राजनीतिक उपलब्धि सत्ता के सहारे ही महिमामंडित होती है
बिहार के नालंदा जिले में जन्मे अजीत कुमार ने अपने करियर की शुरुआत सीएनबीसी टीवी 18 मुंबई से की। दिल्ली में आईएएनएस, ईटी हिंदी के बाद इन दिनों एक ब्रोकरेज हाउस में काम कर रहे हैं। अजीत जी से aboutajeet@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।
♦ अजीत कुमार
दिलीप जी, ज्योति बसु पर आपका लिखा दो खंड पढ़ चुका हूं। शायद आप अगले तीन खंडों में और भी लिखेंगे। लिख रहा हूं, लेकिन बड़ी बेबसी में हूं। न तो आपकी बातों को पूरी तरह से नकार सकता हूं और न पूरी तरह से स्वीकार कर सकता हूं। जहां तक मरने के बाद विभिन्न नेताओं और उद्योगपतियों की तरफ से आये निर्दोष बयान का मामला है। यह तो हमारे यहां परिपाटी बन चुकी है कि देहांत के तुरंत बाद उस व्यक्ति की आलोचना से एक हद तक बचा जाए। भाजपा के नेताओं की तरफ से भी आलोचना के स्वर न आने के पीछे भी सिर्फ एक परिपाटी का चलन ही है। इसी परिपाटी के चलते ही और भी नेताओं, संगठनों व सम्मानित जनों द्वारा आलोचना से गुरेज किया गया है। खैर इस मौके पर भी आपकी आलोचना से मैं असहमत नहीं हूं। यह तो व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है कि वह परिपाटी का मान या सम्मान करे। दूसरी बात आपने कही है कि मरणोपरांत ज्योति बसु जैसा महिमामंडन देश में किसी अन्य वामपंथी या प्रगतिशील नेता का नहीं हुआ। क्या आपको इस देश में ज्योति बसु के कद का कोई दूसरा वामपंथी व राजनीतिक नेता नजर आया? 23 सालों से ज्यादा किसी प्रदेश का मुख्यमंत्रीी रहना अपने आपमें में ही एक बहुत बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है। देखिए मंडल जी, यहां पर मैंने राजनीतिक उपलब्धि की चर्चा की है, न कि उनके विकास पुरुष होने की। विचारधारा और पार्टी से इतर भी चले जाएं तो सिर्फ सत्ता में हिस्सेदारी की बिना पर राजनेताओं को पहले भी महिमामंडित किया जाता रहा है। नेहरु खानदान का प्रशस्ति पत्र रचने के पीछे राजनीतिक सत्ता नहीं तो और फिर क्या है। विकास के प्रतिमानों पर अपने पड़ोसी देश चीन, जापान और अन्य देशों की तुलना में अगर भारत को रखें तो कांग्रेस पार्टी और नेहरु खानदान के योगदान आपको बहुत कमेतर लगेंगे। धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक समरसता, और दलित उत्थान को लेकर भी कांग्रेस का राज्य और केंद्रीय शासन किसी भी सूरत से संतोषजनक नहीं कहा जा सकता। फिर भी इस देश में नेहरु इंदिरा और राजीव गांधी के शान में अनवरत कसीदे पढ़े जा रहे हैं। वर्तमान को ही ले लें, तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी का इस देश को क्या योगदान है, लेकिन विरासत के आभा लोक में मीडिया मां-बेटे को राष्ट्रमाता से लेकर विकासपुरुष और न जाने क्या-क्या विशेषणों से महिमामंडित कर रहा है। प्रदेश स्तर की राजनीति को भी देखें, तो श्रीकृष्ण सिंह, एमजी रामचंद्रन, बीजू पटनायक जैसे नेताओं का महिमामंडन लंबे अरसे तक सत्ता का नेतृत्व करने की बिना पर ही है। मौजूदा राजनेताओं में भी लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव, मायावती, करूणानिधि, मायावती उन राजनीतिक हस्तियों में हैं, जिनके महिमामंडन का बड़ा आधार सत्ता में उनकी लंबे अरसे तक हिस्सेदारी है। अगर विकास के प्रतिमानों की बात की जाए, तो ऊपर के तमाम नेताओं का योगदान बहुत उल्लेखनीय नहीं कहा जाएगा।









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[...] के सहारे ही महिमामंडित होती है [23 Jan 2010 | One Comment | ] अजीत कुमार ♦ बड़ी बेबसी में हूं। न [...]
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