बोफोर्स से भी बड़ा है पद्म भूषण चटवाल का घोटाला
♦ आलोक तोमर

संत सिंह चटवाल और चाहे जो हो सकते हैं, मगर संत तो कतई नहीं है। सरदार चटवाल को सरदार मनमोहन सिंह की सरकार ने भारत का विभूषण माना और पद्म भूषण सम्मान दिया तो इसमें न सिर्फ संविधान का उल्लंघन हुआ है, न सिर्फ भारत की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई का अपमान हुआ है बल्कि कानून को सरकार ने तोड़ा है। चटवाल का पद्म भूषण अगर वापस नहीं लिया गया तो गृह मंत्री चिदंबरम और चटवाल का नाम प्रस्तावित करने वाले प्रवासी भारतीयों के मंत्रालयों को आसानी से सर्वोच्च न्यायालय में खड़ा कर के जवाब मांगा जा सकता है। मांगा क्या जा सकता है, मांगा जाना चाहिए।
अपना चटवाल ने कुछ नहीं बिगाड़ा। उनके बांबे पैलेस में शाकाहारी खाना भी काफी लजीज मिलता है और लंदन का उनका हैंपशायर होटल पाउंड्स कम पड़ जाने पर रुपये में भी भुगतान लेने की कृपा कर चुका है। पता नहीं, इसे रिजर्व बैंक के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा या नहीं, मगर माना गया तो अभियुक्त अपन भी हैं। पद्म पुरस्कारों की अभी सिर्फ घोषणा हुई है और वे अप्रैल में दिये जाएंगे।
कांग्रेस पार्टी से इस बारे में सवाल किये जाने पर उसके प्रवक्ताओं का कहना है कि गृह मंत्रालय यह सम्मान देता है और आपको सवाल करना है तो उससे कीजिए। ठीक है उनसे भी कर लेंगे। अपने देश में सूचना के अधिकार का कानून है। लेकिन सीबीआई एक ठग को भारत के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से नब्बे लाख डॉलर ठगने के आरोप में अदालत में बाकायदा चार्जशीट दाखिल करती है तो यह मामला सिर्फ आरोप का नहीं रह जाता। चार्जशीट अदालती दस्तावेज होती है। चटवाल के खिलाफ अदालत ने फैसला क्यों नहीं दिया और सीबीआई ने सरकार के कहने के कारण उसका विरोध क्यों नहीं किया, यह कहानी अलग है, मगर चटवाल मुंबई मे जब गिरफ्तार हुआ था और जमानत पर छूटा था, तो उस पर देश से बाहर नहीं जाने का प्रतिबंध लगाया गया था, फिर भी वह भाग गया था।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने शिकायत दर्ज करवायी थी कि चटवाल ने बैंक की न्यूयॉर्क शाखा से नब्बे लाख डॉलर का कर्ज लिया था और उसे वापस करने की बजाय जिस कंपनी के नाम पर कर्ज लिया गया था, उसे ही खत्म कर दिया। अब यह भी पता लग गया है कि 21 लाख डॉलर उसने हिलेरी क्लिंटन को भेंट किये थे और यह रकम चौदह कंपनियों के बैंक खातों से निकाली गयी थी, जिनमें से एक वह भी है, जिसे स्टेट बैंक ने कर्ज दिया था। इस हिसाब से क्लिंटन परिवार भी इस ठगी का एक अभियुक्त है। अमेरिका में तीन करोड़ डॉलर का टैक्स बचाने के लिए उसने अपनी दो और कंपनियों को दिवालिया घोषित कर दिया।
क्लिंटन से चटवाल का काफी संदिग्ध किस्म का रिश्ता है। न्यूयॉर्क में चटवाल का घर भी है, लेकिन वह व्हाइट हाउस में क्लिंटन के जमाने में जा कर सोता रहा है। क्लिंटन ने जितनी दावतें दीं, उनमें चटवाल मौजूद रहा। एक दावत तो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में दी गयी थी। रही बात लेन देन की, तो चटवाल ने हिलेरी को दिये गये अपने पैसे एक टिकट ले कर आयोजित किये जाने वाले डिनर में शामिल हो कर वसूल लिये। इस डिनर से चटवाल ने पचास लाख डॉलर कमाये थे।
1996 में चटवाल जब सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किया गया, तो उसने कहा कि उसके नाम पर खाते में सिर्फ 2600 डॉलर हैं और उसके पास कोई क्रेडिट कार्ड नहीं है। 1996 में ही अमेरिका के फैडरल बीमा निगम ने फस्र्ट न्यूयॉर्क बैंक से चटवाल द्वारा 2 करोड़ 50 लाख डॉलर ले कर हड़पने का आरोप लगाया था। चटवाल खुद इस बैंक का डायरेक्टर था और खुद अपने आपको कर्ज दे डाला। इस कर्ज की किसी ने कोई गारंटी भी नहीं दी थी। चटवाल ने ऐसे फर्जी कर्ज इतने दिलवाये कि बैंक ही डूब गया और चटवाल हमारे पद्म भूषण हैं।
मजेदार बात यह है कि मुंबई की अदालत ने जब चटवाल को जमानत दी थी तो 32610 डॉलर का बांड लिया था। जिस आदमी के खाते में 2600 डॉलर हो, उसने इतने पैसे कहां से जुगाड़े? इसका जवाब अब गृह मंत्रालय को देना पड़ेगा। चटवाल ने अपील करने के लिए दस दिन का वक्त मांगा था और आम तौर पर किसी अभियुक्त को देश छोडऩे का प्रतिबंध किसी समय सीमा में नहीं बांधा जाता, मगर चटवाल को अनुमति मिल गयी कि वह दस दिन बाद देश छोड़ सकता है। ठीक दसवें दिन रात एक बजे उसने उड़ान भरी और न्यूयॉर्क पहुंच गया। इसके बाद कभी गुजरात भूकंप पीडि़तों के लिए रकम जमा करने और कभी क्लिंटन की आधिकारिक यात्राओं में प्रतिनिधिमंडल के सदस्य की हैसियत से चटवाल कई बार भारत आया लेकिन वांछित अभियुक्त होने के बावजूद उसको पकडऩे की कोई कोशिश नहीं की गयी।
कायदा और परंपरा तो यही कहती है कि चटवाल का पद्म भूषण वापस लिया जाए, या जब वह राष्ट्रपति भवन में सज-धज कर व्यक्तिगत गुणों के लिए सम्मान लेने जा रहा हो, तो उसे दरवाजे पर ही पकड़ कर सीधे तिहाड़ जेल भेज दिया जाए। आखिर चटवाल ने जो घोटाला किया, वह बोफोर्स और बहुत सारे बड़े घोटालों से भी बड़ा है। लेकिन सरदार मनमोहन सिंह चटवाल से फोन पर बात करते रहते हैं और अपनी ग्लोबल अर्थव्यवस्था में उससे सलाह लेते रहते हैं।
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(आलोक तोमर। युवा तेवर वाले वरिष्ठ जुझारू पत्रकार। जनसत्ता से पत्रकारीय फलक का विस्तार। राजनीति से लेकर अंडरवर्ल्ड तक पर उन्होंने कलम चलायी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के काफी नजदीक रहे। फिलहाल सीएनईबी न्यूज चैनल से जुड़े हैं। उनसे aloktomar@hotmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)









फिर’ क्वात्रोची अंकल’ को तो भारत रत्न से नवाज़ देंगे एक दिन ये लोग .
chatval hi kyon atalvihari v manmohan ke doctor tak ko navaja gaya hai
hamari bharat sarkar k aakh pe kya patti bandhi hi? ki in fraud farji kam karne wale ko padmabhusan de rahi hi
100 me 90 baiemaan phir bhi mera desh mahan !!!!!!!!!
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