“रजिस्ट्री के बाद सरकार कब्ज़ा भी दिलाये”
♦ राम नारायण साहू
सांसद, समाजवादी पार्टी, यूपी
महोदय, एक अनुमान के अनुसार भारत में दो करोड़ से अधिक मुक़दमे ज़मीन या मकान संबंधी विवाद के बारे में विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। यदि यह मानें कि एक-एक मुकदमे में कम से कम दो परिवार अर्थात दस व्यक्ति प्रभावित होते हैं, तो 100 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश में 20 करोड़ से अधिक लोग संपत्ति विवाद की समस्या में जकड़े हैं। ज़मीनी विवादों के कारण आपसी झगड़े, मारपीट तथा हत्या जैसे गंभीर अपराध जन्म लेते हैं। साथ ही, रातोंरात धनवान एवं शक्तिशाली बनने के लिए भू-माफियागिरी का बढ़ता चलन सरकार एवं जनता दोनों के लिए गंभीर समस्या के रूप में उभरा है। इस समस्या से निपटने के लिए यदि सरकार गंभीर रूप से सोचे, तो जनता की बहुत सी समस्याएं स्वत: समाप्त हो सकती हैं। ज़मीन या मकान के बैनामा के समय सरकार स्टांप शुल्क के रूप में क्रेता से छह प्रतिशत का भारी शुल्क वसूलती है, जिसके बदले में सरकार कोई सुविधा या सेवा प्रदान नहीं करती है। मेरा सरकार से अनुरोध है कि भले ही स्टांप शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ा कर आठ प्रतिशत कर दे, परंतु बदले में क्रेता को सेवाएं अवश्य दें, अन्यथा सेवा कर वसूलना अन्यायपूर्ण है। यदि सरकार सभी ज़मीनी संपत्तियों के सौदे में बैनामा से पहले title clearance तथा बैनामा के बाद भौतिक कब्जा दिलाने की ज़िम्मेदारी ईमानदारी से निभाये, तो मेरा मानना है कि 80 प्रतिशत विवाद स्वत: समाप्त हो जाएंगे। यूं भी जनता की संपत्ति की रक्षा करना सरकार की भूलभूत ज़िम्मेदारी है। Title clearance का कार्य आसानी से हो सकता है, यदि सरकार भू-संपत्ति संबंधी सभी अभिलेख को कंप्यूटरीकृत कराये, जिससे किसी भी संपत्ति की जानकारी त्वरित उपलब्ध हो सके। इससे काले धन के रूप में अर्जित संपत्तियों पर भी रोक लगेगी तथा भू-माफियाओं की नकेल भी कसी जा सकेगी। Title clearance ठीक होने पर भौतिक कब्ज़ा दिलाना भी आसान होगा। आशावान हूं कि सरकार इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस एवं त्वरित कदम उठाएगी। धन्यवाद।
(राज्यसभा में 11 दिसंबर 2009 को दिया गया भाषण)













Leave your response!
Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)