सावधान, इंटरनेट पर सीआईए आपकी जासूसी कर रहा है!
♦ जगदीश्वर चतुर्वेदी
कल तक इंटरनेट पर आनंद और स्वाधीनता के दिन थे। अब ख़तरा सामने आ गया है। अमेरिकी गुप्तचर संस्था सीआईए ने अपने पैर इंटरनेट पर रख दिये हैं। सीआईए की नज़रदारी का काफी गंभीर अर्थ है। अब सीआईए के ई जासूस आपके ब्लॉग पढ़ना चाहते हैं। ट्विटर और फेसबुक में आप क्या कर रहे हैं, उसे देखना चाहते हैं। यहां तक कि वे यह भी जानना चाहते हैं कि इंटरनेट से आप कौन सी किताब अमाजॉन से ख़रीद रहे हैं, कौन सी किताब आप इंटरनेट पर पढ़ रहे हैं – इस सबका हिसाब सीआईए तैयार कर रहा है। अमेरिका की एक निवेश कंपनी इन क्यू टेल ने अपनी पूंजी का बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र में निवेश करने का फ़ैसला लिया है। यह फर्म सीआईए की सहयोगी कंपनी है। इस कंपनी ने दृश्य तकनीकी संसार में पैसा लगाने का फ़ैसला किया है। यह काम वह अनेक सॉफ्टवेयर कंपनियों में पैसा निवेश करके करना चाहती है। इसके बहाने वह पूरे इंटरनेट पर नज़रदारी करेगी।
अमेरिका में गुप्तचर सेवाओं में एक बड़ा आंदोलन चल रहा है जिसके तहत नेट की सूचनाओं को जानने, एकत्रित करने और फिर उसे सीआईए, एफबीआई आदि के काम में लगाने के लिए हज़ारों लोग लगे हैं। अब आपकी इंटरनेट पर लिखी प्रत्येक चीज़ उनके निशाने पर है। इस समय इंटरनेट पर मीडिया के विभिन्न माध्यमों के जरिये सूचनाओं, कार्यक्रमों आदि के संचार की बाढ़ आयी हुई है। एक अनुमान के अनुसार वेब 2.0 साइट पर जाने वाले लोगों की तादाद प्रतिदिन पांच लाख है। इसी तरह तकरीबन एक मिलियन से ज़्यादा लोग प्रतिदिन ब्लॉग, बातचीत, ई व्यापार, फ्लिकर, यू ट्यूब आदि का इस्तेमाल कर रहे हैं। सीआईए के गुप्तचर अपने ई जासूसों के जरिये यह भी वर्गीकरण कर रहे हैं कि कौन कितना प्रभावशाली संप्रेषण कर रहा है। प्रभावशाली, कम प्रभावशाली और सामान्य संप्रेषण के नाम से तीन वर्ग बनाये गये हैं। वे यह भी देख रहे हैं कि यूज़र किस तरह की प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रहा है। यूज़र कौन सी पोस्ट को फार्वर्ड कर रहा है। नेट लेखक के साथ यूज़र किस तरह का संवाद कर रहा है। जिन मसलों पर सोशल नेटवर्क या ब्लाक पर चर्चाएं हो रही हैं, उनका विश्व राजनीति पर क्या असर होगा? अगर असर गंभीर होने की संभावनाएं हैं, तो सीआईए जासूस चेतावनी देंगे। ये बातें इन-क्यू टेल के प्रवक्ता डोनाल्ड तिघे ने कही हैं।
इस काम के लिए खास किस्म का सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया गया है, जिसके जरिये आपकी सूचनाएं एकत्रित की जा रही हैं। यह सॉफ्टवेयर बताता है कि किसकी पोस्ट पॉजिटिव है, किसकी नेगेटिव है। विभिन्न संचार उपकरण बनाने वाली कंपनियां और संचार बहुराष्ट्रीय कंपनियां इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही हैं।
इन-क्यू-टेल कंपनी अपनी इस योजना के आधार पर एक पायलट सर्वे करने जा रही है और यह पायलट सर्वे यदि सफल रहता है, तो इसके बड़े ही दूरगामी परिणाम होंगे। यह सीधे व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के साथ मानवाधिकारों का हनन है। आई-क्यू-टेल कंपनी ने इस काम में अभी 90 लोगों को लगाया है और फिलहाल 20 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। यह निवेश बढ़ भी सकता है। इस मामले में विदेशी भाषाओं पर भी नज़रदारी रहेगी। अभी 9 विदेशी भाषाएं इस प्रयोग के लिए चुनी गयी हैं। यह सारा काम विजिविल टेक्नोलॉजी कंपनी के जरिये कराया जा रहा है। उसने ही इसका सॉफ्टवेयर बनाया है। यह कंपनी 2008 से इस क्षेत्र में प्रवेश पाने की कोशिश कर रही थी और अंत में उसे सफलता मिल ही गयी। यह कंपनी अमरीकी गुप्तचर संस्था की सहयोगी कंपनी के रूप में काम कर रही है और इसने विभिन्न भाषाओं के विशेषज्ञ और सैन्य विशेषज्ञ इंजीनियर जुगाड़ किये हैं। इनका काम है विभिन्न भाषाओं की नेट संचार सामग्री की जांच-पड़ताल करना। इस समय अरबी, फ्रेंच, उर्दू, फारसी और रूसी पर नज़रदारी चल रही है। इस कंपनी ने अपनी सूचना व्यवस्था सुरक्षा इंजीनियरों की एक विशालकाय फौज तैयार की है। इसमें सूचना तकनीक के कुशल लोगों को शामिल किया गया है। इसमें वे लोग भी शामिल किये गये हैं, जो पॉलिग्राफ सुरक्षा में कुशल माने जाते हैं।
सीआईए परेशान है सोशल नेटवर्किंग साइट की बढ़ती जनप्रियता से। वे लगातार छान-फटक रहे हैं कि कौन सी साइट जनप्रिय है और उस पर तुरंत अपने ई जासूस लगा देते हैं। ये ई जासूस लगातार बेचैन आत्मा की तरह एक साइट से दूसरे साइट की ओर भागते रहते हैं। अमेरिका के जासूस परेशान हैं कि नेट के 70 प्रतिशत यूज़र गैर अमेरिकी हैं। ये अमेरिका के बाहर रहते हैं। इनका जाल दुनिया के 180 देशों में फैला हुआ है। तकरीबन 200 गैर अंग्रेजी भाषी ब्लागर-ट्विटर समूह हैं। ये लोग रीयल टाइम में तूफान मचाये हुए हैं। इन्हें सीआईए नज़रअंदाज नहीं करना चाहता। उनका मानना है कि यह रीयल टाइम सूचना सूनामी है। हम उन्हें अबोध कह कर नज़रअंदाज नहीं कर सकते।
(जगदीश्वर चतुर्वेदी। मथुरा में जन्म। कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर। मीडिया और साहित्यालोचना का विशेष अध्ययन। तकरीबन 30 किताबें प्रकाशित। जेएनयू से हिंदी में एमए एमफिल, पीएचडी। संपूर्णानंद संविवि से सिद्धांत ज्योतिषाचार्य। फोन नं 09331762360 (मोबाइल) 033-23551602 (घर)। ई मेल jagadishwar_chaturvedi@yahoo.co.in पता : ए 8, पी 1/7, सीआईटी स्कीम, 7 एम, कोलकाता 700054)











पहले भी कई लोग हमारी जासूसी किया करते थे। अंततः वे यही पता लगा पाते थे कि कल हमारे यहां लौकी बनी थी और आज घिया बन रहा है। इधर वे हमारी जासूसी करते थे, और पीछे से करने वाले उनके यहां अपना काम कर जाया करते थे।
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