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	<title>Comments on: नई दुनिया के बाहर भी एक दुनिया है आलोक जी!</title>
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		<title>By: amulya nidhi</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/08/12/shirish-khare-react-on-alok-mehta-editorial/comment-page-1/#comment-885</link>
		<dc:creator>amulya nidhi</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 16 Aug 2009 10:33:33 +0000</pubDate>
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		<description>मुद्दा यह है कि अखबार  और  पत्रकार जनता के मुद्धो से काफी दूर यह सिर्फ विज्ञापन  और कंपनियों के नजदीक है ऐसे मै जनता की हकीकत को समझने  वाले पत्रकारों - अरुंधती  जैसी  को उखार फेकना चाहते है पर अलोक मेहता जैसे गिरे हुए ख़रीदे हुए पत्रकार को ये समझना चाहिए की जनता की आवाज़ की  ताकत अरुन्दाती के पास है और जनता  अपनी आवाज़  pahchanti  है  अलोक मेहता जनता की आवाज़ नहीं है  ऐसे लोग का विसलेसन हमारे kissi   काम का ही नहीं.
अमूल्य निधि</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मुद्दा यह है कि अखबार  और  पत्रकार जनता के मुद्धो से काफी दूर यह सिर्फ विज्ञापन  और कंपनियों के नजदीक है ऐसे मै जनता की हकीकत को समझने  वाले पत्रकारों &#8211; अरुंधती  जैसी  को उखार फेकना चाहते है पर अलोक मेहता जैसे गिरे हुए ख़रीदे हुए पत्रकार को ये समझना चाहिए की जनता की आवाज़ की  ताकत अरुन्दाती के पास है और जनता  अपनी आवाज़  pahchanti  है  अलोक मेहता जनता की आवाज़ नहीं है  ऐसे लोग का विसलेसन हमारे kissi   काम का ही नहीं.<br />
अमूल्य निधि</p>
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		<title>By: rohit</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/08/12/shirish-khare-react-on-alok-mehta-editorial/comment-page-1/#comment-862</link>
		<dc:creator>rohit</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Aug 2009 13:44:48 +0000</pubDate>
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		<description>हिन्दी पत्रकारिता के लोकप्रिय हस्ती अलोक मेहता को पद्म सम्मान से सम्मानित किया गया है। आलोक जी संबंधो की मर्यादा को जिस हद तक निवाते हैं वह एक मिशल है। उनको चाहनेवाले सिर्फ़ पत्रकारिता में ही नही हैं बल्कि शिक्षा जगत, विश्वविद्यालय , नौकरशाही, राजनेताओ और आम पाठको में भी बड़ी संख्या में लोग उन्हें सम्मान के साथ देखते हैं। आलोक जी का रहन सहन अभी भी एक आम आदमी जैसा है। उनके घर पर जाने वाले बताते हैं लगता ही नही है कि किसी बड़े पत्रकार के घर में हम बैठे हुए हैं। यह खुसबू आज कि दुनिया में दुर्लभ है। वे क्लास्सिकल समाजवादी कि तरह रहते हैं। इस जीवन पद्धति ने उन्हें और भी लोकप्रिय बना दिया है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हिन्दी पत्रकारिता के लोकप्रिय हस्ती अलोक मेहता को पद्म सम्मान से सम्मानित किया गया है। आलोक जी संबंधो की मर्यादा को जिस हद तक निवाते हैं वह एक मिशल है। उनको चाहनेवाले सिर्फ़ पत्रकारिता में ही नही हैं बल्कि शिक्षा जगत, विश्वविद्यालय , नौकरशाही, राजनेताओ और आम पाठको में भी बड़ी संख्या में लोग उन्हें सम्मान के साथ देखते हैं। आलोक जी का रहन सहन अभी भी एक आम आदमी जैसा है। उनके घर पर जाने वाले बताते हैं लगता ही नही है कि किसी बड़े पत्रकार के घर में हम बैठे हुए हैं। यह खुसबू आज कि दुनिया में दुर्लभ है। वे क्लास्सिकल समाजवादी कि तरह रहते हैं। इस जीवन पद्धति ने उन्हें और भी लोकप्रिय बना दिया है।</p>
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		<title>By: Sambhu Kujur, Raipur, Chhattisgarh</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/08/12/shirish-khare-react-on-alok-mehta-editorial/comment-page-1/#comment-820</link>
		<dc:creator>Sambhu Kujur, Raipur, Chhattisgarh</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Aug 2009 09:13:02 +0000</pubDate>
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		<description>यह जो शतरंज का खेल चल रहा है वह विश्व बैंक के इशारे पर ही चल रहा है. सत्ता के पास बन्दूक, गोला बारूद और उसको चलाने वाले तो हैं. नहीं हैं तो दिलों मैं इंसानी जस्बा. 
अकल के अकाल में भी उसे उदारीकरण के नाम पर कंपनीराज के एजेंडे को आगे बढाना ही था. इसके लिए विकास के नाम पर विनास को छिपाते हुए उसे आमली जामा पहनाकर उसको सही साबित करने के लिए आलोक मेहता जैसे लोगो की कमी नहीं है. वह &quot;सत्ता के, सत्ता के लिए, सत्ता द्वारा&quot; पोषित शब्द विश्व बैंक से अनुदान के तौर पर ले लेते है&quot;. ऐसे शतरंज के पियादों, जो अपने और सिर्फ अपने फायदे के लिए अपने आकाओं के इशारे पर चाल बदल लेते हैं वे शब्दों के बेहतरीन प्रयोग कर अपने चाहने वालों को खुश कर सकते है लेकिन देश की बुनियादी मसलों में जकडे देशवासियों के आंसू की कदर कैसे कर पाएंगे?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>यह जो शतरंज का खेल चल रहा है वह विश्व बैंक के इशारे पर ही चल रहा है. सत्ता के पास बन्दूक, गोला बारूद और उसको चलाने वाले तो हैं. नहीं हैं तो दिलों मैं इंसानी जस्बा.<br />
अकल के अकाल में भी उसे उदारीकरण के नाम पर कंपनीराज के एजेंडे को आगे बढाना ही था. इसके लिए विकास के नाम पर विनास को छिपाते हुए उसे आमली जामा पहनाकर उसको सही साबित करने के लिए आलोक मेहता जैसे लोगो की कमी नहीं है. वह &#8220;सत्ता के, सत्ता के लिए, सत्ता द्वारा&#8221; पोषित शब्द विश्व बैंक से अनुदान के तौर पर ले लेते है&#8221;. ऐसे शतरंज के पियादों, जो अपने और सिर्फ अपने फायदे के लिए अपने आकाओं के इशारे पर चाल बदल लेते हैं वे शब्दों के बेहतरीन प्रयोग कर अपने चाहने वालों को खुश कर सकते है लेकिन देश की बुनियादी मसलों में जकडे देशवासियों के आंसू की कदर कैसे कर पाएंगे?</p>
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		<title>By: Praveen Singh</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/08/12/shirish-khare-react-on-alok-mehta-editorial/comment-page-1/#comment-819</link>
		<dc:creator>Praveen Singh</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Aug 2009 05:23:07 +0000</pubDate>
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		<description>सत्ता के नाम पर जो लूट मची हुई है. उसकी जड़े विश्व बैंक से है. क्योंक विश्व बैंक का इनदिनों विरोध बढ गया है इसलिए सत्ता की ताकतों ने अमेरिका में बैठे अपने आकाओं से अनुदान के तौर पर ज्ञान की मदद मांगी है. बदले में उसे जो मदद मिली है, लगता है आलोक मेहता का लेख उसी नतीजे का छोटा सा हिस्सा है. आलोक तोमर जैसे कई लोग अब अपनी जुबान बदल रहे है, मतलब असली मामलों से ध्यान हटाने के लिए एक प्यादे की भूमिका ही निभा रहे हैं. और इस तरह देश के संसाधनों को लूटने की छोट को वाजिब ठहराया जाये.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सत्ता के नाम पर जो लूट मची हुई है. उसकी जड़े विश्व बैंक से है. क्योंक विश्व बैंक का इनदिनों विरोध बढ गया है इसलिए सत्ता की ताकतों ने अमेरिका में बैठे अपने आकाओं से अनुदान के तौर पर ज्ञान की मदद मांगी है. बदले में उसे जो मदद मिली है, लगता है आलोक मेहता का लेख उसी नतीजे का छोटा सा हिस्सा है. आलोक तोमर जैसे कई लोग अब अपनी जुबान बदल रहे है, मतलब असली मामलों से ध्यान हटाने के लिए एक प्यादे की भूमिका ही निभा रहे हैं. और इस तरह देश के संसाधनों को लूटने की छोट को वाजिब ठहराया जाये.</p>
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		<title>By: anubhav</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/08/12/shirish-khare-react-on-alok-mehta-editorial/comment-page-1/#comment-813</link>
		<dc:creator>anubhav</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Aug 2009 20:38:14 +0000</pubDate>
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		<description>देखिए मुझे लगता है कि परम आदरणीय आलोक मेहता जी का आकलन करने में आप लोग थोड़ी ग़लती कर रहे हैं. दरअसल बात यह है कि आलोक जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) उर्फ़ कांग्रेस के सच्चे सिपाही है. निष्ठावान कार्यकर्ता हैं(यह बात अलग है कि उनके पास सदस्यता की रसीद न हो.). वे पूरी निष्ठा, लगन और ईमानदारी से कांग्रेस पार्टी की सेवा करते है. मैं उनको बहुत दिनों से तो नहीं जानता या पढ़ता रहा हूँ लेकिन जब वे दैनिक हिंदुस्तान में थे तबसे मैं उनको देख-सुन रहा हूं. हिंदुस्तान से वे भास्कर चले गए. वहां से आउटलुक के प्रधान संपादक बनकर गए और फिर नई दुनिया में लौट आए हैं. इतनी कूद-फांद करने के बाद भी उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा में रत्ती भर भी कमी नहीं होने दी (याद करिए पिछले राष्ट्रपति चुनाव के दौरान निकले आउटलुक के अंक). अब ऐसे निष्ठावान कार्यकर्ता को कांग्रेस पार्टी चाहे तो राज्यसभा भेजे या किसी राज्य का राज्यपाल बना दे, ऐसे में किसी को भी आपत्ती या तकलीफ़ नहीं होनी चाहिए. आप लोग बेवजह चिल्ल-पों मचा रहे हैं. जाइए अपना-अपना काम करिए.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>देखिए मुझे लगता है कि परम आदरणीय आलोक मेहता जी का आकलन करने में आप लोग थोड़ी ग़लती कर रहे हैं. दरअसल बात यह है कि आलोक जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) उर्फ़ कांग्रेस के सच्चे सिपाही है. निष्ठावान कार्यकर्ता हैं(यह बात अलग है कि उनके पास सदस्यता की रसीद न हो.). वे पूरी निष्ठा, लगन और ईमानदारी से कांग्रेस पार्टी की सेवा करते है. मैं उनको बहुत दिनों से तो नहीं जानता या पढ़ता रहा हूँ लेकिन जब वे दैनिक हिंदुस्तान में थे तबसे मैं उनको देख-सुन रहा हूं. हिंदुस्तान से वे भास्कर चले गए. वहां से आउटलुक के प्रधान संपादक बनकर गए और फिर नई दुनिया में लौट आए हैं. इतनी कूद-फांद करने के बाद भी उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा में रत्ती भर भी कमी नहीं होने दी (याद करिए पिछले राष्ट्रपति चुनाव के दौरान निकले आउटलुक के अंक). अब ऐसे निष्ठावान कार्यकर्ता को कांग्रेस पार्टी चाहे तो राज्यसभा भेजे या किसी राज्य का राज्यपाल बना दे, ऐसे में किसी को भी आपत्ती या तकलीफ़ नहीं होनी चाहिए. आप लोग बेवजह चिल्ल-पों मचा रहे हैं. जाइए अपना-अपना काम करिए.</p>
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