“दो कौड़ी का स्तर नहीं है आईआईएमसी के छात्रों का”
♦ अनिकेत तिवारी
क्या शानदार बहस चल रही है! वाह… क्या आईआईएमसी की तारीफ़ में कसीदे पढ़े जा रहे हैं!! कैसा स्तर और कैसी काबिलियत? दो कौड़ी का स्तर नहीं है, इसके छात्रों का। ज़्यादातर को एक लाइन ठीक से लिखनी नहीं आती। आईआईएमसी-आईआईएमसी की रट लगाये हुए हैं। और ये कोई एक बैच का हाल नहीं है… हर बैच में मूर्खों की भरमार रही है। मैं कम से कम 1995 से अब तक हर बैच के कुछ न कुछ नमूने देखता आ रहा हूं। कितनों को काम सिखाया है और कितनों को सिखाने की नाकाम कोशिश की है। नौकरी तो कैसे-कैसों को मिल जाती है, ये किसी से छिपा नहीं है। लिहाजा, न तो आईआईएमसी में चयन को किसी प्रतिभा का मानदंड मान सकते हैं और न नौकरी मिलने को। दोनों जगह चयन की प्रक्रिया में छेद ही छेद हैं। हां, कभी-कभी ग़लती से कुछ प्रतिभाशाली भी यहां प्रवेश पा जाते हैं।
हालांकि मौजूदा बहस में आरोप लगाने और बचाव करने वाले, दोनों ही पक्ष निहायत निजी और ओछे स्तर पर उतर कर बात कर रहे हैं। उनसे अलग हटकर अगर देखें, तो ये बिलकुल सच है कि हर जगह पक्षपात करने और चेलों-चटियों को आगे बढ़ाने की प्रवृत्ति जोर मार रही है। रहा सवाल भेदभाव का, तो ये कहां नहीं होता? अगर पक्षपात नहीं होता, तो जिन्हें दो लाइन ठीक से लिखना नहीं आता, ऐसे लोग आईआईएमसी में प्रवेश कैसे पा जाते हैं? नौकरी भी पा जाते हैं और पदोन्नति भी। जातीय समीकरणों और मक्खनबाज़ी की माया कहां काम नहीं करती? कुछ लोग इसके बिना भी टिके हुए हैं और आगे भी बढ़ते हैं, लेकिन बेहद मुश्किल से और धीमी रफ्तार से।
वैसे सबसे पहले आरोप लगाने वाले ने तो शायद किसी का नाम नहीं लिया था, फिर सब आनंद प्रधान पर जिस तरह पिल पड़े, उससे सारी बहस के पीछे आईआईएमसी की गंदी अंदरूनी राजनीति का हाथ होने की आशंका होती है। किसी ने ये भी लिखा है कि जांगिड़ भी गुटबाजी करते थे, लेकिन जातिवादी नहीं थे। इससे बड़ा झूठ क्या होगा? आईआईएमसी को जानने वाले हर शख्स को पता है कि जांगिड़ घोर ही नहीं, घनघोर जातिवादी/ब्राह्मणवादी थे। इतने कि छात्रों के चयन के लिए होने वाले साक्षात्कार में भी उम्मीदवारों से उनकी जाति से जुड़े सवाल पूछते थे। तो भाइयो, इन आरोपों में कुछ भी नया नहीं है। सिर्फ पात्र बदल गए हैं और वेब पोर्टल के तौर पर एक नया हथियार सामने आ गया है।
सार्थक बात ये है कि आईआईएमसी हो या मीडिया संस्थान, जातिवादी या चंपूवादी पक्षपात हर जगह है और इसका जहां, जितना संभव हो, पुरजोर विरोध करना चाहिए। चयन प्रक्रिया में कुछ तो मानकीकरण हो, कुछ तो पारदर्शिता हो!









aniket ji mai iimc ki hi ek chhatra hoon. aur aapse kahna chahti hoon ki aanand sir ke pakshpaati aachran ne jo bahas shuru ki thi. wo to ab bahut peechhe chhoot chuki hai. aur ab jo ho raha hai. wo sirf iimc ke chhatron ke naam par ho raha hai. in ochhi baaton ke jarie aap sabhi ko bharmaaya ja raha hai. jo ki is mudde ko bahas se bhatkaane ka aasaan aujaar hai. ye sab kaun kar raha hai ? ve chhatra jinhe apne shikshak ke aachran ke prati poore saal kshobh raha ya fir ve log jo nahi chahte ki ye baaten publickly saamne aayen. is bahas ke achaanak itne niche gir jaane se faayda kise mil raha hai. zara soch kar dekhen. aap sabhi ko samajh aa jaayega ki iimc ke chhatron ke naam par ye ghatiya khel kaun khel raha hai. aur jahan tak star ki baat hai.jis ne bhi post likhi thi ya jo is baat par bahas chahte the, wo is tarah ki baaten likh kar mudde ko kabhi bhi nahi bhatkaayenge. fir kahoongi ye khel unhi ka hai jinhe is bahas ke khatm hone se fayda mailega.ab aap log hi tay karen bahas ko tamasha kaun bana raha hai. ham baaghi ya wo aur unke pratibhashali shishya.
बेटा अनिकेत तुम तो आईआईएमसीएन को गरिया दिए हो। अपने आपको बहुत बड़े तीस मारखां समझने लगे हो। अरे पहले अपनी औकात तो देखो। एक आईआईएमसीएन के नीचे काम कर रहे हो। जाहिर है मन की भड़ास तो निकलेगी ही। तुम उस जगह पहुंचने का सपना देखते रह गए और एक आईआईएमसीएन वहां पहुंच गया। बेटा तुम भी गरिया लो वो तो गरिया ही रहे हैं जिसका कभी आईआईएमसी में दाखिला नहीं हुआ था।
अनाम जी आप परेशान मत हो और मजा लेते रहो। आप जानते हैं मोहल्ला लाईव वाले अविनाश जी कमाने बैठा है तभी तो एक कमेंट को को लेख की तरह पोस्ट कर रहा है। जिससे उसे टीआरपी मिलती रहे। शायद आपको पता हो अविनाश जी ने अनिकेत तिवारी का कमेंट को ही पोस्ट कर दिया। आईआईएमसी वाले चाल समझ गए मोहल्ला वाले अविनाश जी को मसाला नहीं मिल रहा था इसलिए उसे ऐसा करना पड़ा।
एनडीटीवी में बहुत परेशान किया था आईआईएमसी वालों ने. सारा बदला ले लिया इस बार. ऐसी गाली सुनवाई संस्थान को, उसके शिक्षकों को और उसके बच्चों को, कि मज़ा आ गया.
अविनाश, हमें पहले से शक था कि तुम ये चूतियापा अपनी वेबसाइट का हिट बढ़ाने के लिए कर रहे हो. देख लो अपनी वेबसाइट पर छपे हर लेख और उसमें छपे कमेंट की संख्या को. आईआईएमसी के नाम पर तुम्हें जो हिट मिला है और जो कमेंट मिला है, वो जिंदगी में कभी दोबारा नहीं मिलेगा. प्रभाष जोशी पर जब तुमने एक महीने तक हल्ला मचाया तब भी इतनी हिट और इतने कमेंट नहीं गिरे. तर लो इसी बार. एनडीटीवी की खुन्नस तुमने इस पवित्र संस्थान को बदनाम करके निकाली है. तुम इतनी गिरी मानसिकता के आदमी हो कि जब कोई बहस करने नहीं आ रहा है तो एक नीच के कुत्सित कमेंट को हेडलाइन बनाकर, आईआईएमसी और उसके लोगों का मजा ले रहे हो.
IIMC : khikhali aur bejan pavitra murtiyon ka tut jana hi samaj ke hit baehta hai. IIMC wale sabhi chhtra un sabhi Hindi Journalism ke chhatro ki suchi den jin par unhe naj ho. khas kar pichhale dasak me paas huye chhtro ke nam de. RAJEEV YADAV jaise apvad nam ko bhi ginaye. Iske bad mai unhe IIMC ke bahar ke chhtro ke naam ginavunga. IIMC valon ki suvidha ke liye mai un sabhi logo se apeal karunga ki wo samne aaye jinhone IIMC ka exam nhi nikal paye lekin UPSC qualify kar gye. Wo log bhi samne aaye jo IIMC ka entrance nhi nikal paye lekin aaj sthapit patrkar hai. ause hi wo log bhi samne aaye jo IIMC nhi nikal paye lekin dusare baudhik kshetro me unka achha naam hai.
Anand Pradhan ke chele IIMC me teaching/preaching ke atirikt aanand pradhan ka patrakrita me diye gye contibution ko samne laye. Anand Pradhan arthsastra par kafi kagaj kala kar chuke hai. unke chhtra bataye ki unke likhe tamam lekho ko kitne CITATION mile hain. CITATION na jnte ho to Anand se puchh lena.
baki bat bad me hogi. pahle in bato ka jawab do….
band karo ye raajniti iimc ki …avinash saale samjh ja kyo batgrad bana raha hai..
अनिकेत तिवारी, iimc tere samjh se bhahar hai..tujhe kya pata tu to faltu me hi khichdi paka raha hai..tera kya standrad hai ye soch jra …bada aaya shikh dene vaalaa…..chal bhag yaha se…saale aajaa te hai muh uthake…haramkhor…
मैं ऐसी बहसों से दूर रहना पसंद करता हूं लेकिन आज कूदना पड़ा। मैं यहां किसी के समर्थन में नहीं कूद रहा हूं। लेकिन मैं चाहता हूं कि लोग बहस को बहस की तरह ही लें। आप रिएक्शन में शब्दों का इस्तेमाल करते वक्त सावधानी बरतें। आप सोंचेंगे ये भाषण देने लगा है लेकिन क्या करूं,भाषण देना होगा।
आप जहां प्रतिक्रिया दे रहे हैं उस साइट को कई लोग पढ़ते हैं ऐसे में इस स्तर की प्रतिक्रिया सहज नहीं लगती है। आपको विचार पसंद नहीं है तो उसे लिखें न कि शब्दों का मायाजाल फेंककर डस्टबीन बनाएं।
हम आशा करते हैं कि लोग मोहल्ला लाइव पर बेनामी होकर भी नामी की तरह बात करें।
शुक्रिया
To Last comment..
What do you mean by what you just wrote?
अनिकेत तिवारी,
बेहद आग्रही और घनघोर दलित हो यार
मोहल्ला लाईव वाले अविनाश, हिसाब अभी बाकी है मेरे दोस्त
तुमने अपने जेहन से जितनी नीच हरकत करनी थी करके मोहल्ला को कबाड़खाना बना लिया और मन ही मन सोच रहे हो कि तुमने आईआईएमसी वालों से हिसाब चुकता कर लिया। लेकिन अभी आईआईएमसी वालों ने तुझे माफ नहीं किया अभी तो आईआईएमसीएन खड़ा हुआ है देख मीडिया के इस बाजार में कितने आईआईएमसीएन खड़े हैं।
‘तुझसे हिसाब अभी पूरा बाकी है’
भाई साहब, आपने जिस प्रतिक्रिया पर वो कमेंट किया है, वो इस साइट के मॉडरेटर ने नहीं किया है। वह कमेंट हटा दिया गया है : अविनाश
अरे कोई इस छिछोरे अविनाश की औकात तो देखो……ये छक्का क्या बदला लेगा आई.आई.एम.सी वालों से जो पत्रकारिता में यहाँ के लोगों के पाँव की धूल के बराबर भी नहीं है। ये बस अपने दो टके के ब्लॉग पर ऊल-जलूल कचरा फैलाता रहेगा। यही इसकी औकात है।
me aapko itna samjha du ki apke kehne se kisi ka kuch nahi bigdega samjhe…aap jese log bas apni bhadaas nikal sakte hai…lagta hai kisi iimc’an se kuch jyada hi pidit hai aap…:)
hum logo ko aapse sikhne ki koi jarurat nahi hai…jitna hamne iimc me sikha utna paryapt ha,field ke liyeaapse sikhne ki BILKUL jarurt nahi hai, aap apna kaam kare…
nahi to agar ham iimc waale aapke piche pad gae to rula ke chodenge…
shayad jitne comment aapko upar diye hai utne bahut hai aapke liye..bas ab chup rahiye…
इन कथित आईआईएमसी वालों का एक और नमूना देखिए- ANJAANI लिखती हैं –
“hum logo ko aapse sikhne ki koi jarurat nahi hai…jitna hamne iimc me sikha utna paryapt ha,field ke liyeaapse sikhne ki BILKUL jarurt nahi hai, aap apna kaam kare…
nahi to agar ham iimc waale aapke piche pad gae to rula ke chodenge…”
अगर रोमन की जगह नागरी में लिखतीं, तो पूरी आशंका है कि वर्तनी की गलतियां भरी होतीं।
यही दिक्कत है। आईआईएमसी में पढ़ाई की है, अब और क्या सीखना है। भले ही कुछ न आता हो, लेकिन सीखना शान के खिलाफ है। अरे बच्चों, आईआईएमसी में तुम लोग महज एक डिप्लोमा करते हो, कोई डिग्री भी नहीं है ये। तुम्हें पढ़ाने वाले भी दूसरे विश्वविद्यालयों से, और काम के तज़ुरबे से सीखकर आये हैं। आईआईएमसी के बच्चों को काम सिखाने के दौरान ज़्यादातर मामलों में सबसे ज़्यादा दिक्कत इसी रवैये के कारण होती है। एक-दो महीने तो उन बिचारों को यही समझने में लग जाते हैं कि अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है।
अभी एक और लेख के नीचे सर्वज्ञानी ANJAANI की एक टिप्पणी मिल गई। उसे यहां कॉपी-पेस्ट कर रहा हूं। आप खुद ही देखें कि इन्होंने आईआईएमसी में कितना कुछ सीख लिया है, जो अब और सीखने की ज़रूरत नहीं है। शायद ही कोई वाक्य दुरुस्त मिलेगा। ये अपने भविष्य से खिलवाड़ की शिकायत कर रही हैं, लेकिन इन जैसे लोग हिंदी भाषा और पत्रकारिता के साथ जो खिलवाड़ कर रहे हैं, उसकी परवाह कौन करेगा?
” ANJAANI said:
पता नहीं अब भेल आएगी भी के नहीं,आपलोगों ने सोचा के इसमें किसका नुक्सान हुआ??????
हम जेसे बेरोजगारों का……हम वही है जहा थे…..पर जिनके कारण ये बवाल उठा उन्हें क्या नुक्सान हुआ वो तो अभी भी अपनी नौकरी पर है…अभी भी पी.टी.आई और बिज़नस भास्कर जाएंगे…..वाह रे तेरी माया!!!!!!!!
अगर अपने मनन की नहीं हो सकी तो अब हिंदी पत्रकारिता के बच्चे नहीं बैठेंगे….वाह !!!
अरे क्या नुक्सान हुआ ऑफिस में बेठे हुए लोगो का और क्या नुक्सान हुआ उन नौकरी वालो का??
नुकसान तो हमारा हुआ न जो प्लेसमेंट का इन्तजार कर रहे थे….भगवान् भी इन लोगो का भला न करे….अगर भेल का एक्साम हमें नहीं देने दिया तो….
में तो दाद देना चाहूंगी इस तरह की राजनीति खेलने वालो के दिमाग की……
मै बस अपने faculty members से इतना पूछना चाहती हु की क्यों हमारे भविष्य से खिलवाड़ कर रहे है….. PLEASE मुझे जवाब दो…..”
@aniket
IIMC ka entrace pas karte hi ye log samajh jate hai ki ab unhe padane ki koee jarurat nahi, unhe sarvbhaum gyan prapt ho gaya hai. sahi baat hai ki ek class me bamushkil 5% log rahe honge jinhe hindi likhana aata hoga. europ me ek kahawat hai ki judge or jouranalist ka gyan 1 inch gahara hi hota hai, halanki uski chaudaee kaee mil hoti hai. lekin ham IIMC ke logo ko dekhe to pata chalega ki vah 1 inch ka 1 % bhi gahara nahi hai. me ese kuch logo ko janta hoon jinka IIMC me admission hua, kuchh din padne ke bad vo chhod kar chale gaye, yah kahate hue ki “bhayankar anti-knowledge mahole hai, teacher log koshishi karte hai, lekin unke koshish karne se kya ho jayega, sab log jante hai ki 9 mahine bad naukari mil jayegi.”
me aapki baat se sava solag aane sahmat hoon.
TO ANIKET___
aniket ji…shayad aapko iimc ke students ki baaten jyada hi buri lag rahi hai,or lagni bhi chahiye aapne kaam hi essa kiya hai…
sir aap to bahut bade teacher maalum padte hai,kiski galti kaha hotI ya nahi..devnaagri me ya roman me?…
sir ye to wahi hisab ho gaya khisyaani billi khamba nauche…accha hai lage rahiye !!!…
me fir yahi bolungi ke aapke bolne se kisi ka gyaan kam nahi ho jaaega samjhe…aur AAP COPY PASTE KARTE RAHIYE Ok…
AUR HAAN UPPAR KE LEKH KA SHIRSHAK YE HONA CHAHIYE THA“दो कौड़ी का स्तर नहीं है ANIKET KA…”
यार अनिकेत जी ये तो आपकी कुंठा ही लग रही है। आपको किसी चैनल या अख़बार में काम करते कितना समय हो गया, ये मैं नहीं जानता, और न ही जानना चाहता हूं। लेकिन ये जो अपनें अनुभव आप बता रहे हैं कि किसी को कॉपी लिखना नहीं आता है और काम सीखाना पड़ता है… तो मैं आपको बता देता हूं कि आपको अगर किसी आईआईएमसी के छात्र के ज्ञान की परीक्षा लेनीं हो तो कृपया कोर्स के दौरन ही देश के किसी भी संस्थान के, किसी भी छात्र को बैठा कर कापी लिखवा लिजिएगा। आपका अल्पज्ञान और आपकी मिथ्या दूर हो जाएगी। एक बात और अपनें उस समय को याद किजिएगा जब आप पत्रकारिता का कोर्स(यदि किया हो तो)कर रहे होंगे। आपको क्या आता था? अपनें उस इंटर्न वाले अनिकेत को आईआईएमसी के किसी भी छात्र से(हिंदी-अंग्रेजी,रेडियों-टीवी,विज्ञापन-जनसंपर्क)कम्पेयर कर लिजिएगा। आपसे इक्कीस ही होगा। अगर आप ख़बर को छोड़कर मात्राओं की अशुद्धियों को छांटेंगे तो कापी-पेस्ट ही सही काम है। ख़बर को लेकर ज्ञान, उसकी खोज़ , उससे संबंधित तथ्यों और स्टोरी के एंगल्स पर बात करते तो शायद पत्रकारीय गुणों को परखनें की बात होती। पर आपकी बातों से लगता है कि किसी चिरकुट संस्थान से कोर्स करनें के बाद इंटर्नशिप के दौरान किसी प्रड्यूसर के हाथ पैर जोड़नें पर या किसी अख़बार में फोटो चिपकानें के बाद किसी ने खबर लिखना सीखा दिया होगा और फिर जब कुछ अधिकार मिल गए तो आज लगे यहां सही और गलत की संज्ञा देनें।
खरी-खोटी,
क्या आप आईआईटी के छात्रों के बारे में सोच सकते हैं कि उन्हें बेसिक अंकगणित भी नहीं आता होगा? नहीं न! तो फिर पत्रकारिता के छात्रों को वर्तनी और व्याकरण क्यों नहीं आना चाहिए? आईआईएमसी पत्रकारिता सिखाने के लिए है या ककहरा पढ़ाने के लिए? आप अपनी इस टिप्पणी को ही देख लीजिए। तमाम गलतियां भरी पड़ी हैं।
भाई साहब, आपने जिस प्रतिक्रिया पर वो कमेंट किया है, वो इस साइट के मॉडरेटर ने नहीं किया है। वह कमेंट हटा दिया गया है : अविनाश
………………
Iska kya matlab hai. Site aapki aur comment aapka, daaw ulta pad gaya to mitai aur safai bhi aapki. Aapki site par koi aur aapke hi naame se kaise comment kar dega. Chutiya mat banaye.
मैं आईआईएमसी का छात्र नहीं हूं। दो बार मैंने रेडियो एंड टीवी वाला इग्जाम दिया सेलेक्ट नहीं हो पाया। इस संस्था के बारे में मेरा ख्याल था कि सरकारी है, सस्ता है, बहुत से लोग यहां से निकले है और कहीं ना कहीं लगे हुए है। जॉब मिलने में आसानी होगी। मगर अब मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हुं की यह संस्था एक गिरोह है और यहां से निकलनेवाले ज्यादातर छात्र अक्ल से पैदल और मन में एक द्विज अहंकार लिए होते हैं। कुछ मेरे भी दोस्त हैं यहां के जिनके मिल से यह अहसास होता है कि उनका पत्रकारिता और समाज से सरोकार होने के बजाए यहां चापलूसी में कैसे पारंगत बने यही सिखाया जाता है। अपने इंटर्नशिप के दौरान यहां की दो लड़की से भी मुलाकात हुई जिन्हे कुछ आता-जाता नहीं था। उनको देखकर में सोच में पड़ गया की इन्होंने कैसे यहां का टेस्ट क्वालीफाई कर लिया। इसके अलावा भी कई गोष्ठीयों और मंचों पर यहां के छात्रों से इंटरेक्शन का मौका मिला। कूल मिलाकर इस संस्थान के बारे में मेरी राय यही है कि अबतक मैं यहां के जितने बंदों से मिल चुका हुं मुझे किसी ने प्रभावित नहीं किया है।
To the post writer and the one who agree with him…
You are neither entirely wrong nor comletely right. There has always been a number of students in IIMC who make a lot of gramatical mistakes throughout the course.
But I would have loved to see you writing without the bias and disgust for the students of the particular institute. I don’t know who you are ? what your age is? what do you do? But you seem real angry.
Let me tell you something. I have known many batches of IIT and IIM students.. and collectively they are as non-perfect as the IIMC students. There are IIT and IIM students who work under the authorities qualified from the less premier institutes than IIT and IIM. These authorities react the same way as you must have facing an IIMCian as junior prone to mistakes.
You cannot judge a journalist by grammer otherwise Manoranjan Bharati, Ravish Kumar, Umashankar Singh of NDTV and Deepak Chaurasia of STAR would not be where they are. They are IIMCian too. Belive me the examples will never fall short.
There are many roles to be played in media. You are bad at some but at the same time real good at many.
Many things to say to you but I would say…. come to IIMC HINDI JOURNALISM sometime and feel the brimming knowledge. We wouls love to have you.
They need not be given the highest importance but must not be insulted the way you tried to do.
I hope that you are a wise and just man. You will be pure next time.
god bless you.
Good night.
आप साला एक बस वर्तनी की गलतियों को ढ़ूंढकर खुद को पत्रकार समझते हो क्या?
मैनें बताया ना कि आप क्या करें यदि आपको शंका हो किसी आईआईएमसीएन की काबलियत पर तो। डरते क्यों हो, अपनें को भी नहीं आंका होगा शायद आपनें ? जिस दिन ऐसा हो जाए ना। उस दिन अपना ये ज्ञान बघारना। साला बेगानी शादी में अनिकेत दिवाना। तुझसे किसी ने पूछा है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं। बात हमारे संस्थान की थी, ये फर्जी में ही आ घुसा बीच में, साले लात मार के निकाल दूंगा सामनें आ गया तो। भाग यहां से…. आ जाते हैं अपनी कुंठा निकालनें। अपना संस्थान खोल ले ना। एक कॉपी नहीं लिखी जाएगी तुझसे। अच्छे-अच्छे बुद्धिजीवी गेस्ट लेक्चरर बनकर आते यहां जिसे तो दो कौड़ी का बता रहा है और वो भी सवालों के घेरे में अपनें ज्ञान को कम मान लेते हैं मेरी जान। और तुम्हारें जैसे लोग….तू कौन? मैं ख़ामैंख़ा..। घर जा बेटा आराम कर। वर्तनी पढ़ा बच्चों को। जिस चैनल या अख़बार में तू काम करता होगा ना, वहां तेरी खूब ली होगी किसी आईआईएमसीएन नें। तभी तू यहां आकर खुजा रहा है।
वाह खरी-खोटी..क्या बात है। ऐसे ही नाम रौशन करो अपने संस्थान का। अपना स्तर खुद ही दिखा रहे हो। शाबाश!
हम्म! पोस्ट से लेकर टिप्पणी तक अनिकेत ने तो ले ली सब IIMC वालों की गजरे के भाव में। खासकर श्रीमान खरी-खोटी की। खरी-खोटी का तो अब परपराने भी लगा है।
जनमत
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