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ठग है, दीवालिया है, झूठा है और पद्म भूषण है

27 January 2010 7 Comments

♦ आलोक तोमर

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एक आदमी कुछ महीने पहले तक केंद्रीय जांच ब्यूरो का अभियुक्त था। लगभग 90 लाख डॉलर बैंक से ठगने के इल्जाम में उससे पूछताछ की जा रही थी और एक बार मुंबई में उसे गिरफ्तार कर के जमानत पर छोड़ा गया था। इस आदमी को पद्म भूषण दिये जाने की घोषणा की गयी है। इस आदमी का नाम है संत सिंह चटवाल। वह अमेरिकी नागरिक है और बांबे पैलेस के नाम से रेस्टारेंट और हैंप शायर के नाम से बहुत सारे होटल चलाने वाला अरबपति है। ऐसा पहली बार हुआ है।

चटवाल अपने आपको भारतीय नौसेना का भूतपूर्व पायलट बताता है, मगर इस बारे में नौसेना के रिकॉर्ड में कोई जानकारी नहीं है। चटवाल ने अपना जीवन परिचय दिया है, उसके अनुसार इथोपिया की राजधानी आदिस अवाबा में जा कर उसने भारतीय खाने के होटल खोले थे मगर 1975 में वहां राजतंत्र खत्म कर दिया गया और चटवाल की संपत्ति भी जब्त हो गयी। फिर भी वह इतना पैसा अपने साथ ले गया था कि कनाडा के मांट्रियल शहर में एक रेस्टोरेंट खोल दिया।

1979 में चटवाल न्यूयार्क चला गया और वहां बांबे पैलेस रेस्टोरेंट खोला जो अब दुनिया के कई देशों में मौजूद है और दिल्ली में भी उसका इसी नाम से रेस्टोरेंट चलता है। अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के करीब रह चुका चटवाल उनके चुनाव अभियान में मोटा चंदा दे चुका है। क्लिंटन के साथ कई बार भारत आया है और क्लिंटन न्यास का सचिव भी है। एक बार अपने आपको दीवालिया घोषित कर चुका है।

अमेरिका के बैंकों का कहना है कि चटवाल बैंकों के पैसे हजम करने के लिए अपने आपको बार-बार दीवालिया घोषित करता है। भारत के कई बैंकों के साथ भी वह यही हरकत कर चुका है और इसी सिलसिले में सीबीआई ने उस पर मुकदमा चलाया था। बाद में चटवाल के संपर्कों के कारण यह मुकदमा वापस ले लिया गया। भारतीय बैंकों का करोड़ों रुपये आज भी उस पर उधार है।

पद्म पुरस्कारों का नियम है कि पुरस्कार पाने वाले पर कोई आपराधिक मुकदमा नहीं चल रहा हो, उसने अपने जीवन परिचय में सही जानकारी दी हो, कभी दीवालिया या पागल न हुआ हो, दुनिया की किसी अदालत में दोषी न हो और आयकर का नियमित भुगतान कर रहा हो। इनमें से पागल होने के प्रावधान के अलावा सारे प्रतिबंध संत सिंह चटवाल लागू होते हैं। इतना ही नहीं संत सिंह चटवाल ने अपना कारोबार सुरक्षित रखने के लिए होटलों की एक शृंखला अपने बेटे विक्रम के नाम खोल दी है और विक्रम का नाम भी इतनी कम उम्र में उसके प्रेम प्रसंगों और नंगी तस्वीरों के लिए कुख्यात हो चुका है।

संत सिंह चटवाल जाहिर है कि बहुत प्रतिभाशाली है। तभी अमेरिका और भारत का कानून उन्हें कुछ नहीं बिगाड़ पाया। मगर चार्ल्स शोभराज भी कम प्रतिभाशाली नहीं हैं और वह भी पिता की ओर से भारतीय मूल के हैं। इससे क्या हुआ कि उनके खिलाफ भारत में बहुत सारे मुकदमे चल चुके हैं और एक बार वह जेल तोड़ कर फरार भी हो चुके हैं। चार्ल्स शोभराज की प्रतिभा से भारत की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी भी काफी प्रभावित रही हैं और आज से पच्चीस साल पहले उन्होंने चार्ल्स शोभराज को अपने ज्ञान का वितरण करने के लिए बिजली से चलने वाला टाइपराइटर उपलब्ध करवाया था। अगर कंप्यूटर और इंटरनेट का जमाना रहा होता तो वह भी चार्ल्स को मिल जाता।

अब चटवाल को सम्मानित कर के भारत सरकार ने साबित कर दिया है कि उसे किसी के अतीत की कोई परवाह नहीं हैं और यह भी साबित हो गया है कि भारत में पद्म पुरस्कार किसी की योग्यताओं के आधार पर नहीं बल्कि संपर्क के आधार पर बांटे जाते हैं। मनमोहन सिंह ने कुछ दिन पहले कहा था कि छोटी मछलियों को पकड़ने से कुछ नहीं होगा, बड़ी मछली पकड़नी चाहिए। हमें नहीं मालूम था कि वे सम्मानित करने के लिए बड़ी मछलियां खोज रहे हैं।

इस खबर के बाद की कड़ी पढ़ने के लिए क्लिक करें : बोफोर्स से भी बड़ा है पद्म भूषण चटवाल का घोटाला

Alok Tomar(आलोक तोमर। युवा तेवर वाले वरिष्‍ठ जुझारू पत्रकार। जनसत्ता से पत्रकारीय फलक का विस्‍तार। राजनीति से लेकर अंडरवर्ल्‍ड तक पर उन्‍होंने कलम चलायी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के काफी नजदीक रहे। फिलहाल सीएनईबी न्‍यूज चैनल से जुड़े हैं। उनसे aloktomar@hotmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

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7 Comments »

  • अंशुमाली रस्तोगी said:

    अपने हिंदी साहित्य और राजनीति में पुरस्कार प्राप्ति की डगर बहुत आसान है। अगर आप हस्ती हैं और जोड़-जुगाड़ में माहिर तो हर पुरस्कार आपका।

    हमारे यहां साहित्यकारों और राजनेताओं ने सामाजिक क्रांतियां करना इसलिए बंद कर दिया है क्योंकि उन्हें ‘पुरस्कार क्रांति’ से ही फुर्सत नहीं मिल पाती।

  • Mohalla Live » Blog Archive » बोफोर्स से भी बड़ा है पद्म भूषण चटवाल का घोटाला said:

    [...] इस खबर से पहले की कड़ी पढ़ने के लिए क्लिक करें : ठग है, दीवालिया है, झूठा है और पद्म भूषण… [...]

  • sandeep said:

    yrajya ke dwara prasatipatra hai ye puraskaar

  • krishna kumar mishra said:

    अब इससे तो हमारी सरकार की मनसिक स्थिति का पता तो चल ही जाता है!

  • विवेक said:

    कवियों की छोडिए

    कुत्ते भी जहां पा जाते हैं पदक

    कभी नहीं सुना गया

    किसि शराबी को पुरस्कृत किया गया(साभार-कृष्ण कल्पित)

  • jawahar choudhary said:

    पद्म पुरस्कारों की साख गिरी है ।
    चटवाल और सैफअली खान को पद्मभूषण या पद्मश्री देना शर्मनाक है ।
    विश्वास के संकट से अब कुछ भी बच नहीं पा रहा है ।
    नेता जनता को मूर्ख समझ रहे हैं या फिर अब वे ढीठ हो गए हैं ।
    संसद को निर्लज्जों की सराय बना दिया गया है !!
    शेम …शेम …शेम…

  • एक पद्म पुरस्कार जो मुझे मिलते-मिलते रह गया! | हिन्दीलैंड.कॉम | Hindi Land said:

    [...] मैं मुँह छिपाए फिरता. लोग मुझे भी ठग, झूठा, दीवालिया समझते. सेटिंगबाज किस्म के बॉलीवुड का [...]

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