फिल्मों में बुलेट की सवारी और “आगे से राइट”

तो लौट आया।
आदमी की फितरत है… जैसे उड़ि जहाज को पंछी पुनि जहाज पे आवे… हम सभी अपने घोंसलों में लौटते है। घोंसला मतलब हमारा परिवार, हमारी नौकरी और हमारा सीमित संसार। कई बार ऐसा लगता है कि हम नहीं हैं तो कैसे कारोबार चल रहा होगा? लौटने पर मालूम होता है कि आप की याद तक किसी ने नहीं की। यही हमारी आदत हो गयी है। अब हम कुछ भी मिस नहीं करते। सच्ची बताएं, क्या अब्राहम हिंदीवाला को मिस किया आप ने? नहीं न…
खैर, आ गया हूं और आप की रुचि-अरुचि का ध्यान रखते हुए मुंबई से जानकारियां देता रहूंगा। पिछले हफ्ते 7 फिल्में रिलीज़ हुईं। मैंने तो आप को सलाह दी थी कि सिनेमाघर का रुख न करें। पता नहीं आप में से कितनों ने मेरी सलाह मानी। इस हफ्ते भी 5 फिल्में रिलीज़ हैं। अभी तक मन नहीं बना पाया हूं कि कौन सी देखूं। मेरा मन “आगे से राइट” देखने का है। यह फिल्म मुझे कुछ अलग और रोचक लग रही है। इसमें मेरी पसंद के दो एक्टर केके मेनन और माही गिल हैं। माही गिल अभी सिर्फ डेढ़ फिल्म पुरानी हैं। एक तो “देव डी” और “गुलाल” को मैं उनकी आधी फिल्म मानता हूं। अभी वह “आगे से राइट” में क्या करती हैं? देखना होगा। मुझे श्रेयश तलपडे उम्दा एक्टर नहीं लगते। वे हर फिल्म में न जाने क्यों मिमिक्री करने लगते हैं? उन्हें ध्यान देना चाहिए और कायदे से आगे बढ़ना चाहिए।
और बाकी सब तो ठीक है। “आगे से राइट” में आपको बुलेट मोटर साइकिल दिखेगी। मोटर साइकिल के शौकीन बता सकते हैं कि बुलेट की सवारी का आनंद कैसा होता है? मेरे प्रिय सिनेमा साइट “पैशन फॉर सिनेमा” पर नलिन ने अच्छी-सी पोस्ट लिखी है… हिंदी सिनेमा और बुलेट। उन्होंने राजेश खन्ना के अंदाज़ का ज़िक्र किया है। हेमामालिनी को बुलेट पर बिठा कर “ज़िन्दगी एक सफर है सुहाना” गाते हुए जब वे परदे पर आये थे तो अनगिनत दिलों को कुचल गये थे। शशि कपूर ने काला पत्थर में “एक रास्ता है ज़िन्दगी” इसी बुलेट पर गाया था। ज़ंजीर के विजय यानि अमिताभ बच्चन को कौन भूल सकता है? वे भी बुलेट पर सवार थे। अंधा कानून में रजनीकांत को भी आपने बुलेट पर देखा था। “ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे” गाते हुए शोले के जय और वीरू को कौन भूल सकता है? अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की जोड़ी ने धमाल मचा दिया था। “झूम बराबर झूम शराबी” में उनके बेटे अभिषेक बच्चन और बॉबी देओल उस जोड़ी को दोहराने में विफल रहे।
♦ अब्राहम हिंदीवाला
पुनश्च : “अंदाज़” में बुलेट पर करतब दिखाते राजेश खन्ना के लिए डुप्लीकेट का काम सलीम खान ने किया था। सलीम खान को तो आप जानते होंगे? सलीम-जावेद वाले सलीम खान – जी सही पहचाना, वे ही सलमान खान के पिता हैं।









हां, आपक सलाह मानी और कोई फिल्म नहीं देखी लेकिन सब चरित्र काल्पनिक देखने की इच्छा है। अब आप आ ही गए हैं तो इ है मुंबई मेरी जान से खबर देते ही रहेंगे, इसी सद्- आशा के साथ…बुलेट की सवारी करने का मन कर गया। और हां, जहां से लौटे हैं, वहां की भी खबर परोसते तो अच्छा लगता हमें।
आपकी बात नहीं मान कर हम तो सिनेमा देख आये.. क्विक गन मुरगन देखे.. और सच्ची बताते हैं की खूब मजे किये.. कारण यह की, बहुत दिनों बाद कोई ऐसे कामेडी सिनेमा देखी जिसमे सेक्स को लेकर फूहड़ कामेडी नहीं थी.. सो देखना अच्छा लगा..
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