110 पत्रकारों ने लिखी 56 अस्पृश्य महिलाओं की कहानी
♦ मदन झा
सिर पर मैला ढोने के घिनौने काम से मुक्त करायी गयी राजस्थान के अलवर और टोंक की करीब 200 महिलाओं ने 10 अगस्त को देश की पहली महिला लोकसभाध्यक्ष के साथ अपने दु:ख-सुख बांटे। मौका था स्कैवेंजिंग से मुक्त करायी गयीं महिलाओं के जीवन पर आधारित अंगरेजी पुस्तक `न्यू प्रिंसेसेस ऑफ अलवर´ और हिंदी पुस्तक `अलवर की नई राजकुमारियां´ का लोकार्पण।
मीरा कुमार ने राजधानी दिल्ली और अन्य जगहों से आये कम-से-कम एक हजार बुद्धिजीवियों की मौजूदगी में दोनों पुस्तकों का लोकार्पण किया। समारोह की अध्यक्षता पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री भीष्म नारायण सिंह ने की और विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार श्री मोहन के टिक्कु जी उपस्थित थे।
पुस्तक लोकार्पण के अवसर पर श्रीमती मीरा कुमार ने डॉ बिंदेश्वर पाठक के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और नौजवानों तथा बुद्धिजीवियों से अपील की कि वे देश से इस कुप्रथा को मिटाने और स्कैवेंजरों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में सहयोगात्मक और सकारात्मक प्रयास करें, ताकि इस अमानवीय कुप्रथा को मिटाने का महात्मा गांधी और बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का सपना पूरा हो सके।
मीरा कुमार ने कहा कि विषमता और छूआछूत का भयंकर रोग हमारे समाज को खोखला कर रहा है, जिससे निजात दिलाना हम सभी का धर्म है। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि जो जितना ज्यादा पढ़ लिख लेता है, रूढ़िवादिता उनमें ज्यादा घर कर जाती है। विद्वानों का मन भी जात-पांत और अन्य सामाजिक कुरीतियों से अभी तक ऊपर नहीं उठ सका है।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे पूर्व राज्यपाल भीष्म नारायण सिंह ने पुस्तकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि मुंशी प्रेमचंद से लेकर आज तक अनेक लेखकों ने शोषित-पीड़ितों के संबंध में बहुत कुछ लिखा है। उनकी पुस्तकों में इनके साथ हुए दुर्व्यवहार, इनकी समस्याएं और इनकी सामाजिक स्थिति का काल्पनिक चित्रण है, किंतु इन दोनों पुस्तकों में इनके साथ-साथ अलवर की नई राजकुमारियों की आपबीती का भी मार्मिक चित्रण है, जो हृदय को द्रवित कर देता है।
इस अवसर पर डॉ पाठक ने कहा कि इन स्कैवेंजर महिलाओं को पुनर्वासित करने और सदियों पुरानी कुप्रथा से निकाल पाने में मिली इस सफलता पर निश्चित तौर पर थोड़ा सुकून हुआ है, लेकिन वह देश के अन्य हिस्सों में इससे संलिप्त महिलाओं और उनके परिवारों को भी समाज की मुख्यधारा में शामिल करने का अनवरत प्रयास करते रहेंगे।
पुस्तकों में 56 पूर्व स्कैवेंजर महिलाओं की आपबीती और दर्दभरी कहानियां हैं, जिन्हें राजधानी के सम्मानित 110 पत्रकार बंधुओं और शिक्षाविदों ने अपने शब्दों में पिरोया है। उल्लेखनीय है कि सुलभ की ही संस्था `नई दिशा´ ने अलवर के हजूरी गेट इलाके की इन महिलाओं को छह वर्ष पहले सिर पर मैला ढोने का घिनौना काम छुड़वा कर विभिन्न तरीकों से पुनर्वासित किया था। अब ये महिलाएं पापड़, अंचार, सेवई और अन्य खाद्य-सामग्री बनाने में जुटी हैं। सुलभ के प्रयास से इन पुनर्वासित महिलाओं को पिछले वर्ष अमरीका के न्यूयॉर्क-स्थित संयुक्त-राष्ट्र-मुख्यालय भी ले जाया गया था, जहां इनलोगों ने `मिशन सैनिटेशन´ कार्यक्रम के तहत हॉलीवुड और बॉलीवुड की जानी-मानी हस्तियों, मॉडलों और कलाकारों के साथ रैंप पर कैटवॉक कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का जश्न मनाया था।
न्यूयॉर्क से लौटने के बाद ये महिलाएं राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मिलने राष्ट्रपति-भवन पहुंचीं तो महामहिम राष्ट्रपति ने उन्हें बधाई देते हुए कहा था कि गांधीजी समाज के माथे से अस्पृश्यता का कलंक मिटाना चाहते थे। यह सुलभ के प्रयास का ही नतीजा था कि गत वर्ष दिसंबर में पुनर्वासित स्कैवेंजर परिवारों को स्थानीय मंदिर में मत्था टेकने का गौरवपूर्ण क्षण उपलब्ध कराया गया। इतना ही नहीं, वे समाज के उच्च वर्ग के उनलोगों के साथ भोज में सम्मिलित हुए, जिनके घरों में कभी वे मैला ढोने का काम करते थे।
अलवर की हजूरी गेट कॉलोनी के स्कैवेंजर-परिवार जब आम लोगों के साथ भोज में सम्मिलित हुए थे तो इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। कल-तक जिनकी परछाईं से लोग दूर भागते थे, आज उन्हीं स्कैवेंजरों के साथ समाज के उच्च वर्ग के लोगों ने सहभोज का आनंद लिया था। यह वैसा ही नजर आ रहा था, जैसे नभ और धरा का मिलन हो रहा हो।
इतना ही नहीं, इस वर्ष फरवरी में महाशिवरात्रि के अवसर पर जहां मंदिरों में `हर-हर, बम-बम´ के नारे गूंजते रहे, वहीं देश के सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठन सुलभ इंटरनेशनल ने इसे कुछ अनोखे तरीके से मनाया। राजधानी के महावीर एन्क्लेव-स्थित सुलभ-ग्राम में मिट्टी के ढाई लाख शिवलिंग बनाकर उनकी-पूजा अर्चना की गयी, लेकिन इस पूजा-अर्चना की सबसे खास बात यह रही कि पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करीब 400 लोगों ने सामूहिक रूप से किया, जिनमें राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में सिर पर मैला ढोने के काम से मुक्त करायी गयीं 100 महिलाएं भी शामिल थीं। शिवलिंग-निर्माण के बाद वाराणसी, पटना और दिल्ली के करीब 15 प्रकांड वेदज्ञाताओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महादेव-पूजन को अंजाम दिया।
समारोह में वरिष्ठ पत्रकार मोहन के टिक्कु ने भी अपने विचार व्यक्त किये। धन्यवाद-ज्ञापन अलवर की मुक्त महिला स्कैवेंजर और सुलभ इंटरनेशनल की उपाध्यक्ष सुशीला चौहान ने किया।











*****यह वैसा ही नजर आ रहा था, जैसे नभ और धरा का मिलन हो रहा हो।*****
इसमें नभ कौन और धरा कौन ?
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