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सत्‍य का खोजी अं‍तर्विरोधों में जीता है : प्रभाष जोशी

8 October 2009 2 Comments

जयप्रकाश सम्‍मान 2009 कुलदीप नैयर को

jaiprakash-memorial-lecture-in-jnuलोकनायक जयप्रकाश नारायण की 30वीं पुण्‍यतिथि के अवसर पर जेएनयू के स्‍कूल ऑफ लैंग्‍वेज में जयप्रकाश प्रतिष्‍ठान की ओर से जयप्रकाश स्‍मृति व्‍याख्‍यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत समाजवादी चिंतक प्रो आनंद कुमार ने जयप्रकाश की वैकल्पिक राजनीति के एजेंडे पर बात करते हुए की। उन्‍होंने कहा कि जयप्रकाश जी ने समाज के लिए खुद को समर्पित कर दिया। वे कभी स्‍वार्थ की राजनीति का हिस्‍सा नहीं बने। उन्‍होंने परमार्थ की राजनीति की। लोकतंत्र के लिए आवश्‍यक है कि लोग सामाजिक सरोकारों के लिए समय निकालें।

वरिष्‍ठ पत्रकार श्री प्रभाष जोशी ने दायरों से बाहर जयप्रकाश नारायण विषय पर जयप्रकाश नारायण स्‍मृति व्‍याख्‍यान दिया। उन्‍होंने जेपी से जुडे हुए कुछ सवालों को उठाया और उन पर तार्किक ढंग से विचार की ज़रूरत पर बल दिया। कहा कि लोग सवाल उठाते हैं कि जेपी का सारा आंदोलन लोकतंत्र का विरोध करने के लिए था, राजनीति में सांप्रदायिकता जेपी की देन है, अलोकतांत्रिक ताकतों को भी जेपी ने प्रोत्‍साहन दिया आदि। इन तमाम सवालों पर फिर से सोचना चाहिए। जेपी लोकतंत्र विरोधी नहीं थे। लोकतंत्र की पहली ही शर्त है कि विरोधी पक्ष को भी सुना जाए। उसके साथ संवाद किया जाए। यदि लोकतंत्र की प्रक्रिया में विचार से किसी व्‍यक्ति को बदल कर अपने साथ लेने का सामर्थ्‍य नहीं है, तो वह लोकतंत्र झूठा है। प्रभाष जी ने जेपी के जीवन से जुड़ी हुई कुछ घटनाओं का उदाहरण देते हुए इस बात की पुष्टि की और कहा कि अहिंसा के बिना सत्‍य की तलाश नहीं हो सकती। अहिंसा की प्रक्रिया लोकतंत्र के मूल में है क्‍योंकि वह विचारों से चलती है। जो जीवन सत्‍य की जितनी ईमानदारी से तलाश के लिए जीया जाता है, उसमें उतने ही अंतर्विरोध हो सकते हैं। गांधीजी के बाद इस तरह के अंतर्विरोध जेपी के जीवन में भी थे। विचारधाराएं आदमी के लिए होती हैं पर धीरे-धीरे आदमी उनमें विलुप्‍त हो जाता है और विचारधाराएं मुख्‍य हो जाती हैं। इसी मायने में जेपी किसी एक ही विचार पर टिके रहकर अपनी ओर सब सीमाओं को बांधने के पक्ष में नहीं थे।

जयप्रकाश प्रतिष्‍ठान की ओर से वर्ष 2009 का जयप्रकाश सम्‍मान वरिष्‍ठ पत्रकार कुलदीप नैयर को दिया गया। पुरस्‍कार स्‍वरूप उनको एक शॉल, अभिनंदन पत्र, जेपी की तस्‍वीर और बुद्ध की प्रतिमा भेंट की गयी। इस अवसर पर नेपाल से आये प्रतिनिधिमंडल ने कुलदीप नैयर, प्रभाष जोशी और प्रो आनंद कुमार को सम्‍मानित किया। कार्यक्रम का संचालन आशीष कुमार ने किया। इस अवसर पर कुलदीप नैयर ने जयप्रकाश नारायण के जीवन से जुड़े कुछ संस्‍मरण सुनाये। कार्यक्रम में जेएनयू के विद्यार्थियों के अलावा बड़ी संख्‍या में भारतीय जनसंचार संस्‍थान के विद्यार्थियों ने भागीदारी की। इसके अलावा प्रो प्रमोद कुमार यादव, सईद नकवी, अरुण कुमार पानीबाबा, अवधेश कुमार, गंगा सहाय मीणा आदि भी मौजूद थे।

2 Comments »

  • Dalip Kumar Meena said:

    ye to hota hi hai,jaha phool khilte hai vahi kaate lagte hai,but vo sucess hote hai aur sadiyo tak jane jaate hai….aise mahapurush.

  • संवेदना said:

    जयप्रकाश की राजनीति पर वही लोग सवाल उठाते हैं जिन्‍होंने खुद को किसी पार्टी को बेच दिया है.

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