61 साल के युवा निर्देशक रंजीत कपूर

रंजीत कपूर का नाम आप ने ज़रूर सुना होगा। दिल्ली के रंगमंच से परिचित लोगों के लिए वे सुपरिचित नाम हैं। रंगमंच पर उन्होंने अनेक सफल प्रयोग किये हैं। सिनेमा से भी उनका करीबी रिश्ता रहा है, लेकिन वे कभी मुंबई में रम नहीं पाये। उन्होंने कुछ फिल्में लिखीं और अपनी दुनिया में मस्त रहे। उन्होंने ज़्यादा फिक्र भी नहीं की। करीब दो साल पहले ख़बर आयी थी कि वे एक फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं। इस ख़बर से उनके चहेतों को बहुत खुशी हुई थी। उनकी कलम के प्रशंसक मानते हैं कि अगर रंजीत कपूर को आजादी दी जाए जो वे कमाल कर सकते हैं। आप लोगों को “जाने भी दो यारो” याद होगी। निश्चित ही कुंदन शाह की इस कल्ट फिल्म में रंजीत कपूर का भारी योगदान रहा।
रंजीत कपूर की फिल्म “चिंटू जी” 4 सितंबर को रिलीज हो रही है। इसमें ऋषि कपूर ने स्वयं की भूमिका निभायी है और खूब निभायी है। अपना ही मज़ाक और छीछालेदर करते ऋषि कपूर को देखते हुए बेहद हंसी आती है। सेलिब्रटी और आम नागरिक के मानस को अच्छी तरह से समझते हुए रंजीत कपूर ने मारक व्यंग्य किया है। ताज्जुब होता है कि ऋषि कपूर ऐसी भूमिका के लिए कैसे तैयार हो गये। हड़बहेड़ी और त्रिफला गांव की यह कहानी राजनीति, उद्योग और विकास की गलियों से गुजरती हुई एक क्लाइमेक्स पर पहुंचती है। कई परिचित नामों के रेफरेंस आते हैं और इन सभी के बीच अपने ऋषि कपूर भी हैं। इसमें राज कपूर की “मेरा नाम जोकर” की रूसी नायिका भी आयी हैं।
मेरी सिफारिश है कि आप ये फिल्म अवश्य देखें।
♦ अब्राहम हिंदीवाला
पुनश्च : हिंदी फिल्मों के इतिहास में संभवत रंजीत कपूर बुजुर्ग निर्देशक होंगे, जिनकी पहली फिल्म 61 की उम्र में आ रही है। इसके पहले प्रदीप सरकार की पहली फिल्म “परिणीता” 52 की उम्र में और नसीरूद्दीन शाह की “यूं होता तो क्या होता” 56 की उम्र में आयी थी।












जरूर देखेंगे जी…
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