डीयू में यश मालवीय से होगा आमना-सामना
♦ राकेश कुमार सिंह
सफ़र की अनियमित शृंखला आमने-सामने में इस दफ़ा गीतकार यश मालवीय अपने कुछ गीत सुनाएंगे और फिर कवयित्री अनामिका के सान्निध्य में श्रोता उनसे सीधी बातचीत करेंगे। सफ़र द्वारा पिछले साल आरंभ किया गया यह कार्यक्रम नायाब है। इसलिए कि इसके तहत कोई भी रचनाकार न केवल समय निकाल कर फुर्सत से अपनी पसंदीदा रचनाएं सुनाते हैं और लोगों को उनसे उनकी रचनाओं के साथ-साथ उनके रचना कर्म और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर भी बातचीत करने का मौक़ा होता है। कोशिश यह है कि इसके जरिये लोग न केवल रचनाओं की मार्फ़त उन्हें जानें बल्कि उनके व्यक्तित्व और व्यवहार को भी जानें। सफ़र की इस शृंखला की शुरुआत समकालीन पसंदीदा रचनाकार और हंस के संपादक राजेंद्र यादव द्वारा लघुकथाओं और उनकी कुछ चुनी हुई कविताओं के पाठ के साथ हुई थी और साथ में थीं अर्चना वर्मा। वज़ीराबाद की संकरी गलियों से गुज़र कर राजेंद्रजी, अर्चना जी और उनको जानने-सुनने के इच्छुक चालीस-पैंतालीस लोग सफ़र के दफ्तर में इकट्ठा हुए थे। उसी सफलता से प्रेरित हो कर सफ़र ने इस बार अपने ज़माने के पसंदीदा नवगीत लेखक और लोकप्रिय कवि यश मालवीय को आमंत्रित किया है। यश मालवीय ने उदय प्रकाश के उपन्यास पर आधारित फिल्म मोहनदास के लिए गीत लिखे भी हैं। इलाहाबाद में लगने वाला माघ मेला का पंडाल हो, या दिल्ली में अंबेडकर जयंती पर सामुदायिक पार्क में खुले आसमान के नीचे होने वाले कार्यक्रम, उनके गीत लोगों को थम कर सुनने को मजबूर करते रहे हैं। उम्मीद है दिल्ली में रहने वाले साहित्यप्रेमी और सृजनशील लोग इस मौक़े का लाभ ज़रूर उठाएंगे।













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