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इलाहाबाद में “मुन्नी मोबाइल” का लोकार्पण

22 December 2009 One Comment
munnimobile@allahabad1

पत्रकार प्रदीप सौरभ के पहले उपन्यास मुन्नी मोबाइल का आज इलाहाबाद में लोकार्पण हुआ। आलोचक प्रोफेसर राजेंद्र कुमार ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के निराला सभागार में लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता की। प्रोफेसर राजेंद्र कुमार बहुवचन पत्रिका के संपादक भी हैं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भूमंडलीकरण समाज को जोड़ता नहीं बल्कि बांटता है। एक नहीं होने देता। और सांप्रदायिकता भी यही काम करती है। इन दोनों संदर्भों में प्रदीप सौरभ का उपन्यास मुन्नी मोबाइल काफी अहम है। यह उपन्यास सांप्रदायिकता और भूमंडलीकरण, दोनों के ख़तरों से लोगों को आगाह करता था। प्रोफेसर राजेंद्र कुमार ने यह भी कहा कि मीडिया में रहते हुए यथार्थ को सामने लाना किसी चुनौती से कम नहीं। वह भी तब जब कहा जा रहा हो कि मीडिया बाज़ार की रखैल है।

मुन्नी मोबाइल पर कवि-पत्रकार अजामिल ने भी अपनी बात रखी। वरिष्ठ पत्रकार गोपाल रंजन ने भी दो शब्द कहे। इस मौके पर प्रदीप सौरभ ने अपनी तरफ से उपन्यास के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गुजरात में रहते हुए उन्होंने जो रिपोर्टिंग की और उस दौरान उन्हें जो सच दिखाई दिया, उसी अनुभव को उन्होंने पन्नों पर उकेर दिया है। इस मौके पर उन्होंने इलाहाबाद में बिताये दिनों को दिल से याद किया। लोकार्पण समारोह में श्याम कृष्ण पांडे, हिमांशु रंजन, डॉक्टर अजय जेतली समेत इलाहाबाद की कई जानीमानी हस्तियां मौजूद रहीं।

munnimobile@allahabad

One Comment »

  • M Venkateshwar said:

    वर्तमान सन्दर्भों में संप्रदायिक्ता के घिनौने स्वरुउप का पर्दाफ़ाश करने वाले ऐसे उपन्यास का समस्त भारतीय पाठक वर्ग स्वागत करेगा . हमें ऐसे ही सामाजिक
    सरोकार से युक्त कथासाहित्य की नितान्त आवश्यकता है . गुजरात मे हुए प्रायोजित नरमेध का साहित्यिक प्रलेखीकरण एक पत्रकार लेखक ही कर सकता है जिसे प्रदीप जी ने किया है. समीक्षाएं तो हल लोग पढ रहे हैं उपन्यास के मूल पाठ को पढने को लालायित हैं . जल्द से जल्द उपन्यास प्राप्त्करने के प्रयास में हैं. प्रदीप जी को बधाई .
    एम वेंकटेश्वर

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