एनएसडी से मांगा शशि भूषण की मौत का हिसाब
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रथम वर्ष के छात्र शशि भूषण, जिनकी मौत पिछले 4 नवंबर को नोएडा के एनएमसी अस्पताल में डेंगू के कारण हुई, की याद में उनके दोस्तों ने बुधवार शाम चार बजे ललित कला अकादमी के कौस्तुभ सभागार में एक शोकसभा का आयोजन किया। इस शोकसभा में शशि भूषण से जुड़े संस्कृतिकर्मियों और पत्रकारों ने बड़ी हिस्सेदारी की। शशि भूषण का रंगकर्म उनके बचपन से ही शुरू हो गया था। उम्र के तीसवें दशक में दस्तक दे रहे शशि का रंगमंचीय कॅरिअर 22 सालों का रहा। उन्होंने निर्देशक, अभिनेता और थिएटर म्यूजिक के क्षेत्र में जमकर काम किया और देशभर में इसके लिए जाने जाते रहे। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय आने के पहले उन्होंने बंगाल में उषा गांगुली के साथ एक वर्ष तक काम किया और गोवा नाट्य एकेडमी से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। वामपंथी सांस्कृतिक संगठन हिरावल से अपने रंगमंच की शुरुआत करने वाले शशि आजीवन जन संस्कृति की सच्ची मशाल थामे रहे।
शोक सभा में उनके बचपन से उन्हें जानने वाले संस्कृतिकर्मी और हिंदी समालोचक सुधीर सुमन ने बात करते हुए कहा कि शशि जैसे लोग जो बिना किसी पारिवारिक बैकग्रांउड से आते हैं, और अपनी पहचान बनाने को लालायित होते हैं, अकसर व्यवस्था की छलनाओं के शिकार हो जाते हैं। जरूरत इस बात की है कि हम यह जिम्मेदारी तय करें कि आखिर उसकी मौत का जिम्मेदार कौन है? डेंगू जैसी एक मामूली बीमारी के कारण उसकी मौत हो जाती है, तो इसमें अस्पताल की भूमिका बनती है। अस्पताल से इलाज में लापरवाही हुई है जो मेडिकल रिपोर्ट में भी साफ दिखती है। इसलिए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय को चाहिए कि वह अस्पताल के सामने इस मुद्दे को उठाये और अगर वह नहीं उठाता है तो हम जो शशि के दोस्त हैं, इस मुद्दे को उठाएंगे। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्राध्यापक सुरेश शेट्टी ने उनकी मौत को सबके लिए सदमा बताते हुए कहा कि इस मामले में अस्पताल की लापरवाही सापफ नजर आती है और रानावि ने इसकी जांच के लिए एक कमिटि गठित की है, जिसमें रानावि के छात्र, कर्मचारी, प्राध्यापक और डॉक्टर शामिल हैं।
शशि के साथ पिछले पंद्रह वर्षों से जुड़ कर काम करने वाले रानावि स्नातक विजय कुमार ने कहा कि जरूरत पड़ी तो वह रानावि की डिग्री ठुकराने से भी नहीं हिचकेंगे, अगर स्कूल ने मामले को सही तरीके से नहीं उठाया। उन्होंने नोएडा मेडिकेयर सेंटर ‘एनएमसी‘ हॉस्पीटल के बारे में कहा कि जो अस्पताल किडनी रैकेट और दूसरे कई संगीन आरोपों में फंसा है, उनसे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का संपर्क क्यों है, यह समझ से परे है। उन्होंने कहा की सारी बातें साफ होनी चाहिए, नहीं तो कल रानावि के किसी और छात्र की भी जान जा सकती है। शोकसभा में शशि से जुड़े कई लोगों ने शशि और उसके परिवार वालों को न्याय दिलाने की बात रखी। शोकसभा का संचालन मृत्युंजय प्रभाकर ने किया।









ye bahut achha hua ki delhi me hui shok sabha se ye mang uthi.lagaatar dabav banai rakhne ki aasyakta hai. abhi adhik aawayak hai ki delhi ke sathi thos karykram banakar kam karen.bagair nsd ko ghere kuch bhi hasil nahin hoga.
भाई, दु:ख तो इतना है कि कभी कभी लगता है कलेजा बाहर आ जाए । हमने क्यों चुना इतना निर्मम समाज ( रंगकर्मियों के इस कर्ता धर्ताओ का ) । कहने के लिए तो हम हमेशा इमोशन से खेलते हैं । पर, लगता है कि इस खेल में हमारे बड़ों ने अपना इमोशन पैसे के हाथों कर दिया है । दोस्त, विजय भाई अभी अकेले हैं, हमें उनका साथ देना चाहिए । जिस तरह आज हमारे ऊपर कोई भी हाथ नहीं है और हम सिर्फ आक्रोशित होकर रह जाते हैं । हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को भी जबाव देना है । भाई, विजय भाई जो करें साथ दो और कमसे कम अपने पीढ़ियों को भी आग्रह करो ।
NSD ko Phir kisi Sashi ke Maut nahi hone dene ke liye Apne karyapranile me sudhar karna hoga.Kendra aur Rajya Sarkaar ko har Kalaraar ka Sammaan karte huye Rangkarm se Zure har kalakaar ke liye Rozgaar ke Samuchit Wawastha karne Chahiye.
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