राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ शब्दों का हथियार लेकर खड़ा है एक न्यूज़ चैनल
♦ रजनीश
शांति का नोबेल पुरस्कार ओबामा को दिये जाने के एलान के बाद जिस अमेरिकी न्यूज़ चैनल ने नोबेल कमेटी को सबसे तीखी आलोचना का शिकार बनाया, वो फॉक्स था। हमारे अपने देश में ऐसा संभव नहीं। एक भी मीडिया हाउस व्यवस्था की ऐसी फज़ीहत के लिए तैयार नहीं दिखता। कह सकते हैं कि हमारा मीडिया कम कलेजे वाला है या उसके सामने अपने बहुतेरे हित प्राथमिकता सूची में ऊपर हैं। लेकिन फॉक्स के तेवर की कहानी इतनी सीधी भी नहीं है। जैसा कि पत्रकार रजनीश बता रहे हैं, ऐसा लगता है कि फॉक्स न्यूज़ चैनल ओबामा के ख़िलाफ़ एक पार्टी की तरह काम कर रहा है : मॉडरेटर
राजकाज में ध्यान केंद्रित के बजाय वाइट हाउस युद्ध की मुद्रा में है और उनकी हमलावर मानसिकता का लक्ष्य फॉक्स न्यूज़ चैनल है।
- माइकल क्लिमेंट, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट (न्यूज़), फॉक्स न्यूज़ चैनल
हम उनके साथ अपने विरोधियों का सा सलूक करेंगे क्योंकि उन्होंने बराक ओबामा और वाइट हाउस के विरुद्ध एक किस्म का युद्ध छेड़ रखा है।
- फॉक्स न्यूज़ चैनल के बारे में वाइट हाउस की जनसंपर्क निदेशक अनीता डन का बयान
दरअसल अभी पिछले महीने फॉक्स न्यूज़ चैनल के चेयरमैन रोज़र एल्स और राष्ट्रपति ओबामा के वरिष्ठ सलाहकार डेविड एक्सलराड की न्यूयॉर्क में मुलाक़ात हुई। इस मुलाक़ात को फॉक्स शिखर बैठक का नाम दिया गया। हालांकि इस बैठक के एजेंडे के बारे में दोनों पक्षों ने कुछ नहीं कहा है। कयास लगाया जा रहा है कि बातचीत का केंद्रबिंदु एक समझौता या कम से कम सुर में बदलाव था। उल्लेखनीय है कि 2008 के मध्य में एल्स और ओबामा के बीच एक अस्थायी युद्ध विराम हुआ था। लेकिन दोनों ओर से रुक-रुक कर हमले जारी थे। इससे ऐसा आभास होता है कि इस झगड़े में दोनों पक्ष अपना फ़ायदा देख रहे हैं। वाइट हाउस द्वारा की जा रही आलोचनाओं के बारे में बोलते हुए फॉक्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (प्रोग्रामिंग) बिल साइन कहते हैं, “उनके हर हमले से हमारी रेटिंग बढ़ जाती है।”
बुश प्रशासन का चहेता नेटवर्क होने से लेकर अब ओबामा प्रशासन की आंखों की किरकिरी बनने तक के फॉक्स न्यूज़ के रवैये में आये इस बदलाव के आर्थिक निहितार्थ भी हैं। खासकर मीडिया कंपनियों के लिए इस नाज़ुक वक्त में यह बदलाव खासा महत्त्वपूर्ण है।
फॉक्स न्यूज के कार्यक्रमों ने इस वर्ष रिकॉर्ड दर्शक बटोरे हैं। पिछले सप्ताह के दौरान, इस वर्ष किसी भी दिये गये समय में फॉक्स ने औसतन 1.2 मिलियन दर्शक हासिल किये, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान बटोरी गयी दर्शकों की संख्या से एक मिलियन अधिक है। इससे पहले सन 2003 में इराक युद्द के दौरान इस चैनल को 1.1 मिलियन दर्शकों ने देखा था।
हालांकि इस चैनल के एक कार्यक्रमे के प्रस्तुतकर्ता ग्लेन बेक की एक विवादास्पद टिप्पणी के कारण चैनल को विज्ञापनदाताओं का बहिष्कार भी झेलना पड़ा। साथ ही, फॉक्स न्यूज की विरोधी छवि के कारण इसके मुख्य वाइट हाउस संवाददाता मेजर गैरट समेत अन्य संवाददाताओं का कामकाज भी प्रभावित हुआ है। खासकर मेजर गैरट, जिन्हें वाइट हाउस संतुलित पत्रकार करार देता है, के लिए खासी दिक्कत पैदा हुई है। उन्हें सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (न्यूज) माइकल क्लिमेंट का निर्देश है कि वे चैनल के तीखे कार्यक्रमों में सामने न आएं।
दूसरी ओर, अधिकतर डेमोक्रेट समर्थकों के लिए फॉक्स न्यूज एक “रूढ़ीवादी चैनल” है और उनकी इस धारणा को चैनल द्वारा ओबामा के विवादास्पद कवरेज ने और दृढ़ किया है। इस साल जून में फॉक्स का नाम लिये बग़ैर ओबामा ने कहा था, “एक टेलीविज़न चैनल है, जो पूरी तरह मेरे प्रशासन पर हमला बोलने के लिए समर्पित है। दिनभर देखने के बाद भी आप उस चैनल पर मेरे बारे में शायद ही कोई सकारात्मक स्टोरी पाएंगे।”
हाल के कुछ समय से वाइट हाउस ने प्रशासन के सदस्यों को उस चैनल के कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए भेजना कम कर दिया है। यहां तक कि इस साल सितंबर में ओबामा के “मॉर्निंग टॉक शो” के लिए इस चैनल को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। जिसके जवाब में “फॉक्स न्यूज संडे” के एंकर क्रिस वालेस ने बिल ओ रैली के प्राइम टाइम शो में ओबामा प्रशासन की जम कर खिंचाई करते हुए उसे “सबसे अधिक रोनी सूरत वाले बच्चों का समूह” करार दिया। उनकी इस टिप्पणी को अनीता डन ने बचकानी बताते हुए कहा कि हमारे प्रशासनिक अधिकारी फॉक्स न्यूज से बात करना जारी रखेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि “हम उन्हें एक समाचार संगठन के रूप में मान्यता नहीं देने जा रहे।”
फॉक्स न्यूज़ के अधिकारियों का कहना है कि उनके समाचार कार्यक्रम, जो सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक और फिर शाम छह बजे से आठ बजे तक आते हैं, वस्तुनिष्ठ हैं। क्लिमेंट के शब्दों में, “एक आम पाठक को अखबार के संपादकीय पृष्ठ और अन्य पृष्ठों के बीच का अंतर मालूम है।” हालांकि वाइट हाउस क्लिमेंट की इस परिभाषा को खारिज़ करता है और उसके अधिकारी चैनल के “अपराधों” की एक लंबी सूची गिनाते हैं। वे उस समय की ओर ध्यान दिलाते हैं, जब चैनल के सुबह के एक कार्यक्रम में यह ग़लत दावा किया गया था कि ओबामा ने एक मदरसे का दौरा किया। यह उस समय की बात है, जब ओबामा ने अपना चुनाव अभियान आधिकारिक रूप से शुरू भी नहीं किया था।
हाल ही में फॉक्स ने सरकार के खिलाफ “टी पार्टी रैली” आयजित करना शुरू किया है और वाइट हाउस द्वारा की गयी बड़ी नियुक्तियों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। इसी क्रम में चैनल के मशहूर एंकर ग्लेन बेक का ज़िक्र किया जाता है, जिन्हें इस बात का श्रेय दिया जाता है कि उनकी तीखी टिप्पणियों की वजह से ही पर्यावरण मसलों के लिए सलाहकार पद पर नियुक्त वॉन जोंस को पिछले महीने इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। बेक ने अपने कई कार्यक्रमों को जोंस पर केंद्रित किया था और उन्हें एक “अराजक वामपंथी” करार दिया था।
यही नहीं, बेक ने ओबामा को एक नस्लवादी नेता कहा था, जिसकी वजह से कलर ऑफ चेंज, ओसारजी नामक समूह की ओर से चैनल को विज्ञापन संबंधी बहिष्कार का सामना करना पड़ा। दर्जनों विज्ञापनदाताओं ने बेक के शो से खुद को अलग कर लिया, जिससे चैनल के मार्केटिंग विभाग के लिए नया सिरदर्द पैदा हुआ है। फिर भी, चैनल अपने क़दम पीछे खींचने को तैयार नहीं है।













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