ये कैसा साहस?



♦ राजस्थान पत्रिका
जयपुर। सी-स्कीम स्थिति ब्राइट हॉरिजन स्कूल में ट्रेकर्स दि माउंटेनियरिंग स्पोर्ट्स ऑफ राज्स्थान की ओर से चार दिवसीय एडवेंचर कोर्स शुरू हुआ। इसमें स्कूल के ढाई साल से साढ़े चार वर्ष तक के 125 बच्चों को आर्टिफिशियल रिवर क्रॉसिंग एंड रेस्क्यू की प्रैक्टिस करायी गयी। आयोजकों के अनुसार इसमें छोटे-छोटे बच्चों को साहसी बनाने के मक़सद से उन्हें स्कूल की छत से एक लक्ष्य तक लापरवाही से पहुंचाया गया। बच्चे जिस तरह इस दौरान बिलख रहे थे, वह बेहद दुखी करने वाला माहौल था, लेकिन ट्रेनर ने इनकी परवाह नहीं की। हम पैरेंट्स को यह बताना चाहते हैं कि कैसे बच्चों की जान कुछ एक्टिविटी के नाम पर जोखिम में डाली जा रही है।
मानसिक रूप से बीमार हो सकते हैं बच्चे
गुरुवार को कोर्स के दौरान कई छोटे बच्चे इतनी ऊंचाई से भयभीत होकर रोने लगे। कई बच्चों के डर कर रोने के बावजूद उन्हें आर्टिफिशियल रिवर क्रॉसिंग में रस्सी से लटका कर लक्ष्य तक पहुंचाया गया। हालांकि विशेषज्ञ इस तरह की गतिविधियों को सही नहीं मानते। उनके अनुसार इससे बच्चों को कई तरह की मानसिक परेशानियां हो सकती हैं।
डॉक्टर की राय
चार साल तक के छोटे बच्चों को इस तरह की ट्रेनिंग देना ख़तरनाक है। इससे बच्चों में मेंटल ट्रोमा हो सकता है। रात में डर लगना, स्कूल फोबिया और अनजाना भय जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एक तरह से बच्चे को इमोशनल ट्रोमा हो सकता है, क्योंकि चार-साढ़े चार वर्षों में बच्चों का ब्रेन मैच्योर नहीं होता।
डॉ अशोक गुप्ता, चाइल्ड स्पेशलिस्ट, एसएमएस मेडिकल कॉलेज
इनका कहना है
छोटे बच्चों को इस तरह की ट्रेनिंग हम कई वर्षों से दे रहे हैं। सुरक्षा के इंतज़ाम रखते हैं। कई बच्चे घबरा कर रोते हैं, लेकिन ये स्वाभाविक है। इससे उन्हें कोई नुक़सान नहीं होता।
विक्रम खेतान, निदेशक, ट्रेकर्स इंस्टीट्यूट












Photo nahi dikh raha hai..
Leave your response!
Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)