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सब कृष्ण कुमार वगैरह ने किया, वीएन राय पाक साफ!

31 January 2010 3 Comments

♦ दिलीप मंडल

Krishna Kumar

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर विभूति नारायण राय की मानें तो प्रोफेसर अनिल चमड़िया की नियुक्ति निरस्त करने का फैसला प्रोफेसर कृष्ण कुमार, मृणाल पांडे, गंगा प्रसाद विमल और एक्जिक्यूटिव कौंसिल के बाकी सदस्यों का था। उनका इस फैसले से कोई लेना देना नहीं है और वो तो दरअसल अनिल चमड़िया को लेकर आये थे और उनके हाथ में होता तो वो अनिल चमड़िया को कतई न हटाते।

वीएन राय के इस भोलेपन पर कौन न फिदा हो जाए? लेकिन वीएन राय, क्या आप ये बताएंगे कि…

1. दिल्ली में 13 जनवरी को हुई यूनिवर्सिटी की एक्जिक्यूटिव कौंसिल की बैठक में कौंसिल के सदस्यों से आपने अनिल चमड़िया की नियुक्ति के संदर्भ में क्या कहा था?

2. क्या आपने ये कहा था कि मैंने अनिल चमड़िया की नियुक्ति की थी और अब उसे कंफर्म किया जाना है?

3. या फिर आपने ये कहा था कि अनिल चमड़िया की नियुक्ति करके मैंने गलती कर दी और अब उसे सुधार करना है। या फिर आपने कुछ और कहा था? ये काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि तभी ये पता चल सकता है कि कौंसिल के सदस्यों ने ये फैसला किस पृष्ठभूमि में किया।

4. क्या आपको नहीं लगता कि किसी की नियुक्ति निरस्त करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का कम से कम एक मौका दिया जाना चाहिए?

5. क्या प्रोफेसर अनिल चमड़िया को ये मौका दिया गया, और अगर नहीं तो इसकी वजह क्या थी?

6. आपका ये कहना सही है कि एक्जिक्यूटिव कौंसिल सबसे ताकतवर संस्था है, लेकिन उसके सामने फैसला करने के लिए तथ्य कौन रखता है?

7. आप कहते हैं कि ईसी ने हटा दिया मैं क्या करूं, लेकिन आपने क्या ईसी को ये जानकारी दी थी कि अनिल चमड़िया की नियुक्ति का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है?

8. क्या आपने एक्जिक्यूटिव कौंसिल की बैठक में बताया कि किन नियमों के तहत आपने अनिल चमड़िया की नियुक्ति की थी?

9. आप कहते हैं कि “अगर ईसी ने अनिल चमड़िया की नियुक्ति को मानकों के हिसाब से नहीं पाया, तो इसमें मेरा दोष क्या है?” ईसी ने अगर प्रोफेसर नियुक्त करने के आपके तरीके पर इतना बड़ा सवाल खड़ा कर दिया तो आपको इस्तीफा नहीं देना चाहिए? प्रोफेसर की नियुक्ति कोई तमाशा नहीं है कि आपने मानकों को ध्यान में रखे बगैर नियुक्ति कर दी? छात्रों के भविष्य और एकेडमिक शुचिता के साथ आप इतना बड़ा खिलवाड़ कैसे कर सकते हैं? और ये सब करके आप अपने पद पर कैसे बने रह सकते हैं?

10. जब ईसी अनिल चमड़‍िया की नियुक्ति के आपके फैसले को मानकों के हिसाब से खारिज कर रही थी, तो आपका डिफेंस क्या था? या आपने अपना दोष कबूल कर लिया? ऐसी हालत में आप पर गलत नियुक्ति करने के लिए मुकदमा क्यों नहीं चलाया जाना चाहिए?

दरअसल इस मामले में सारी जिम्मेदारी प्रोफेसर कृष्ण कुमार, मृणाल पांडे, गंगा प्रसाद विमल और कौंसिल के दूसरे सदस्यों पर डालकर वीएन राय अपने लिए बचाव का पक्ष तैयार कर रहे हैं। ईसी के सदस्य खामोश रहकर इस अन्याय का समर्थन कर रहे हैं। उन्हें मुखर होकर सामने आना चाहिए।

dilip mandal(दिलीप मंडल। सीनियर टीवी जर्नलिस्‍ट। अख़बारों में नियमित स्‍तंभ लेखन। दलित मसलों पर लगातार सक्रिय। यात्रा प्रिय शगल। इन दिनों भारतीय जनसंचार संस्‍थान, नयी दिल्‍ली में रेगुलर क्‍लासेज़ ले रहे हैं। उनसे dilipcmandal@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

3 Comments »

  • दिनेश शर्मा said:

    सारे मौसेरे भाई इकट्ठा हो गये हैं।

  • संजय प्रणित said:

    सारे मौसेरे भाई यानी अंकित, विभूति और गैंग….

  • bikas said:

    Bhai patrata to upar se tapkati hai kya? VN Rai ki kya patrata hai, jo VC ban gaya. samjvadi party aur congress ki chamchagiri ke alava VC banane layak kya kiya tha inhone. ek din campus ka anubhav nahi tha inko

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