso ki koshish hasyaspad sthiti paida karti hai.chinmay ka is kathan par ki khandekar ka ye statement kshetravaad nahi hai unke maansik diwaliyepan ko darshaata hai.kam se kam kisi sharmsaar karne wali ghatna aur usko chashni me lapet kar use ek alag rang dene wale sampadak ki maansikta ko sweekaarne ka saahas kijiye..par ye maadda bhi to hona chahiye..jo chinmay khandekar thakre jaiso ke paas nahi hai.rahi baat delhi haryana mein bihari jaise term ke use ki to bata doon iska kaaran crime level se nahi balki iske opeechhe ek bada socio-economic reason hai.thoda sa brain se kaam lenge to samajh jayenge.haryana aur delhi jaisi jagahon mein crime level kis kaaran badha hai isko dekhne ki jarurat hai aur haan aapki jaankari ke liye bata doon ki in jagahon par naye amir khoob uge hai pichhle 20 saalon me jo pahle kisaan the aue ab..(JAANKARI KE LIYE BATA DOON ITARSI SE HI PARVARISH HAI MERI)
    soch badalne ko nahi kahunga chinmay sahab aur khandekar ji kyonki ye guda aap jaison me nahi hai kunwe ke mendhak bane rahiye baudhikta ka khokhla labaadaa odhe rahiye…waise bhi apni aadat gobar pe laat maarne ki nahi hai
    regards apke tarko ko salaam aapki buddhi ko
    munna k pandey(

  • Sangeeta Kumari said:

    कम से कम पत्रकार को अभिलाष खांडेकर होने से बचना ही चाहिए :-)

  • नई पीढी said:

    खांडेकर को बिहार का “आपराधिक चहरे” के साथ उसके संघर्षशील और जुझारू इतिहास को भी देखना होगा. लोगों का आंदोलित होना उनके पिछडेपन का नहीं बल्कि उनकी जागरूकता का परिचायक है. खांडेकर जैसे लोगों का विरोध होना इसलिए भी जरुरी है क्योंकि यह मीडिया के माद्यम से आम लोगों के दिमाग में नकारात्मक छवि का बिज बोते हैं, जैसे की संघियों ने मुसलिमों को लेकर बो रखी है.

  • रजनीश के झा said:

    खांडेकर के बारे में बताने की जरुरत नहीं, कहने की जरुरत नहीं,
    पत्रकारिता में लोग जानते हैं की ये खालिश दलाली करने वाले पत्रकार हैं और सिर्फ दलाली की कीमत इन्हें मिलती है, रही बात प्रतिक्रिया की तो ऐसे बेगैरत पत्रकार और इसकी प्रतिक्रया से किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, हाँ लोग अब खांडेकर के ज्ञान और पत्रकारिता से वाकिफ जरुर हो गए हैं.

  • Atul Jha said:

    मुझे पता नहीं इन मीडिया वालो को बिहार्वालो औउर बिहार से क्या परेसानी है .हमे ऐसे रिपोर्टर्स की ऐसे रिपोर्ट्स की तिपनियो पर मजाक समझ के हसना होगा .They are fscking so jobless and they have no news to cater so to sell there news they are creating sensation out of nothing.I wish these buggers get some bashing and they shut there fscking mouth.

    cheers!!!

  • दैनिक भास्कर की चोरी, ऊपर से सीनाजोरी | जनतंत्र said:

    [...] के एडिशन में की गई उनकी विशेष टिप्पणी (भोपाल को बिहार होने से बचाएं) को राष्ट्रीय संस्करण में हू-ब-हू छाप [...]

  • पूरे देश से माफी मांगें अभिलाष खांडेकर | जनतंत्र said:

    [...] मोहल्ला लाइव पर मौजूद एक ख़बर पर मेरी नज़र पड़ी। [...]

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