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क्‍या ये अख़बार की टॉप लीड स्‍टोरी बनायी जा सकती है?

19 December 2009 15 Comments
Prabhat Khabar Lead Story

प्रभात खबर का पटना संस्‍करण मिला है। परसों का। इसकी टॉप लीड स्‍टोरी है – पटना में बिज़नेस सबसे आसान ये रिपोर्ट इंटरप्रेन्‍योर से साभार छापी गयी है। इसमें ज़्यादातर काम राज्‍य सरकार के दायरे से बाहर हैं। एकाध को छोड़ कर। हम सिर्फ एक सवाल रख रहे हैं। अपनी तरफ से कुछ कहे बिना। आप बताएं कि इनमें से कौन-कौन से काम में राज्‍य सरकारें पहले बिहार में बाधा डालती रही हैं और कौन से काम में राज्‍य सरकार चाहे भी, तो नागरिक के लिए मुश्किलें नहीं खड़ी कर सकती हैं? वैसे हैरानी इस बात की है कि क्‍या इस तरह की ख़बरों को अख़बार का टॉप लीड बनाया जा सकता है? और क्‍या इसे सरकार की चमचागीरी कही जा सकती है या ये महज़ निम्‍न संपादकीय दृष्टि का एक शानदार मुजाहिरा है: मॉडरेटर

डीआइएन नंबर लें

डाइरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (डीआइएन) लेना होगा। मिनिस्‍ट्री आफ कॉरपोरेट्रअफेयर्स के पोर्टल डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.एमसीए.जीओभी.आइएन पर आनलाइल आवेदन दें। समय – एक दिन, शुल्क – सौ रुपये।

डिजिटल सिग्नेचर लें

एमसीए से अधिकृत किसी भी छह निजी एजेंसी से आप आनलाइन क्लास – 2 डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट प्राप्त करें। समय – तीन दिन, शुल्क – 1500 रुपये। लेकिन एजेंसी के अनुसार शुल्क की राशि बढ़ सकती है।

कंपनी का नाम पंजीकृत कराएं

रजिस्‍ट्रार ऑफ कंपनीज के यहां आप अपनी कंपनी का नाम आनलाइन रिज़र्व करा सकते हैं। समय – दो दिन, शुल्क – 500 रुपये।

कंपनी के कागजात पर मुहर लगवाएं

स्टेट ट्रेजरी या किसी अधिकृत निजी बैंक में आपको कंपनी के इनकॉरपोरशन डाक्यूमेंट पर मुहर लगवानी होगी। इनके साथ मेमोरेंडम आफ एसोसिएशन (एमओए), आर्टिकल्स आफ एसोसिएशन (एओए) की अहस्ताक्षरित प्रतियां और पेमेंट रिसीट संलग्न करना होगा। समय – एक दिन, शुल्क – 180 रुपये।

इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट लें

आरओसी से इनकॉरपोरेशन फॉर्म प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए एमसीए की वेबसाइट पर इ फॉर्म – 1, इ फॉर्म – 18 और इ फॉर्म – 32 को इलेक्‍ट्रॉनिकली प्रेषित करना होगा। एक प्रति एमओए, फॉर्म – 1, फॉर्म – 32, फॉर्म 18 वास्तविक नाम का स्वीकृति पत्र, डाइरेक्टरों की सहमति और मुहर के साथ पावर आफ अटॉर्नी को व्यक्तिगत रूप से रजिस्‍ट्रार आफ कंपनीज के यहां जमा करना होगा। समय – पांच दिन, शुल्क – 13,250 रुपये।

मुहर बनवाएं

शेयर सर्टिफिकेट और अन्य डॉक्यूमेंटों को इश्‍यू करने के लिए आपको एक मुहर की ज़रूरत पड़ेगी। हालांकि यह इनकॉरपोरेशन-निगमित ज़रूरत नहीं है। शब्दों की संख्या, मुहरों की संख्या और डिलीवरी अवधि के हिसाब से खर्च होगा। समय – एक दिन, शुल्क – 350 रुपये।

पैन कार्ड लें

नेशनल सिक्योरिटिज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) या यूनिट ट्रस्ट आफ इंडिया इंवेस्टर्स सर्विसेज लिमिटेड (यूटीआइआइएसएल) द्वारा नियुक्त किसी एजेंट्रया अधिकृत फ्रैंचाइजी से परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) प्राप्त कर सकते हैं।

टैन प्राप्त करें

टैन के आवंटन के लिए फॉर्म 49 बी पर आवेदन करें। इ-टीडीएस रिटर्न प्राप्त करने वाले किसी भी अधिकृत टीआइएन फैसिलिटेशन सेंटर पर यह आवेदन जमा करें। फैसिलिटेशन सेंटरों की सूची डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.आइएनसीओएमइटीएएक्सआइएनडीआइए, जीओभी.आइएन, और डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.टीआइएन.एनएसडीएल.सीओएम से प्राप्त होगी। समय – सात दिन, शुल्क – 57 रुपये – 50 रुपये का आवेदन पत्र और 12.36 प्रतिशत सर्विस टैक्स।

वैट के लिए पंजीकरण कराएं

टैक्स देने के लिए आपको स्थानीय सेल्स टैक्स ऑफिस में वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) के लिए पंजीकरण कराना होगा। समय – एक दिन, शुल्क – सौ रुपये।

पीएफ के लिए पंजीकरण

वर्तमान कानूनों के तहत किसी भी बिजनेस में जहां बीस या उससे ज़्यादा कर्मचारी कार्यरत हों, देश के 183 उद्योगों और उद्योग घरानों में काम करते हों, उन्हें इम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड आरगेनाइजेशन-इपीएफओ का पंजीकरण कराना होता है। कोड नंबर के आवंटन के लिए आपको क्षेत्रीय इपीएफओ में जरूरी सूचनाएं देनी होंगी। समय – बीस दिन, निःशुल्क।

मेडिकल इंश्योरेंस के लिए पंजीकरण

इम्प्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस (इएसआइ) के क्षेत्रीय कार्यालय में मेडिकल इंश्योरेंस के लिए पंजीकरण करा सकते हैं। इसके बाद अपने कर्मचारियों के व्यक्तिगत बीमा के लिए आवेदन दे सकते हैं। समय – 14 दिन, निःशुल्क।

(इंटरप्रेन्योरशिप पर देश में पहली और अनूठी पत्रिका है इंटरप्रेन्योर। नेटवर्क 18 की ओर से इसका प्रकाशन होता है। उसके चौथे अंक से इस आलेख को हम छाप रहे हैं।)

15 Comments »

  • NANDAN said:

    Nahi To kya lead story bane,

    (ek ko chku mara)BIHAR ME JANGALRAJ.

    Dilli me aajkal roj din dahde daqaiti ho rahi hai, lekin agar ye bihar me ho to?

    tum sab media walon ne bihar ko sirf badnam kiya hai.
    shir aani chqahiye tum logon ko

  • शुभचिंतक said:

    ये बिहार शाईनिंग है।

  • Sudesh said:

    बिलकुल लीड स्टोरी बनाई जा सकती है। अगर बिहार में कुछ अच्छा काम हो रहा है, तो इससे भाई लोगों को परेशानी क्यों हो रही है।

  • Ajay Singh said:

    नंदन और सुदेश जी का बिहार प्रेम पसंद आया। लेकिन भावना के साथ आदमी के पास एक दिमाग भी होता है। उसका भी समुचित उपयोग किया जाना चाहिए। इस स्टोरी में जिन कार्यों के बारे में बताया गया है, वे काम सिर्फ बिहार नहीं, पूरे देश में इतने ही बेहतर तरीके से होने लगे हैं। इसमें बिहार में कुछ भी विशेष या अलग से नहीं हुआ है। ये सारे कार्य इंटरनेट पर आॅनलाइन हो रहे हैं। सारे कार्य केंद्र सरकार की एजेंसियों के माध्यम से होते हैं। देश के किसी भी कोने में बैठा कोई भी आदमी इनती ही आसानी से ये सारे कार्य आसानी से करा सकता है। इनमें बिहार सरकार या नीतीश कुमार का दूर-दूर तक कोई योगदान नहीं। केंद्र सरकार ने इन सारे कार्यों को उतना ही आसान कर दिया है जितना किसी भी राशन की दुकान पर जाकर एक टूथपेस्ट खरीदना है।

    इन्टरपेन्योअर नामक पत्रिका किसकी है और उसने पाठकों को गुमराह करने के लिए ऐसी स्टोरी क्यों छापी, यह नहीं मालूम। लेकिन प्रभात खबर ने उसे बिना अपने दिमाग का इस्तेमाल किये छापा, तो यह चरम किस्म की दलाली या फिर अव्वल दरजे की मूर्खता मात्र है। आज के दौर में जब नीतीश कुमार की चमचागीरी करने के लिए मीडिया में होड़ मची है, ऐसी मूर्खतापूर्ण खबरें संदेह पैदा करती हैं। प्रभात खबर ऐसा क्यों सोचता है कि उसके सारे पाठक इतने जाहिल हैं कि उन्हें इनकमटैक्स का पैनकार्ड और कंपनी का डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर मिलने की प्रक्रिया नहीं मालूम। अगर पटना में बिजनेस करना सचमुच आसान हो गया तो क्या आप किसी बेरोजगार को छोटा सा रोजगार चलाने के लिए एकाध लाख का कर्ज दिला सकते हैं?

    मोहल्ला लाइव ने बिलकुल सही सवाल उठाया है। जिस काम में नीतीश सरकार की कोई भूमिका नहीं, उसके लिए नीतीश सरकार की तारीफ करके प्रभात खबर हास्यास्पद और हंसी का पात्र ही बना है। यही हाल रहा तो कल छपेगा- नीतीश जी की मेहरबानी से इन दिनों बिहार में सूरज ठीक समय पर पूरब में उगने लगा है और बारिश भी ठीक हुई है। चिड़िया भी चहचहा रही है और अल्लसुबह मुरगे भी सही समय पर बांग देना नहीं भूलते…।

  • RAVI said:

    Thik kah Rah rahe hain Ajay ji. Yah to chamchai ki parakastha hai. Waise bhi Prabhat Khabar Patna se jyada ummidein nahi ki ja sakti hain. Bhagwan jane Harivansh ji ko yah samajh mein kyon nahi aa raha hai. Ya phir wp sab samajh kar anjaan bane rahne ka natak kar rahe hain.

  • गिरीश पंकज said:

    aap apna rona rote rahe. apnee bala se. lekin akhabar ab karobaar hai. dhandha hai. maine kal ek teekhee tippanee ke thi.ab to yahee hoga. yah khabar nahee, sarkar ka vigyaapan hai. pata karen,is khabar kaa paisa liya gaya hoga.

  • ashok joshi said:

    You people at Mohalla Live seem to be the supporter of Laloo’s corruption in Bihar? Don’t you see that finally something is changing in Bihar. It was once leading state of India and look where it is now. How can educated people sympathise with Lallo’s policy of keeping Biharis poor and illiterate so that he could fool them for ever. When rest of the states were marching ahead, for 15 yrs he kept Bihar one of the most backward states in India, while his brother-in-laws looted the state.

  • Sanjay Mahto said:

    पड़ोसी के भरोसे पुत्र?

    अशोक जोशी का पत्र पढ़कर लगा कि नीतीश और प्रभात खबर मिलकर जिन लोगों को मूर्ख बना रहे हैं, वे पहले से ही बने हुए हैं।
    अगर जरा भी अकल होती तो पैन कार्ड बनवाने और कंपनी रजिस्ट्रेशन जैसे केंद्र सरकार के काम पटना में आसानी से होने जैसे मूर्खतापूर्ण दावे नहीं कर रहे होते। बिहार के नागरिकों ने नीतीश को पांच साल का अवसर दिया। उसमें चार साल उन्होंने लालू राज को गाली देकर गुजार दिये।
    बेहतर हो कि बिहार के विकास के लिए ठोस काम किये जायें और सिर्फ अपने काम की ही उपलब्धि का दावा करें।
    पड़ोसी के भरोसे पुत्ररत्न प्राप्त करने की उम्मीद न करें।

  • Sudesh said:

    सारे किंतु-परंतु के बीच इस बात को स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है कि बिहार की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। काफी दिनों के बाद बिहार से अच्छी खबरें आने लगी हैं, नहीं तो हत्या अपहरण और इसी तरह की दूसरी खबरों से देशभर के अखबार और न्यूज चैनल भरे रहते थे। अगर कुछ बदलाव दिख रहा तो कोई भी इसका श्रेय लेने की कोशिश करेगा ही। इसमें नीतिश कुमार या लालू यादव वाली कोई बात नहीं है। रेल मंत्री रहते हुए लालू ने भी अपनी छवि बदली और रेलवे के कामों के लिए श्रेय लिया। अब यहां यह नहीं कह सकते कि केंद्र सरकार बिहार पर मेहरबान हो गई और उसने अपने अब तक पापों को धोने के लिए बिहार को तोहफों की झड़ी लगा दी। अगर ऐसा है तो बिहार की लंबित रेल परियोजनाओं के बारें लोगों की क्या राय है, वहीं बताएं।

  • Rajendra Sinha said:

    पटना में बिजनेस सबसे आसान, तो मुश्किल किस शहर में?

    इस सुदेश को कौन समझाये कि इसमें बिहार की स्थिति सुधरने जैसी कोई बात ही नहीं है। देश के संविधान ने केंद्र सूची और राज्य सूची के माध्यम से अलग-अलग काम बांटे हैं। कुछ काम केंद्र के जिम्मे और कुछ काम राज्य के जिम्मे। प्रभात खबर ने जिन कार्यों में सुधार की बात की है] वे ज्यादातर काम केंद्र सरकार के जिम्मे हैं और इनके सुधरने के पीछे भी केंद्र सरकार से ज्यादा भूमिका नयी कंप्यूटर एवं इंटरनेट तकनीक की है जिसने इंटरनेट पर सारा काम आनलाइन एवं बेहद आसान कर दिया है। इसलिए ऐसे कार्यों के लिए नीतीश सरकार को के्रडिट देना या पटना में ऐसे काम आसान होने जैसी बात करना महज मूर्खता या दलाली है। उसी तरह जैसे देश में दूरसंचार क्रांति आयी तो इसे वाजपेयी सरकार की क्रेडिट बताकर एनडीए ने वर्ष 2005 का लोकसभा चुनाव लड़ा तो इंडिया शाइनिंग का नारा पिट गया। अब बिहार शाइनिंग का नारा लगाने के लिए नीतीश अगर ऐसे ही हास्यास्पद उदाहरणों को आधार बनायेंगे तो उनका पिटना तय है।
    पटना में बिजनेस सबसे आसान- ऐसा लिखने से लगता है मानो दूसरी जगहों पर ऐसे काम कराना मुश्किल है। क्या प्रभात खबर यह बतायेगा कि देश कि किस शहर में आज पैन कार्ड बनवाना मुश्किल काम है।

  • Raj Agarwal said:

    Dear Moderator / Readers of this Blog

    I have just gone through the article on the e paper edition of Prabhat Khabar.

    My first impression was that it was a very nice article spreading a positive vibration about Bihar and its Changing image under Shri Nitish Kumar.

    But to my surprise, when I read the blog comments, I felt disappointed over the remarks and the allegations on the newspaper being made by some ignorant people.

    To make my point, I would like to express the following facts:

    • Prabhat Khabar is a regional newspaper and if any regional newspaper tries to bring a positive story happening in a State, where the question of Central & State departments comes into picture? After all the same process is through put the country and the report only summarizes the total mandays involved in the process and reflect a changing image of Bihar. What is wrong in it ?

    • How many of us are aware of the following:
    o Bihar has more number of Graduates than Kerela
    o Bihar with 3rd largest student population in India opens up a world of Brand Opportunities with the New Generation Reader
    o Bihar is the 5th largest state owning Mahindra vehicles, which is greater than 6 Metros put together. Bihar showed a whopping 45% growth in automobile sales till Jan’09
    o Bihar is the 4th largest Tea purchasing state in India, which is greater than 6 Metros put together
    o The growth rate has been very good for at least three sectors — Construction (21.53 percent), Communications (16.01 percent) and Trade, Hotels and Restaurants (12.08 percent)
    o There has been a sharp decline of around 50 percent or more in the cases of dacoity, kidnapping, road dacoity and bank robbery in 2008 over 2001
    o As against 382 major cases of extremism reported in 2004, only 79 cases have been reported in 2008
    o Out of 164 approved proposals for investment, 15 proposals have already been implemented and are working, one is ready for production, and as many as 49 with a total investment of Rs. 22.91 thousand crore are in the advanced stage of implementation
    o The number of both foreign and domestic tourists has recorded an increase from 69.44 lakh in 2005 to 107.65 lakh in 2006 and to 105.30 lakh in 2007
    o The number of motor vehicles in Bihar has increased by 239 percent in 2007
    o There has been significant growth in total deposits in Bihar in 2007-08 over the previous year by Rs 11,681 crore
    o Bihar had a revenue surplus of Rs 4647 crore in 2007-08. In the budget estimates of 2008-09 also, the state government projected to keep it at almost the same level

    • The people making the allegations are just hypocrites who want to make news on only corruption, murder, rapes and other hard core crimes.

    • It must not be forgotten that in Jharkhand, it was Prabhat khabar who raised the news against madhu Koda and team and the result is now known to whole world. But if a state is doing good, is appreciation not necessary ? Stick and reward should go hand in hand , it is the rule of the world.

    • Finally, if Times Group had raised this story, then all would have appreciated it, but when a small regional paper tries to do the same everybody accuses it. Is it not a double standard?

    This blog from very beginning is trying to attack Prabhat Khabar for some reasons known to it only and I would like to convey to the moderator and all other readers that please be factual and not arbitrator in making any decision and coming to ay conclusions.

    Regards

    Raj Agarwal

  • Sudesh said:

    जो सच है वह सामने आएगा ही। इसमें समझाने या नहीं समझाने की तो मैं कोई जरूरत महसूस नहीं करता हूं। लेकिन यही बात क्या आप साढ़े चार पहले कहने की स्थिति में थे।
    धन्यवाद

  • Mohalla Live » Blog Archive » प्रभात खबर का बॉटम : सॉफ्ट पॉर्न या सच्‍ची सूचना? said:

    [...] उत्तेजक ख़बर है। एक दिन पहले हमने बताया था कि कैसे एक मामूली ख़बर को विशिष्‍ट [...]

  • NANDAN said:

    Thanks 2 Mr RAJ AGRWAL 2 highlitig the actual truth ob bihar,

    Pls Give ur contact no or E-mail ID.
    TX

  • NANDAN said:

    What a write-up Raj Agrwalji,
    Plz give ur contact no or e-mail ID.
    Tx

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