एक आईपीओ था… और एक वीओआई भी था…

♦ देवेंद्र शर्मा

IPO-VOIवॉइस ऑफ इंडिया की तुलना पिछले साल जनवरी में आये देश के सबसे बड़े IPO से की जा सकती है। कड़ी दर कड़ी दोनों की तुलना करते हुए बताता हूं। जनवरी 2008 में आये देश के सबसे बड़े IPO ने इनती धूम मचायी कि चाय की थड़ियों तक पर इसकी चर्चा थी। इसी तरह मीडिया जगत में वॉइस ऑफ इंडिया का हल्ला था। जिन्हें शेयर बाजार की ABCD नहीं आती थी, दलाल पथ के नाम से वो डरते थे और यहां पैसा लगाने को जुआ समझते थे, वो भी सबसे बड़े पब्लिक इश्यू की रोशनी में नहाने को तैयार हो गये। इसमें पैसा लगाने के लिए लोगों ने अपना सुरक्षित निवेश भी दांव पर लगा दिया। कइयों ने तो कर्ज लेकर किस्मत आजमायी। इसी तरह ऐसे कई लोग जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की बुनियादी जानकारी तक नहीं थी, VOI से जुड़े। कई स्थापित पत्रकारों की आंखें भी VOI की चकाचौंध में डबडबा गयीं। मार्केट कैपिटल का बड़ा हिस्सा सबसे बड़ा आईपीओ चूस गया, तो VOI में भी लांचिंग से पहले ही अरबों रुपये झोंक दिये गये। ग्रे मार्केट में हर रोज आईपीओ पर प्रीमियम घट-बढ़ रहा था, तो वॉइस ऑफ इंडिया में भी मनमाना पैसा देकर नियुक्तियां की जा रही थीं। कई गधों को घोड़ों के भाव ले लिया गया तो कई घोड़ों को घास से दोस्ती करनी पड़ी क्योंकि वो लंबी रेस के थे। वापस आईपीओ पर आता हूं। निवेशकों को इंतजार था लिस्टिंग के दिन, जिस का जिस दिन वे अपने पैसों को कम से कम दुगुना होते तो देख ही रहे थे। लेकिन लिस्टिंग के पहले ही दिन करोड़ों लोगों के सपने चकनाचूर हो गये और शेयर अपने इश्यू प्राइस पर भी नहीं टिक पाया। यही चैनल के साथ भी हुआ। काफी चर्चा के बाद लांचिंग का दिन तय हुआ लेकिन पहले ही दिन बड़ी गड़बड़ी हो गयी। शेयर लगातार नीचे की ओर जाता रहा, लोग फिर भी पैसा लगाते रहे, और अपने आप को होशियार समझते रहे, इस उम्मीद में कि अब तो इश्यू प्राइस से भी काफी नीचे मिल रहा है, तो जल्द ही मोटा मुनाफा होगा लेकिन उम्मीदें इस बार भी धरी रह गयीं। उधर वीओआई में कर्मचारियों की छंटनी और दूसरे मामलों में कटौती कर चैनल चलाने का खर्चा काफी नीचे लाया गया। ठीक उसी तरह जैसे शेयर के भाव लगातार नीचे जा रहे थे। इसी बीच शेयर कंपनी के मालिक ने बोनस शेयर देने का ऐलान किया तो उधर वीओआई में भी वेतन देरी से मिलने के एवज में एक महीने की बेसिक सैलरी के बराबर पैसा देने का मेल किया गया। निवेशकों को तो बोनस शेयर मिल गये लेकिन VOI के कर्मचारियों को कुछ नहीं मिला। आगे की बात करें तो एक दिन ऐसा आया जब शेयर भाव इश्यू प्राइस के एक चौथाई हिस्से से भी नीचे चला गया। उधर वीओआई में भी कर्मचारियों का वेतन घटा कर और एक महीने का वेतन रोककर खर्चा पहले से एक चौथाई तक कर दिया गया। इस स्थिति में शेयर और चैनल दोनों कुछ दिनों तक स्थिर रहे लेकिन उसके बाद दोनों ने विपरीत दिशाएं पकड़ लीं। शेयर ऊपर की बढ़ता गया और वीओआई नीचे की ओर। कंपनी शेयर में हिस्सेदारों के रूप निवेशक जुड़ते गये तो वीओआई में भी एक नये हिस्सेदार आ गये। अच्छा होने की उम्मीद और आश्वासन के साथ कुछ महीने चैनल चलाते रहे। इनकी तुलना FII’s (विदेशी संस्थागत निवेशकों) से की जा सकती है जो एक बड़ी रकम लगाकर पहले तो किसी शेयर के भाव आसमान पर पहुंचा देते हैं फिर मोटा मुनाफा कमाकर निकल लेते हैं। ऐसे में छोटे निवेशक अपने आपको ठगा महसूस करते हैं। VOI को बंद करने की आधिकारिक घोषणा हो चुकी लेकिन शेयर अपने निम्नतम स्तर से लगभग दोगुना ऊंचे भाव पर है जो हिचकोले खाते-खाते ही सही एक दिन काफी ऊपर जाएगा। लेकिन VOI अब कभी नहीं उठ पाएगा। VOI पर ये शायरी एकदम फिट बैठती है –

अब तो इतनी भी मयस्सर नहीं मयखाने में
जितनी हम छोड़ दिया करते थे पैमाने में।

MORAL OF THE STORY

जिस तरह शेयर बाजार का नियमन करने के लिए सेबी जैसी संस्था है, जो किसी कंपनी के आईपीओ को तय मापदंडों पर विचार करने के बाद मंजूरी देती है, कंपनी के शेयर की ट्रेडिंग या फिर कंपनी में किसी तरह की गड़बडी की शिकायत के बाद कंपनी की गतिविधियों पर रोक भी लगाती है, उसी तरह न्यूज़ चैनल के लिए लाइसेंस जारी करने से लेकर चैनल चलाने के तरीकों पर भी नजर रखने के लिए कोई नियामक संस्था होनी चाहिए। चैनल का लाइसेंस देते वक्त खासकर इन बातों पर ध्यान जरूर देना चाहिए कि चैनल के लिए लाइसेंस मांग रहे शख्स के पत्रकारिता से सरोकार रहे हैं या नहीं। मुनाफे के लिए वो कहीं पत्रकारिता का बाजारीकरण तो नहीं कर देगा। एक और सबक यहां पत्रकारों को लेना चाहिए कि न सिर्फ शेयर बाजार में बल्कि मापदंडों को ताक पर रख पत्रकारिता के फलते-फूलते बाजार में भी फूंक फूंक कर कदम रखें।

Dev(देवेंद्र शर्मा कुशल टीवी पत्रकार हैं। उनकी राइटिंग में एक फ्रेशनेस नज़र आता है। देवेंद्र उन थोड़े से टीवी पत्रकारों में से हैं, जो वीओआई जैसी दुखद परिघटना का सुखद और सटीक विश्‍लेषण कर पा रहे हैं। उम्‍मीद है, हम जल्‍दी ही उन्‍हें किसी बेहतरीन जगह पर देखेंगे।)

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *