उत्तमा की कामायनी : मनु और श्रद्धा के कुछ चित्र-प्रसंग

♦ उत्तमा दीक्षित

युवा‍ चित्रकार उत्तमा दीक्षित की कामायनी पेंटिंग सीरीज़ की मशहूरियत के बारे में सुनकर मोहल्‍ला लाइव ने उनसे इसे प्रकाशित करने की गुज़ारिश की। उत्तमा ने न सिर्फ उस सीरीज़ की महत्‍वपूर्ण पेंटिंग्‍स हमें भेजी, बल्कि उन्‍हें पेंट करने के दौरान के अपने अनुभवों को भी हमसे साझा किया। हम उनके शुक्रगुज़ार हैं : मॉडरेटर

कामायनी मुझे अपनी सबसे प्रिय पेंटिंग सीरीज में से एक है। मुझे नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने का शौक है, खासकर बड़ी शख्सियतों की पुस्तकें। वाकया आगरा का है। वहां आगरा कालेज में अध्यापन के दौरान एक शिक्षक साथी के साथ जयशंकर प्रसाद की पुस्तकों पर चर्चा चल रही थी। कामायनी पर बात आते ही मुझे लगा, जैसे मेरे भीतर का कलाकार कुछ करना चाहता है। प्रलय के दौरान मनु और श्रद्धा का प्रेम मुझे प्रेरक लगा। कल्पना की उस समय की। मैं जैसे खो सी गयी। मैंने तत्काल पेपर पर स्केच बनाना शुरू किया और देखते ही देखते मनु का चित्र उतर आया। बेशक, अन्य कल्पनाओं की तरह यह कल्पना भी मुश्किल नहीं थी। पहले चित्र का स्केच मनमुताबिक आना शुरू हुआ तो उत्साह बढ़ा। हालांकि विषय की संवेदना और भाव-भंगिमा को चित्र में उतारने में बाद में खासी मेहनत करनी पड़ी। प्रलय के कारण भावशून्य हुए मनु के रूप में मुझे मन दिखाना था और श्रद्धा के रूप में दिल। रहस्य, स्वप्न, आशाएं, कर्म, काम, वासना, आनंद, लज्जा, ईर्ष्या और चिंता के भावों का चित्रण करना सचमुच चुनौतीपूर्ण है। सीरीज़ में विशेषता इसकी टेक्चरल क्वालिटी और आंखों पर ज़्यादा काम किये बिना ही उनके भावों को दर्शाने की कोशिश है। चित्रांकन के दौरान मैं कामायनी पढ़ती रही। कुछ पेज तो कई-कई बार पढ़े। मैंने एक साल तक लगातार इस सीरीज पर काम किया। हालांकि पूरी तरह संतुष्टि नहीं हुई। मन को समझाती रही कि संतुष्ट न होना तो कलाकार का गुण ही है, संतुष्ट हुए तो लगे किनारे। मेरी इस सीरीज ने चर्चा भी पायी। ग्वालियर में एक्जीबीशन के दौरान एक हिंदू संगठन ने विरोध किया। पहले दिन नारेबाज़ी हुई। मैंने समझाया कि चित्रों में मौलिकता दिखाना हर चित्रकार का अपना अधिकार है। वो जानता है कि किस समय को किस तरह से व्यक्त किया जाना चाहिए। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में अपनी प्रदर्शनी में मैंने यह पेंटिंग्स भी लगायीं, सौभाग्य से सराहना भी मिली।

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uttama-dixit-front(उत्तमा दीक्षित। काशी में जन्‍म। बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय से पढ़ाई-लिखाई। बचपन से पेंटिंग का पैशन। करियर की शुरुआत आगरा कॉलेज में अध्‍यापन से। फिलहाल बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय के चित्रकला विभाग में असिस्‍टेंट प्रोफेसर। उनसे uttama.dixit@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

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