हैरान मत होइए, नारायण के साथ है “नई दुनिया”

एनडी तिवारी के स्टिंग की कुछ तस्‍वीरें, जो इन दिनों सर्कुलेशन में है और जिन तस्‍वीरों की सच्‍चाई पर नई दुनिया को शक है (कुछ तस्‍वीरें इतनी शर्मनाक हैं कि उसे छापने के लिए बड़ी हिम्‍मत चाहिए, जो इस वक्‍त मोहल्‍ला लाइव के पास नहीं है)…

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जब पूरा देश आंध्र के राजभवन में एक पतित परिघटना पर हैरान है, एक अख़बार है, जो उसको भी जस्‍टीफाई करने की कोशिश में है। एक संवैधानिक जगह पर अय्याशियों को लेकर उस अख़बार ने अपना रुख़ तो नहीं ही रखा है, बल्कि इसके पर्दाफ़ाश के पीछे वो राजनीतिक साज़‍िश बता रहा है। आपने अंदाज़ा लगा लिया होगा कि उस अख़बार का नाम है नई दुनिया। वही नई दुनिया, जो पुरानी कांग्रेस पार्टी के मुखपत्र की तरह दिल्‍ली से निकल रही है। उसमें हर हफ्ते तीन से चार दिन मामूली आयोजनों में शामिल राष्‍ट्रपति की तस्‍वीरें ग़ैरमामूली ढंग से छापी जाती हैं और हर सरकारी पहलक़दमी को ऐतिहासिक और अनिवार्य बता कर संपादकीय लिखे जाते हैं। यह वही अख़बार है, जिसमें अरूंधती रॉय जैसी दिलेर महिला लेखिका को अंग्रेज़ी की बदौलत विचारों की अय्याशी करने वाली लेखिका बताया जाता है। इस अख़बार ने एनडी तिवारी के सेक्‍स सीडी कांड को लेकर जो बहस छेड़ी है, उसका कुल जमा मतलब है कि कांग्रेस को इस मामले में स्‍टैंड लेने के लिए दलीलों का हथियार कैसे सौंपा जाए।

इस मामले में इस अख़बार ने संपादकीय लिखा, जिसका लब्‍बोलुआब यह है कि आजाद भारत में पहली बार एक इतने बड़े और बुजुर्ग नेता को सेक्स के आरोप में अपना पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। इस बुजुर्ग नेता को संदेह का लाभ तक नहीं दिया गया। कोई औपचारिक-अनौपचारिक स्पष्टीकरण तक नहीं मांगा गया। सच को सामने लाने के लिए जरा सा वक्त तक नहीं दिया गया। संपादकीय में यह पंक्ति भी लिखी गयी है कि वैसे कंप्यूटर के युग में किसी की भी नकली सीडी बनाकर उसे फंसाया जा सकता है। संपादकीय में नई दुनिया ने संजय जोशी के प्रकरण को याद किया है और लिखा है कि भारतीय जनता पार्टी के पूर्व महासचिव संजय जोशी की ऐसी ही एक सीडी फोरेंसिक जांच में नकली निकली।

जिस दिन नारायण दत्त तिवारी ने इस्‍तीफा दिया, उसी दिन पहले पन्‍ने पर विनोद अग्निहोत्री नाम के एक पत्रकार ने बॉट‍म में अंदाज़ा लगाया है कि इस सीडी कांड के पीछे आंध्र का सत्ता संघर्ष हो सकता है। अग्निहोत्री ने लिखा है : इसमें तिवारी के कुछ कथित करीबियों के शामिल होने का शक है। तिवारी के साथ काम कर चुके एक अधिकारी के मुताबिक उत्तराखंड से ही तिवारी के इर्द गिर्द कुछ स्वार्थी तत्वों ने घेरा डाला हुआ था। सीडी कांड की सूत्रधार महिला का देहरादून, दिल्ली और हैदराबाद के हाई प्रोफाइल लोगों के बीच आना जाना है। तिवारी और उनके स्टाफ से उसका संपर्क देहरादून से है। मूल रूप से आंध्र की रहने वाली इस महिला के राज्य की राजनीति के कुछ ताकतवर नेताओं से भी करीबी रिश्ते हैं। आंध्र के राजभवन में तिवारी के आने के बाद यहां भी उसका आना जाना रहा। उसके जरिये कुछ लोग राज्य में खदानों की लीज पाने के लिए तिवारी पर दबाव डाल रहे थे जिन पर करो़ड़ों की काली कमाई है लेकिन तिवारी नहीं माने।

ND Tiwari in naiduniaअगले पाराग्राफ में अग्निहोत्री लिखते हैं : आंध्र की उबलती राजनीति ने भी तिवारी को जला दिया। राज्य के दिवंगत मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी के साथ तिवारी के रिश्ते बेहद अच्छे थे। लेकिन रेड्डी की मौत के बाद चले सत्ता संघर्ष में तिवारी ने पार्टी बनने से इनकार कर दिया, जिसकी वजह से राज्य की राजनीति का एक ताकतवर खेमा तिवारी से नाराज था।

इन ख़बरों को लिखते वक्‍़त इतनी चतुराई ज़रूर बरती गयी है कि पाठक अख़बार को कम से कम अनैतिक न मानें। लेकिन निहितार्थ यही कि आंध्र में जो हुआ, वो ग़लत था। और पत्रकारिता को कम से कम सनसनी की ये राह नहीं पकड़नी चाहिए थी।

आप लोग क्‍या कहते हैं?

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