किशोर अजवानी को सवाल दें, वे रविशंकर से पूछेंगे
धर्म कर्म की दुकान चैनलों पर चकाचक रहती है। कई बाबाओं पर पिछले दिनों गाज गिरी। कोई सेक्स स्कैंडल में घिरा, तो किसी पर सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप लगे। बाबा रामदेव का बयान आया कि साधु समाज के खिलाफ गहरी साजिशों का दौर है ये। ऐसे में स्टार न्यूज के एंकर किशोर अजवानी आज रविशंकर का इंटरव्यू ले रहे हैं। जैसा कि उन्होंने अपने ब्लॉग पर डाली संक्षिप्त सूचना में बताया है, ये इंटरव्यू लाइव होगा। आप सवाल उनके ब्लॉग पर जाकर डाल सकते हैं। ये खयाल रहे कि आपके सवाल को वे क्रेडिट नहीं देंगे। बहरहाल, उनकी सूचना को यहां छापने का मकसद सिर्फ उसके विस्तार का नहीं है – आप देखें कि एक वरिष्ठ मीडियाकर्मी की भाषा कितनी हिचकोलेदार हो जाती है, हड़बड़ी में
: मॉडरेटर
एक्चुअली तो लेट हो गया अब, लेकिन फिर भी अगर आपके जेहन में श्री श्री रविशंकर के लिए कोई सवाल हो, तो सुबह तक मुझे बता दें। कल दोपहर बारह बजे इंटरव्यू है उनका, लाइव। हो सका तो आपका सवाल जरूर लूंगा। मतलब वो विविध भारती की तरह तो न ले पाऊंगा कि फलां फलां का फलां जगह से ये सवाल है, बस मेरी मदद हो जाएगी थोड़ी – और क्या। वैसे रात के साढ़े ग्यारह तो बज गये हैं मेरी घड़ी में – लेकिन फिर भी हो सकता है आपको मौका लग जाए ये पोस्ट पढ़ने का भी और वाकई आपके पास कोई सवाल भी हो, तो मुझे बड़ी ख़ुशी होगी। इसलिए सोचा ट्राई मार लूं आज ब्लॉग पर।
ब्लॉग का नाम : खामख्वाह










mujhe milawaa deejiye on line main podcast-saakshatkar le loongaa
to pandit ji se vartaa fix karawa deejiye shreeman
aabhaar
भाई, अध्यात्म के अर्थशास्त्र पर कुछ पूछियेगा,और महेश योगी से इनकी मुलाकात,उनके प्रवक्ता बनने और उनसे दूर होने के बारे में.
आध्यात्मिकता को बाज़ार में उतारकर सडक छाप होरहे बाबाओं के बारे में भी,होसके तो पहुंचे हुए होने दावा करने के बाद एकांत साधना
के बजाए मायावी दुनिया में बने रहने की ललक के बारे में भी
नहीं मॉडकेटर भाईसाहब (या बहनजी), हड़बड़ी में नहीं लिखा है। ऐसे ही लिखता हूं मैं। आपको अगर लगता है कि मेरी भाषा मीडियाकर्मी (आपका शब्द) होने के लायक़ नहीं है तो ख़याल रखूंगा आगे से। और माफ़ी चाहूंगा। लेकिन अब इस उम्र में दूसरा काम ढूंढना! बड़ी मुश्किल हो जाएगी यार, रहम करो।
अब देखो, टाइपिंग में भी मिस्टेक कर दी, मॉडरेटर को मॉडकेटर लिख दिया मैंने अपने कमेंट में। नहीं, मेरा कुछ नहीं हो सकता।
अच्छा है कि मॉडकेटर ही टाइप किया नहीं तो केयरटेकर टाइप कर दिया होता तो हमें समझने में भारी फजीहत होती।..इस वर्चुअल स्पेस में इतने काबिल-काबिल लोग भरे पड़े हैं कि इसे ही जस्टीफाय कर देते। आपकी तारीफ में कसीदे पढ़ने लग जाते और तब आपको भी लगता कि आपने वाकई मॉडरेटर के लिए नया शब्द दे दिया।..संभव है फुलकर कुप्पा हो जाते।..
किशोर जी, आपने गौर नहीं किया। आपकी भाषा के बारे में लिखने के बाद मैंने एक स्माइली लगायी है। आपने नहीं लगायी। इसका मतलब आपने सीरियसली ले लिया।
ओह,स्माइली तो हमने भी नहीं लगाया तब तो मेरी बात को भी सीरियसली ले लेंगे। सारी भाषा एक तरफ और एक अदना सा स्माइली एक तरफ।..अब जैसे लें मेरी बातों को क्या कर सकते हैं?
दांत चियारने की भी अपनी महत्ता है भाई। ये सबके लिए
लो जी मेरी स्माइली। वो लगानी नहीं आती, लेकिन टेक्स्ट में ले लो यार, मुझ ग़रीब के पीछे पड़ कर क्या होगा। मैंने कतई सीरियसली नहीं लिया भाई। मैं तो ख़ुद को हल्के में लेने में यक़ीन रखता हूं। हल्के में नहीं लूंगा तो उड़ूंगा कैसे? लो, एक और बड़ी वाली स्माइली।
sri sri ravishankar bhi dharm ki dukan hi chalate hai. inaki dukandari thoda sofisticated hai.
रविशंकर जी से पूछा जाए कि वो समस्त हिन्दुओ का प्रतिनिधित्व करते हुए डॉक्टर ज़ाकिर नायक की सभा में गए थे और वहां पर सभी की बेइज्जती कराकर आ गए। उन्होंने सभी के सामने मंच में स्वीकार किया कि उन्होंने हिन्दू और इस्लाम धर्म की समानताओं पर पुस्तक लिखी है वो जल्दी में लिखी है और उसमें कई त्रुटियां हैं।
उस वक्त न सिर्फ उनकी खिल्ली उड़ी बल्कि आज डॉ. नायक जिस किसी भी सभा में जा रहे हैं वहां पर उसी पुस्तक को ले जाते हैं और बताते हैं कि कैसे इसके लेखक ने गलती मानी।
उनसे पूछिए कि अगर उन्हें जानकारी नहीं है तो ऐसी सभा में क्या सोचकर गए थे…?
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Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)जनमत
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