लांछित होने के बावजूद बच्चन की लालसा

एक अरसा बीता। अपने जीवन की गहमा-गहमी में मोहल्ला लाइव के लिए नहीं लिख पाया। वैसे, आप सभी को पढ़ने और कमेंट करने के इतने अवसर मिले कि आप ने भी अब्राहम हिंदीवाला की सुध नहीं ली। हो सकता है ली भी हो तो माडरेटर महोदय ने मुझे नहीं बताया। बहाने और शिकायत में देर तक उलझने से बेहतर है कि लिखना और कमेंट करना चालू करें।
पिछले दिनों फिल्मफेअर ने अमिताभ बच्चन को ‘पा’ फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया। फिल्मफेअर के पुरस्कारों पर क्या बातें करना? उन्होंने इस पुरस्कार के जरिये अमिताभ बच्चन को मनाने की कोशिश की। आप सभी जानते हैं कि मुंबई मिरर में छपी ऐश्वर्या राय से संबंधित एक खबर से बच्चन परिवार नाराज है। वे चाहते हैं कि मुंबई मिरर माफी मांगे। उस खबर को लेकर आहत अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन ने ब्लॉग और ट्विटर पर लिखा कि कोई आपकी मां, बहन या बीवी के बारे में ऐसी बातें लिखे, तो आप क्या करेंगे? मुझे लगा कि हर वर्ग और समाज में औरतों को कमतर माना जाता है। पुरुष सदस्य अपने समाज की स्त्रियों की संरक्षा और सुरक्षा को नैतिक जिम्मेदारी मानते हैं। झूठी खबर के खिलाफ यह लड़ाई ऐश्वर्या राय अकेले भी लड़ सकती थीं। लेकिन नहीं, बच्चन बाप-बेटे ने इसे अपना कर्तव्य समझा और हमें बताया कि ऐश्वर्या राय की ब्रांड वैल्यू जो भी हो, वह हैं एक अबला औरत।
एक और दुविधा है मेरी। हमारे फिल्म स्टार अंग्रेजी अखबारों और मीडिया से लांछित, तिरस्कृत और अपमानित होते हैं, लेकिन वहीं से पुरस्कृत और सम्मानित होने की लालसा रखते हैं। अब फिल्मफेअर के पुरस्कार का ही मामला लें। अमिताभ बच्चन को अपनी फिल्म बिरादरी को सख्त हिदायत देनी चाहिए थी कि उनका पुरस्कार कोई ग्रहण न करे। जैसे कि आमिर खान मीडिया हाउस के पुरस्कारों में शामिल नहीं होते और उन्हें स्वीकार भी नहीं करते। फिल्मों के खोजी पत्रकारों को पता करना चाहिए फिल्मफेअर की ट्राफी अभी कहां है? क्या वह अभी तक करण जौहर के पास ही है या प्रतीक्षा, जलसा या जनक में सम्मान के साथ अन्य ट्राफियों के बीच लगा दी गयी है?
अमिताभ बच्चन सचमुच बुढ़ा गये हैं। इन दिनों वे जैसे तिलमिलाते और पिनकते हैं, उससे घर के किसी बुजुर्ग की याद आती है। ऐसे बुजुर्ग अपनी मौजूदगी और महत्व का एहसास दिलाने के लिए दिन-रात खांसते और भुनभुनाते रहते हैं।
♦ अब्राहम हिंदीवाला









आपने ऐष्वर्या के मामले को लेकर जो कहा है उससे असहमति। उसके बाद जो कहा है उससे सहमति।… आपका स्वागत है।
चलिए कहीं तो सहमत हैं।
अगर पति और पिता तुल्य ससुर अपने परिवार की स्त्री के पक्ष में आते हैं तो इसमें “स्त्री को अबला मानने” की बात कहां से आ गई? अगर कलम के ज़रिए किए गए अपमान की जगह कोई हाथ पकडकर अपमान कर दे और परिवार के पुरुष सदस्य विरोध करें, तब भी आप यही पूछेंगे कि स्त्री को अबला क्यों माना जा रहा है? यह ठीक है कि अमिताभ बच्चन अपने हिंदू होने पर शर्म नहीं करते और अपनी आस्था को छुपाते भी नहीं हैं, इसलिए वे और उनका परिवार आप लोगों का स्वाभाविक टारगेट है. लेकिन मित्र, सिर्फ़ विरोध करने के लिए तो विरोध मत कीजिए, वह भी इस कदर मूर्खतापूर्ण विरोध!
वैसे, फ़िल्मफ़ेयर वाले पैराग्राफ़ से सहमत हूं.
मैं अब्राहम जी की पोस्ट से पूरी तरह इत्तफाक रकती हूं। अमिताभ का पूरा चरित्र दिन ब दिन नंगा होता जा रहा है। एंग्री यंग मैनकी गह वह एंग्री ओल्ड मैन होते जा रहे हैं जिसे अपने परिवार, अपने करियर, अपने पैसे औप अपने नाम की ही चिंता है। ( अमिताभ का नरेंद्र मोदी से गुजरात का ब्रैंड एंबैस्डर बनने की ख्वाहिश जाहिर करना) हालांकि अमिताभ के ऐश की तबियत के बारे में जताए गए विरोध में कुछ गलत नहीं है लेकिन उनके शब्द ये जाहिर हैं कि घर के पुरुषहोने के नाते ये उनका जिम्मेदारी है। बचाव में तो जया बच्चन भी आ सकती थीं फिर वह क्यों नहीं बोलीं। जो स्त्री अपने घर की महिला का अपमान होने पर भी चुप रहे वह भी एक मुखर राजनीतिज्ञ मानी जाने के बाद भी। उसके लिए हम सब क्या कहेंगे। अमिताभ का पूरा परिवार और वह खुद जिस प्रगतिशील सोच की झांकी दिखलाते फिरते हैं वह दरअसल पुरुषसत्तात्मक दंभ और परुवरवाद के पुरातन ढांचे में सनी नयी चाशनी है। जिस में जया बच्चन पहले ही अपना करियर स्वाहा कर चुकी हैं और अब ऐश भी उनके नक्शेकदम पर चल रही हैं।
abhinetri pahle abhinetri hoti hai baad mein bahu beti ya bahen owr koi baat batai ja rahi hai to kuchh sach owr kuchh jhoth. uspar agar amitabh bachchan react karte hai to ye ek mature insaan ki pahchhan nahi hai , aishwaryaa rai pahle bhi vivadon mein rahin hai owr wo jis xetra se judi hain wahaan to ye sab aam baatein hain agar aaj mumbai mirror mafi maang bhi le to kya aage unke saath koi vivad nahi hoga owr vivadon se pareshaani hai to sirf aishwarya rai patni owr bahu bankar rahen film industry chhod den
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