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छात्रों ने अनिल चमड़‍िया को हटाये जाने की निंदा की

4 February 2010 14 Comments

वर्धा। 03.02.’10

Ambedkar Student Forum

आज दिनांक तीन फरवरी 2010 को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में अंबेडकर स्टूडेंट फोरम की केंद्रीय कार्यकारिणी की एक बैठक हुई। इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दलितविरोधी कार्यवाहियों के खिलाफ आंदोलन को और तेज करने की रूपरेखा पर विचार किया गया। फोरम की तरफ से एक निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसमें जनसंचार विभाग के प्रोफेसर अनिल चमड़िया को हटाये जाने की घोर भर्त्सना की गयी। निंदा प्रस्ताव में यह कहा गया कि प्रो अनिल चमड़िया देश के प्रतिष्ठित बुद्धिजीवी और पत्रकार हैं। वे लगातार दलित, शोषित और वंचित तबकों के लिए लिखते रहे हैं और आंदोलनो में हिस्सा भी लेते रहे हैं। हमेशा न्याय और सच का पक्ष लेने वाले प्रो चमड़िया विश्‍वविद्यालय में बेहद लोकप्रिय प्राध्यापक रहे हैं और छात्रों के अकादमिक विकास के लिए हमेशा तत्पर और सक्रिय रहे हैं। सामंती और जातिवादी कुलपति विभूति नरायण राय को यही रास नहीं आया और उन्होंने प्रो चमड़िया को साजिश के तहत विश्‍वविद्यालय से हटा दिया।

फोरम ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अंबेडकर की भूमि वर्धा में दलित विरोधी किसी भी कदम को हम और बर्दाश्‍त नहीं करेंगे। कार्यकारिणी ने प्रो चमड़िया के प्रति विश्‍वविद्यालय प्रशासन के इस जातिवादी और साजिशाना कदम के खिलाफ आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। आज से एक हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है जिसे राष्ट्रपति, मानव संसाधन विकास मंत्री और यूजीसी को भेजा जाएगा। फोरम ने विश्‍वविद्यालय के सभी छात्रों से यह अपील की है कि वे विश्वविद्यालय के छात्र विरोधी, सामंती नजरिये के खिलाफ एकजुट हों और विश्‍वविद्यालय के प्रत्येक कार्यक्रम का तब तक वहिष्‍कार करें जब तक एक लोकतांत्रिक स्थिति कायम नहीं की जाती। गौरतलब है कि पिछले दिनों आयोजित “कथा-समय” का भी फोरम के सदस्यों ने पूरी तरह वहिष्‍कार किया। इन स्थितियों के बने रहने तक विश्वविद्यालय के दलित छात्र विश्‍वविद्यालय में भविष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का भी वहिष्‍कार जारी रखेंगे। फोरम ने चेतावनी दी कि यदि प्रो अनिल चमड़िया को विश्‍वविद्यालय में वापस नहीं लाया गया तो यहां का दलित छात्र समुदाय चुप नहीं बैठेगा और आंदोलन को व्यापक स्तर पर छेड़ा जाएगा।

केंद्रीय सदस्य
अंबेडकर स्टूडेंट फोरम
महात्‍मा गांधी अंतर्राष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय

14 Comments »

  • suman said:

    दोस्तो हिन्दी विश्वविद्यालय मे जो छात्र इस मसले पर कुछ बोल रहे हैं उनके विरुद्ध अंकित के चेले हस्ताक्षर करा रहें है सब आपलोगों ने सिखाया है वर्ना ये चैम्बर कभी नहीं छोड़े सुना कि वे छात्र जो इस अलोकतांत्रिक माहौल के खिलाफ खड़े हो रहे हैं उन पर कार्यवाही को लेकर हस्ताक्षर अभियान अंकित के चेलों ने चलाया है. इ सब आप लोग सिखा रहे हैं नहीं तो सर का पैर छूने के अलावा इ सब उ नहीं जानते थे

  • एस मणि said:

    क्या ये सच है कि मृणाल पांडे, गंगा प्रसाद विमल, कृष्ण कुमार और विभूति नारायण राय ने जिस मीटिंग में अनिल चमड़िया को निकालने का फैसला किया उसी मीटिंग में चोर गुरू की नियुक्ति को ओके कर दिया गया। अगर ऐसा है तो इन सबको डूब मरना चाहिए। वर्धा या दिल्ली से खबर लेकर कोई स्थिति स्पष्ट कर सकता है क्या? फिर तो हम हस्ताक्षर नहीं करेंगे, इनके नाम पर थूकेंगे।

  • suman said:

    एस. मणि जी,
    यह सच है कि जुलाई में हुई कुल १२ नियुक्तियों में से ११ को ओके किया गया जिसमे अनिल राय अंकित भी थे. पर एक सच मैं और बताना चाहता हूँ कि पूरा मामला ही इसलिये था क्योंकि अनिल चमड़िया के रहते अनिल राय अंकित की कोई साख नहीं बन पा रही थी विश्वविद्यालय के छात्रों में जब भद्द पिट गयी अनिल अंकित की तो कुलपति ने एक हद तक इस मामले के पीछे चमड़िया का ही हाथ माना. कुछ छात्रों ने अनिल अंकित के कारनामे की महज सी.डी. देखी तो उन्हें निष्काषित करने की बात भी की गयी. और प्रायोजित ढंग से उन छात्रों पर छात्र मित्रों द्वारा ही अप्लिकेशन लिखवाया गया इसका ताकि सी.डी. देखने वालो या इस पर विश्वविद्यालय में बात करने वाले छात्रों को डराया जा सके प्रस्तुत है इस लिंक पर कुछ दस्तावेज-
    http://mgahv.blogspot.com/2009/12/blog-post_18.html

  • एस मणि said:

    थू!

    मैं बेहद दुखी हूं और अवसाद में हूं। अनिल चमड़िया के लिए नहीं। वर्धा के विद्यार्थियों और बाकी शिक्षकों के लिए। सुमन जी आप लोग हिम्मत न छोड़ना। सच की जीत होगी। अगर आप विद्यार्थी हो तो जमकर पढ़ाई करना और बेहतर नागरिक बनना। वर्धा ने आपको चोर भी दिखाया है और संघर्षशील इंसान भी। चुनना कि कैसा बनना है। ईश्वर आप लोगों को शक्ति दे। आमीन।

  • एस मणि said:

    मेरा हस्ताक्षर भी शामिल समझिए। इससे कुछ फर्क तो पड़ेगा। राय का विरोध करके मुझे अच्छा लगेगा।

  • alguram1 said:

    मणि जी थूकने से पहले गला साफ कर लीजिये. वरना ठुक खुद पर ही गिरेगा . ये जो सुमन है अध्यापक है वर्धा . में . थोरात के यहाँ चापलूसी करता था . इसके बाल वही कुकर्म करते -२ झड गए पर इसको नौकरी नहीं मिली . यहाँ किसी तरह जुगाद बैठा लिया चरण पकड़ कर. आजकल क्रांतिकारी हो गया है. वी एन राय का विरोधी हो गया है . वी एन राय को तो अपने कर्मो का तर्पद करना ही होगा ऐसी नियुक्ति करके .सुमन से पुछए की एस दी थोरात मुंबई वि वि में गेस्ट बनकर गए थे तो कहा रुके थे ताज होटल में मात्र ५०००० रु एक दिन का . कुलपति पर दबाब बनाकर . उनपर कलम क्यों नहीं चलता. नहीं चलेगा क्योकि अभी इसको fir naukari paanaa है. तो इसके liye jugaad rakhanaa jaroori है.
    rahee baat chamaadiyaa के तो inake kya lokpriyataa है sab jaanate है . kabhee aap mile तो bat हो. ya yadi वर्धा aaye तो dekhe .

  • suman said:

    ठुक की जगह थूक लिख लिजिये अलगू राम जी, गुस्से में की बोर्ड ठीक से दबाना मत भूलिये ये बहस है इसमे गुस्सा होने का क्या मामला और अलगू राम जी यहाँ सब लोग इसी पर बात कर रहे हैं कि जुगाड़ जैसी चीजें खत्म हो यदि यह नियुक्ति जुगाड़ से हुई तो जिम्मेदार कौन है कुलपति विभूति नारायण राय ही न और आप कुलपति के इतने करीबी लगते हैं कि आपको सब कुछ पता रहता है तो उनसे एक बार कहिये कि जुगाड़ तंत्र बंद करें और फेयर तरीका अपनायें वर्ना विरोध को कौन रोक पायेगा.

  • एस मणि said:

    अलगू राम जी, मेरी ये बात विभूति तक पहुंचाइए।

    विभूति जी, आप जानते ही हैं कि लगभग एक हजार किलोमीटर दूर से मेरे लिए वर्धा आना संभव नहीं है। आप अपनी बात साफ नहीं कर रहे हैं तो आपके पुराने प्रशंसकों के लिए भी मुश्किल स्थिति है। हम तो आपको शहर में कर्फ्यू के लिए जानते थे। उत्तर प्रदेश के हमारे और आपके साझा परिचितों का कहना है कि आपने दंगे रुकवा दिए थे। क्या पता था कि ऐसा समय भी आएगा, जब आपके नाम पर थूकने की नौबत आ जाएगी। आलोक धन्वा भी कह रहे थे कि वो आपके दिए पद और पैसे को स्वीकार नहीं करेंगे। राजेंद्र जी तक आपके विरोधी हो गए। आप तो नास्तिक हैं फिर भी मेरी प्रार्थना है कि ईश्वर आपको विवेक प्रदान करे।

  • alguram1 said:

    मि सुमन लाल गुस्स्सा मै क्यों करू. मेरा क्या नुक्सान है . अपने राम तो मस्ती करते है. हाँ जहा गलत लगता है वहा कुछ लिख पढ़ लेता हूँ. की बोर्ड का क्या दब ही गया तो आप जैसे सुधारक तो है न . जहा तक बात बहस की है तो कौन भाग रहा है. पर सही तथ्य तो सामने आये. दरअसल फर्जी क्रांत्कारियो से दूरी बनाकर रहता हूँ . आप खुद को देखे की आप कितने इमानदार है .जो काम आपके जिम्मे है उसे इमानदारी से करते है या …..

    काश कि मै भी कुलपति का करीबी होता और आज आपकी जगह मै भी मुफ्त का वेतन उठाता .अब आप जुगाड़ से आये है तो क्यों जुगाड़ का विरोध कर रहे है , यदि विरोध करना है तो आइये हमारे बीच इस्तीफा देकर तब पता चले कि कौन कितने पानी में है. दिन भर आप जो कम्पूटर पर बैठे रहते है वह हमलोग रोज देखते ही है .पर अपन को क्या . आये है चले जायेंगे जहा का दाना पानी मिलना होगा मिलेगा ही

  • suman said:

    हम तो टर्मिनेट किये जाने का इंतजार कर रहे हैं अलगू भईया, आप जैसे लोग ही बिभूति जी की मुखबिरी करते हैं. वेतन इस समय कितना मिल रहा है.

  • alguram1 said:

    मुझे आपके टर्मिनेसन से क्या लेना देना. आप अपने कुकर्मो का फल भोगेंगे. वेतन आपके वेतन का १/६. इसी में गुजारा कर रहा हु. काश कि आप वाला राजयोग होता

  • alguram1 said:

    मुखबिरी तो आपका काम है.यह काम आप आपने बखूबी किया बी थोरात के आने पर .आप अपने से ही पुछिये.थोरात से लेकर एल तक. हे क्रांतिकारी सुमन आखिर थोरात के बारे में भी तो लिखे . वहा आपकी कलम क्यों नहीं चलाती . देखए भाई इमानदारी का मतलब यह होता है कि हर गलत का विरोध हो . पर आप तो जातवाद भी कर रहे है है और क्रांति का भी दंभ भर रहे है आप अपने नाम का अर्थ तो जानते ही होंगे और उसका काम भी आप जैसे यही करते है जो हर लीडर करता है . हर गरीब का मलाई तो आप सब खा जाते हो. नारों के बल पर इससे बचिए

  • anil attri said:

    यह एक दूखद घटना है और क्‍या कहें…

  • अविनाश (author) said:

    इस पोस्‍ट पर सुमन नाम से जो कमेंट हैं, वो वर्धा विश्‍वविद्यालय से जुड़े सुनील कुमार सुमन का नहीं है। उन्‍होंने फोन करके बताया है कि इस बात को मॉडरेटर की हैसियत से मैं इसलिए स्‍पष्‍ट कर दूं क्‍योंकि उन्‍हें इस मामले में कमेंटेटर मान कर टार्गेट किया जा रहा है।

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