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	<title>Comments on: प्रभाष जी के लिए इतनी कटुता, इतनी घृणा?</title>
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		<title>By: गिरीश पंकज</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/11/08/girish-pankaj-writeup-on-prabhash-joshi/comment-page-1/#comment-4363</link>
		<dc:creator>गिरीश पंकज</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Nov 2009 14:38:55 +0000</pubDate>
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		<description>सरोज जी, आपकी बातों से सहमत हूँ, आपने जिस शालीनता के साथ बात रखी है, तरीका यही होना चाहिए. बाकी लोग भी इसी स्तर पर बात रखें, तो लगे की संस्कार जिंदा है. खैर. प्रभाषजी की आड़ में कौन-कौन रोटियाँ सेंक रहा है, मै समझ नहीं पा रहा. बहुत अधिक ब्लॉग भी नहीं देख पाता, अपने ब्लॉग में अपनी कविताये लिख देता हूँ. फिर अपने लेखन में लग जाता हूँ. चाहता हूँ समाज की बेहतरी के लिए कुछ करू. मै यही  चाहता हूँ कि नैतिक मूल्य बने रहें. स्त्री हो या पुरुष. एक और बात, किसी व्यक्ति के निधन के बाद हम कम से कम तत्काल तो उसे कोसने का घिनौना कम नहीं करते.  बशर्ते वह खलनायक न हो. यह हमारी संस्कृति है. प्रभाष जी कम से कम खलनायक तो नहीं थे शायद. खैर, अब हमें कुछ अच्छे चिंतन की और लगना चाहिए. कीचड उछालने की संकृति से बचना चाहिए. और  किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना ही नहीं चाहिए, हाँ, गलत प्रवृत्तियों पर बात होती रहे. होनी चाहिए. लेकिन आपकी शालीनता का मै कायल हूँ. अपनी ही तारीफ के पुल बांधने वाले भी है. आप क्या कर सकते है. यही समाज है. तरह-तरह के लोग है. हमें अच्छा इन्सान बने रहना है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सरोज जी, आपकी बातों से सहमत हूँ, आपने जिस शालीनता के साथ बात रखी है, तरीका यही होना चाहिए. बाकी लोग भी इसी स्तर पर बात रखें, तो लगे की संस्कार जिंदा है. खैर. प्रभाषजी की आड़ में कौन-कौन रोटियाँ सेंक रहा है, मै समझ नहीं पा रहा. बहुत अधिक ब्लॉग भी नहीं देख पाता, अपने ब्लॉग में अपनी कविताये लिख देता हूँ. फिर अपने लेखन में लग जाता हूँ. चाहता हूँ समाज की बेहतरी के लिए कुछ करू. मै यही  चाहता हूँ कि नैतिक मूल्य बने रहें. स्त्री हो या पुरुष. एक और बात, किसी व्यक्ति के निधन के बाद हम कम से कम तत्काल तो उसे कोसने का घिनौना कम नहीं करते.  बशर्ते वह खलनायक न हो. यह हमारी संस्कृति है. प्रभाष जी कम से कम खलनायक तो नहीं थे शायद. खैर, अब हमें कुछ अच्छे चिंतन की और लगना चाहिए. कीचड उछालने की संकृति से बचना चाहिए. और  किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना ही नहीं चाहिए, हाँ, गलत प्रवृत्तियों पर बात होती रहे. होनी चाहिए. लेकिन आपकी शालीनता का मै कायल हूँ. अपनी ही तारीफ के पुल बांधने वाले भी है. आप क्या कर सकते है. यही समाज है. तरह-तरह के लोग है. हमें अच्छा इन्सान बने रहना है.</p>
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		<title>By: सरोज सागर</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/11/08/girish-pankaj-writeup-on-prabhash-joshi/comment-page-1/#comment-4360</link>
		<dc:creator>सरोज सागर</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Nov 2009 13:12:05 +0000</pubDate>
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		<description>गिरीश पंकज जी, प्रभाष जोशी मेरे लिए व्‍यक्ति नहीं विचार हैं। &#039;थे&#039; नहीं &#039;हैं&#039;। और मैं समझता हूं एक समतावादी नागरिक के लिए इस तरह के विचारों का विरोध जरूरी है। 

हां, उन्‍हें गरिया कौन रहा है ? एक शेर याद आ रहा है- 

&#039;&#039;हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वोह कत्‍ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती&#039;&#039;

ब्‍लॉगों में झांकिए जनाब, प्रभाष जी को श्रद्धांजलि के नाम पर कैसी राजनीति हो रही है। कोई किसी को माफी मांगने कह रहा है तो कोई इसी बहाने अपनी ही तारीफ के पुल बांध दे रहा है। 

क्‍या ये कथित रूप से माफी मंगवाने वाले प्रभाष जी के निधन पर अपनी रोटी सेंकने के फेर में नहीं हैं  ??</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>गिरीश पंकज जी, प्रभाष जोशी मेरे लिए व्‍यक्ति नहीं विचार हैं। &#8216;थे&#8217; नहीं &#8216;हैं&#8217;। और मैं समझता हूं एक समतावादी नागरिक के लिए इस तरह के विचारों का विरोध जरूरी है। </p>
<p>हां, उन्‍हें गरिया कौन रहा है ? एक शेर याद आ रहा है- </p>
<p>&#8221;हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम<br />
वोह कत्‍ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती&#8221;</p>
<p>ब्‍लॉगों में झांकिए जनाब, प्रभाष जी को श्रद्धांजलि के नाम पर कैसी राजनीति हो रही है। कोई किसी को माफी मांगने कह रहा है तो कोई इसी बहाने अपनी ही तारीफ के पुल बांध दे रहा है। </p>
<p>क्‍या ये कथित रूप से माफी मंगवाने वाले प्रभाष जी के निधन पर अपनी रोटी सेंकने के फेर में नहीं हैं  ??</p>
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		<title>By: girish pankaj</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/11/08/girish-pankaj-writeup-on-prabhash-joshi/comment-page-1/#comment-4354</link>
		<dc:creator>girish pankaj</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Nov 2009 09:56:04 +0000</pubDate>
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		<description>bhagvan k liye mujhe stree virodhin samjhe. striyo par meree anek rachnatmak kavitaye hai. lekh hai khaniyaan hai. prabhasjji ke lekh me ek sandarbh ke roop me jo tippanee maine kee hai, use hi pakad kar mat baith jaye bhayee. prabhash joshi ka nidhan huye 4 din bhi nahee huye aur kuchh log unhe gariyane se baaj nahi aa rahe. ham log kya itane patit ho gaye hai...? cheezo ko gaharai se n samajhna aur lathee bhanjane lagna hi jab mansikata ho jaye to aap kisee ko bhi kharij karate rahe.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>bhagvan k liye mujhe stree virodhin samjhe. striyo par meree anek rachnatmak kavitaye hai. lekh hai khaniyaan hai. prabhasjji ke lekh me ek sandarbh ke roop me jo tippanee maine kee hai, use hi pakad kar mat baith jaye bhayee. prabhash joshi ka nidhan huye 4 din bhi nahee huye aur kuchh log unhe gariyane se baaj nahi aa rahe. ham log kya itane patit ho gaye hai&#8230;? cheezo ko gaharai se n samajhna aur lathee bhanjane lagna hi jab mansikata ho jaye to aap kisee ko bhi kharij karate rahe.</p>
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		<title>By: aam admi</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/11/08/girish-pankaj-writeup-on-prabhash-joshi/comment-page-1/#comment-4352</link>
		<dc:creator>aam admi</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Nov 2009 08:11:05 +0000</pubDate>
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		<description>....अच्छी औरते, गद्दारी करती औरते और व्यभिचार करती औरते....
Girishji,

is tarah ke classification karne aur certificate baantne se bachiye. aap hote kaun hain achchai, gaddari aur vyabhichar ki paribhasha nirdharit karnewale.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>&#8230;.अच्छी औरते, गद्दारी करती औरते और व्यभिचार करती औरते&#8230;.<br />
Girishji,</p>
<p>is tarah ke classification karne aur certificate baantne se bachiye. aap hote kaun hain achchai, gaddari aur vyabhichar ki paribhasha nirdharit karnewale.</p>
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		<title>By: सरोज सागर</title>
		<link>http://mohallalive.com/2009/11/08/girish-pankaj-writeup-on-prabhash-joshi/comment-page-1/#comment-4347</link>
		<dc:creator>सरोज सागर</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Nov 2009 06:25:50 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://mohallalive.com/?p=6880#comment-4347</guid>
		<description>देख रहे हैं प्रेम रंजन जी, कैसे खुल रही है स्‍वर्गीय प्रभाष जोशी की पोल। जोशी जी के ये अनुयायी दरअसल बता रहे हैं कि प्रभाष जोशी वास्‍तव में क्‍या थे। इधर एक जगह ऐसे ही एक अनुयायी का लेख मैंने पढा, जिसमें उन्‍होंने बताया था कि जोशी जी भले ही बाबरी मस्जिद के विध्‍वंस के खिलाफ रहे हों लेकिन वे राममंदिर के समर्थक थे। 

मेरे विचार से स्‍त्री विमर्श करने वाली लेखिकाओं को भी इस पर गौर करना चाहिए। और हो सके तो प्रभाष जोशी के लेखन को खारिज करने की मुहिम चलानी चाहिए। 

मैंने जोशी के निधन के बाद लगभग 50 लेख उनकी प्रशंसा में पढे। सब में एक ही बात कि जनसत्‍ता को यहां पहुंचा दिया वहां पहुंचा दिया। अरे भाई, कहां पहुंचा दिया, यहां रांची में तो मुश्किल से मिलता है और सुनता हूं महज कुछ हजार कॉपियां इसकी छपती हैं। हम जैसे लोगों को यह अखबार पसंद है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह महान अखबार है। हम इसे लेखों के लिए पढते हैं, खबरों के लिए नहीं। 

जोशी के कार्यकाल में ही इस अखबार ने सती प्रथा का समर्थन किया और पिछले दिनों  एक लेखक ने सबूत के साथ बताया था कि बाबरी मस्जिद विध्‍वंस के समय इस अखबार ने कैसी भूमिका निभायी थी।  इसके बावजूद इन लेखकों की निर्लज्‍जता पर गौर कीजिए कि वे उन्‍हें माफी मांगने कह रहे हैं जिन्‍होंने जोशी जी की कमियों की ओर इशारा किया था।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>देख रहे हैं प्रेम रंजन जी, कैसे खुल रही है स्‍वर्गीय प्रभाष जोशी की पोल। जोशी जी के ये अनुयायी दरअसल बता रहे हैं कि प्रभाष जोशी वास्‍तव में क्‍या थे। इधर एक जगह ऐसे ही एक अनुयायी का लेख मैंने पढा, जिसमें उन्‍होंने बताया था कि जोशी जी भले ही बाबरी मस्जिद के विध्‍वंस के खिलाफ रहे हों लेकिन वे राममंदिर के समर्थक थे। </p>
<p>मेरे विचार से स्‍त्री विमर्श करने वाली लेखिकाओं को भी इस पर गौर करना चाहिए। और हो सके तो प्रभाष जोशी के लेखन को खारिज करने की मुहिम चलानी चाहिए। </p>
<p>मैंने जोशी के निधन के बाद लगभग 50 लेख उनकी प्रशंसा में पढे। सब में एक ही बात कि जनसत्‍ता को यहां पहुंचा दिया वहां पहुंचा दिया। अरे भाई, कहां पहुंचा दिया, यहां रांची में तो मुश्किल से मिलता है और सुनता हूं महज कुछ हजार कॉपियां इसकी छपती हैं। हम जैसे लोगों को यह अखबार पसंद है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह महान अखबार है। हम इसे लेखों के लिए पढते हैं, खबरों के लिए नहीं। </p>
<p>जोशी के कार्यकाल में ही इस अखबार ने सती प्रथा का समर्थन किया और पिछले दिनों  एक लेखक ने सबूत के साथ बताया था कि बाबरी मस्जिद विध्‍वंस के समय इस अखबार ने कैसी भूमिका निभायी थी।  इसके बावजूद इन लेखकों की निर्लज्‍जता पर गौर कीजिए कि वे उन्‍हें माफी मांगने कह रहे हैं जिन्‍होंने जोशी जी की कमियों की ओर इशारा किया था।</p>
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