आख़‍िर कौन है, जो प्रलेस में ये बीमारी लाया?

♦ काशीनाथ

भोपाल के काशीनाथ की ये प्रतिक्रिया वाया मुंबई (पंकज कौरव) आयी। यह बताना इसलिए ज़रूरी है ताकि लोग काशीनाथ नाम देख कर भ्रम में न पड़ जाएं। सबको मालूम है कि शानदार कथाकार काशीनाथ सिंह प्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह के छोटे भाई हैं : मॉडरेटर

kamla-gyanजब पता चला की बाबा ज्ञानरंजन (बाबा ज्ञानरंजन इसलिए कि हमारे शहर में एक बड़ी जमात उनको इसी नाम से पुकारती है) ने प्रगतिशील लेखक संघ से इस्तीफा दे दिया है तो तकलीफ हुई फिर सोचा की जरूर कोई ऐसी बात है जिसने उनको अंदर तक झकझोर दिया है. बात खुली भी तो बड़ी वीभत्स शक्ल में। जनवादी और साम्यवादी विचार के अगुआ माने जाने वाले दो दिग्गजों डॉ नामवर सिंह और डॉ कमला प्रसाद के कारनामे से बाबा नाराज है।

देश में कई तरह से इस पर प्रतिक्रिया आ रही है सब जानते हैं कि ज्ञानरंजन का इस तरह के आरोप लगा कर हटना साहित्य जगत में नज़रअंदाज तो नहीं किया जायेगा उल्टे लिखने पढने वाले प्रगतिशील लेखक संघ में चल रही उठा पटक को अच्छा भी नहीं कहेंगे। ज्ञानजी का कहना भी सही है कि जिस मकसद और विस्तार को लेकर 1936 में प्रेमचंद ने प्रलेस का गठन किया और लोगों को जोड़ कर आगे बढाया उस मकसद पर काम करने का अब किसी का मन नहीं रहा। फिर समय के साथ बदलने और चलने का हवाला देने वालों की भी एक जमात खड़ी कर ली गयी है जो साहित्य में लिखने, पढने और विचार से सामाजिक सरोकार का आन्दोलन चलाने पर कम त्ता का सुख भोगने पर यकीन करती है।

ज्ञानरंजन ने अपने इस्तीफे में जो बात उठायी है, वो कोई साधारण नहीं है। जिन लोगों पर उंगली उठायी है वो भी कोई छोटे लोग नहीं है। नामवर हों या कमला प्रसाद, इन पर उंगली उठाने की बात भी कोई सोच नहीं सकता। सुंदर वन के अक्षय वट की भांति प्रलेस और जनवादी साहित्य आंदोलन के इन धुरंधरों को कटघरे में लाने का बीड़ा भले ही आज ज्ञानरंजन अकेले उठा रहे हो पर ये तो साफ़ हो गया है कि प्रलेस अब किसी नौकरशाह, सत्तासुखभोगी सहित्यकार और स्वयंभू मठाधीशों का चरोखर तो नहीं ही रहेगा। असल में इस्तीफे की पीड़ा ये है कि विचारधारा के प्रति समर्पित व्यक्ति कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता कि प्रलेस के किसी भी आयोजन या किसी अन्य आयोजन में विपरीत विचार के लोग गठबंधन करके शामिल हो जाएं। मूल रूप से पूंजीवाद के खिलाफ खड़ा संगठन यदि उसी की गोद में बैठ जाए तो हद ही पार हो गयी मान लेना चाहिए।

हुआ भी ऐसा ही कुछ और ज्ञानरंजन ने इस्तीफा देकर बता दिया की कम से कम वो तो शरीके जुर्म नहीं हैं और न इसे बर्दाश्त कर सकते है। फिर वो प्रलेस हो या नामवर या कमला प्रसाद। कितनी अजीब बात है कि पूंजीवाद को कोसने वाले जनवादी अमेरिका के फोर्ड फाउंडेशन का पैसा भी लेने लगे और उसके कार्यक्रमों में शामिल होने लगें। फिर एक तरफ गोली बरसाने वाला डीजीपी और बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल की मौजूदगी में प्रलेस के कर्ताधर्ता भी वहां पर दुम हिलाते मिल जाएं, तो किसी भी दृढ़ व्यक्ति को तो नागवार गुजरेगा ही। वही हुआ। ज्ञानरंजन ने तत्काल इस्तीफा देकर साफ़ कर दिया की अब ऐसा नहीं चलेगा। विचार पसंद नहीं है या उसको आगे नहीं चला सकते तो कोई गड़बड़ करने की भी अनुमति नहीं दी जा सकती।

इतनी बहस के बीच एक चर्चा और जरूरी है की आखिर प्रलेस में वो कौन है, जो इस बीमारी को ले आया तो सुई अशोक वाजपेयी पर अटक जाती है। ऐसे बहुत वाक़ये हैं, जो प्रलेस को घेरते हैं। जसवंत सिंह की किताब का विमोचन करने पहुंचे नामवर सिंह ने क्या सोच कर कार्यक्रम में शिरकत की ये तो वो नहीं बता रहे इतना जरूर है कि उस मंच पर खड़े हो कर वो ये हुंकार जरूर भर रहे थे कि देखो हिंदू कट्टरपंथी को भी हम ही मिले। ज्ञानरंजन के इस आरोप का क्या जवाब है कि भारत भवन में दक्षिणपंथियों को प्रोत्साहित करने के लिए जिस फोर्ड फाउंडेशन का अनुदान वापस कर दिया गया था, उसी का 50 हज़ार रुपये का इनाम इलाहाबाद में चुपचाप लेकर कौन आ गया और सब शांत कैसे हैं। क्या प्रलेस इस तरह से ही काम करना चाहता है। ज्ञानरंजन ने प्रलेस के भीतर जो भी सवाल खड़े किये हैं, उनका जबाब तो आना चाहिए। ये बहस एकतरफा नहीं होना चाहिए।

दूसरी बात ज्ञानजी से कि यदि आप देखते हैं कि प्रलेस में इतनी सड़ांध भर रही है तो इस्तीफा इतनी देर से क्यों? प्रलेस किसी एक की जागीर तो नहीं है कि जो हो रहा है देखो सुनो और चुप रहो। न जाने कितने नौजवानों और कितनी ही पीढ़ी ने इसको खड़ा करने में अपना योगदान दिया है। जो सत्ता के दलाल और सुविधाभोगियों के आगे डर से बाहर चले जाएं और इनको छुट्टा सांड की तरह उत्पात मचाने के लिए छोड़ दें, ऐसा भी नहीं होगा। जब जागे तब सबेरा की तर्ज पर अब जरूरी है की एक बार कचरा साफ़ कर ही लिया जाए। समय भी सही है। देश भर में दीपावली के समय घरों घर सफाई होगी। लगे हाथ हम भी प्रलेस के घर में सफाई पुताई कर लें और प्रेमचंद की आत्मा को शांति दें। आमीन।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *