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बिहार में फिर बाढ़ की दस्‍तक, असम में भी तबाही

3 July 2009 One Comment

BiharFlood1पटना/गुवाहाटी, 3 जुलाई। बिहार के उत्तर में मूसलाधार बारिश की वजह से कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक और बागमती जैसी प्रमुख नदियां ऊफान पर हैं जिससे कई क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। सुपौल जिले के बीरपुर बैराज पर कोसी नदी में जलस्तर 1.88 लाख क्यूसेक के ऊपर पहुंच गया है।

बाढ़ के खतरे को देखते हुए बाढ़ संभावित सभी क्षेत्रों के जिलाधिकारियों को चौकस रहने का आदेश दिया गया है। नेपाल तथा बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में दो दिनों से हो रही लगातार बारिश से नदियों के जलस्तर में वृद्धि देखी जा रही है।

बीरपुर बैराज के अधीक्षण अभियंता एम़ एफ हमीद ने शुक्रवार को बताया कि बैराज के ऊपर कोसी में 1,88,951 क्यूसेक पानी है जबकि बहाव के समय पानी 1,86,951 क्यूसेक है। उन्होंने बताया कि कोसी नदी के कैनाल में 3,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। गुरुवार को बीरपुर बैराज में 1.27 लाख क्यूसेक पानी बह रहा था। पानी के बहाव के कारण बैराज में दबाव बना हुआ है।

बढ़ते जलस्तर के कारण मधेपुरा तथा अररिया की कई छोटी नदियां ऊफान पर हैं। वाल्मीकिनगर में गंडक बैराज का जलस्तर 1.71 लाख क्यूसेक बना हुआ है। लखीसराय जिला में किउल तथा हरूहर नदी में जलस्तर बढ़ जाने के कारण पिपरिया प्रखंड का जिला मुख्यालय से सड़क संपर्क भंग हो गया है।

नेपाल में हो रही भारी बारिश के बाद कटिहार जिला के कुरसेला रेल ब्रिज पर कोसी का जलस्तर 24.85 मीटर है, जो खतरे के निशान से नीचे है। हालांकि इसमें बढ़ोतरी के संकेत हैं।

केन्द्रीय जल आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद बागमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, वहीं गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।

अधिकारिक सूत्रों के अनुसार जलस्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को संवेदनशील तटबंधों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

उधर असम में मूसलाधार बारिश से उत्पन्न बाढ़ की स्थिति गंभीर रूप ले चुकी है। पिछले दो दिनों में लगभग 200,000 लोग बेघर हो गए हैं।

राज्य के राजस्व एवं पुनर्वास मंत्री भूमिधर बर्मन ने शुक्रवार को बताया, “पिछले दो दिनों में चार जिलों लखीमपुर, धीमाजी, जोरहाट और नागांव के तकरीबन 350 गांवों में बाढ़ की वजह से लगभग 200,000 लोग बेघर हो गए हैं।”

अधिकतर विस्थापितों को अस्थायी शिविरों में शरण दी गई है। बर्मन ने कहा, “हम बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को खाद्य और चिकित्सा सहायता मुहैया करा रहे हैं।”

असम के खाद्य नियंत्रण मंत्री पृथ्वी माझी ने कहा, “स्थिति गंभीर है। हम लोगों की तकलीफें कम की भरपूर कोशिश कर रहे हैं।”

उधर, केंद्रीय जल आयोग की ओर से शुक्रवार को कहा गया कि असम की मुख्य नदी ब्रह्मपुत्र और इसकी सहयोगी नदियां कम से कम आठ जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

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One Comment »

  • विनीत कुमार said:

    भाई लोग पिछले साल के फुटेज निकालो…काम आ जाएगा

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