अमिताभ के वजूद का मतलब है जया की समाप्ति

जया सामान्य रूप से अमिताभ से नाराज़ रहती थीं। वे अमिताभ के मूड को समझ नहीं पाती थीं और रिश्ते में बनायी दूरी से खीझती थीं। वे हमेशा शिक़ायती लहजे में बातें करती थीं। जया चाहती थीं कि वे फिर से राजनीति में जाएं। लेकिन अमिताभ को चुप कराना आता है। वे अपने विश्वास में इतने दृढ़ हैं कि आप टस से मस नहीं कर सकते। इसलिए ऐसा लगता था कि सामान्य बातचीत में भी जया उनसे बहस कर रही हैं। मैं जया को दोषी नहीं मानती। उन्हें मुसीबतें झेलनी पड़ी थीं। मैंने उनसे कहा था कि इस व्यक्ति के साथ आपकी शादी खुशहाल नहीं हो सकती, क्योंकि वे अपने दिमाग़ में अकेले हैं। वे दूसरों के नज़रिये से नहीं सोचते। वे परिवार का पालन एक धर्म के तहत करते हैं। अमिताभ के व्यक्तित्व में एकाधिकार की प्रवृति है, लेकिन वे एकाधिकारवादी पुरुष नहीं हैं। वे पुरुष अहमन्यता के शिकार लगते हैं, लेकिन हैं नहीं।
अमिताभ और जया नज़रें चुरा कर बातें करते हैं। वे आंखों में आंखें डाल कर बातें नहीं करते। दोनों के सोचने के तरीक़े अलग हैं। वे दो अलग व्यक्तियों की तरह हैं। अमिताभ के वजूद का मतलब है जया की समाप्ति। उनके परिवार में कभी तलाक की बात सुनी नहीं गयी। वे स्पष्ट हैं कि उनकी शादी एक सामाजिक संस्कार है, जिसे उन्हें निभाना है। अमिताभ के लिए विवाह कर्तव्य रहा है, उसमें प्यार नहीं है। अमिताभ श्वेता के अधिक करीब हैं।
अभिषेक अपनी सीमाएं जानते हैं। उनकी छवि अपने पिता जैसी नहीं है। उन्होंने समर्पण कर दिया है। पिता के साये में जीने और एडजस्ट करने में थोड़ी दिक्कत होती है, लेकिन वह हालात के अनुसार बदलना जानते हैं।
जया मेरे लिए गाड़ियों का इंतजाम करती थीं कि मैं लोगों से जाकर मिल सकूं। मेरे लिए लजीज़ खाने भिजवाती थीं। मैं उन्हें उस बात की याद कैसे दिला सकती थी, जो उनके खिलाफ़ जाती थी। मैंने अमिताभ और रेखा के बारे में पढ़ा था। अमिताभ ने अपने अहं की तुष्टि के लिए रेखा का इस्तेमाल किया। वे देखना चाहते थे कि कोई औरत उनके लिए किस हद तक जा सकती है। साथ ही वे यह भी जानना चाहते थे कि औरतों पर उनका क्या प्रभाव है। लेकिन रेखा ने सब कुछ खो दिया। वह अमिताभ के लिए खूबसूरत बनी, लेकिन अमिताभ के प्रेम ने रेखा को हमेशा के लिए दासी बना दिया।
(यह पोस्ट सोसायटी पत्रिका में छपे सुस्मिता दासगुप्ता के लंबे इंटरव्यू के अंशों पर आधारित है।)













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