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Google की जासूसी का प्रति‍वाद करो, ईमेल करो…

16 November 2009 One Comment

♦ जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

pamela in google TshirtGoogle ने प्राइवेसी के बारे में तयशुदा सभी नि‍यमों को धता बताते हुए नेट यूज़रों की जासूसी शुरू कर दी है। यह ख़बर इंटरनेट संबंधी जनतांत्रि‍क अधि‍कारों की संरक्षक एक अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍था ने जारी की है। इस संस्‍था का नाम है इलैक्‍ट्रोनि‍क फ्रंटि‍यर फाउंडेशन। आश्‍चर्य की बात यह है यह अपील जुलाई 2009 में अपडेट करके जारी की गयी थी, इसके बावजूद भारत में इसके बारे में कोई सुगबुगाहट नहीं देखी गयी। बाद में सितंबर 2009 में उन्‍होंने फि‍र से जारी कि‍या है कि‍ लोग Google द्वारा कि‍ये जा रहे प्राइवेसी अधि‍कारों के हनन बारे में सचेत हों। सारी दुनि‍या के नेट लेखकों को भी यह अपील भेजी गयी है।

इस अपील में इस तथ्‍य की ओर ध्‍यान खींचा गया है कि‍ अब Google वाले अपने सर्च इंजन में आने वाले हर आदमी का हि‍साब रखने वाले हैं। आपकी निजी सूचनाओं का इस्‍तेमाल कभी भी आपके ख़‍िलाफ़ कि‍या जा सकता है। Google की नयी प्रणाली के अनुसार अब बुक सर्च करने वालों का हि‍साब रखा जाएगा। आप नेट पर कौन-सी कि‍ताब पढते हैं, कहां से पढ़ते हैं, कि‍तने पेज़ पढ़ते हैं, प्रत्‍येक‍ पेज़ पर कि‍तना समय देते हैं – साथ ही मार्जि‍न में क्‍या लि‍खते हैं, यह सब Google के रि‍कॉर्ड में रहेगा। इसके जरिये यूज़र की रीडिंग आदतों का हि‍साब रखा जाएगा। साथ ही उसकी प्राइवेसी पर भी नज़रदारी रहेगी। प्रत्‍येक यूज़र का व्‍यापक हि‍साब-कि‍ताब डि‍जि‍टल डोजि‍यर में रहेगा।

आपकी रुचि‍ क्‍या है, सरोकार क्‍या हैं, कि‍स तरह की सूचनाएं आप पसंद करते हैं – इस सब पर Google की नज़र रहेगी। अभी तक यह क़ानून है कि‍ यूज़र कहां जाता है, क्‍या पढ़ता है, यह उसका नि‍जी कार्यव्‍यापार है, लेकि‍न अब Google के द्वारा प्राइवेसी में सेंध लगाने के साथ प्राइवेसी की धारणा पूरी तरह ध्‍वस्‍त होने जा रही है। वि‍भि‍न्‍न देशों की सरकारें यह दबाव डालती रही हैं कि‍ यह बताया जाए कि‍ लोग क्‍या पढ़ रहे हैं। Google की डि‍जि‍टल लाइब्रेरी में पैसे देकर कि‍ताब पढ़ने से अच्‍छा है मुहल्‍ले की लाइब्रेरी में जाओ – कि‍ताबें पढ़ो, वि‍श्‍ववि‍द्यालय की लाइब्रेरी में जाओ, कि‍ताबें पढ़ो।

आप क्‍या पढ़ते हैं और क्‍यों पढते हैं, यह कि‍सी को न बताएं। हम भारत के अनुभव से कह रहे हैं कि‍ माओवादी साहि‍त्‍य मि‍लने के कारण कि‍सी भी व्‍यक्‍ति‍ को सरकार पकड़ सकती है। पश्‍चि‍म बंगाल में अनेक लोगों के ऊपर जो आरोप लगाये गये हैं, उनमें एक आरोप यह भी है कि‍ तलाशी में माओवादी साहि‍त्‍य मि‍ला। ऐसी स्‍थि‍ति‍ में माओवादी साहि‍त्‍य को यदि‍ कोई पाठक नेट पर पढ़ता है और Google आपकी इस गतिविधि को रिकॉर्ड करके सरकार को सौंप दे, तो आपकी खैर नहीं। यही स्‍थि‍ति पोर्न वेब पर जाने वालों की भी हो सकती है।

Google से कल भारत सरकार यह मांग कर ही सकती है कि‍ माओवादी साहि‍त्‍य की चर्चा करने वालों, माओवादी संगठनों के ईमेल आदि‍ का हि‍साब-कि‍ताब दो, Google वाले भारत सरकार को यह हि‍साब-कि‍ताब देने के लि‍ए बाध्‍य हैं। वे चीन सरकार को उन तमाम बाग़ी लोगों के ईमेल पते, ठि‍काने दे चुके हैं और उनमें से अनेक जेलों में बंद हैं, सज़ाएं काट रहे हैं।

अमेरि‍का में मुसलमानों के ईमेल पेट्रि‍एट एक्‍ट के तहत जांचे गये हैं। मुसलमानों पर खास नि‍गरानी रखी जा रही है। यही हाल ब्रि‍टेन का भी है। एक भारतीय मूल के युवक को कुछ अर्सा पहले 25 साल की सज़ा इसलि‍ए दे दी गयी क्‍योंकि‍ वह बार-बार बम बनाने वाली वेबसाइट पर जाता था, बम बनाने वाली कि‍ताबें नेट से पढ़ता था, लंदन की लाइब्रेरी से बम बनाने वाली कि‍ताबें लाता था। यानी बम बनाने वाली कि‍ताबें पढ़ना अपराध करार दे दि‍या गया और उस युवक को अदालत ने 25 साल की सज़ा सुना दी। ‍जबकि‍ उस युवक ने कभी कोई हिंसा नहीं की, उसके पास कोई हथि‍यार या वि‍स्‍फोटक नहीं मि‍ला, उसने कोई बम का धमाका भी नहीं कि‍या था। उसने कि‍सी को धमकी भी नहीं दी थी। सि‍र्फ ईमेल और रीडिंग की आदतों के आधार पर ब्रि‍टेन की अदालत ने उसे आतंकी करार दे दि‍या जबकि‍ उसका कि‍सी भी संगठन से कोई भी संबंध तय नहीं हो पाया, कि‍सी भी संगठन का वह सदस्‍य भी नहीं था। महज रीडिंग आदत के आधार पर उसे जेल जाना पड़ा।

अब Google वाले सारी दुनि‍या में यूज़रों का हि‍साब रखने जा रहे हैं। यह एक ख़तरनाक कदम है। इससे व्‍यक्‍ति‍ की प्राइवेसी में दखलंदाज़ी बढ़ेगी। साथ ही संवि‍धान प्रदत्त मानवाधि‍कारों का भी इससे उल्‍लंघन होगा। हमें Google के इस तरह के प्रयास का जमकर वि‍रोध करना चाहि‍ए।

हमें Google से मांग करनी चाहि‍ए कि

1. वह यूज़र के डाटा कि‍सी थर्ड पार्टी को न दे। सरकार को न दे। आप जब भी Google में कोई चीज़ खोजने जाएं, तो उपनाम से खोज करें। सही नाम न बताएं।

2. आपके जो डाटा Google ने संकलि‍त कि‍ये हैं, वे तब तक कि‍सी अन्‍य को न दि‍ये जाएं जब तक संबंधि‍त व्‍यक्‍ति‍ की अनुमति‍ नहीं मि‍ल जाती। आपके बारे में Google ने जो भी सूचना एकत्रि‍त की है उसे संपादि‍त करने, ख़त्‍म करने का संबंधि‍त व्‍यक्‍ति‍ को अधि‍कार होना चाहि‍ए।

3. आपने कौन-सी कि‍ताब ली, कि‍सके खाते से ली और कि‍सके खाते में ट्रांसफर की, इसके बारे में कोई जानकारी कि‍सी भी कीमत पर अन्‍य पार्टी को नहीं दी जाए।

4. बुक सर्च में जाने वाले यूज़रों की सूचनाओं को सरकार, वि‍ज्ञापन एजेंसि‍यों और क्रेडि‍‍ट कार्ड प्रोसेसर्स कंपनि‍यों को नहीं बताया जाए।

हमें Google के सीईओ Eric Schmidt को तुरंत ईमेल भेजकर अपनी सुरक्षा के लि‍ए उपरोक्‍त मांगें उठानी चाहि‍ए। उन पर दबाव पैदा करना चाहि‍ए। वि‍भि‍न्‍न वेबसाइट के मालि‍कों को भी इस मामले में आवाज़ बुलंद करनी चाहि‍ए। Google का बुक सर्च करने वालों के बारे में सूचनाएं एकत्रि‍त करना नागरि‍कों की नि‍जता या प्राइवेसी के अधिकारों का हनन है। हम सब मि‍लकर इसके ख़‍िलाफ़ बोलें, ईमेल करें।

jag(जगदीश्‍वर चतुर्वेदी। मथुरा में जन्‍म। कलकत्ता वि‍श्‍ववि‍द्यालय के हिंदी वि‍भाग में प्रोफेसर। मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन। तकरीबन 30 कि‍ताबें प्रकाशि‍त। जेएनयू से हिंदी में एमए एमफि‍ल, पीएचडी। संपूर्णानंद संवि‍वि‍ से सि‍द्धांत ज्‍योति‍षाचार्य। फोन नं 09331762360 (मोबाइल) 033-23551602 (घर)। ई मेल jagadishwar_chaturvedi@yahoo.co.in पता : ए 8, पी 1/7, सीआईटी स्‍कीम, 7 एम, कोलकाता 700054)

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One Comment »

  • प्रमोद कुमार तिवारी said:

    उपयोगी जानकारी के लिए धन्‍यवाद। हमारे यहां साइबर दुनिया के लाभों की ही ज्‍यादा चर्चा होती है उसके साइड इफेक्‍टस के बारे में भी जानना बहुत जरूरी है।

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