अनिल चमड़‍िया को निकाल कर गलती सुधार ली

VibhutiNarayanRaiaddressedHindiSamay

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा के कुलपति विभूति नारायण राय का यह इंटरव्‍यू पांच फरवरी की शाम साढ़े छह बजे से आठ बजे के बीच लिया गया। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में। इंटरव्‍यू जनतंत्र डॉट कॉम के संपादक समरेंद्र, वरिष्‍ठ पत्रकार दिलीप मंडल और मोहल्‍ला लाइव डॉट कॉम के मॉडरेटर अविनाश ने लिया। करीब चालीस मिनट की बातचीत रही और वर्धा विश्‍वविद्यालय से जुड़ी जगजाहिर विसंगतियों को लेकर सवाल-जवाब हुए। कुलपति ने धैर्यपूर्वक सबके जवाब दिये। एकाध बार माहौल में तल्‍खी भी आयी, लेकिन बातचीत में खलल लेकर नहीं। बातचीत में हमने कोई एडिटिंग नहीं की है। लंबा है, इसलिए इसे हम किस्‍तों में रखेंगे। पूरी बातचीत के बाद हम इसका ऑडियो वर्ज़न भी यूजर्स को मुहैया कराएंगे : मॉडरेटर

प्रोफेसर अनिल चमड़िया वाले मामले में क्या हुआ था?

अनिल चमड़िया का जो अप्वाइंट हुआ था। उस अप्वाइंटमेंट लेटर में लिखा हुआ था कि “दिस विल बी सब्जेक्ट टू अप्रूवल ऑफ ईसी (एक्जीक्यूटिव कौंसिल)”। ईसी की मंजूरी के बाद ही उनकी नियुक्ति प्रभावी होगी। उनके अप्वाइंटमेंट के बाद ईसी का गठन हुआ। 13 जनवरी को दिल्ली में बैठक हुई। वहां पर जितने लोगों का अप्वाइंटमेंट अनिल चमड़िया के साथ हुआ था, उन सभी लोगों का केस रखा गया। और ईसी ने अनिल चमड़िया को छोड़ कर बाकी सबका अप्रूवल कर दिया। इनका छोड़ दिया।

ईसी में कितने लोग थे?

12 या 13 थे। मुझे इक्जैक्ट तो याद नहीं। लेकिन 12-13 लोग थे।

ईसी के रिजेक्ट करने का आधार क्या था?

ईसी सारे रिकॉर्ड देखती है। सारे डॉक्यूमेंट देखती है। उसके बाद फैसला करती है।

तो क्या ईसी में आपने कुछ प्रस्ताव भी रखा था।

नहीं मैंने कोई प्रस्ताव नहीं रखा। मैंने उनके सामने यह रखा कि ये केसेज हैं… अप्वाइंटमेंट के। इनको मेरिट के आधार पर तय करना है।

ईसी कब कंस्टीट्यूट हुई थी।

ईसी… मुझे लगता कि हमारी 13 को मीटिंग हुई थी तो सात या फिर आठ (जनवरी) को ईसी का गठन हुआ था।

कितने लोग हैं ईसी में इस समय?

ईसी में इस समय… देखिए हमारी ईसी का फॉर्मेशन ऐसा होता है कि सात विजिटर के नॉमिनी होती हैं। तो सात उन्होंने विजिटर ने किये थे। उसमें एक विष्णु नागर जी ने पहले ही दिन.. जैसे ही सात या आठ तारीख को मैंने उनको फोन करके कहा कि आप हमारी ईसी के मेंबर हो गये हैं, उन्होंने कहा कि उनके लिए यह संभव नहीं हो पाएगा क्योंकि पिछली बार भी वो ईसी में हमारे थे और उनका कहना था कि ईसी की बैठक का शिड्यूल बहुत व्यस्त और थका देने वाला था.. तो वो इस बार नहीं रह पाएंगे। तो इस तरह से छह लोग बचे।

इस समय आपकी ईसी में सब मिला कर कितने लोग हैं।

आठ लोग हैं।

ये पूरी ईसी है?

नहीं, ये पूरी ईसी नहीं है। इसमें सात अध्यापक भी होने चाहिए। अध्यापक पिछले डेढ़, दो साल से नहीं हो पा रहे हैं हमारी ईसी में। उसकी वजह है कि उनकी सीनियॉरिटी को लेकर विवाद चल रहा है। जब तक वो हल नहीं हो जाता, वो ईसी में नहीं आ सकते। ये लगता है कि सवा साल तो मुझी को हो गया और ये मेरे आने के पहले से यानी लगभग दो साल से बिना अध्यापकों के… केवल विजिटर के नोमिनी की ईसी चल रही है।

ये जो एजेंडा में जब ये क्लॉज आया होगा, तो क्या आपने उनको (ईसी मेंबर्स को) इसके बारे में कोई बैकग्राउंडर दिया था?

बैकग्राउंडर दो होते हैं। एक तो विज्ञापन की कॉपी होती है। दूसरा यूजीसी की गाइडलाइंस होती हैं। ये दोनों बैकग्राउंडर उनके पास होते हैं।

ये वैकेंसी कब की थी। 1998, 2000 या फिर 2009 की?

यह मुझे याद नहीं। ये वैकेंसी… जिसमें अनिल चमड़िया हुए थे?

हां

ये मुझे ध्यान नहीं। ये देखना पड़ेगा अपने रिकॉर्ड्स में।

अच्छा?

98 की हो ही नहीं सकती क्योंकि 2001 के बाद हमारे यहां पठन-पाठन हुआ था। तो उसके बाद ही की होगी।

जब आपने एडवरटाइज किया था और अनिल चमड़िया ने अप्लाई किया था तो आपको यह क्यों लगा कि ये क्राइटेरिया फुलफिल करते हैं?

नहीं। उस समय हमारे दफ़्तर से ग़लती हुई थी। यूजीसी की दो गाइडलाइंस थीं। एक गाइडलाइंस पहले की थी, जिसमें… असल में ऐसा है कि यूजीसी में एक एक्सलेंस का क्लॉज है। एक्सलेंस के क्लॉज में आप किसी को प्रोफेसर बना सकते हैं। अगर उसने उस क्षेत्र में कोई महत्वपूर्ण कंट्रीब्यूशन किया हो तो। लेकिन उसके बाद 2002 में यूजीसी ने नयी गाइडलाइंस जारी की थी… 2000 या 2001 में…

2000 में।

चलो तो अच्छा है आपने देख रखा है… तो फिर आप मुझसे क्या पूछ रहे हैं? (थोड़ा पॉज) उन गाइडलाइंस में यह स्पष्ट था कि यूजीसी ने मास कॉम से ये क्लॉज हटा दिया था। बाकी दूसरी जगह है। जैसे अनिल चमड़िया साहित्य के प्रोफेसर हो सकते थे। किसी और हमारे सब्जेक्ट के हो सकते थे। लेकिन वो मास कॉम के नहीं हो सकते थे। दुर्भाग्य से हमारे दफ़्तर में जब स्क्रूटनी (फॉर्म की) हो रही थी, तो वो रिकॉर्ड हमारे सामने नहीं आया था। उस चक्कर में हमने अनिल चमड़िया को बुला लिया और सलेक्शन कमेटी ने उनको सलेक्ट भी कर लिया।

इस ग़लती की जानकारी आप लोगों ने ईसी को दे दी थी। या फिर ईसी ने …

नहीं। हमने दे दी थी। हम क्यों ईसी से छिपाएंगे। हमने उससे पहले हाईकोर्ट को यह जानकारी दे दी थी। शायद आपको यह तथ्य नहीं मालूम है कि नागपुर में हाईकोर्ट में अनिल चमड़िया के ख़िलाफ़ एक रिट है। एक सज्जन जो कि… आशुतोष मिश्रा नाम के एक सज्जन हैं, जो उसी इंटरव्यू में आये थे, जिनका सलेक्शन नहीं हुआ था। तो आशुतोष मिश्रा ने एक रिट कर रखी है हाईकोर्ट में। उन्होंने कहा है कि भाई साहब 2002 या फिर 2001… अब आप कह रहे हैं कि 2000 तो यूजीसी की 2000 वाली गाइडलाइंस का यूनिवर्सिटी ने उल्लंघन किया है। यह विश्वविद्यालय को अधिकार नहीं था। यह ईसी के बैठक से पहले की बात है। हफ़्ते-दस दिन पहले की बात। जब हमने अपना पक्ष रखा, तो हमने स्वीकार कर लिया था कि हमसे ग़लती हो गयी थी। और हम इस ग़लती को सुधार कर आपके पास आएंगे।

हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई की जानकारी ईसी को दी गयी थी?

हां, ये ईसी के मेंबर्स को भी पता होगी।

उनको पता था कि आपलोग एक पोजीशन ले चुके हैं।

हां… नहीं… ये तो मुझे ध्यान नहीं आ रहा कि शायद यह पक्ष उठा था या नहीं उठा था। लेकिन जो यूजीसी के नॉर्म्स थे और जो एड्वरटिजमेंट था, वो सब ईसी के सामने रखा गया था। उन्होंने सारे… दस बारह जितने अप्वाइंटमेट हुए थे… सबका एक-एक करके देखा।

कोर्ट का जिक्र किया गया था?

मुझे नहीं लगता कि कोर्ट का जिक्र किया था। हो सकता है कि बातचीत में आया भी हो, तो मुझे ध्यान नहीं।

मृणाल पांडे का कहना है कि बैठक में कहा गया था कि ग़लती हो गयी है, उसे हमें सुधारना है।

हां… यह तो हमने कहा ही था कि हमसे ग़लती हो गयी है और उसे सुधारना है।

मृणाल जी ने ये भी कहा कि किसी भी कानूनी पचड़े से बचने के लिए हमने उनको अप्रूव नहीं किया।

चलो अच्छा है। मृणाल जी कह रही हैं तो ठीक ही होगा। मृणाल जी का कहना ठीक ही होगा। (पॉज) क्योंकि हमने ऑलरेडी नागपुर हाईकोर्ट में यह स्वीकार कर रखा है कि हमसे ग़लती हुई है। अगले दस पांच दिन में हाईकोर्ट का फ़ैसला आ जाएगा। हमसे ग़लती हुई है तो हम उसे छिपाएं क्यों?

आपके कार्यकाल के दौरान कुल कितनी नियुक्तियां हुई हैं?

अब यह तो ध्यान नहीं… देखना पड़ेगा।

फैक्लटी पोजिशन..

अब यह ध्यान नहीं। 12-13 तो हुई ही होंगी।

बस 12-13 के आस-पास

अभी तक तो एक ही विज्ञापन निकला था मेरे सामने, जिसका इंटरव्यू हुआ था। दूसरा विज्ञापन अब निकला हुआ है। 10-12 लोगों का और। जिस पर अगले एक-दो महीने में इंटरव्यू होंगे।

(((कमरे की घंटी बजती है।)))

लगभग 12 के आसपास आपके मुताबिक नियुक्तियां हुई हैं।

यस… ज़रा एक मिनट शाहिद (कमरे में बैठे हुए शाहिद से उन्होंने गुजारिश की दरवाज़ा खोलने के लिए। बैरा चाय लेकर कमरे में दाखिल होता है। बातचीत जारी रहती है।) इक्जैक्ट संख्या तो मुझे देखनी पड़ेगी।

नियुक्तियों के लिए क्या कोई अप्रूवल लेना पड़ता है? ईसी से या फिर फाइनेंस कमेटी से या फिर यूजीसी से?

नहीं अप्रूवल नहीं लेना पड़ता।

यूजीसी से भी नहीं लेना पड़ता।

यूजीसी की गाइडलाइंस उनकी वेबसाइट पर हैं। अगर आपको चाहिए तो आप उनकी वेबसाइट पर देख सकते हैं।

(((अब बातचीत थोड़ी देर कर लिए रुकती है। चाय बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है)))

“अंकित की चोरी साबित होगी, तो उसे जाने से कोई नहीं रोक सकता”

इसी से जुड़ा हुआ मामला है। क्या आपने ईसी को इस बात की जानकारी दी थी कि डॉ अनिल राय अंकित को लेकर विवाद चल रहा है।

नहीं… नहीं। देखिए। ये ईसी से जुड़ा मसला नहीं है। जो अनिल राय अंकित के ऊपर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने प्लैगरिज्म (plagiarism – दूसरे के विचार और भाषा को उठा कर अपने नाम पर चेंप देना) किया है… दूसरों की किताबों से चुरा कर लिखा है… उसकी जांच हो रही है। जांच की रिपोर्ट आएगी, वो ईसी के सामने रखी जाएगी। क्योंकि अनिल राय अंकित वो सारी योग्यताएं पूरी करते थे, जो यूजीसी की गाइडलाइंस में थीं, इसलिए अंकित के मामले में कोई दिक्कत नहीं हुई। यह तो दूसरा आरोप है कि उन्होंने प्लैगरिज्म किया है। दूसरों की किताबें उठा कर अपने नाम पर छाप दिया है। यह जांच का विषय है। जांच कमेटी बना दी गयी है।

अंकित अभी सस्पेंड हैं या काम कर रहे हैं?

क्यों भई? जब तक कोई दोषी नहीं पाया जाएगा, उसे सस्पेंड क्यों किया जाए?

सस्पेंड तो करना ही चाहिए था।

काहे को सस्पेंड?

जांच कमेटी में कौन कौन है?

वो मैं अभी नहीं बता सकता। क्योंकि कमेटी के मेंबरों के रिटेन कंसेंट अभी आये नहीं थे। हमने उनको ऑलरेडी भेज रखा है। जब मैं चला था तो उन्होंने कहा था कि उन्होंने स्पीड पोस्ट से भेज दिया है। मुझे वहां से चले सात दिन हो गये हैं। अब मैं जाकर के देख कर बताता हूं।

ये जो ईसी फैसले होते हैं – किसी को रखने और निकालने के फैसले – इसमें क्या ईसी का फैसला अंतिम होता है या फिर इसके ऊपर कोई और भी अथॉरिटी है, जो उसके फैसले को बदल सकती है?

ईसी के ऊपर तो कोई नहीं है। ईसी ही है। अब चमड़िया जी कोर्ट में जाना चाहते हैं तो जाएं।

विजिटर की कोई भूमिका होती है क्या?

विजिटर की भूमिका… विजिटर को हमने भेज दिया है। अब विजिटर के यहां से कोई ऑब्जेक्शन आये, तो देखा जाएगा।

अप्रूवल आ गया क्या?

नहीं। विजिटर के अप्रूवल की कोई ज़रूरत नहीं होती है। विजिटर को हम सूचनार्थ ईसी की सारी प्रोसिडिंग के फैसले भेजते हैं।

((… जारी))

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