अपने लालाओं से कहो, कुछ सोचें और गंध न फैलाएं
♦ गिरींद्र नाथ झा
संसद में इतनी सार्थक बातचीत के लिए पहले रविशंकर प्रसाद का शुक्रिया। टीआरपी को लेकर उनकी चिंता एक आम दर्शक की चिंता दिखती है, जो शाम में घर लौटने पर टीवी के रिमोट से खेलना शुरू करता है तो उसके हाथ में ऐसे कार्यक्रम ही आते हैं, जिस पर एक नज़र डालने के बाद ही वह बमक (गुस्सा) उठता है।देश में गिनती के घरों में मशीनें लगाकर टीआरपी का खेल और फिर विज्ञापनों का लॉलीपॉप, यह समाचार चैनलों और अन्य मनोरंजन चैनलों की जीन में घुसा पड़ा है। इसे निकालना कितना संभव है, यह लाख टके का सवाल है। लेकिन इतना तो सच है कि इस टीआरपी के नाम पर टेलीविजन स्क्रीन पर हर रोज़ गंध ही फैलाया जा रहा है।
आखिर राखी सावंत, सच का सामना, इस जंगल को बचाना है या फिर न्यूज चैनलों का अपना खास संग्राम, हमें और आपको बोर करता है। पता नहीं ऐसे कार्यक्रम किस प्रकार के दर्शकों के लिए परोसे जाते हैं। हम सब जानते हैं कि टीआरपी का खेल विज्ञापनों का भंवर रचने के लिए खेला जा रहा है लेकिन उच्च पदों पर आसीन सभी लोग मौन साधे हुए हैं और इन भंवरों को रास्ता दिखा रहे हैं कि लगे रहो इंडिया, बाजार को मज़बूत बनाओ।
अब देखिए राखी शादी के लिए लालायित हैं तो टीआरपी बढ़ेगी, सच का सामना में रिश्तों की ऐसी की तैसी की जाएगी तो भी टीआरपी का ग्राफ बढ़ेगा और तो और ‘इस जंगल को बचाना है’ में कोई अदाकारा है, स्नान करेगी तो टीआरपी का खेल और मजेदार हो जाएगा। अरे हुजूर, यह फैसला करने वाले आप कौन होते हैं… कुछ हजार घरों में लगायी गयी मशीन से ही क्या चैनलों को विज्ञापन मिलेगा? सुदूर शहरों में क्या लोग टीवी नहीं देखते हैं…?
हद तो तब हो जाती है, जब समाचर चैनलों पर ही इन कार्यक्रमों के प्रोमो पेश किये जाते हैं। राखी का हंसना-रोना मुख्य समाचार का हिस्सा है। रविशंकर प्रसाद और कुछ सांसदों की राय ने ज़रूर इन बातों पर सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हां यह भी धुव्र सच है कि कुछ लोगों को और खासकर मीडिया के लोगों को रविशंकर प्रसाद की टिप्पणियां तीखी लगी होंगी, लेकिन इस पर उन्हें विचार करना होगा।
मेरे कुछ दोस्त, जो ख़बरों की खिचड़ियां रोज़ नहीं पकाते हैं, उन्होंने जब रविशंकर प्रसाद का वक्तव्य सुना तो बड़ी चोटिल बात कही – दोस्त अब अपने लालाओं से कहो, कुछ सोचें और गंध फैलाने के काम से बाज आएं।
जुड़े हुए लिंक
♦ समाज, सरकार, संसद, सर्जना, सेंसर और रविशंकर प्रसाद
♦ टीआरपी से टशन : गुड़ खाये, गुलगुल्ले से परहेज
♦ मॉनिटरिंग का मतलब होगा कि टीवी पर योग, अध्यात्म
♦ रविशंकर प्रसाद ने जन-चिंता को मुखरित किया













[...] टशन : गुड़ खाये, गुलगुल्ले से परहेज ♦ अपने लालाओं से कहो, कुछ सोचें और गंध न फ… ♦ रविशंकर प्रसाद ने जन-चिंता को [...]
Leave your response!
Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)