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सच सुनिए-देखिए प्रभात खबर पर आरोप लगानेवाले

22 November 2009 7 Comments
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प्रिय अविनाश जी,

प्रभात खबर की आचार संहिता पर सरयू राय भारी शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट पढ़ी। तथागत नाम से यह रिपोर्ट लिखी गयी है। इसमें सरयू राय से संबंधित दो ख़बरों की कटिंग भी है और उस पर चर्चा है। अब मेरी बात सुनिए। सरयू राय से संबंधित वह रिपोर्ट मैंने ही लिखी है। मैं पिछले 20 साल से प्रभात खबर में हूं। आपने लिखा है कि ख़बर देखने से पता चलता है कि रिपोर्टर रिश्वत लेकर लिख रहा है। यह आरोप मेरे ऊपर आपने लगाया है। गंभीर आरोप है। किसी तथागत ने आपको प्रभात खबर में छपी दो-चार रिपोर्ट की कटिंग भेज दी और आपने लिख दिया कि अख़बार सरयू राय का है। क्या आपने चुनाव के दौरान पूरे प्रभात खबर अख़बार को देखा है। अन्य प्रत्याशियों की ख़बरें कैसे, कितनी छप रही हैं, यह देखा है? मैं आपकी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देना नहीं चाहता था लेकिन चूंकि व्यक्तिगत टिप्पणी की है, मुझे करप्ट बताने का प्रयास किया है, इसलिए जवाब भी पढ़‍िए।

सरयू राय जमशेदपुर पश्चिमी से भाजपा के प्रत्याशी हैं। इसी क्षेत्र से कांग्रेस ने बन्ना गुप्ता को और झारखंड मुक्ति मोरचा ने मोहन कर्मकार को मैदान में उतारा है। यानी ये दोनों सरयू राय के खिलफ चुनाव लड़ रहे हैं। प्रभात खबर उसी प्रमुखता से बन्ना गुप्ता और मोहन कर्मकार की भी ख़बरें छाप रहा है, जिस प्रमुखता से सरयू राय की ख़बरें छपी हैं। तो क्या प्रभात खबर बन्ना गुप्ता या मोहन कर्मकार का हो गया? ये दोनों ही नहीं, निर्दलीय प्रत्याशियों को भी प्रभात खबर प्रमुखता से जगह दे रहा है। इसलिए प्रभात खबर की निष्‍पक्षता पर सवाल उठाना मानसिक दिवालियापन ही है। आपको हम हाल में प्रभात खबर में छपी रिपोर्ट से संबंधित कटिंग भी भेज रहे हैं। अगर आपमें जरा सी भी नैतिकता होगी, तो इसे पढ़ेंगे, विचार करेंगे। इसी प्रभात खबर में चुनाव के दौरान सरयू राय के खिलाफ कई रिपोर्ट छपी है। उदाहरण : सरयू ने धरातल पर कोई काम नहीं किया : बन्ना गुप्ता (18 नवंबर, पेज चार)। बस्तियों के विकास के लिए सरयू राय ने कुछ नहीं किया (15 नवंबर, पेज चार)। पांच वर्ष में सरयू राय की संपत्ति दोगुनी हुई (6 नवंबर, पेज चार)। सरयू, बन्ना समेत चार प्रत्याशियों को शो कॉज (17 नवंबर पेज दो)। बिष्टुपुर : झंडा लगाने पर सरयू-बन्ना पर केस (17 नवंबर पेज तीन)। ये तो चंद उदाहरण हैं (सभी की कटिंग भेज रहा हूं)।

अब देखिए सरयू राय के खिलाफ जो मुख्‍य प्रत्याशी बन्ना गुप्ता (कांग्रेस) और मोहन कर्मकार (जेएमएम) हैं, उनके समर्थन में छपी ख़बरें। भाई और बेटा बन कर रहूंगा : बन्ना (16 नवंबर पेज पांच)। माता-पिता का आशीर्वाद लेकर घर से निकले बन्ना (8 नवंबर पेज 11)। गरीब-गुरबों के लिए लडता रहूंगा : बन्ना (15 नवंबर पेज तीन)। युवा आगे आयें, तभी देश का भला : मोहन (17 नवंबर पेज तीन)। मोहन को मिल रहा जीत का आशीर्वाद (16 नवंबर पेज पांच)। ये सिर्फ मोहन कर्मकार और बन्ना गुप्ता से संबंधित छपी ख़बरों के कुछ उदाहरण हैं। आगे और देखिए। प्रभात खबर ने दो नवंबर को सरयू राय और मोहन कर्मकार और 10 नवंबर को मोहन कर्मकार और बन्ना गुप्ता का हाथ मिलाते व गला मिलते हुए तसवीर छापी, ताकि समाज में यह मैसेज जाये कि यहां के प्रत्याशियों के बीच कैसी स्वस्थ स्पर्धा है। प्रभात खबर का यह प्रयास क्या सराहनीय नहीं है?

आपने जिन ख़बरों की कटिंग प्रकाशित की है, उसमें एक है – मुसलमान भाजपा से हाथ मिलाएं। उसके ऊपर के स्लग को पढ़‍िए। यह बयान है भाजपा नेता शाहनवाज का। इसे प्रभात खबर ने 17 नवंबर को पेज एक पर छापा था। इसलिए कि शाहनवाज राष्ट्रीय नेता हैं। दूसरे दिन कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता सचिन पायलट जमशेदपुर आये। उन्हें भी प्रभात खबर के पेज एक पर तसवीर समेत उतनी ही जगह दी गयी जितनी जगह शाहनवाज खान को दी गयी थी। यह है प्रभात खबर की निष्‍पक्षता का उदाहरण। आपने सरयू राय से संबंधित छपी एक रिपोर्ट में कुछ पंक्तियों का उल्लेख किया है। इसमें सरयू राय के बारे में लिखा गया है कि जहां-जहां वे जा रहे हैं, वहां उन्हें बेहतर समर्थन मिल रहा है। इसी से आपको लगता है कि प्रभात खबर सरयू राय के समर्थन में खडा है और रिपोर्टर ने पैसा लेकर यह रिपोर्ट लिखी है। जरा आंख खोलिए और पढ़‍िए सरयू राय के विरोधी प्रत्याशी बन्ना गुप्ता के बारे में प्रभात खबर के 17 नवंबर के पेज तीन पर छपी रिपोर्ट : मां-पिता का आशीर्वाद ले निकलते हैं बन्ना गुप्ता। इसमें रिपोर्टर ने पहले पारा में ही लिखा है : स्थिति यह है कि मानगो, कदमा, सोनारी में उन्हें ज़ोरदार जनसमर्थन मिल रहा है। उनके लिए लहर चल रही है, जो चुनाव में परिणाम देनेवाली है। यह रिपोर्ट सरयू राय के लिए नहीं, बल्‍क‍ि उनके विरोधी बन्ना गुप्ता के लिए लिखी गयी है। यह रिपोर्ट आपको क्यों नहीं दिखाई देती? इस रिपोर्ट को देखने के बाद आप तो यही कहेंगे कि प्रभात खबर बन्ना गुप्ता के लिए काम कर रहा है। कितना-कितना उदाहरण आपको गिनाएं।

दरअसल आप प्रभात खबर के घोर विरोधी हैं, जो और किसी के इशारे पर काम कर रहे हैं। प्रभात खबर ने अपनी निष्‍पक्षता के अनेक उदाहरण आपको दिये लेकिन क्या आपको यह नज़र नहीं आता कि इस चुनाव में अन्य बड़े अख़बार क्या कर रहे हैं? कई प्रत्याशियों की ख़बरें दूसरे बड़े अख़बारों में इसलिए नहीं छप रही हैं क्योंकि वे विज्ञापन नही दे रहे हैं, जबकि प्रभात खबर में हर प्रत्याशी की ख़बर छप रही है, चाहे वह विज्ञापन देता है या नहीं देता है। रोज का अख़बार देखते रहिए। क्या कारण है कि आपकी नज़र अन्य बड़े अख़बारों की करतूतों की ओर नहीं जाती। मैं नहीं कह सकता कि वह कौन-सी मजबूरी है, जिसके इशारे पर आप प्रभात खबर जैसे छोटे अख़बार को निशाना बना रहे हैं लेकिन बड़े अख़बारों की ओर आपका ध्यान नहीं जा रहा है। चुनाव में ये अख़बार क्या कर रहे हैं। कैसे पिछले और इस चुनाव में मामूली प्रत्याशियों को परेशान कर दिया है? लेकिन आप नहीं लिख सकते हैं। आपकी लाचारी पर तरस आता है। हो सकता है कि बडे अख़बारों के खिलाफ कुछ नहीं छाप कर आप अपना भविष्‍य सुरक्षित करने के प्रयास में हों। आप बड़े अख़बारों के ख़‍िलाफ़ लिख भी नहीं सकते क्योंकि वे बड़े पूंजीवाले हैं, आप जैसे लोगों को पाल कर रख सकते हैं।

जहां तक तथागत का सवाल है, अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता है तो सामने आएं और एक आरोप को साबित करें। चोर जैसा चुपके-चुपके वार न करे। झूठ छाप-छाप कर आप क्या बताना चाहते हैं? जब व्यक्तिगत टिप्पणी पर बहस आपने छेड़ ही दी है तो तथागत मालूम करे कि वह कौन-सा पत्रकार है, जिस पर भोपाल में जब एक लड़की को प्रताड़‍ित करने का आरोप लगा, धरना-प्रदर्शन हुए तो एक सम्मानित बड़े अख़बार के प्रबंधन ने तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया।

आपने प्रभात खबर के झारखंड के वरिष्ठ संपादक अनुज कुमार सिन्हा को संघी बताया है। तरस आती है आपकी जानकारी पर। आप उन्हें संघी करते हैं, लेकिन सच यह है कि आरएसएस से उनका दूर-दूर का संबंध नहीं है। पिछले 25 साल में शायद आरएसएस के पक्ष में उनकी एक भी रिपोर्ट नहीं छपी है। समझ लीजिए, अनुज सिन्हा झारखंडी विचारधारा वाले पत्रकार हैं। जिनकी अधिकांश रिपोर्ट झारखंड आंदोलनकारियों-शहीदों और आदिवासियों से संबंधित रहती है, आरएसएस पर नहीं। आपने प्रभात खबर में काम किया है, अनुज सिन्हा 25 साल से इसी अख़बार में हैं। फिर भी आप नहीं जानते उनका बैकग्राउंड। अगर नहीं जानते तो जानने का प्रयास तो कर लेते।
आपको सलाह है। जो अख़बार बेहतर काम कर रहे हैं, उन्हें काम करने दीजिए। हमारा अनुभव बताता है कि जब भी प्रभात खबर जैसे किसी छोटे अख़बार ने बेहतर पत्रकारिता की है, बडे अख़बारों को यह पसंद नहीं आयी है। उनके इशारे पर कुछ लोग प्रभात खबर व उसके पत्रकारों के खिलाफ अभियान चलाते हैं, आप और तथागत उन्‍हीं में से हैं। मैंने भी 20 साल में बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं और कई तथागतों का हाल भी देखा है। ऐसे लोग न घर के होते हैं न घाट के। चूंकि आपने मेरे ऊपर आरोप लगाये, इसलिए मैं सबूत समेत आपको जवाब भेज रहा हूं। अगर आपमें नैतिकता बची है, अगर आपसे सच में भूल हो गयी है, तो इसे सुधारने का आप प्रयास करेंगे।

संलग्न है प्रभात खबर में छपी रिपोर्ट की कटिंग।

विनोद शरण
मुख्‍य संवाददाता, प्रभात खबर, जमशेदपुर

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7 Comments »

  • रंगनाथ सिंह said:

    संचालक ध्यान दें। महोल्ला लाइव एक मीडिया मंच है। इसकी विश्वसनियता बनी रहनी चाहिए। अगर यही हाल रहा तो मोहल्लालाइव एक न्युज पोर्टल से गासिप पोर्टल बन के रह जाएगा।

  • Raj Agarwal said:

    Dear Moderator

    My humble request to you would be that kindly try to ascertain the prima facie credibility of any report before accepting in your portal so that your portal gradually gathers support and respect of all.

    You should be aware of the fact that in media fraternity, credibility of news and its source is very vital and crucial, as it can make or break the agency publishing it in one single stroke.

    Prabhat Khabar is one of the finest examples of regional newspaper having editorial independence and integrity. You should first try to understand any newspaper house, its ethics and values before publishing any anonymous reports in your portal.

    Shri Harivansh ji is a man of values and principal. You should be aware that Mr. Harinaryan Singh (erstwhile editor of Hindustan) was earlier with Prabhat Khabar, and it took only one proven complain of corruption for Shri Harivanhji to remove him from the organization and after so many years of service in Hindustan, again same thing got repeated when the personal department of HT Media received a complain of disproportionate assets of Mr. Harinarayan and it finally took the same stand (of transferring him to Chandigarh, but actually it was a pressure tactics to make him quit from the organization).

    Moreover, so far as Mr. Ravi Prakash is concerned, he joined and left Prabhat Khabar two times. As long as he was in Prabhat Khabar, Shri Harivansh ji was his role model and he respected him like his father. When his third attempt to join Prabhat Khabar was not accepted by Shri Harivansh ji, he wrote a report which was again published in your portal. I think that hypocrites like Mr. Ravi Prakash should have not got any place in your portal !

    I hope that you will assess the actual reality based on facts and not in personal whims of any person / organization.

    Regards

    All the good wishes for a more serious journalism with integrity and independence.

  • madan said:

    AVINASH ABHI ROAD PAR HAI, ISLIYE PRABHAT KHABAR KO BADNAM KAR RAHE HAI. TAKI UNHE DUSRE AKHBARO ME TO NAUKARI MIL JAYE. AVINASH JI JAB TAK LARKI KE PICHE BHAGTE RAHENGE, UNHE HAR JAGAH SE NIKALA JATA RAHEGA. KOI UNHE NAUKRI NAHI DEGA. HAM TO AROP LAGATE HAI KI AVINASH MAAL LEKAR YAH SAB CHAPTA HAI.

  • Himmat Singh Chandel said:

    After reading the rejoinder from Vinod Sharan, I’d request the moderator to apologize for carrying a malicious article agaist the repute and reliability of a news group.
    It’s a very serious legal and moral offence ammount to be criminal.

  • Prashant (PD) said:

    रंगनाथ जी की बात पर ध्यान दिया जाये..

  • ranjan said:

    आश्चर्य है कि तथागत की रपट के जवाब में मुख्य संवाददाता ने सफाई पेश करते हुए अखबार में छपी दूसरी खबरों की जो कटिंग भेजी है, वे सब लगभग उसी भाषा में लिखी गई हैं, जिन पर तथागत ने सवाल उठाए थे। सवाल ये है कि कथित आचार-संहिता के प्रकाशन के बावजूद प्रभात खबर को इस भाषा में “खबर” छापने की जरूरत पड़ती है, तो इसके क्या कारण होंगे। सभी खबरों की भाषा यह बताती है कि वे खबरें कम और विज्ञापन ज्यादा हैं। एक “आंदोलन” होने और “आचार संहिता” छापकर अपनी “ईमानदारी का सबूत” पेश करने वाले एक अखबार में काम करने वाले तथाकथित अनुभवी पत्रकारों को अगर खबर और विज्ञापन की भाषा में फर्क करना नहीं आता तो क्या उन्हें दूसरों को होने वाले शक पर सवाल उठाने का हक है? पहले तो अपने स्तर पर यह सुधार करने की जरूरत है कि खबर और विज्ञापन की भाषा अलग होती है और अगर किसी विज्ञापन को खबर की भाषा में पेश किया जाएगा, तो इसकी “अंतर्कथाओं” को जानने की जिज्ञासा पैदा होगी ही…।

    पुनश्च-

    अब विनोद शरण और उनके सहयोगियों से यह भी निवेदन है कि “आउटलुक” ने जो खुलासा किया है, कि मधु कोड़ा-कांड के पर्दाफाश के पीछे की क्या कहानी है, उस पर भी कोई “प्रकाश डालने वाली” कोई “सफाई” भेजी जाए। ताकि प्रभात खबर पर पाठकों को फिर से भरोसा पैदा करने में सहूलियत हो…

    रंजन, पटना…

  • Mohalla Live » Blog Archive » “प्रभात खबर ने सभी प्रत्‍याशियों से पैसे लिये” said:

    [...] दे पाया। लौटा, तो सरयू राय प्रसंग पर विनोद शरण जी का जवाब पढ़ा। बचकाना जवाब है। उनकी सारी दलील [...]

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