प्रभात खबर के 25 साल, लेकिन कहां गये वो लोग?
14 अगस्त 2009 को प्रभात ख़बर के 25 साल पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर लगातार अख़बार के पन्नों पर पुराने इतिहास की कतरनें रखी जा रही हैं। लेकिन इसी अवसर पर तैयार किया गया एक विज्ञापन इन दिनों चर्चा में है। विज्ञापन एक चौथाई पेज का है, जिसमें उन कुछ लोगों की तस्वीर दी गयी है, जिनका प्रभात खबर के संघर्ष और विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस चयन से उन लोगों को ज़रूर मलाल होगा – जो इस सफर में प्रभात खबर के महत्वपूर्ण साथी रहे लेकिन अपनी असहमतियों को कभी दबाया नहीं – और जिन वजहों से उनकी तस्वीरें इस विज्ञापन से ग़ायब हो गयीं।
ठीक है कि कुछ लोगों ने ऐसे वक्त में प्रभात खबर का साथ छोड़ा, जब उस अखबार को बड़े अखबारों से लड़ने की जरूरत थी। लेकिन 25 साल पूरे होने पर कृतज्ञता ज्ञापन में इन लोगों के प्रति कंजूसी अखबार की छवि को संकीर्ण ही करता है। जिन कुछ लोगों का नाम बहुत जरूरी था, उनमें संजीव क्षितिज, अजय कुमार, मिथिलेश, फैसल अनुराग, रंजन श्रीवास्तव, राघवेंद्र जैसे लोग हो सकते थे। इन सबने प्रभात खबर को एक विचारसंपन्न अखबार बनाने में मदद की।
बहरहाल, इस अवसर अंतर्जाल पर विज्ञापन देकर प्रभात खबर इस अवसर को राष्ट्रीय महत्व का बना देना चाहता है और ज्यादातर लोगों की सदिच्छा है कि यह अवसर बिना विवाद के निपट जाए। मोहल्ला लाइव भी यही कामना करता है।













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