आपात काल में मीडिया पर रहेगा अंकुश
♦ अमिताभ पराशर

राष्ट्रीय विपदाओं के दौरान मीडिया को सूचनाएं देने के एक केंद्रीकृत व्यवस्था की घोषणा केंद्र सरकार जल्द ही करने वाली है। सूचना व प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित इस व्यवस्था को हाल ही में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी सहमति मिल चुकी है।
पिछले साल मुंबई आतंकी हमलों के दौरान मीडिया ब्रीफिंग से जुड़ी अव्यवस्था को लेकर हुई सरकार, खासकर सूचना व प्रसारण मंत्रालय की चौतरफा आलोचना हुई थी। आलोचना का मुख्य आधार यह था कि मुंबई में आतंकी हमलों के दौरान ताज होटल के सामने मौजूद दुनिया भर की समाचार एजेंसियों और चैनलों को विभिन्न सरकारी एजेंसियां अपने-अपने ढंग से सूचनाएं देने में एक दूसरे से होड़ कर रही थीं। इस वजह से कई बार भारी कनफ्यूजन की स्थितियां बनीं। कई बार कथित तौर से सरकारी एजेंसियों के हवाले से टीवी चैनलों पर चलने वाली खबरों से मुंबई आतंकी हमले को अंजाम दे रहे आतंकवादियों को फायदा पहुंचने की खबरें भी आयीं।
सूचना व प्रसारण मंत्रालय के इस प्रस्ताव के मुताबिक, किसी भी राष्ट्रीय विपदा की स्थिति में तीन केंद्रीय मंत्रालयों के केंद्रीय मंत्रियों की एक टीम बनेगी। इस टीम में सूचना व प्रसारण मंत्री, गृह मंत्री और संबंधित आपदा से जुड़े मंत्रालय के मंत्री सदस्य होंगे। इन तीनों के विचार विमर्श के बाद सरकार जिस सूचना को मीडिया से बांटना चाहेगी, उसे संभवत: भारत सरकार के मुख्य सूचना अधिकारी के जरिये उपलब्ध कराया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि सूचना व प्रसारण मंत्रालय द्वारा शीघ्र ही जारी होने वाले इन दिशा-निर्देशों में मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए कुछ स्पष्ट दिशा-निर्देश होंगे, जिनका पालन अनिवार्य होगा। इनमें मुंबई हमलों जैसी घटना के दौरान लाइव प्रसारण पर रोक का प्रावधान है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित व्यवस्था का नाम क्या होगा और इसके विस्तृत दिशानिर्देश क्या क्या होंगे। सूत्रों ने बताया कि सूचना व प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी इसकी घोषणा 26 नवंबर के पहले करने वाली थीं लेकिन प्रधानमंत्री के देश से बारह होने की वजह से इसे कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया गया। (दैनिक हिंदुस्तान से)












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