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	<title>Comments on: बिकाऊ मीडिया से पर्दा उठाने के लिए थैंक यू आम चुनाव!</title>
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		<title>By: काशिफ आरिफ</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/07/16/more-comments-on-media/comment-page-1/#comment-336</link>
		<dc:creator>काशिफ आरिफ</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Jul 2009 13:17:35 +0000</pubDate>
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		<description>आप लोगो के लेख पढकर मुझे मेरे शहर आगरा में प्रचलित एक कहावत याद आ गयी....

&lt;b&gt;&quot;दुसरों को नसीहत और अपने को वसीहत&quot;&lt;/b&gt;

कालीचरन फ़िल्म में कादर खान जी ने एक डायलाग बोला था कि &lt;b&gt;&quot;कीचड को साफ़ करने के लिये कीचड में उतरना पडता है&quot;&lt;/b&gt;

आप लोग इस मैदान में है और आप लोगो का लेख पढने के बाद दिल करता है कि आपसे उम्मीद की जाये कि आप लोग इस गन्दगी को अपने - अपने तरीके दुर करने की कोशिश करेंगे</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आप लोगो के लेख पढकर मुझे मेरे शहर आगरा में प्रचलित एक कहावत याद आ गयी&#8230;.</p>
<p><b>&#8220;दुसरों को नसीहत और अपने को वसीहत&#8221;</b></p>
<p>कालीचरन फ़िल्म में कादर खान जी ने एक डायलाग बोला था कि <b>&#8220;कीचड को साफ़ करने के लिये कीचड में उतरना पडता है&#8221;</b></p>
<p>आप लोग इस मैदान में है और आप लोगो का लेख पढने के बाद दिल करता है कि आपसे उम्मीद की जाये कि आप लोग इस गन्दगी को अपने &#8211; अपने तरीके दुर करने की कोशिश करेंगे</p>
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	<item>
		<title>By: samjho</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/07/16/more-comments-on-media/comment-page-1/#comment-334</link>
		<dc:creator>samjho</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Jul 2009 11:19:39 +0000</pubDate>
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		<description>खबरें खबरें हें इन्हें मजाक न समझो. खबरें पढ़ क्रर आपने अपनी सोच  में बदलाव क्र लिया हो, एसा  तो कदाचित नहीं 
हुआ होगा. फिर काहे की चिंता चलने दीजेये जो चल रहा हे. खबरें सुन कर आप दींन  भर  उसकी चर्चा दिन भर इधर -उधर 
करते ही तो फिरते रहते हें. बीएस इतना भर  ही तो है . यदी आपको कोइ खबर ऐसी लगती है की आपका मन ना मान रहा 
हो तो न मानो . पर जब क्या करोगे यदि आपके बेटे का सलेक्शन कीसी कम्पनी में हो गया है.उसकी खबर छापी है कम्पनी 
ने. फीर   भी ना मानीये आप . कम से कम खबरों का अस्तित्व तो स्वीकार कीजिए . शायद आप समझ गये होगे . थोडी को 
ज्यादा समझें ....अलविदा ऐ पढ़ने वालो ....सलामत रहो ....</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>खबरें खबरें हें इन्हें मजाक न समझो. खबरें पढ़ क्रर आपने अपनी सोच  में बदलाव क्र लिया हो, एसा  तो कदाचित नहीं<br />
हुआ होगा. फिर काहे की चिंता चलने दीजेये जो चल रहा हे. खबरें सुन कर आप दींन  भर  उसकी चर्चा दिन भर इधर -उधर<br />
करते ही तो फिरते रहते हें. बीएस इतना भर  ही तो है . यदी आपको कोइ खबर ऐसी लगती है की आपका मन ना मान रहा<br />
हो तो न मानो . पर जब क्या करोगे यदि आपके बेटे का सलेक्शन कीसी कम्पनी में हो गया है.उसकी खबर छापी है कम्पनी<br />
ने. फीर   भी ना मानीये आप . कम से कम खबरों का अस्तित्व तो स्वीकार कीजिए . शायद आप समझ गये होगे . थोडी को<br />
ज्यादा समझें &#8230;.अलविदा ऐ पढ़ने वालो &#8230;.सलामत रहो &#8230;.</p>
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		<title>By: shambhugaon</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/07/16/more-comments-on-media/comment-page-1/#comment-324</link>
		<dc:creator>shambhugaon</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Jul 2009 20:55:15 +0000</pubDate>
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		<description>आपके अंदर की पत्रकारिता जिंदा रहे... बहुत अच्छा है आप लोग जिस समुह में हैं... उसमें तो सुधार करने की आपकी औकात नहीं है या नौकरी के डर से करेंगे ही नहीं... बस ब्लॉग के जरिए बौद्धिक दस्त करते रहिए... या अगर इतनी ही आग है तो अपने ग्रूप टाइम्स ग्रूप या एक्सप्रेस ग्रूप या मेरे दोस्त जो सरकारी रुपए खा रहे है वो सड़क पर निकलकर संघर्ष करें... या वो मैडम जो रेडियो पर गाना सुनाती हैं या समाचार वाचती है... पता नहीं वो क्यों नहीं अपने माध्यम से इसका हल निकालती हैं... ये तो वहीं हुआ विचार कुछ और व्यवहार कुछ और,,, भाइयों और बहनों अगर हिम्मत है तो अपने अपने माध्यम में आग उगलकर दिखाओं... नहीं तो चलने दो... जैसे चल रहा है.. क्यों बौद्धिकता झाड़ रहे हैं... अविनाश जी का ब्लॉग है उसे इस लिए पढ़ता हूं क्योंकि वो कहते नहीं बल्कि करते हैं... नौकरी को कई बार लात मार चुके हैं... वैसे आपके मनमोहक सुंदर तस्वीर हिन्दुस्तान में छपी मृणाल पांडे की तस्वीर को भी फिका कर रही है... बस एक दो किताब हाथ में रख लेते...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपके अंदर की पत्रकारिता जिंदा रहे&#8230; बहुत अच्छा है आप लोग जिस समुह में हैं&#8230; उसमें तो सुधार करने की आपकी औकात नहीं है या नौकरी के डर से करेंगे ही नहीं&#8230; बस ब्लॉग के जरिए बौद्धिक दस्त करते रहिए&#8230; या अगर इतनी ही आग है तो अपने ग्रूप टाइम्स ग्रूप या एक्सप्रेस ग्रूप या मेरे दोस्त जो सरकारी रुपए खा रहे है वो सड़क पर निकलकर संघर्ष करें&#8230; या वो मैडम जो रेडियो पर गाना सुनाती हैं या समाचार वाचती है&#8230; पता नहीं वो क्यों नहीं अपने माध्यम से इसका हल निकालती हैं&#8230; ये तो वहीं हुआ विचार कुछ और व्यवहार कुछ और,,, भाइयों और बहनों अगर हिम्मत है तो अपने अपने माध्यम में आग उगलकर दिखाओं&#8230; नहीं तो चलने दो&#8230; जैसे चल रहा है.. क्यों बौद्धिकता झाड़ रहे हैं&#8230; अविनाश जी का ब्लॉग है उसे इस लिए पढ़ता हूं क्योंकि वो कहते नहीं बल्कि करते हैं&#8230; नौकरी को कई बार लात मार चुके हैं&#8230; वैसे आपके मनमोहक सुंदर तस्वीर हिन्दुस्तान में छपी मृणाल पांडे की तस्वीर को भी फिका कर रही है&#8230; बस एक दो किताब हाथ में रख लेते&#8230;</p>
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