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	<title>Comments on: गू खाने को ट्रेंड बनाने की कोशिश</title>
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		<title>By: suresh pandey</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/07/20/dheeresh-saini-on-uday-prakash-controvercy/comment-page-1/#comment-405</link>
		<dc:creator>suresh pandey</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jul 2009 11:24:48 +0000</pubDate>
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		<description>मुंडे- मुंडे- मतिर्भिन्ना. लगे रहो विद्वानों- आप महान आपकी सहितियक भाषा महान, बाकी सब बेईमान. वाह. क्यूं पढेगा हिंदी का पाठक आपको? इसी गू -गा के लिए क्या? चलिए अपनी तलवारों को म्यान में डाल लीजिये, सब का भला होगा.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मुंडे- मुंडे- मतिर्भिन्ना. लगे रहो विद्वानों- आप महान आपकी सहितियक भाषा महान, बाकी सब बेईमान. वाह. क्यूं पढेगा हिंदी का पाठक आपको? इसी गू -गा के लिए क्या? चलिए अपनी तलवारों को म्यान में डाल लीजिये, सब का भला होगा.</p>
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		<title>By: अंशुमाली रस्तोगी</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/07/20/dheeresh-saini-on-uday-prakash-controvercy/comment-page-1/#comment-394</link>
		<dc:creator>अंशुमाली रस्तोगी</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jul 2009 05:08:59 +0000</pubDate>
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		<description>इस मसले पर संतुष्ट किस्म की चुप्पी साधे बैठे बहुत से बड़े लेखक, जिनमें नामवर सिंह और अशोक वाजपेयी, राजेंद्र यादव और दूसरे तमाम लेखक कब अपना रुख जाहिर करेंगे (’संतो कुछ तो कहो इस गाढ़े वक़्त में’)।

अरे इन महानों के पोथड़े स्वयं गू में सने हुए हैं, ये क्या खाकर इस प्रकरण पर कहे-बोलेंगे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इस मसले पर संतुष्ट किस्म की चुप्पी साधे बैठे बहुत से बड़े लेखक, जिनमें नामवर सिंह और अशोक वाजपेयी, राजेंद्र यादव और दूसरे तमाम लेखक कब अपना रुख जाहिर करेंगे (’संतो कुछ तो कहो इस गाढ़े वक़्त में’)।</p>
<p>अरे इन महानों के पोथड़े स्वयं गू में सने हुए हैं, ये क्या खाकर इस प्रकरण पर कहे-बोलेंगे।</p>
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		<title>By: neeraj paasvan</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/07/20/dheeresh-saini-on-uday-prakash-controvercy/comment-page-1/#comment-393</link>
		<dc:creator>neeraj paasvan</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jul 2009 04:06:56 +0000</pubDate>
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		<description>समीर जैन और आडवाणी का &#039;गू&#039; खाने वाले &#039;क्रांतिकारी&#039; ही नहीं, अभी ताज़ा खबर ये है कि जेसिका लाल के कातिल मनु शर्मा के अखबार से  भी मोटी रकम (गू ) पाने वाले ने भी ऐसा ही लिखा है। उसमें पंकज चतुर्वेदी को &#039;क्रांतिकारी&#039; बनाया गया है और हमारे लेखक-साहित्यकार उदय को संघी। अब निंदा अभियान में लगे इन सभी की पोल खोलनी चाहिए। इस काम में मैं भी साथ हूं। मेरा भी संबंध किसी पार्टी से नहीं है, हां उदय प्रकाश जी का मैं पाठक और प्रसंश्क हूं। &#039;फ़ैन&#039; बोलो तो बोल सकते हो।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>समीर जैन और आडवाणी का &#8216;गू&#8217; खाने वाले &#8216;क्रांतिकारी&#8217; ही नहीं, अभी ताज़ा खबर ये है कि जेसिका लाल के कातिल मनु शर्मा के अखबार से  भी मोटी रकम (गू ) पाने वाले ने भी ऐसा ही लिखा है। उसमें पंकज चतुर्वेदी को &#8216;क्रांतिकारी&#8217; बनाया गया है और हमारे लेखक-साहित्यकार उदय को संघी। अब निंदा अभियान में लगे इन सभी की पोल खोलनी चाहिए। इस काम में मैं भी साथ हूं। मेरा भी संबंध किसी पार्टी से नहीं है, हां उदय प्रकाश जी का मैं पाठक और प्रसंश्क हूं। &#8216;फ़ैन&#8217; बोलो तो बोल सकते हो।</p>
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		<title>By: हृषिकेश सुलभ</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/07/20/dheeresh-saini-on-uday-prakash-controvercy/comment-page-1/#comment-389</link>
		<dc:creator>हृषिकेश सुलभ</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Jul 2009 18:25:16 +0000</pubDate>
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		<description>प्रि‍य अवि‍नाश,

उदय प्रकाश पर विवाद समाप्‍त होना चाहि‍ए। नि‍श्‍चि‍त रूप से उन्‍होने योगी के हाथों पुरस्‍कार लेकर उचि‍त नहीं कि‍या। फि‍र भी।

भारतें‍दु ने वि‍क्‍टोरि‍या रानी की प्रशंसा की थी। पर वे आधुनि‍क हिं‍दी कवि‍ता और रंगमंच के जनक थे और रहेंगे। इसके बावजूद उन्‍हें कोई गाली नहीं देता और न दि‍या जाना चाहि‍ए।

मैं हिं‍दी के ढेरों ऐसे लेखकों को जानता हूं, जो दि‍न-रात राजनेताओं के तलवे चाटते रहते हैं और महान बने हुए हैं।

और मैं ही नहीं तुम भी और बहुत सारे लोग भी जानते हैं - उदय ने तलवे नहीं चाटे हैं। मैंने दि‍ल्‍ली में दो पेग शराब और दो बोटी कबाब के लि‍ए बडे़ लेखकों को भागते हुए देखा है। इस तरह भागते हुए कि‍ धोती का पि‍छुआ खुल जाए।

हिं‍दी का संसार प्‍यार और नफ़रत दोनों बेहद हिंसक ढंग से करता है।

उदय प्रकाश से मेरा न तो पत्र व्‍यवहार है और न ही नि‍कट की मुलाकात। उन्‍हें पढ़ता रहा हूं। कई बार पसंद आये हैं और कई बार नहीं भी आते।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रि‍य अवि‍नाश,</p>
<p>उदय प्रकाश पर विवाद समाप्‍त होना चाहि‍ए। नि‍श्‍चि‍त रूप से उन्‍होने योगी के हाथों पुरस्‍कार लेकर उचि‍त नहीं कि‍या। फि‍र भी।</p>
<p>भारतें‍दु ने वि‍क्‍टोरि‍या रानी की प्रशंसा की थी। पर वे आधुनि‍क हिं‍दी कवि‍ता और रंगमंच के जनक थे और रहेंगे। इसके बावजूद उन्‍हें कोई गाली नहीं देता और न दि‍या जाना चाहि‍ए।</p>
<p>मैं हिं‍दी के ढेरों ऐसे लेखकों को जानता हूं, जो दि‍न-रात राजनेताओं के तलवे चाटते रहते हैं और महान बने हुए हैं।</p>
<p>और मैं ही नहीं तुम भी और बहुत सारे लोग भी जानते हैं &#8211; उदय ने तलवे नहीं चाटे हैं। मैंने दि‍ल्‍ली में दो पेग शराब और दो बोटी कबाब के लि‍ए बडे़ लेखकों को भागते हुए देखा है। इस तरह भागते हुए कि‍ धोती का पि‍छुआ खुल जाए।</p>
<p>हिं‍दी का संसार प्‍यार और नफ़रत दोनों बेहद हिंसक ढंग से करता है।</p>
<p>उदय प्रकाश से मेरा न तो पत्र व्‍यवहार है और न ही नि‍कट की मुलाकात। उन्‍हें पढ़ता रहा हूं। कई बार पसंद आये हैं और कई बार नहीं भी आते।</p>
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