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निर्मल वर्मा के घर से पद्मभूषण की नकल उठा ले गये चोर

18 December 2009 One Comment
nirmal verma house
इसी घर से चोरी हुई अनुकृति

पूर्वी दिल्ली। साहित्यकार निर्मल वर्मा का पद्मभूषण सुरक्षित है, चोरी उसकी अनुकृति हुई है। दरअसल, पद्मभूषण के साथ थो़ड़े छोटे आकार की अनुकृति भी भेंट की जाती है। मधु विहार आवास से वही चोरी हुआ है। पद्मभूषण उनकी पत्नी व लेखिका गगन गिल के ग्रेटर नोएडा वाले आवास पर सुरक्षित है। अनुकृति की तलाश में पुलिस सरगर्मी से लगी है। एफआईआर होने के 24 घंटे बाद भी सोसाइटी का एक सफाई कर्मचारी मधु विहार पुलिस की हिरासत में है। कल्याणपुरी से भी दो लोगों को पूछताछ के लिए उठाया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी का दावा है कि जांच सही दिशा में चल रही है। चोर जल्द पक़ड़े जाएंगे। खुद नयी दिल्ली जिले के संयुक्त आयुक्त धर्मेंद्र कुमार और उपायुक्त तक गगन गिल से संपर्क बनाये हुए हैं। वे जल्द ही चोरों को पक़ड़ने का भरोसा दिला रहे हैं। दूसरी तरफ दिल्ली में पद्मभूषण चोरी होने के हंगामे से गिल के ग्रेटर नोएडा स्थित आवास की सुरक्षा के लिए वहां के पुलिस अधिकारी चिंतित हो गये हैं, क्योंकि वहां पद्मभूषण के अलावा भारतीय ज्ञानपीठ, अन्य पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र हैं। गगन गिल के अनुसार उनसे सुरक्षा कारणों से नोएडा एसपी ने भी संपर्क किया।

निर्मल वर्मा की मौत के बाद से गगन गिल ग्रेटर नोएडा में रहती हैं। उन्होंने बताया कि वह कुछ-कुछ समय के अंतराल पर मधु विहार स्थित सह विकास सोसाइटी वाले घर पर आती रहती हैं। जैसे वर्मा की पुण्यतिथि या त्योहार पर पूजा-पाठ वगैरह करने या एकांत में लेखन के लिए। वह 16 दिसंबर को थाइलैंड जाने वाली थीं। उसी सिलसिले में 15 दिसंबर को मधु विहार आवास पर पासपोर्ट व अन्य सामान लेने आयी थीं।

सफाईकर्मी मोंटू पर उनके शक की वजह यह है कि सोसाइटी में आने पर उन्होंने हमेशा की तरह उसे सफाई के लिए घर बुलाया, मगर वह इस बार यहां पहुंचने से आना-कानी करने लगा। वह ताला खोल कर अंदर गयीं, तो पहले सब कुछ सामान्य नज़र आया। पीछे वाले कमरे में जाकर लाइट जलायी और चिक उठायी तो हैरत में प़ड़ गयीं। पिछले दरवाज़े की जाली करीब छह इंज कटी हुई थी। उससे चिटकनी खोली गयी थी।

कमरे में बाकी सब सामान अपनी जगह नज़र आ रहा था। उन्होंने अपने ज़ेवरों का डिब्बा और कैरी बैग खोला तो असमंजस में पड़ गयीं। उसमें मंगलसूत्र समेत कई जेवर रखे थे, मगर उनसे लॉकेट ग़ायब थे। उसी डिब्बे में पद्मभूषण की अनुकृति का बॉक्स भी रखा था। वह खोला तो अनुकृति चोरी थी। वह समझ गयीं कि चोर जेब में आसानी से छुपा कर ले जाने लायक गहने और अनुकृति ले गया। हो सकता है कि जाली के बाहर वाला दरवाज़ा वह बंद करना भूल गयी हों। दरवाज़ा खुला मिलने पर किसी ने जाली काटकर अंदर घुसने की योजना बना ली।

nirmal verma study room
इसी कुर्सी-मेज पर निर्मल वर्मा करते थे अध्ययन।

गिल का कहना है कि उन्होंने अपने घर के चारों तरफ गमले लगवाये हुए हैं। पौधों की देखभाल का ज़‍िम्मा भी मोंटू पर ही सौंपा हुआ था। वह डेढ साल से पौधों को पानी दे रहा था। बदले में उसे रुपये और कुछ-कुछ मदद करती रहती थीं। यहां तक कि निर्मल वर्मा के कुछ कपड़े भी उसे दिये थे। उन्हें मोंटू पर सिर्फ शक है, क्योंकि सिर्फ वही उनके घर से परिचित था। हो सकता है, उसने कुछ न किया हो। चोर प्रोफेशनल नहीं थे, इसलिए उस कमरे में अन्य जगह पर खुले में रखे ज़ेवर नहीं ले गये। उस कमरे में बाहर से कुंडी लगी थी, जिसे तोड़ सकते थे, फिर पूरे घर का सामान उनके सामने होता, जहां निर्मल वर्मा को मिले कई पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र आदि थे।

“पुलिस पर भरोसा नहीं”

चोरी का पता चलने पर गिल हैरान-परेशान हालत में ग्रेटर नोएडा चली गयीं। 16 दिसंबर को मधु विहार थाने में जाकर एफआईआर दर्ज करवायी। उन्होंने फौरन पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी, नयी दुनिया संवाददाता के इस सवाल पर गिल का दो टूक का कहना था कि “क्योंकि मुझे पुलिस पर भरोसा नहीं है।” लेकिन निर्मल की अनुकृति की चोरी और सोसाइटी में किसी अपराधी के छिपे होने की आशंका के चलते अगले दिन उन्होंने पुलिस को खबर करना ज़रूरी समझा। फिर उन्हें थाइलैंड भी निकलना था, इसलिए सोच-विचार में पड़ी रहीं।

जानकार का हाथ!

जिस तरह से चोरी हुई, उससे लगता है कि वह घर से वाक़‍िफ़ व्यक्ति है। यह भी तय है कि चोर प्रोफेशनल नहीं था। वह पद्मभूषण की अनुकृति को साधारण सोने का मैडल समझ कर ले गया। यही वजह है कि पुलिस ने सोसाइटी के सफाई कर्मचारी को हिरासत में रखा है। गुरुवार दो और लोगों को हिरासत में लिया गया। इन सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है।

“सरकार और साहित्यिक अकादमियों से नाराजगी”

गिल ने मधु विहार स्थित आवास को संग्रहालय की शक्ल दी है, जहां वर्मा का अध्ययन कक्ष, आराम कक्ष और उनकी उपयोग की वस्तुएं, पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र, पुस्तकालय आदि चीज़ें सहेज कर रखी हैं। ग़नीमत है चोर उन तक नहीं पहुंचे।

गिल का कहना है कि जब वह अकेली महिला सीमित संसाधनों के जरिये अपनी संपत्ति को संग्रहालय की शक्ल दे सकती हैं, तो क्या सरकार या साहित्यिक अकादमियों का फर्ज नहीं बनता कि वह भी अपना योगदान दें, ताकि भावी पीढ़ी प्रेरणा ले सके। वह तो अपनी संपत्ति तक देने को तैयार हैं, मगर कोई दिलचस्पी तो ले। क्या प्रतिष्ठित लेखकों की निधि को संभालना और सुरक्षित रखना सरकार का फर्ज नहीं बनता।

लेखक बिरादरी आहत

प्रसिद्ध लेखक स्व निर्मल वर्मा के घर चोरी होने से लेखक बिरादरी बहुत आहत है। लेखकों का कहना है कि दिल्ली जैसे शहर में असुरक्षा का माहौल ज़्यादा है। ऐसे में नामचीन लेखकों की धरोहर को सुरक्षित रखने की ज़रूरत बढ़ गयी है। इसके लिए निजी और सरकारी दोनों स्तर प्रयास होने चाहिए।

वरिष्ठ आलोचक प्रो निर्मला जैन ने बताया कि पटपड़गंज स्थित सहविकास अपार्टमेंट में जिस तरह से चोरी हुई, वह चौंकाने वाली घटना है। इससे कुछ समय पहले रवींद्रनाथ टैगोर को मिला नोबल पुरस्कार भी चुराया जा चुका है। शांतिनिकेतन में हुई इस वारदात से लोगों को सबक लेने की ज़रूरत है। लेखक रवींद्र कालिया ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह का माहौल आज बन रहा है, उसमें बड़े लेखकों के धरोहर को संभालने वाले को आज बेहद सावधानी बरतने की ज़रूरत है। अगर ऐसा संभव नहीं है उसे किसी संग्रहालय को सौंप देना चाहिए। इस सिलसिले में वे इलाहाबाद संग्रहालय का ज़‍िक्र करते हैं।

इस घटना से स्तब्ध कथाकार उदय प्रकाश इसे आम जनता और लेखक दोनों की सुरक्षा से जोड़कर देखते हैं। वे कहते हैं, देश में आज दोनों पूरी तरह असुरक्षित हैं। दोनों के पास न अपनी सत्ता है, न ही सुरक्षा। राज्य व समाज की नकारात्मक ताक़तों के हमले इन पर लगातार बढ़ रहे हैं। वह कहते हैं, देश में जो असुरक्षा का माहौल बना है, उसमें सिर्फ वहीं सुरक्षित है जिनके पास लाल बत्ती गाड़ी और वीआईपी सुरक्षा है। इस कड़ी में अब कॉरपोरेट जगत भी शामिल हो गया है। बाकी सभी असुरक्षित और अभेद्य हैं। (नई दुनिया, दिल्‍ली संस्‍करण में छपा समाचार)

One Comment »

  • Prof Pyarelal said:

    हे भगवान ! क्या करे हिन्दी का लेखक ? निर्मल जी के साथ ऐसा हो रहा है !

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