दलाल पत्रकारों की न सुनें, वीओआई कर्मियों का साथ दें

वॉयस ऑफ इंडिया के बारे में पहले ये ख़बर आयी कि कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया है और प्रसारण रोक दिया गया है। फिर ख़बर आयी कि कर्मचारियों को मना लिया गया है और प्रसारण शुरू हो गया है। दूसरी ख़बर आधा सच है, आधा झूठ। सच ये है कि प्रसारण शुरू तो हुआ है, लेकिन वो लाइव नहीं है। पुराने प्रोग्राम चलाये जा रहे हैं। और झूठ ये है कि कर्मचारियों ने काम शुरू नहीं किया है, वे अब भी हड़ताल पर है। भारतीय टीवी मीडिया के इतिहास में टीवीआई के बाद ये संभवत: दूसरी घटना है, जब अपने हक़ के लिए मीडियाकर्मी आंदोलन की राह पर चल पड़े हैं। टीवीआई के समय में तो टीवी जर्नलिस्‍टों का अलग से कोई संगठन नहीं था – लेकिन आज तो है। कल ही न्‍यूज़ चैनलों के संपादकों का अपना संगठन ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) बनने की ख़बर आयी है। हम उम्‍मीद करते हैं कि वीओआई कर्मियों के मामले में ये संगठन कोई पहल करेगा। वीओआई कर्मियों ने मोहल्‍ला लाइव से संपर्क करके अपनी ओर से ये सूचना हमें भिजवायी है, जिसे हम यहां अविकल जारी कर रहे हैं : मॉडरेटर

voiवॉयस ऑफ इंडिया न्यूज चैनल मीडिया में टाइटैनिक जहाज की तरह आया। आज वो उसी टाइटैनिक की तरह डूब रहा है। किसी ने कल्‍पना भी नहीं की होगी की यहां के पत्रकारों को भूखे रहने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। जो दूसरों के हक़ की बात करते हैं, आज उनका ही हक़ मारा जा रहा है। वॉयस ऑफ इंडिया के पत्रकार अब भी हड़ताल पर है। कई महीनों से बकाया अपनी तनख्वाह पाने के लिए वे धरने पर बैठे हैं। वीओआईकर्मियों ने तब तक धरने पर बैठने का फैसला किया है, जब तक उन्हें सारे पैसे न मिल जाएं।

कर्मचारियों के इस क़दम से मालिकान हर चतुराई निबटने की कोशिश कर रहे हैं। दो मालिकों के आपसी विवाद से पर्दा भी इसी मौक़े पर हुआ है। वीओआई त्रिवेणी मीडिया ग्रुप का हिस्सा है, जिसके मालिक हैं बिल्डर मधुर मित्तल और सुमित मित्तल। इन पर कई मुक़दमे चल रहे हैं। इन पर आगरा और फरीदाबाद में कई प्रॉपर्टी घोटालों के आरोप हैं। इन आरोपों को हमेशा के लिए दफन करने की कोशिश के रूप में ही वीओआई त्रिवेणी मीडिया ग्रुप की नींव रखी गयी। चैनल में भी उन पर कई घोटालों के आरोप हैं। जैसे VOI का सारा सामान जूम नाम की कंपनी से लिया गया, जिसको लेकर केस चल रहा है। ऐसी खबरें भी हैं की त्रिवेणी ग्रुप केस हार चुका है और जल्द ही जूम वहां से अपने सारे सामान समेटने की तैयारी कर रहा है।

त्रिवेणी मीडिया के लोगों को सैलरी नहीं दी जा रही है। उनका पीएफ़ भी जमा नहीं किया जा रहा। मेडिकल और रिइम्‍बर्समेंट के नाम पर काटे गये पैसे भी अगस्त 08 के बाद किसी को नसीब नहीं हुआ है। हर बार की तरह मित्तल बंधु यहां पत्रकारों को ठग रहे हैं। ऐसे में वीओआईकर्मियों के सब्र का बांध टूटा और उन्‍होंने आंदोलन का रास्‍ता चुना।

कुछ महीने पहले वीओआई में कर्मियों के बीच असंतोष से निबटने के लिए मित्तल बंधुओं ने एक किरदार को पेश किया, जिनका नाम अमित सिन्हा है। ये कहा गया कि अमित सिन्हा चैनल के नये कर्ताधर्ता हैं और अब चैनल की सारी ज़‍िम्मेदारी उनकी है। अमित सिन्हा चैनल के नये सीईओ बनाये गये। ये बात सबको मेल के जरिये सूचित की गयी। इसके बाद भी वीओआई के हालात नहीं सुधरे। सूखे में बारिश की तरह वीओआई के कर्मचारी सैलरी की बाट जोहते रहे, लेकिन कमबख्त सैलरी आती ही नहीं। कहा जा रहा था कि अमित सिन्हा और मित्तल बंधुओं में अभी एग्रीमेंट नहीं हुआ, इसी कारण सैलरी में देर हो रही है। अमित सिन्हा ने ये वादा किया था कि महज़ तीन महीने में चैनल का कायाकल्प कर देंगे। कर्मचारी इंतज़ार करने लगे। उन्हें शायद इस बात का इलहाम नहीं था ये इंतज़ार कभी ख़त्म नहीं होगा।

मित्तल बंधुओं और अमित सिन्हा का एग्रीमेंट हुआ ही नहीं। अभी हड़ताल के दौरान जब मित्तल बंधुओं से बात की गयी, तो उन्होंने कहा कि चैनल की सारी ज़‍िम्मेदारी अमित सिन्हा की है। अमित सिन्हा ने इस बात को नकार दिया और कर्मियों से मित्तल बंधुओं से बात करने की सलाह दी। इससे कर्मचारियों के बीच का आक्रोश और बढ़ गया और हताश-निराश पत्रकार कभी अमित सिन्हा तो कभी मित्तल बंधुओं की ओर ताकते रहे।

इसी बीच चैनल के कर्मचारियों को तोड़ने की बात की जाने लगी। सभी एचओडी ने अपने अपने सेक्शन के लोगों को ऑफिस आने से मना कर दिया और हड़ताल से दूर रहने को कहा। उन्हें धमकी दी गयी। कहा गया‍ कि जो ऑफिस आएगा, उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा। कहा जा रहा है कि ये आदेश वरिष्‍ठ पत्रकार किशोर मालवीय ने दिया है। कई सीनियर लोग भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए जी हुजूरी में लगे हैं। इनमें सारे एचओडी शामिल हैं। सिर्फ कर्मचारी अपने हक़ के लिए दिलेरी से खड़े हैं और दो दिनों से कोई घर नहीं गया।

एक और दुखद बात है की कभी वीओआई-कर्मियों के हक़ की हर ख़बर छापने वाला एक वेब-पोर्टल वीओआई प्रबंधन की ज़ुबानी बात कर रहा है। वीओआई कर्मियों के खिलाफ़ हो रही साज़‍िश में ये वेब पोर्टल भी शामिल है। वेबसाइट पर लिखा गया है कि ये हड़ताल एक सोची-समझी साजिश है। खुद को बड़ा पत्रकार कहने वाले इस पोर्टल के सीईओ और संपादक पर वीओआई प्रबंधन से अंडर टेबल रुपयों के लेनदेन का आरोप है।

अभी वीओआई कर्मियों को आशंका है कि दोनों मालिक कर्मचारियों को ठेंगा दिखाकर रफूचक्कर होने की तैयारी में हैं। क्यूंकि वीओआई में जितने सामान हैं, वो जूम के हैं और बिल्डिंग भी उनकी नहीं है।

सवाल ये है कि अब क्या करें वीओआई के सैकड़ों मीडियाकर्मी?

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