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अज्ञेय की जन्‍मशती : कवि की कविता, कवि की आवाज़

8 March 2010 4 Comments

agyeyaअज्ञेय को उनकी आवाज़ में सुनना एक आह्लादकारी अनुभव था। सात मार्च, रविवार की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के एनेक्‍सी सभागार में उनकी कविताओं को सुनने के लिए लगभग सौ बुद्धिजीवी, लेखक, कलाकार, संगीतकार, नाट्यकर्मी और पत्रकार जुटे थे। अज्ञेय के श्‍वेत-श्‍याम चित्रों एक एक करके पर्दे पर आ रहे थे और पार्श्‍व से उनकी विनम्र आवाज़ हॉल के अंधेरे में फैल रही थी। उनकी आवाज़ की रेकार्डिंग उपलब्ध हुईं रमेश मेहता और अज्ञेय के निकट रहे ओम थानवी के सौजन्य से। कविताओं का चुनाव और संयोजन ओम थानवी ने किया; चित्र उनके निजी संग्रह से थे। अज्ञेय की जन्‍मशती का यह पहला आयोजन था। इस तरह का आयोजन साल भर तक चलेगा।

इस अवसर पर दर्शकों को बांटे गये एक फोल्‍डर में अशोक वाजपेयी ने लिखा है, ‘आप जानते ही हैं कि 2011 में हमारे तीन मूर्धन्‍यों शमशेर बहादुर सिंह, अज्ञेय और नागार्जुन की जन्‍म शताब्दियां क्रमश: 13 जनवरी, 7 मार्च और ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा को होने जा रही है। यह अवसर होगा, जब हम इन कृतिकारों के अवदान और उनके विभिन्‍न पक्षों का पुनराकलन करें और हिंदी लेखक समाज की ओर से उन्‍हें प्रणति दें।’

मोहल्‍ला लाइव पर हम इन तीनों कृतिकारों पर होने वाले आयोजनों की सूचना देते रहेंगे। फिलहाल आप यूट्यूब के सौजन्‍य से सुनिए अज्ञेय की कविताएं…

कविता पाठ : एक

कविता पाठ : दो

असाध्‍य वीणा : भाग एक

असाध्‍य वीणा : भाग दो

असाध्‍य वीणा : भाग तीन

4 Comments »

  • आशुतोष said:

    अद्भुत, मेरी पीढ़ी के लिए, जिसने अज्ञेय को देखा नहीं, सुना नहीं, यह अवर्णनीय अनुभव है. अज्ञेय शब्द साधक थे, शील के वट वृक्ष.शब्द उनसे छिटकते नहीं थे, उनकी आवाज में आज इसे महसूस भी कर लिया. आयोजकों को और आपको भी; शतशः बधाई.

  • हृषीकेश सुलभ said:

    इन कवि‍ताओं को उपलब्‍ध कराने के लि‍ए मोहल्‍ला के प्रति‍ आभार।

  • anil gupta said:

    bahut bahut abhaar

  • satyarth aniruddha said:

    kya kahun,maun rahun…!!!
    “maun bhi abhivyanjana hai”

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