<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
		>
<channel>
	<title>Comments on: “गूगल गणराज्य” में प्रभाष जोशी के नायकत्व का अंत</title>
	<atom:link href="http://mohallalive.com/2009/09/11/prabhash-joshi-and-google-search/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://mohallalive.com/2009/09/11/prabhash-joshi-and-google-search/</link>
	<description></description>
	<lastBuildDate>Thu, 11 Mar 2010 17:57:41 -0500</lastBuildDate>
	<generator>http://wordpress.org/?v=2.8.4</generator>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
		<item>
		<title>By: blogwalebaba</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/09/11/prabhash-joshi-and-google-search/comment-page-1/#comment-3443</link>
		<dc:creator>blogwalebaba</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Sep 2009 18:54:13 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://mohallalive.com/?p=4178#comment-3443</guid>
		<description>ऐसी ओछी मानसिकता रखनेवालों का यहीं अंजाम होना है। ऐसे मानवता के खिलाफ मानसिकता रखनेवाले को मरने के बाद भी चैन नहीं मिलेगा। भले हीं जातिगत,द्विज, पुरुषवादी, नस्लवादी अहंकार में पड़े लोग इस कोढ़ को ढ़ंकने के लिए लाख चादर डालें। पर आनेवाले समय की खुले दिल दिमागवाली पीढ़ी ऐसे घटिया लोगों को कभी माफ नहीं करेगी।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ऐसी ओछी मानसिकता रखनेवालों का यहीं अंजाम होना है। ऐसे मानवता के खिलाफ मानसिकता रखनेवाले को मरने के बाद भी चैन नहीं मिलेगा। भले हीं जातिगत,द्विज, पुरुषवादी, नस्लवादी अहंकार में पड़े लोग इस कोढ़ को ढ़ंकने के लिए लाख चादर डालें। पर आनेवाले समय की खुले दिल दिमागवाली पीढ़ी ऐसे घटिया लोगों को कभी माफ नहीं करेगी।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: jayram "viplav"</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/09/11/prabhash-joshi-and-google-search/comment-page-1/#comment-2090</link>
		<dc:creator>jayram "viplav"</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Sep 2009 18:30:00 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://mohallalive.com/?p=4178#comment-2090</guid>
		<description>गूगल पर “प्रभाष” सर्च करने पर पहले 20 रिजल्ट में 12 रिजल्ट उनके ब्राह्मणवाद और सती के समर्थन में किए गए लेखन और उसपर आई प्रतिक्रिया से जुड़े हैं। बात तो सही है पर पहला रिजल्ट तो पढो भाई देखो जनोक्ति के ब्लॉग पर क्या छापा है ? इसमें प्रभाष जी को नायक ही बनाया गया है जिसके वो लायक हैं , परन्तु आप जैसे महान पत्रकार यहाँ हल्ला लाइव पर बगैर पढ़े लिखे चिल्लाते हैं और ऊपर के ये दो महानुभाव भी बगैर पढ़े सुर में ताल दे रहे हैं . शर्म आणि चाहिए आपको ऐसी पातित्कारिता करते हुए !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>गूगल पर “प्रभाष” सर्च करने पर पहले 20 रिजल्ट में 12 रिजल्ट उनके ब्राह्मणवाद और सती के समर्थन में किए गए लेखन और उसपर आई प्रतिक्रिया से जुड़े हैं। बात तो सही है पर पहला रिजल्ट तो पढो भाई देखो जनोक्ति के ब्लॉग पर क्या छापा है ? इसमें प्रभाष जी को नायक ही बनाया गया है जिसके वो लायक हैं , परन्तु आप जैसे महान पत्रकार यहाँ हल्ला लाइव पर बगैर पढ़े लिखे चिल्लाते हैं और ऊपर के ये दो महानुभाव भी बगैर पढ़े सुर में ताल दे रहे हैं . शर्म आणि चाहिए आपको ऐसी पातित्कारिता करते हुए !</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: santosh</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/09/11/prabhash-joshi-and-google-search/comment-page-1/#comment-1858</link>
		<dc:creator>santosh</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Sep 2009 09:31:05 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://mohallalive.com/?p=4178#comment-1858</guid>
		<description>इंटरनेट के महापंडित माननीय दीलीप मंडल से मेरा आग्रह है कि जिस तरह आपने प्रभाष जोशी जी के बारे में गुगल पर अभियान चलाकर अपने शब्दों में महानायकत्व और सर्वमान्यता(मुझे नहीं लगता है कि प्रभाष जी खुद को कभी महानायकत्व का दर्जा दिया है) का अंत कर दिया है, उसी तरीके से मेरा आग्रह है कि देश में भूख, रोटी, और बेरोजगारी जैसे महान समस्याओँ के खिलाफ भी इंटरनेट पर मुहिम चलाएँ ताकि एक दिन गुगल पर कुछ दिनों के बाद हम सर्च करें तो इसे भी खत्म के रूप में देख पाएंगे। अपने आप से किसी को महिमामंडित करने और उस का खंडित करने का जो दुस्वपन माननीय दीलीप मंडल ने देखा है उसके लिए उनका धन्यवाद।
मंडल जी, गुगल ही दुनिया नहीं है। अपने आस-पास नजर दौड़ाइए, दुनिया बहुत बड़ी है। और हम आप इस दुनिया की मात्र इकाई भर हैं।
आंकड़े से अगर सचमुच सबकुछ खत्म हो जाता तो साहब पिछले साठ सालों में सरकार सिर्फ आंकड़े ही परोस रही है लेकिन गरीबी, बेरोजगारी आज भी जस की तस है। गांव जाइए देखिए, कि हकीकत क्या है। इंटरनेट पर बहसबाजी कीजिए लेकिन एजेंडा तय मत कीजिए, कि हम जो लिखेंगे वही सच होगा। 
 भाई साहब, विचार सिर्फ रखे नहीं जाते उसपर बहस होती है दादागिरी नहीं। मुझे उनके बहस या तर्क पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन आपत्ति है तो सिर्फ इस लाइन पर जिसमें उन्होंने ये कहा है
“आप कह सकते हैं कि इस विवाद के नेट पर आने के साथ ही सर्वमान्य महानायक प्रभाष जोशी की सर्वमान्यता और महानायकत्व का अंत हो गया है।”
बहस या विचार कभी अपने नहीं होते, बल्कि सामाजिक मुद्दे से सरोकार होता है उसका और अपने से ही बहस शुरू करके अपने शब्दों में ही उसका अंत कर देना, कुछ आंकड़े परोस देना मात्र भर नहीं है। बहस कीजिए,तो सार्थक कीजिए। एक पत्रकार के रूप मे मंडल जी को मैं बहुत पहले से जानता रहा हूं। लेकिन प्रभाष जोशी या किसी ऐसे व्यक्ति जो नेट से सरोकार नहीं रखता हो, आपके बहस में भाग नहीं ले रहा हो,को अपने शब्दों के मायाजाल से छिछालेदार करना कोई बड़प्पन नहीं है। पत्रकारिता में हैं अगर बहुत बहस ही करना है और बहुत बड़ा मुद्दा ही पकड़ना है तो वीओआई बंद हो गया उसपर बहस शुरू कीजिए न। कौन रोकता है आपको।
650 लोग सड़क पर आ गए। सरकार या तथाकथित मीडिया के मठाधीशों की आंखों में एक रत्ती भर भी पत्रकार बिरादरी की चिंता नहीं। इस मुद्दे पर आगे आईए ना, हम सब आपके साथ होंगे। क्यों नहीं मायावती को घेरते हैं दीलीप मंडल भाई। नोएडा तो उनके राज्य में ही आता है न और वीओआई का मालिक भी तो आगरा से ही ताल्लुकात रखते हैं। बहस करिए लेकिन मुद्दों पर। लठैती मत करिए जनाब</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इंटरनेट के महापंडित माननीय दीलीप मंडल से मेरा आग्रह है कि जिस तरह आपने प्रभाष जोशी जी के बारे में गुगल पर अभियान चलाकर अपने शब्दों में महानायकत्व और सर्वमान्यता(मुझे नहीं लगता है कि प्रभाष जी खुद को कभी महानायकत्व का दर्जा दिया है) का अंत कर दिया है, उसी तरीके से मेरा आग्रह है कि देश में भूख, रोटी, और बेरोजगारी जैसे महान समस्याओँ के खिलाफ भी इंटरनेट पर मुहिम चलाएँ ताकि एक दिन गुगल पर कुछ दिनों के बाद हम सर्च करें तो इसे भी खत्म के रूप में देख पाएंगे। अपने आप से किसी को महिमामंडित करने और उस का खंडित करने का जो दुस्वपन माननीय दीलीप मंडल ने देखा है उसके लिए उनका धन्यवाद।<br />
मंडल जी, गुगल ही दुनिया नहीं है। अपने आस-पास नजर दौड़ाइए, दुनिया बहुत बड़ी है। और हम आप इस दुनिया की मात्र इकाई भर हैं।<br />
आंकड़े से अगर सचमुच सबकुछ खत्म हो जाता तो साहब पिछले साठ सालों में सरकार सिर्फ आंकड़े ही परोस रही है लेकिन गरीबी, बेरोजगारी आज भी जस की तस है। गांव जाइए देखिए, कि हकीकत क्या है। इंटरनेट पर बहसबाजी कीजिए लेकिन एजेंडा तय मत कीजिए, कि हम जो लिखेंगे वही सच होगा।<br />
 भाई साहब, विचार सिर्फ रखे नहीं जाते उसपर बहस होती है दादागिरी नहीं। मुझे उनके बहस या तर्क पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन आपत्ति है तो सिर्फ इस लाइन पर जिसमें उन्होंने ये कहा है<br />
“आप कह सकते हैं कि इस विवाद के नेट पर आने के साथ ही सर्वमान्य महानायक प्रभाष जोशी की सर्वमान्यता और महानायकत्व का अंत हो गया है।”<br />
बहस या विचार कभी अपने नहीं होते, बल्कि सामाजिक मुद्दे से सरोकार होता है उसका और अपने से ही बहस शुरू करके अपने शब्दों में ही उसका अंत कर देना, कुछ आंकड़े परोस देना मात्र भर नहीं है। बहस कीजिए,तो सार्थक कीजिए। एक पत्रकार के रूप मे मंडल जी को मैं बहुत पहले से जानता रहा हूं। लेकिन प्रभाष जोशी या किसी ऐसे व्यक्ति जो नेट से सरोकार नहीं रखता हो, आपके बहस में भाग नहीं ले रहा हो,को अपने शब्दों के मायाजाल से छिछालेदार करना कोई बड़प्पन नहीं है। पत्रकारिता में हैं अगर बहुत बहस ही करना है और बहुत बड़ा मुद्दा ही पकड़ना है तो वीओआई बंद हो गया उसपर बहस शुरू कीजिए न। कौन रोकता है आपको।<br />
650 लोग सड़क पर आ गए। सरकार या तथाकथित मीडिया के मठाधीशों की आंखों में एक रत्ती भर भी पत्रकार बिरादरी की चिंता नहीं। इस मुद्दे पर आगे आईए ना, हम सब आपके साथ होंगे। क्यों नहीं मायावती को घेरते हैं दीलीप मंडल भाई। नोएडा तो उनके राज्य में ही आता है न और वीओआई का मालिक भी तो आगरा से ही ताल्लुकात रखते हैं। बहस करिए लेकिन मुद्दों पर। लठैती मत करिए जनाब</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: नई सहर</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/09/11/prabhash-joshi-and-google-search/comment-page-1/#comment-1790</link>
		<dc:creator>नई सहर</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2009 10:05:00 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://mohallalive.com/?p=4178#comment-1790</guid>
		<description>यशवेंद्र सिंह ने जो शेर लिखा है उसमें सहर की जगह शहर होना चाहिए। सहर याने सबेरा। शहर यानी नगर।

प्रभाष जोशी के समर्थन या बचाव में किसी के भी न आने के बाद अब इस थके हुए विवाद यानी बुरी तरह निचुड़े गन्ने से और रस निकालने की कोशिश बंद होनी चाहिए। नए बच्चे जानते भी नहीं हैं कि कौन प्रभाष (ये स्पेलिंग गलत है। हिंदी की किसी डिक्शनरी में ये शब्द इस तरह नहीं लिखा गया है। शब्द है प्रभास) और कौन जोशी। उनके स्टार हैं बरखा दत्त, दीपक चौरसिया और अर्णव गोस्वामी। 

नई सहर है, नए हीरो हैं। प्रभाष जोशी इतिहास में नाम दर्ज कराने की आखिरी कोशिश के तौर पर रविवार को इंटरव्यू दे चुके हैं। अब उन्हें छोड़ देँ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>यशवेंद्र सिंह ने जो शेर लिखा है उसमें सहर की जगह शहर होना चाहिए। सहर याने सबेरा। शहर यानी नगर।</p>
<p>प्रभाष जोशी के समर्थन या बचाव में किसी के भी न आने के बाद अब इस थके हुए विवाद यानी बुरी तरह निचुड़े गन्ने से और रस निकालने की कोशिश बंद होनी चाहिए। नए बच्चे जानते भी नहीं हैं कि कौन प्रभाष (ये स्पेलिंग गलत है। हिंदी की किसी डिक्शनरी में ये शब्द इस तरह नहीं लिखा गया है। शब्द है प्रभास) और कौन जोशी। उनके स्टार हैं बरखा दत्त, दीपक चौरसिया और अर्णव गोस्वामी। </p>
<p>नई सहर है, नए हीरो हैं। प्रभाष जोशी इतिहास में नाम दर्ज कराने की आखिरी कोशिश के तौर पर रविवार को इंटरव्यू दे चुके हैं। अब उन्हें छोड़ देँ।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: yashvendra singh</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/09/11/prabhash-joshi-and-google-search/comment-page-1/#comment-1784</link>
		<dc:creator>yashvendra singh</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2009 05:46:19 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://mohallalive.com/?p=4178#comment-1784</guid>
		<description>प्रभाष जोशी के नायकत्व का अंत..इस महान विजय के लिए आप सब योधाओं को लाख लाख बधाइयाँ. आप का यह लक्ष्य था या गंतव्य, इसपर आप सब खुद ही विचार करेंगे कभी न कभी. उस दिन आज के आप से बaखुद  असहमत होंगे...एक शेर हिंदूवादी कारसेवकों के लिए था, वो अब विचारों के नाम पर मानसिक व्यायाम करने वालों के लिए याद आ रहा है.
ओरिजनल-
मज़हबी मजदूर सब बैठे है इनको काम दो,
एस सहर में एक पुरानी सी इमारत और है.
इसे उ पढें.
नेट पैर बैठे इन वैचारिक मजदूरों को कोई नाम दो,
इस सहर में फजीहत करने के लिए कई और है.
...
भाइयों अब आप नए किसी par जुट जाएँ. प्रभाष जोशी का सीरियल काफी लम्बा हो गया. कमेन्ट बाज थक गए है. मुह से झाग आ रहा है. देखिये ना, एक दो ही लगे है. बाकी हांफ गए है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रभाष जोशी के नायकत्व का अंत..इस महान विजय के लिए आप सब योधाओं को लाख लाख बधाइयाँ. आप का यह लक्ष्य था या गंतव्य, इसपर आप सब खुद ही विचार करेंगे कभी न कभी. उस दिन आज के आप से बaखुद  असहमत होंगे&#8230;एक शेर हिंदूवादी कारसेवकों के लिए था, वो अब विचारों के नाम पर मानसिक व्यायाम करने वालों के लिए याद आ रहा है.<br />
ओरिजनल-<br />
मज़हबी मजदूर सब बैठे है इनको काम दो,<br />
एस सहर में एक पुरानी सी इमारत और है.<br />
इसे उ पढें.<br />
नेट पैर बैठे इन वैचारिक मजदूरों को कोई नाम दो,<br />
इस सहर में फजीहत करने के लिए कई और है.<br />
&#8230;<br />
भाइयों अब आप नए किसी par जुट जाएँ. प्रभाष जोशी का सीरियल काफी लम्बा हो गया. कमेन्ट बाज थक गए है. मुह से झाग आ रहा है. देखिये ना, एक दो ही लगे है. बाकी हांफ गए है.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
</channel>
</rss>
