WPI कांफ्रेंस में विभा रानी का नाट्य पाठ
विभा रानी के बेहद चर्चित नाटक “दूसरा आदमी दूसरी औरत” का नाट्य पाठ मुंबई में स्त्री मुक्ति संघटना एवं एकेडेमी ऑफ थिएटर आर्ट, मुंबई विश्वविद्यालय के सौजन्य से 1-7 नवम्बर, 2009 तक आयोजित WPI (WOmen Playwright International) यानी अंतर्राष्ट्रीय महिला नाट्य लेखक कांफ्रेंस में 6 नवम्बर, 2009 को दोपहर 12 बजे होने जा रहा है। प्रेम और संबंध के एक नये रूप पर आधारित इस नाटक का पाठ विभा रानी एवं अजय रोहिल्ला करेंगे। विवाहेतर संबंध न तो आज के समय की देन है, न शरीर की ज़रूरत और मन की फिसलन का परिणाम। यह मन की अतृप्ति की एक अभिव्यक्ति है। प्रश्न यह नहीं है कि यह संबंध हुआ कैसे और क्यों हुआ? सवाल यह है कि इस संबंध का परिणाम क्या हो जो घर, परिवार को भी बनाये रखे और संबंध को भी। इसी की पड़ताल और विवेचना करता है यह नाटक।
विभा रानी हिंदी और मैथिली की लेखक, नाट्य लेखक, नाट्य समीक्षक, रंगमंच अभिनेत्री व सामाजिक कर्मी हैं। अब तक उन्होंने 10 से अधिक नाटक लिखे हैं, जिनमें से दो नाटको “आओ तनिक प्रेम करें” तथा “अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो” को “मोहन राकेश सम्मान” से सम्मानित किया जा चुका है। विभा रानी लिखित व अभिनीत दो एक पात्रीय नाटक “लाइफ इज नॉट ए ड्रीम” का मंचन फिनलैंड, मुबई तथा राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव, रायपुर में तथा “बालचंदा” का मंचन काला घोड़ा फेस्टिवल, मुंबई में किया जा चुका है। उनके अन्य एक पात्रीय नाटक “ऐ प्रिये, तेरे लिए” का मंचन मुंबई में हो चुका है। विभा रानी अभिनीत ताज़ातरीन नाटकों में से है डॉ नरेंद्र मोहन लिखित नाटक “मि जिन्ना”, जिसमें वे जिन्ना की बहन फातिमा की भूमिका में हैं। “दूसरा आदमी दूसरी औरत” का मंचन 2002 में भारतीय रंग महोत्सव, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में राजेंद्र गुप्ता व सीमा बिश्वास द्वारा तथा मुंबई में इसका रंगपाठ राजेंद्र गुप्ता व नीना गुप्ता द्वारा किया जा चुका है। विभा रानी ने अब तक 12 से अधिक किताबें लिखी हैं तथा “कथा” अवार्ड सहित कई पुरस्कार पा चुकी हैं।
अजय रोहिल्ला थिएटर के एक जाने-माने अभिनेता, निर्देशक हैं। “दुलारीबाई”, “सावधान पुरुरवा”, “विदूषक”, “चिट्ठी”, खालिद की खाला”, “मौली” जैसे नाटकों में अभिनय किया है। सभी प्रमुख संस्थानों, जैसे साहित्य कला परिषद, उर्दू अकादमी, संगीत नाटक अकादमी, शाकुंतलम थिएटर आदि द्वारा आयोजित थिएटर फेस्टिवलों में एक निर्देशक के रूप में भाग ले चुके हैं। वे दिल्ली विश्वविद्यालय, गोवा कला अकादमी के विजिटिंग फैकल्टी रह चुके हैं। देश भर में ये थिएटर वर्कशॉप लेते हैं। अजय द्वारा अभिनीत कुछ महत्वपूर्ण फिल्में हैं – “बैंडिट क्वीन”, “डॉ अंबेदकर”, “गंगाजल”, “मंगल पाडेय”, “वारियर” आदि। अब तक 11 लघु फिल्में बन चुके अजय की एक फिल्म पिछले साल 2008 के सिंगापुर फिल्म फेस्टिवल में नामित हुई थी।
अगर आप 6 नवंबर, 2009 को मुंबई में हैं तो इस WPI (WOmen Playwright International) कांफ्रेंस में भाग लें और विभा रानी का नाट्य पाठ सुनें – “दूसरा आदमी दूसरी औरत”।









बधाई बिभा ।
bahut bahut badhai
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