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निरंकुश कुलपति की इंसाफपसंदों ने भर्त्‍सना की

17 February 2010 9 Comments

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के बाद बिना कोई कारण बताये उनकी सेवा समाप्त करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाये जाने की जरूरत है। आईएएस और आईपीएस पृष्ठभूमि के कुलपतियों के कार्यकाल में कई तरह की मानमानी किये जाने की शिकायतें मिलती रही हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में जनसंचार विभाग के प्रोफेसर अनिल चमड़िया को सात महीने के बाद जिस तरह से विश्वविद्यालय से बाहर किये जाने का मामला सामने आया है, वह एक नयी तरह की प्रवृत्ति को सामने लाता है।

महात्मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में दलित प्रोफेसर एल कारुण्यकारा को छह दिसंबर को बाबा साहेब के महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के कारण कुलपति द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई किये जाने की नोटिस जारी करने एवं जनसंचार विभाग के प्रोफेसर अनिल चमड़िया की कार्य परिषद द्वारा नियुक्ति को रद्द करने की कार्रवाई की दिल्ली फोरम फॉर सोशल जस्टिस भर्त्सना करती है। एल कारुण्यकारा को जिस कार्यक्रम में भाग लेने की वजह बता कर नोटिस जारी की गयी, उस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के गैर दलित अन्य अधिकारियों ने भी भाग लिया था। लेकिन एल कारुण्यकारा को दलित होने के कारण नोटिस जारी कर दी गयी और कुलपति ने चेतावनी दी कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसी तरह से प्रोफेसर अनिल चमड़िया की दूसरे विभाग के ग्यारह शिक्षकों के साथ जनसंचार विभाग में प्रोफेसर के पद पर सात महीने पहले नियुक्ति की गयी थी। लेकिन 13 जनवरी को दिल्ली में विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में कुलपति के प्रस्ताव के अनुसार ग्यारह शिक्षकों की नियुक्ति को तो स्वीकृति प्रदान कर दी गयी लेकिन प्रोफेसर अनिल चमड़िया की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया। जबकि विश्वविद्यालय के अधिनियम के अनुसार किसी प्रोफेसर के संबंध में चयन समिति द्वारा की गयी अनुशंसाओं को कार्य परिषद स्वीकृति नहीं प्रदान करती है तो उसे स्वीकृति नहीं देने का केवल कारण बताना है। इसके बाद उस मामले को अंतिम निर्णय के लिए विश्वविद्यालय के विजिटर (राष्ट्रपति) को भेजे जाने का प्रावधान है।

पहले भी विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने ग्यारह शिक्षकों की नियुक्ति को स्वीकृति प्रदान नहीं की थी, तब उन सारे मामलों को राष्ट्रपति के समक्ष भेजने का निर्णय किया गया था। लेकिन अनिल चमड़िया के मामले में कुलपति विभूति नारायण राय ने राष्ट्रपति के अंतिम निर्णय का इंतजार किये बिना ही उन्हें कार्य मुक्त करने का आदेश पारित कर दिया। दिल्ली फोरम फॉर सोशल जस्टिस उनके इस फैसले की निंदा करती है और मांग करती है कि सात महीने के बाद बिना कोई कारण बताये अनिल चमड़िया की नियुक्ति को रद्द करने के अपने निर्णय को वापस लें। राष्ट्रपति से भी दिल्ली फोरम फॉर सोशल जस्टिस की गुजारिश है कि वे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें और पुलिस पृष्ठभूमि वाले कुलपति की निरंकुशता पर अंकुश लगाएं। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में नवनियुक्त शिक्षकों को प्रोबेशन के दौरान भय और असुरक्षा के मनोविज्ञान का शैक्षणिक गतिविधियों पर गहरा असर होता है। ये लगातार शिकायतें मिल रही है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में नव नियुक्त शिक्षकों को प्रशासनिक दबावों में रहना पड़ता है और उनके समक्ष किसी भी वक्त नौकरी से निकाले जाने का भय बने रहता है।

रतन लाल, संयोजक, दिल्‍ली फोरम फॉर सोशल जस्टिस

9 Comments »

  • akinchan said:

    abe chutiye kyaa baasi khabar parkalam chalaa rahe ho. avinash type lakhero ke chakakar me kyo pade hp

  • rinkoo singh said:

    dhol, gawar, …… pashu naari sakal tadna ke adhikari.

  • sach bolo said:

    sahi likha hai aapne.university koi thana nahi hoti ki raub se chalaya jaye.ispe vichar karna hoga.
    cnkichan jee ne anuchit shabdo ka prayog kiya hai jo thik nahi hai.
    ye nischit anil ankit hoga ya uska koi chela. kyo ki ish samaya sabse jyada wahi paresan hai.hamare department ke student main unki kya respect hai sabko pata hai.
    avinash ji aap sach ko dete rahiye.
    hathi chalti rahati hai aur?

  • Omprakash kushwaha,J.N.U said:

    रतन लाल, संयोजक, दिल्‍ली फोरम फॉर सोशल जस्टिस aapko bahut bahut dhanybad

  • Rajesh said:

    Maoist killed 30 policemen in Bengal and killed 9 villagers in Bihar. Avinash will not discuss that issue because none of the killed belong to his family. Maoist are more dangerous then Pakistan . Soon our Govt realises this thing is better. They should arrest the sympathizers of Maoist who are providing base and collecting money for them

  • bp singh said:

    aapne bahut achhe se mudda uthaya, aapke tarko ka VN Rai ke pas koee jawab nahi hai. aapko ye tark samne lane ke liye dhanyavad.

  • rajnesh said:

    probation waala masla wajib hai.

  • Save the International university said:

    Thank You Thank You Very Much

    रतन लाल Jee,(संयोजक, दिल्‍ली फोरम फॉर सोशल जस्टिस) apne Bilkul Sahi bate kahi hai…. Lakin kiya ise koi sunne wala hai…. khas kar jab samne koi kanun nirmata ho….

    Chandan Singh
    Journalist(Patna)

  • baurambaital said:

    ab sarkar muhalee par vot karake kulapati nyukta kare.
    agala kulapati kaun hoga?
    anil ya chamariya ?
    vot den.

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