Home » मोहल्ला पटना, समाचार

नीतीश ने सूचना नियम बदले, अख़बारों ने ख़बर गोल की

19 November 2009 22 Comments

विदूषकों में नाम न लिखाएं नीतीश जी!

♦ विष्णु राजगढ़िया

Press Releaseसूचना मांगने वालों को प्रताड़ित करने की सबसे ज़्यादा शिक़ायतें बिहार से ही आती रही हैं। अब बिहार सरकार ने आरटीआई फीस नियमावली में संशोधन करके सूचना क़ानून की हत्या कर डाली है। हाल ही में झारखंड सरकार की ऐसी ही एक हास्यास्पद कोशिश को सूचनाधिकार कार्यकर्ताओं ने धूल चटा दी है। बिहार में भी यह कोशिश ज़्यादा दिन नहीं टिकेगी।

ध्यान रहे कि वर्ष 2005 में संसद द्वारा सूचना क़ानून पारित किये जाने से पहले ही नौ राज्य सरकारों ने सूचना क़ानून लागू कर दिये थे। तमिलनाडु एवं गोवा में 1997, राजस्थान एवं कर्नाटक में 2000, दिल्ली में 2001 में यह क़ानून बना। असम, मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र ने 2002 तथा जम्मू-कश्मीर ने 2004 में सूचना क़ानून बनाया। इनमें से एक भी राज्य एनडीए के किसी घटक या भाजपा-जदयू शासित नहीं था। इन नौ राज्यों में और फिर केंद्रीय स्तर पर भी सूचना क़ानून लाने का श्रेय कांग्रेस और यूपीए से जुड़े दलों को जाता है। अब कांग्रेस को सूचना क़ानून बनाने का अफ़सोस है क्योंकि इस क़ानून से पहली बार लोकतंत्र के बेचारे नागरिक को एक हैसियत मिल गयी है। वह शासन-प्रशासन की असलियत उजागर करने लगा है। इसीलिए केंद्र सरकार ने सूचना क़ानून में संशोधन करके इसे कमज़ोर करने की कोशिशें शुरू कर दी है।

दूसरी ओर, बिहार सरकार ने एक कदम आगे बढ़ कर फीस नियमों में अवैधानिक संशोधन किये हैं। इससे पता चलता है कि नागरिकों को सूचना के अधिकार से वंचित करने में आज यूपीए और एनडीए, दोनों में सहमति बन चुकी है।

17 नवंबर 2009 को पटना में बिहार सरकार के मंत्रिपरिषद की बैठक हुई। बैठक में सूचना का अधिकार संबंधी फीस नियमावली के संशोधन को स्वीकृति दी गयी। इसके अनुसार अब आवेदक को एक आवेदन पर एक ही सूचना उपलब्ध करायी जा सकेगी। आवेदक को सूचना पाने के लिए अपना टिकट लगा एवं पता लिखा लिफाफा भी देना होगा। इसके अलावा बीपीएल सूची में शामिल लोगों को अब दस पेज तक की ही सूचना नि:शुल्क दी जाएगी।

यह संशोधन पूर्णतया अवैध है। यह सूचना मांगने वाले नागरिकों को परेशान करने की बुरी नीयत से किया गया है। यह सूचना क़ानून के प्रावधानों और भावना के ख़‍िलाफ़ है। बिहार और देश की जनता इसे कदापि स्वीकार नहीं करेगी। सुशासन और विकास पुरुष की श्रेणी में नाम लिखाने की कोशिश में जुटे नीतीश कुमार को पारदर्शिता विरोधी इस संशोधन के कारण विदूषकों की सूची में अपना उल्लेख देखने की नौबत आ सकती है।

सूचना क़ानून के तहत फीस एवं अपील संबंधी नियमावली बनाने का अधिकार राज्य सरकारों को दिया गया है। लेकिन यह मूल क़ानून के अनुरूप ही होनी चाहिए, न कि इससे प्रतिकूल। कोई भी नियम उसके मूल क़ानून से ऊपर या उसके प्रतिगामी नहीं हो सकता। फिर, जब क़ानून और नियम में विरोधाभास हो, तो क़ानून को ही सर्वोपरि माना जाएगा।

सूचना क़ानून की धारा 7(5) कहती है – ऐसे व्यक्तियों से, जो गरीबी की रेखा के नीचे हैं, कोई फीस प्रभारित नहीं की जाएगी।

मतलब साफ है। क़ानून के अनुसार बीपीएल श्रेणी के नागरिकों से सूचना के एवज़ में कोई फीस नहीं ली जाएगी। वह सूचना अधिकतम कितने पृष्ठों तक होगी, क़ानून ने इसकी कोई सीमा तय नहीं की है। लिहाजा, बिहार सरकार द्वारा बीपीएल श्रेणी के लोगों को दस पेज तक की ही सूचना निःशुल्क देने संबंधी नियम बनाया जाना अवैध है। यह सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के प्रावधानों और भावनाओं के प्रतिकूल है। अदालत में इसे चुनौती देकर न्याय की अपेक्षा की जानी चाहिए।

इसी तरह, एक आवेदन में सिर्फ एक सूचना मांगने संबंधी नियम भी अवैध एवं हास्यास्पद है। सूचना क़ानून के अनुसार सूचना के लिए नागरिक एक लिखित आवेदन देगा। इसमें सूचना की परिभाषा काफी व्यापक एवं विस्तृत है। इसमें आवेदन को मात्र किसी एक सूचना या किसी एक बिंदु तक सीमित करने का कोई प्रावधान नहीं है। लिहाज़ा, कोई भी सरकार अपनी मरजी से सूचना की परिभाषा को संकुचित नहीं कर सकती। यह संशोधन बिहार को सुशासन नहीं बल्कि कुशासन की ओर ले जाएगा। नौकरशाह इस संशोधन की मनमानी व्याख्या करके नागरिकों को अपमानित और प्रताड़ित करेंगे।

सूचना के एवज़ में फीस लेने का प्रावधान है। लेकिन क़ानून में यह बात स्पष्ट कही गयी है कि यह फीस युक्तियुक्त या तर्कसंगत होनी चाहिए। अनुचित या अतार्किक फीस वसूलने की कोशिश अवैध मानी जाएगी।

क़ानून की धारा 27 में राज्य सरकार को नियम बनाने की शक्ति दी गयी है। इसमें फीस संबंधी नियम सिर्फ सूचना के लिए आवेदन करने और सूचना के प्रति पृष्ठों के संबंध में लेने की बात कही गयी है। सूचना नहीं मिलने या अधूरी मिलने पर अगर आवेदक को अपील करनी हो, तो इसके लिए कोई फीस नहीं ली जा सकती। प्रथम अपील के संबंध में राज्य सरकार को सिर्फ प्रक्रिया संबंधी नियम बनाने की शक्ति है। इसके लिए वह कोई फीस निर्धारित नहीं कर सकती।

लेकिन बिहार सरकार ने प्रथम अपील के लिए पचास रुपये की फीस निर्धारित करके सूचना क़ानून का मखौल उड़ाया है। जरा सोचिए, किसी नागरिक को अपील क्यों करनी पड़ रही है? जनसूचना अधिकारी ने उसे वांछित सूचना नहीं दी, इसलिए नागरिक को अपील करनी पड़ रही है। अगर उसे सूचना मिल गयी होती तो अपील नहीं करनी पड़ती। इस तरह, जनसूचना अधिकारी द्वारा क़ानून का पालन नहीं किये जाने के कारण नागरिक को प्रथम अपील करनी पड़ी। ऐसे में उस नागरिक को संरक्षण और सहयोग देने के बजाय उससे पचास रुपये वसूलना निश्चय ही उसे हताश करने की साजिश है।

डॉ जगन्नाथ और लालू प्रसाद जैसे प्रतापी नेता पशुपालन घोटाले की चक्की में पिस गये। मधु कोड़ा जैसे सौभाग्यशाली मुख्यमंत्री मिनटों में उठाईगीर साबित हो गये। सुशासन लाना हंसी-ठठ्ठा नहीं है नीतीश जी। देखते-ही-देखते दिन लद जाएंगे। सुशासन का ठेका अकेले मत लीजिए। नहीं सकिएगा। भ्रष्टाचार रोकना हो तो बिहार के नागरिकों की मदद लीजिए। सुशासन चाहिए तो आम नागरिक की हैसियत को मत ललकारिए। उसे भी शासन और प्रशासन से जानने और पूछने दीजिए। उसे अवैध नियमों के जाल में मत उलझाइए। उन राज्यों का अनुसरण कीजिए, जो सूचना क़ानून को सरल और जनमुखी बना रहे हैं। महाराष्ट्र से ही कुछ सीख लीजिए। पुणे नगरपालिका में हर सोमवार को कोई भी नागरिक जाकर कोई भी फाइल देख सकता है। उसकी फोटो कॉपी ले सकता है। महाराष्ट्र ज़्यादा दूर लगे तो आप पड़ोसी राज्य झारखंड के एक युवा आइएएस का उदाहरण देख लीजिए। रांची के उपायुक्त केके सोन अपने विभागों की तमाम सूचनाएं सहर्ष देने को तत्पर रहते हैं। उन्हें तो कोई डर नहीं है सूचना क़ानून से।

अगर आपको अकर्मण्यता और लूटखसोट के उजागर होने का भय नहीं, तो सूचना क़ानून से डरने की ज़रूरत नहीं। नागरिक तो अपने सवालों से आपके सुशासन के रथ को आगे बढ़ाने में ही मदद कर रहे होंगे। अगर आपके पास छुपाने को कुछ नहीं, तो सूचना क़ानून से भय कैसा? यह क़ानून तो पूरे देश में शासन और प्रशासन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में ऐतिहासिक और शानदार सफलताएं हासिल कर रहा है। फुरसत हो तो इन सफलताओं के किस्से पढ़-सुन लें। क़ानून की धारा चार के सभी प्रावधानों का सही अनुपालन हो तो आपकी समस्याएं यूं ही आधी हो जाएंगी। आप जिस सुशासन की बात करते हैं, वह सूचना क़ानून से ही आएगा। वह सुशासन हर नागरिक की सक्रियता से ही आ सकता है। अगर आपके राज्य में सूचना क़ानून की हत्या हुई, तो कुशासन लाकर सुशासन की बात करने वाले विदूषक कहलाने में देर नहीं लगेगी।

Vishnu Rajgadia image(विष्‍णु राजगढ़‍िया। वरिष्‍ठ पत्रकार। सूचना के अधिकार को लेकर पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय। लंबे समय तक प्रभात ख़बर, धनबाद संस्‍करण के स्‍थानीय संपादक रहे। पीके इंस्‍टीच्‍यूट ऑफ मास कम्‍युनिकेशन के डायरेक्‍टर भी रहे। इन दिनों नई दुनिया के झारखंड प्रमुख। उनसे vranchi@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

  • Share/Save/Bookmark

22 Comments »

  • A K JAIN said:

    Excellent reaction. I fully endorse. This must be condemn by each and every citizen of not only the Bihar State but the entire country. By this amendment Nitish Jee will be more dangerous than Raj Thakre.

    Thank you very much for your beautiful article/reaction. I am forwarding this mail to all my friends for its wide circulation and widespread reaction.

    A K Jain

  • Rupesh said:

    Dear friends

    Your excellent reaction in your article.

    This is our first reaction on 18th November by medea in every district of Bihar. Next step On 20th November we organize press conference and Start signature campaign. Second step, we organize protest dharna on 30th November and also organize protest march on 3 December. This is tentative date, we will finalise tomorrow.

    Nitish kumar government for making an amendment in the RTI rules making extracting information under RTI more cumbersome expensive and difficult.
    According to it, Rs 10 for one answer, for BPL only 10 pages free answer and definition of information, to keep people devoid of file noting, these news were published in the Newspaper which is a decision to make Democracy weak and cutoff fundamental rights. This can be told as a plot to weaken and playing with this law. Government is doing with our money and it is stopping us from scrutiny. RTI activists —Arshad Ajmal, Manoj Misra, Ranjan Kumar, Ramesh Kumar, Rupesh—- have termed this act of state government as undemocratic and against the letter and spirit of RTI. This step is ultra virus act. This can be also told that government is favoring beaurocrats and it is not keeping side of to general public. Ashok Kumar Chaudhary has been chosen as Chief Information Commissioner after one year and his first action is anti-people. Campaign objects this and wants that this decision should be withdrawn. Otherwise general mass will take a strong stance and the government of Nitish Kumar will come to an end.

    Rupesh, member convening body, Soochna ka adhikar abhiyan, Bihar
    Abdin house fraser road Patna 80001 phone 9431021035
    email: soochnakaadhikarabhiyan@yahoo.co.in Blog: rtibihar.blogspot.com

  • Balram said:

    This is a conspiracy to weaken the movement for transparency and accountability. In the era of the exposure of more and more corruption, the people of our country have the right to know each and every detail of the functioning of the government whereas such amendments are being made to harass the common citizen and to deny for information. I strongly condemn such activity and urge Mr. Nitish Kumar to stop such Anti-People Anti-Democratic move.
    -Balram, State Adviser to the Supreme Court Commissioner

  • Manish Sisodia said:

    This is against the sprit of the whole transparency concept. On one hand Govt of Bihar is posing a pro-RTI image, on other hand they are passing such orders. I oppose this move.

  • Parveen Amanullah said:

    Stop anti-poor, anti-democratic rules against letter and spirit of RTI Act
    Parveen Amanullah, Patna

  • विष्णु राजगढ़िया said:

    आनलाइन हस्ताक्षर करके विरोध जतायें
    बिहार सरकार ने सूचना कानून के खिलाफ गहरी साजिश की है। अगर सूचना पाने के नियमों में संशोधन हुआ तो नागरिकों को सूचना पाने के इस महत्वपूर्ण अधिकार से वंचित होना पड़ेगा।
    इसलिए आनलाइन पिटिशन पर हस्ताक्षर करके अपना विरोध अवश्य दर्ज करायें। यहां क्लिक करें-
    http://www.PetitionOnline.com/rtibihar/petition.html

  • Kunal Kumar said:

    Nitish ji ne Jharkhand Assembly election ka slogan diya hai- “Badala hai Bihar, Badalega Jharkhand”. Now I am worry if the BJP-JDU comes in power in Jharkhand, they will change the RTI rule in Jharkhand also as per his election slogan.

  • प्रेमरंजन said:

    कुणाल कुमार की टिप्पणी में कुछ तल्ख सच्चाई छिपी हुई है। कृपया गौर करें…

  • Rupesh said:

    Nitish kumar government for making an amendment in the RTI rules making extracting information under RTI more cumbersome expensive and difficult. which is a decision to make Democracy weak and cutoff fundamental rights.
    Soochna Ka Adhikar Abhiyan, Bihar, Patna

  • Raajesh Kasera said:

    The common man has been provided with this strong weapon named RTI. The common man now has started to feel that he is also entitled to some rights in India. Please dont try to snatch their happiness, else these common men may snatch your throne.

  • Anil Kumar Agrawal said:

    खटारा गाड़ी के नकारा ड्राइवर हैं नीतीश कुमार

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीस नवंबर 2009 को लघु जल संसाधन विभाग के एक सम्मेलन में अपने सुशासन असलियत बता दी। कहा- मुझे तो विरासत में खटारा गाड़ी मिली है। ऐसी गाड़ी को स्पीड में चलाने से दुर्घटना का खतरा है। इसी भाषण में सुशासन बाबू ने बिािर का विकास नहीं होने के लिए नौकरशाही की सुस्त गति को भी जिम्मेवार ठहराया।
    ऐसे बयानों के जरिये दरअसल नीतीश कुमार अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में अपने नकारा राज के लिए अभी से बहाने तलाश रहे हैं। वैसे भी पिछले चार वर्षों में वह खटारा गाड़ी के नकारा ड्राइवर ही साबित हुए हैं। चार वर्ष में उन्होंने खटारा गाड़ी की थोड़ी-बहुत भी मरम्मत करने का प्रयास किया होता तो आज उन्हें ऐसे बहाने नहीं ढूंढ़ने पड़ते। चार साल में नीतीश कुमार ने बिहार के विकास की कोशिशों की बजाय बिहार की बदहाली के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को गरियाने में ही अपना ध्यान केंद्रित किया।
    आज नीतीश कुमार बिहार की सुस्त नौकरशाही को भी अपने नकारेपन का बहाना बना रहे हैं। सच तो यह है कि खुद नीतीश कुमार बिहार में नौकरशाही प्रवृति एवं मनोवृति के सबसे बड़े पोषक हैं। सूचना का अधिकार की हत्या करके उन्होंने अपनी असलियत सामने ला दी है। अगर उन्हें नौकरशाही को गतिशील बनाने की जरा भी चिंता हो तो इसका सबसे जरूरी और सबसे आसान रास्ता है सूचना का अधिकार कानून का समुचित अनुपालन करना। अगर नीतीश कुमार ईंमानदारी के साथ सिर्फ यह घोषणा कर दें कि सूचना का कानून पूरी तरह लागू किया जायेगा और इसकी अवहेलना करने वाले अधिकारियों को कानून के अनुसार कठोर दंड दिया जायेगा, तो बिहार की नौकरशाही की सुस्ती खुद ही फट जायेगी। लेकिन यह हास्यास्पद है कि एक तरफ नीतीश कुमार नौकरशाही की सुस्ती का रोना रोते हैं और दूसरी ओर उन्होंने बिहार राज्स सूचना आयोग को नौकरशाहों का अड्डा बना दिया है।
    अब भी वक्त है। एक साल का समय बचा है नीतीश कुमार के पास। बेहतर होगा कि अगले साल चुनाव के समय अपनी असफलताओं के कारण गिनाने और बहाने बनाने के बजाय आज सूचना के कानून का सहारा लें। पूरे देश और पूरी दुनिया में पारदर्शिता को ही सुशासन का सबसे जरूरी औजार माना गया है। लिहाजा, पारदर्शिता के कानून सूचना के अधिकार की हत्या करके सुशासन लाने की बात करना मूर्खों के स्वर्ग में जीने के समान है।

  • RAJ SINH said:

    आपकी पोस्ट से मुझे बहुत दुःख हुआ .
    जो जानकारी मिली वह उद्धिंग कर रही है .
    मैं जनता दल युनायितेद के मुम्बई प्रदेश का प्रेसिडेंट हूँ ,और अपने २५ साल के अमेरिका प्रवास के बाद कुछ पुराने समाजवादियों के आग्रह पर ही यह जिम्मेदारी ली . खास कर बिहार में जेडीयू की सुशासन से प्रेरित हो .
    ये बातें अनमयस्क कर रही हैं . मैं खुल कर नहीं कह सकता क्योंकि पार्टी प्रतिबद्धता के नियमानुसार ये मुद्दे अंतरिम विमर्श का विषय हैं , पर इन मुद्दों को मैं पार्टी के प्लेटफार्म पर उठाऊंगा .सूचना कानून का मैं प्रबलतम हिमायती हूँ और चाहता हूँ की वह जनता का सशक्त हथियार बने .पहले भी कुछ भनक लगने पर लिखापधी की है पर अगर स्थिति ऐसी है तो अत्यंत सक्रियता जरूरी है .जो भी बन पड़ेगा करूंगा ,पार्टी की राष्ट्रिय कार्यकारिणी के माध्यम से .

    हाँ पार्टी की तरफ से इतना ही कह सकता हूँ की भ्रष्ट और नाकारेपन की मिसाल नौकर्साही,जो लम्बे अंतराल तक मुंह में खून लगाये बैठी है,और ‘ सुशासन ‘ का चाहे कितना भी इरादा हो , माध्यम वही है , तो दिक्कतों से पार्टी भी असहाय हो जाती है. पर इसे बहाना नहीं बनाया जा सकता .

    सजग पत्रकारिता को जरूरी समझता हूँ और ‘ सुशासन ” के लिए उसे अपरिहार्य मानता , समझता हूँ. अतः ऐसे आलेखों का स्वागत है और आभार भी . कुछ टिप्पणियों में अगर दुराग्रह देखा है तो उसे भी अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान ही मानूंगा.
    व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास करूँगा की ‘ सुशासन ‘ विदूसकता में न बदल जाये और इस शब्द की परिणिति ‘ गरीबी हटाओ ‘ और ‘ सम्पूर्ण क्रांति ‘ के प्रारब्ध को न प्राप्त हो जाये .
    फिर से आपका धन्यवाद . जनहित के मुद्दे उठाते रहें .

  • Vishnu Rajgadia said:

    Raj Singh ji
    Thanks for your comment. Your support is valuable for the RTI movement as you are associated with the same party. please let us know your email ID and cell number.
    09431120500, vranchi@gmail.com

  • Dhan Raj Bansal said:

    Nitish Ji,
    Ye kanoon mein badlaw aapki image ko jaroor dhakka pahunchayega.
    Aakhir kya sandesh dena chah rahein hain aap aam janta ko is se.

    Jo log Dr. Kiran Bedi ko CIC banane k favour mein hain, please sign the online petition at following link:

    http://www.petitiononline.com/CIC2009_/petition.html

  • Ashok Kumar said:

    This is the gift from Nitish Kumar on his four years completion celebration. Bihar ko SUSHASHAN ki taraf le jana hai

  • dharmendra kumar said:

    rajgardia sb.
    you are saluted for quick response on amendment in RTI by cabinet of Bihar. we are also doing protest regarding this on behalf of AID INDIA BIHAR CHAPTER & SUCHNA KA ADHIKAR JAN ABHIYAN. This amendment is like pills for death of RTI ACT. I am surpised about NITISH Ji mentality. it changed drastically. he forgot his base and taking one by one anti people steps. People and history willnot give him forgivness.
    infact in this govt. curruption is on peak and everything is happening on the name of SUSHASHAN. Daroga became bigradier and officers became jamindar. people are affraid bcz govt says BIHAR BADAL RAHA HAI. Bihar itna kharab tha ki badlao ANGREGO ki tarah ke shashan se aayega. CM bolte hai ki DM ko angrejo ke jamane jaisa kam karna chahiye. Agar yahi badlao nitish ji lana chate hai to democracy ka khoon ho jayega jaha janta bechari aur bechari ho rahi hai.
    itna krur mat baniye CM saheb. Bihar badalane ka matlab democracy ko hi mat badal dijiye.
    ITNA MAT UDIYE AAKASH ME, KYOKI AAKASH ME SIDIYAN NAHI HOTI.

    Dharmendra kumar

  • Amrendra Nath said:

    Nitish ji, aapane tau kamal hi kar diya. Aap Sushashan ki bat karte karte achnak officers ko bachane me kyo lag gaye?

  • Sanjeev Kumar said:

    Bihar ke bare mey hardam galatfahmi hi rahati hai. Ab ye galatfahmi bik rahi hai ki ki Bihar Sudhar raha hai. Sarkari Vigyapan ke bhukhe media ke log publicity kar rahe hai ki Bihar badal raha hai. Lekin sach kya hai ye RTI amale se clear hai. Ek kahawat hai- “BOYA PED BABOOK KA TAU AAM KAHA SE HOYE…? ” Jab Nitish ji Sushashan ke kanoon ki hatya kar denge tab bhala wo Good Governance kaha se layenge? Nitish ki dalali karne wale patrakaro aur budhijiviyo ko iska jawab dena chahiye. Thanks to Mohalla for raising this issue otherwise Bihar mey tau sab talwe hi chatane wale log sher bane ghoomte nazar aa rahe hai, gambhir logo ki koi pooch nahi

  • Manik Kumar said:

    Nitish ji, You have no right to deprive the people of Bihar for the right which has been given by the parliament of India. If you do so, it will not continue as the people of Bihar will oust you in the very next election and a new popular government will must change your rule

  • bablu kumar said:

    said
    हमारे लोक सूचना अधिकारी सूचना का अधिकार का आबेदन आने पर वो अपनी पर्तीस्ठा का विसय बना लेते हैं, अगर वो अपने कार्य को सिर्फ अपना फर्ज और सरकारी सेवा मान कर करे तो कोई परसनी नहीं होगी, परन्तु इन बातो पर बिचार विमर्स किये बिना ही हमारे राज्य का मुखिया माननीय नितीश कुमार जी ने सूचना का अधिकार कानून का जो संशोधन करने का जो निर्णय लिया हैं वो बहुत ही गलत हैं क्यों की सूचना के अधिकार कानून में संशोधन भ्रस्टाचार और घूसखोरी, को बढावा देने का बराबर हैं
    किर्पया कर किसी प्रकार का संशोधन करने का विचार na kare

  • bablu kumar said:

    हमारे लोक सूचना अधिकारी सूचना का अधिकार का आबेदन आने पर वो अपनी पर्तीस्ठा का विसय बना लेते हैं, अगर वो अपने कार्य को सिर्फ अपना फर्ज और सरकारी सेवा मान कर करे तो कोई परसनी नहीं होगी, परन्तु इन बातो पर बिचार विमर्स किये बिना ही हमारे राज्य का मुखिया माननीय नितीश कुमार जी ने सूचना का अधिकार कानून का जो संशोधन करने का जो निर्णय लिया हैं वो बहुत ही गलत हैं क्यों की सूचना के अधिकार कानून में संशोधन भ्रस्टाचार और घूसखोरी, को बढावा देने का बराबर हैं
    किर्पया कर किसी प्रकार का संशोधन करने का विचार न करे.

    http://savebiharecologically.blogspot.com

  • Sanjay Kumar said:

    It is very sad news as we had an impression that our state Bihar is going to improve. But BOYA PED BABOOL KA TAU AAM KAHA SE HOYE…? Nitish ji ne RTI ki hatya karke naukarshahi ka babool boya hai, ab sushan ke aam ki ummid karana bekar hoga

Leave your response!

Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)

Add your comment below, or trackback from your own site. You can also subscribe to these comments via RSS.

Be nice. Keep it clean. Stay on topic. No spam.

You can use these tags:
<a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>

This is a Gravatar-enabled weblog. To get your own globally-recognized-avatar, please register at Gravatar.

Spam Protection by WP-SpamFree