वर्मा विभूति के साथ, अरुंधती विरोध में
लाल बहादुर वर्मा वैसे तो भारत में समाजवादी क्रांति करना चाहते हैं लेकिन क्या करे कोई अगर क्रांति का रास्ता हरियाणा पुलिस के स्टॉल से होकर गुजरता है। क्या करे कोई जब देश के इतिहासबोध पर व्यक्ति का भविष्यबोध भारी पड़े। दिल्ली के प्रगति मैदान में संवाद प्रकाशन के स्टॉल पर जब उनसे ये कहा गया कि प्रोफेसर अनिल चमड़िया की नियुक्ति निरस्त किये जाने और कुलपति वीएन राय के आचरण के खिलाफ क्या वे हस्ताक्षर अभियान में शामिल होना चाहेंगे, तो उन्होंने पूरे टेक्स्ट को गौर से पढ़ा। बार-बार पढ़ने के बाद उन्होंने कहा कि बाकी तो ठीक है लेकिन इसमें विभूति नारायण राय की भर्त्सना वाली बात क्यों है। अगर इसे हटा दिया जाए, तो ये ठीक रहेगा। कई लोगों की उपस्थिति में उन्होंने इसे फिर से ड्राफ्ट करने की सलाह भी दे डाली। जब उनसे ये कहा गया कि तटस्थ होना तो अपराध है, तो उन्होंने कहा कि ऐसा आपका सोचना है। इसके कुछ समय ही बाद वो एक और स्टॉल पर दिखे। आपको जानकर आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि वह स्टॉल हरियाणा पुलिस अकादमी का था, जहां शहर में कर्फ्यू समेत राय साहब की किताबें प्रमुखता से सजी हैं। हरियाणा पुलिस से विभूति नारायण राय का क्या संबंध हो सकता है, ये पता लगाने का दायित्व हम आप पर छोड़ते हैं : मॉडरेटर

सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों से लगभग ढाई दशक से लगातार जुड़े रहे पत्रकार और शिक्षक अनिल चमड़िया की महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में नियुक्ति रद्द किये जाने का हम विरोध करते हैं। हमारी मान्यता है कि प्रोफेसर अनिल चमड़िया को अपना पक्ष रखने का कम से कम एक मौका मिलना चाहिए। हम मांग करते हैं कि विश्वविद्यालय उन कारणों का खुलासा करे, जिसके आधार पर प्रोफेसर चमड़िया की नियुक्ति रद्द की गयी। हमारी मान्यता है कि विश्वविद्यालयों के कामकाज में पारदर्शिता होनी चाहिए और लोकतांत्रिक परंपराओं के मुताबिक उनका संचालन किया जाना चाहिए। अनिल चमड़िया की नियुक्ति रद्द किये जाने को हम एक मनमानी कार्रवाई मानते हैं और इसके लिए विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हैं। विश्वविद्यालय में दलित छात्रों और शिक्षकों के उत्पीड़न की भी हम निंदा करते हैं।

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लाल बहादुर वर्मा वैसे तो भारत में समाजवादी क्रांति करना चाहते हैं लेकिन क्या करे कोई अगर क्रांति का रास्ता हरियाणा पुलिस के स्टॉल से होकर गुजरता है। क्या करे कोई जब देश के इतिहासबोध पर व्यक्ति का भविष्यबोध भारी पड़े। दिल्ली के प्रगति मैदान में संवाद प्रकाशन के स्टॉल पर जब उनसे ये कहा गया कि प्रोफेसर अनिल चमड़िया की नियुक्ति निरस्त किये जाने और कुलपति वीएन राय के आचरण के खिलाफ क्या वे हस्ताक्षर अभियान में शामिल होना चाहेंगे, तो उन्होंने पूरे टेक्स्ट को गौर से पढ़ा। बार-बार पढ़ने के बाद उन्होंने कहा कि बाकी तो ठीक है लेकिन इसमें विभूति नारायण राय की भर्त्सना वाली बात क्यों है। अगर इसे हटा दिया जाए, तो ये ठीक रहेगा। कई लोगों की उपस्थिति में उन्होंने इसे फिर से ड्राफ्ट करने की सलाह भी दे डाली। जब उनसे ये कहा गया कि तटस्थ होना तो अपराध है, तो उन्होंने कहा कि ऐसा आपका सोचना है। इसके कुछ समय ही बाद वो एक और स्टॉल पर दिखे। आपको जानकर आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि वह स्टॉल हरियाणा पुलिस अकादमी का था, जहां शहर में कर्फ्यू समेत राय साहब की किताबें प्रमुखता से सजी हैं। हरियाणा पुलिस से विभूति नारायण राय का क्या संबंध हो सकता है, ये पता लगाने का दायित्व हम आप पर छोड़ते हैं : मॉडरेटर







वर्चुअल स्पेस में लिखकर-कमेंट करके विरोध दर्ज करा चुका हूं। जल्द ही कागज पर भी। कल पुस्तक मेले में मिलने पर।.
जिस तरह भी संभव हो मेरे भी हस्ताक्षर दर्ज़ किए/कराएं जाएं। इसके लिए अगर कहीं आने की ज़रुरत है तो मैं आ जाऊंगा।
आपका विरोध जबरन है और जबरदस्ती करवाया जा रहा है जोलोग आपके साथ नहीं उन्हे आप महिमां मंडित भी कर रहे हैं जैसे लाल बहादुर वर्मा का किया। अरुंधति क्या कहती हैं और उनकी बात की कितनी कीमत है वह तो उनका खुदा जानता है। बाकी तो आपका नेशनल इस्स्यु जिन्दा रहे और कितनी पोस्ट आप लोगों द्वारा डाली जानी है जिससे हवा बनेगी।
हमारा नाम भी शामिल कर लें ….हम भी उस भ्रष्टाचारी कुलपति के खिलाफ हैं जो एक योग्य पत्रकार और शिक्षक की बजाए एक नकलची के माध्यम से सैकड़ों युवाओं का भविष्य खराब का रहा है.
jo hamari tarah nahi sochta wo gunhagaar hai. aapki yah post usi duragrah ke saath hai. Lal Bahadur Verma ho ki koi aur agar koi aapsey ashamat hona chahey to wo manushya nahi hai. Bhai RSS waalo ki THOUGHT POLICE ab Camrade log bhi lekar ghum rahey hai. Meri tarah socho, mere jaisa bolo, mai jo kehta hun usey sach kaho. accha honey ki etni keemat jo dega wo khud ko kaise bachaiyega.
अविनाश जी,
इस पत्र को ऑनलाइन समर्थन. मुलाकात के साथ दस्तखत भी हाजिर होगा. आग्रह ये है कि पत्र में अनिल सर को सम्मान के साथ बहाल करने की बात शामिल की जाए और कपिल सिब्बल साहब को एक तय समय के बाद इसे सौंपकर उस पर कदम उठाने की मांग की जाए.
लालबहादुर वर्मा और विभूति नारायण राय का हरियाणा पुलिस अकादमी के साथ क्या संबंध है, इस संबंध में संक्षेप में मैं अपनी निजी जानकारी के आधार पर बता देता हूं।
देश के विभिन्न पुस्तक मेलों में हरियाणा पुलिस अकादमी का स्टॉल विकास नारायण राय के प्रयास से लगता है। विकास विभूति के छोटे भाई हैं और हरियाण पुलिस में संभवत: डीजी (होमगार्ड) हैं। इस स्टॉल पर मुख्यत: ‘साहित्य उपक्रम’ प्रकाशन की किताबें होती हैं। लालबहादुर बर्मा और विकास नारायण राय मिलकर इस प्रकाशन को चलाते हैं। और इसमें दो राय नहीं हो सकती, सस्ती और जनपक्षधर किताबें प्रकाशित करने की दिशा में इस प्रकाशन ने कीर्तिमान स्थापित किया है।
दूसरी बात, इस संदर्भ में जानने योग्य यह है कि विकास ‘प्रेमचंद से दोस्ती’ और ‘अंबेदकर से दोस्ती’ जैसे कार्यक्रम चलाते रहे हैं और उन्होंने हरियाणा में ही पाश पुस्तकालय की भी स्थापना की है। अभी तक के उनके कार्यकलापों पर कोई दाग नहीं है।
इसलिए बेहतर होगा कि, सिर्फ सहोदर भाई होने कारण विकास के कामों को उसी तराजू से न तोला जाए।
बहरहाल, यह बातें मैंने अपनी अल्प और निजी जानकारी के आधार पर तथा विकास नारायण राय के कामों के प्रति सदभावना के कारण कहीं हैं।
ye bataiye anil chamariya ki yogyata kya hai? kya we professor pad ki arhataon ko pura karte hain? jis aadmi ki yogyata kam hoti hai wahi rajniti karta rahta hai.
प्रभात जी, अगर आप सही कह रहे हैं तो कम योग्यता वाले एक व्यक्ति को प्रोफेसर जैसे एकेडमिक्स के शिखर पर बिठाने वाले वीसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उसके खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र के लिए धारा 120 ए, बी, सी के तहत मुकदमा कायम किया जाना चाहिए। ये धाराएं गैर जमानती हैं और आरोप साबित होने पर सात साल कैद का प्रावधान है। तो आप ऐसा मुकदमा करने वाले हैं? दरअसल आप घोर अज्ञानी और अनपढ़ हैं। विभूति नारायण राय जानते हैं कि अनिल चमड़िया में प्रोफेसर बनने की योग्यता है और वे मानदंडों पर खरे उतरते हैं। इसलिए कार्यकारिणी ने उन्हें हटाने का कोई कारण नहीं बताया है। अनिल चमड़िया ने कब कहा था कि वो पीएचडी या डी लिट हैं। देश में कितने ही प्रोफेसर हैं, जो पीएचडी नहीं हैं। आप जैसों से तो बात करना भी मुश्किल है। चोर गुरू के चेले ऐसे ही भोंदे हैं क्या?
Popins khaunga,uncle chips khaunga lekin sign nahi karoonga.
BJP ko vote dekar Congress ka hath majboot kare.
ये सिर्फ एक हस्ताक्षर अभियान नहीं है ,ये देश में वैचारिक अभिज्यातता के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा युद्ध है ,अनिल चमडिया को निकला जाना सिर्फ एक घटना नहीं है ,ये प्रतीक है देश के हर कोने में अयोग्य और नाकारा लोगों द्वारा छल एवं कपट से खुद को स्थापित किये जाने और योग्य एवं देश की नब्ज पहचानने वालों को हाशिये पर धकेल दिए जाने का |अनिल चमडिया तो सिर्फ उस रण का माध्यम बने हैं जो बहुप्रतीक्षित था |जिनमे समर्थ्य है वो इसे रोंक लें ,यहाँ इन्टरनेट पर छदम नामों से या फिर वर्धा में अपने तिकडमों से वो इसे प्रभावित करने की असफल कोशिश कर सकते हैं ,लेकिन वो आग जो देश के उन तमाम युवाओं के भीतर उमड़ रही है ,जिन्होंने हर पल कैम्पस के भीतर ही नहीं बाहर भी इस वैचारिक अभिज्यातता की वजह से चोट खायी है ,को कैसे कोई रोंक पायेगा ?
प्रमोद रंजन, एक भाई अंबेदकर से दोस्ती करता है, दूसरा भाई अंबेडकर परिनिर्वाण दिवस में शामिल होने के लिए प्रोफेसर कारुण्यकर को नोटिस देता है और कॉमरेड लाल बहादुर वर्मा तटस्थ रहते हैं। क्या तिकड़ी है। सुना है किसी भूमिहार पुत्री को साहित्य की किसी अकादमी में सेट करने की तैयारी है। नामवर ढोल बजाएं, संजीव और वर्मा जी भांगड़ा करें और प्रगतिशील बच्चा लोग जोर से ताली बजाओ, तो दारू मिलेगी। जनसंस्कृति के मैनेजर पांडे क्या करेंगे, ये अंदाजा लगाइए और रामजी इस मौके पर राय बनेंगे या नहीं, इस बात पर सट्टा खेलिए। नागार्जुन होते तो कूद-कूद कर इन्हें गालियां देते।
अविनाश जी, मैं समझता था कि आप केवल चेहरे से काले हैं, लेकिन विभूति नारायण राय के पीछे आप जिस कदर पड़े हैं, उससे जाहिर हो रहा है कि आपका दिल भी काला है। भोपाल में अपनी ही शिष्या से बलात्कार की कोशिश के आरोप में जब आपको दैनिक भास्कर से निकाला गया था, तब आपको कैसा लग रहा था। क्या विभूति पर लगाए जा रहे आरोप उससे भी शर्मनाक है।
अंकित-विभूति ने तुम्हारा काम देख लिया जगदीश। अब सो जाओ। वैसे जगदीश बाबू, आपको गोरे-काले का ये भेद आज नजर आ रहा है क्या इसलिए कि आज तुम्हारे अग्रजों की धुनाई हो रही है। तुम्हारे हिसाब से अविनाश को दिल का गोरा बनने के लिए क्या करना होगा। “विभूति” क्या गोरेपन की किसी क्रीम का नाम है जिसे वे चेहरे पर मल लें? वर्मा जी ने ये क्रीम लगाई तो सबने देखा कि चेहरा काला हो गया। वैसे पूरा शहर थू-थू कर रहा है विभूति के नाम पर। उससे कोई फेयरनेस क्रीम बन सकती है क्या? फेयर एंड लवली.
दोस्तो हिन्दी विश्वविद्यालय मे जो छात्र इस मसले पर कुछ बोल रहे हैं उनके विरुद्ध अंकित के चेले हस्ताक्षर करा रहें है सब आपलोगों ने सिखाया है वर्ना ये चैम्बर कभी नहीं छोड़े सुना कि वे छात्र जो इस अलोकतांत्रिक माहौल के खिलाफ खड़े हो रहे हैं उन पर कार्यवाही को लेकर हस्ताक्षर अभियान अंकित के चेलों ने चलाया है. इ सब आप लोग सिखा रहे हैं नहीं तो सर का पैर छूने के अलावा इ सब उ नहीं जानते थे.
mitron,
bhai, dost, staal, gora-kala, balatkar, jor-tor se samay bach jaye to thori bahas mudde par bhi kar lena. kripa kar yah tay kar lein ki bahas kis baaat par ho rahi hai
कौन योग्य है ? यह बड़ा प्रश्न है कि उसकी योग्यता किस पैमाने पर नापी जा रही है? दरअसल हम जिस देश में जी रहे हैं,वहां नियमों को लोगों के लिए नहीं बनाया जा रहा है,बल्कि लोगों को काट-छांट कर नियमानुसार काफी कुछ हद तक सत्ता के स्वादानुसार तैयार किया जा रहा है। यही कारण है जो तय नियमों यानी खांचों पर आपत्ति दिखाता है,उसे सत्ता से विरोध झेलना पड़ता है। अब आप चाहे अनिल चमड़िया हों या कोई और…सत्ता निर्मित खांचो को स्वीकार कर लीजिये,अपनी चेतना का गला घोंट दीजिये…सवाल न पूछिये…सत्ताप्रिय और सत्ता स्वीकार्य रहेंगे
Prabhash Joshi to Brahmin hote huye bhi kale the. zara is rahasya par bhi kuch prakash daliye,Jagdish ji.
अनिल जी आपको अविनाश से ज़्यादा घटिया,भ्रष्ट, चरित्रहीन और लिजलिजा वक़ील नहीं मिल सकता था। वर्मा जी से जब यह संवाद हुआ तो मैं उसी स्टाल पर था। यह आदमी बिलकुल झूठ बोल रहा है। वर्मा जी ने कहा था कि इसे एक व्यक्ति के ख़िलाफ़ अभियान की जगह विश्वविद्यालयों में पोस्टिंग के समय चलने वाले व्यापक दुराग्रह के ख़िलाफ़ अभियान बनाया जाना चाहिये। यह वहां खड़ा हें हें करता रहा और यहां आकर गंद फैला रहा है। एक ऐसे आदमी पर हमला जो नेट यूज़ तक नहीं करता कि वह यहां आकर जवाब दे सके।
जिसे ख़ुद बलात्कार के प्रयास और छेड़खानी के आरोप में विश्वविद्यालय और चैनल से निकाला गया हो, जिसके पुराने दोस्त उसके पतन और उससे मुक्ति पाने के संतोष को सार्वजनिक रूप से ब्लाग पर व्यक्त करते हों। जो उदयप्रकाश पर रातोरात स्टैण्ड बदल चुका हो। किराये और भोजन के लालच में इसी विभूति के बुलावे पर एलाहाबाद दौड़ा जाहो वह क्या नैतिकता सिखायेगा उस आदमी को जिसका घर एलाहाबाद के हर छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता, राजनैतिक लोगों और संस्कृतिकर्मियों के लिए खुला रहता हो और जिसने 50 सालों तक बेदाग़ रह कर छात्रों की एक ऐसी खेप पैदा की है जो नये समाज के निर्माण में लगी है।
और जिस जसम को गाली दे रहा है यह आदमी छद्म नाम रखकर उसी का पोस्टर सीने पर चिपकाये उस दिन हीरो बना घूम रहा था…
प्रमोद जी
साहित्य उपक्रम विकास नारायण राय का प्रकाशन है और इसमें वर्मा जी कि कोई भागीदारी नहीं है।
मैं इन सब के पीछे की वास्तविकता से तो परिचित नहीं हूँ. वर्धा में भाई राकेश शर्मा जी से एस.एम.एस भेज कर पूछा भी था. पर जवाब में प्रतीक्षारत हूँ.
जो भी हो पर, ये सब ठीक नहीं हो रहा. क्योंकि हिंदी पट्टी में इससे टूटन या बिखराव के संकेत नज़र आ रहे हैं. आखिर हमने साहित्य और सृजनधर्मिता से जुड़े संस्थान में भी राजनीति की कालिख पोत ही डाली. दोषी चाहे कोई भी हो, या कोई ना भी हो, फर्क ये पड़ता है कि इससे नुकसान तो हिंदी साहित्य और हम (बकौल प्रमोद भाई) अल्पसंख्यकों को, जो हिंदी से वावस्ता रखते हैं, हुआ है. कौन यहाँ दूध से धुला होता है या फिर कौन ये तय करेगा कि सत् और असत् क्या है?
अंत में केवल इतना ही कहूँगा कि अन्याय और गलत बातें कम से कम ना हों और इस महान भाषा को क्षति ना पहुंचे, या इसकी साख खराब हो.
दोस्तों, मैं भी नाजायज़ बातों के खिलाफ़ हूँ.बस इतना ही.
आलोकजी ने अपने युवादखल ब्लॉग पर आपका परिचय करवाया। वे प्रो.लालबहादुर वर्माजी के मित्र लगते है. मेरा ऐसा विश्वास है कि सच्चाई सामने आनी चाहिये। मै तो आप किसी को व्यक्तिगत तौर पर नही जानता। मगर पूरा माजरा क्या है?
DALIT NAHIN HAIN ANIL CHAMADIYA, WE BHUMIHAR JATI SE AATE HAIN
aap log jis dalit anil chamadiya ke liye ladai lai rahen hian, we dalit nahin hain. ye alag bat hai ki we in muddon par likhate rahen hain.
jis bhumihar vibhiti narayan rai ke khilaf aap log lad rahe hain. usi bhumihar jati ke ek gotra se aate hain anil chamadiya.
vishavash nahi hai to aap anil chamadiya ji se hi puchh len, we kis jati se aate hain.
aapke is saval par aapko unka bhashan sunane ko milega, unki jati nahi. kyoki jati chhupane se hi unki dalit type dukan chalati hai.
thanks.
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