तिनके बटोर रहे हैं विवेक ओबेराय

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में समरथ को नहि दोस गुसाईं का मुहावरा का सटीक बैठता है। आप कमज़ोर हों और आप ने किसी ताक़तवर पर उंगली उठा दी हो तो आप के करियर का बंटाधार होना लाज़िमी है। फिल्मों के इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जब कमज़ोर को मुंह की खानी पड़ी है। ताज़ा मामला विवेक ओबेराय का है। विवेक ओबेराय ने रामगोपाल वर्मा की फिल्म कंपनी से शुरुआत की और रातोंरात इंडस्ट्री के चहेते बन गये। उन्हें धड़ाधड़ फिल्में मिलने लगीं। उनके मैनरिज्म को ध्यान में रख कर फिल्में लिखी जाने लगीं। एक समय वे ऐश्वर्या राय के साथ क्यों हो गया न? के हीरो थे। इस फिल्म ने उन्हें उत्कर्ष के साथ ही ज़मीन भी दिखायी। अर्श से फर्श पर आये।
अगर आप को याद हो तो उन दिनों सलमान खान और ऐश्वर्या राय का प्रेम उफान पर था। दोनों के प्रेम के किस्सों और हरकतों से इंडस्ट्री के लोग परेशान थे। सलमान के व्यवहार ने ऐश्वर्या को क्षुब्ध कर रखा था। उनकी फिल्में छूट रही थीं। उन्हें तानों का सामना करना पड़ रहा था। एक पुरस्कार समारोह में वे सूजी आंखों और चोट के निशान के साथ पहुंची थीं। सलमान खान को लगने लगा था कि वे ऐश्वर्या को खो देंगे, इसलिए वे बहुत आक्रामक हो गये थे। इसी मानसिकता में उनसे कुछ ऐसी हरकतें हो गयीं कि ऐश्वर्या ने उनसे बात करना बंद कर दिया। तब वह विवेक के साथ शूटिंग कर रही थीं। सलमान का आशिक मन जल-भुन गया। उन्होंने विवेक को समझाने, डांटने और चेताने के लिए फोन किया। विवेक ने भी फोन नहीं उठाया। बेसुध सलमान खान ने 40 बार फोन किया। अगले दिन विवेक ओबेराय ने अपने घर पर प्रेस कांफ्रेंस की और इसका खुलासा किया। भयंकर हंगामा हुआ। सलमान खान भावनात्मक रूप से आहत हुए।
विवेक ओबेराय को ग़लतफ़हमी हो गयी कि ऐश्वर्या राय उनसे प्रेम करने लगी हैं। हो सकता है इसमें लेश मात्र ही सच्चाई हो। लेकिन ऐश्वर्या राय ने विवेक ओबेराय की ओट ली। यह बात सलमान खान को नागवार गुज़री। उन्होंने या यों कहें कि उनके करीबियों ने लंबी चाल चली। उन्होंने विवेक ओबेराय को घेरना और काटना शुरू किया। धीरे-धीरे यह स्िथति आ गयी कि विवेक ओबेराय को कोई फिल्में तो दूर, अपने पास भी बिठाने से कतराने लगा। अचानक सभी के चहेते से अछूतों जैसा व्यवहार होने लगा। ऐश्वर्या राय ने एक झटके में उनकी ओट छोड़ दी। वे आज कहां हैं, हम सभी जानते हैं। विवेक ओबेराय इंडस्ट्री निकाला हो गये। उनका हुक्का-पानी बंद हो गया।
करियर और प्रेम, दोनों में आहत विवेक ओबेराय फिर से तिनके बटोर रहे हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि वे कामयाब रहेंगे, लेकिन उन्हें वक्त लगेगा। उन्हें सब्र से काम लेना होगा और बाक़ी चीज़ें छोड़ कर सिर्फ अपने काम पर ध्यान देना होगा। वे यही कर रहे हैं। ताज़ा फिल्म कुर्बान में वे सबसे ज़्यादा प्रभावित करते हैं।
♦ अब्राहम हिंदीवाला









ye pahli baar kahiN padha hai ki Vivek aur Aihwarya ke beech kuchh nahiN tha, sirf ‘OT’ thi. Baharhal, kisi “BADE’ par ungli uthane ke natije meN “hukka-pani” band hone ka “uphar” sirf film jagat meN nahiN milta, balki dabe-chhupe dhang se ye PANCHAYTI VYAVASTHA hamare pure samaaj meN laagu hai. Khair, VIVEK ko ek din unki sahi jagah milegi, aisa mujhe bhi vishvas hai.
good observation!
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