शिवसेनावादियो, इधर देखो, देवी दुर्गा नंगी खड़ी हैं…
हुसैन पर हल्ला मचाने वाले शिवसेनावादियों का रचना और उसकी प्रक्रिया से कोई लेना देना नहीं होता। वे बस मंगलाचरण के शोर में अपनी गालियां निकालते हैं और सो जाते हैं। अभी एक मित्र ने हमें सुबोध गुप्ता के बारे में बताया, जो कलाकार हैं और जिन्होंने दुर्गा की नग्न मूर्ति बनायी है। 1964 में बिहार में पटना के पास खगौल कस्बे में जन्मे सुबोध गुप्ता ने पटना आर्ट कॉलेज से कला की पढ़ाई की। 1990 के बाद से वे लगातार दिल्ली में हैं। सुबोध गुप्ता की ये मूर्ति बहुत स्वाभाविक है और इसमें दुर्गा की शक्ति को उनके अप्रतिम सौंदर्य के साथ जोड़ कर देखा गया है। गनीमत है कि शिवसेनावादियों की नजर उन पर नहीं पड़ी है। पड़ती भी तो वे सुबोध को हिंदू होने का लाभ देते। ऐसा नहीं लगता कि हिंदुओं की दादागीरी का प्रदर्शन करने वाले इस देश में अभिव्यक्ति की सारी आजादी केवल इसी कौम के लिए है? खैर, आइए दुर्गा की नग्न मूर्ति पर एक नज़र डालें…

सुबोध की चंद कलाकृतियों से परिचित होने के लिए क्लिक करें : Subodh Gupta Images










yah bhi hussain se alag nahi hai. iske saath bhi usi prakar kanooni ladai ladna chahiye jaise ki hussain ke khilaph ki gayi…
avinash ji, asi kai or kala kritiyan hain……..fursat mili to bhejunga aapko………….
aapne lagatar bahut umda kam kiya hai hussain prakaran par……
badhai hai aapko………….
hum kalakaron ki oor se dhanyawad bhi…
अविनाश शालीनता और अश्लीलता का अर्थ समझते हो या सिर्फ इसी तरह की कुत्तई में समय जायर करते रहोगे? खैर तुम्हारी शालीनता और सभ्यता से कौन नहीं परिचित है। छेड-छाड और बलात्कार के इल्जाम झेल रहे तुम एसी ही सोच रखोगे इसमें अंतर क्या।
राक्षस को काट दिया, कहीं हुसैन तो नहीं था?
भले आदमी टैक्स का पैसा बचाने हुसैन तो कतर चला गया. देखते है वहाँ क्या बनाता है. काहे उसकी तरफदारी करते हो.
यह तो है ही क्या, भारत में नग्न शिल्पों की परम्परा रही है. मगर उनमें भेदभाव नहीं होता था. पण्डिंत नंगा और मौलवी कपड़ों में…विरोध इस मानसीकता का है. यह आप भी जानते है, मगर….
संजय बेंगाणी का कुतर्क : भारत में नग्न शिल्पों की परम्परा रही है। मगर उनमें भेदभाव नहीं होता था। यानी कलाकार केवल नग्न शिल्प ही रचता था। कमाल है भाई। खैर, आप सुबोध गुप्ता की एक और कलाकृति देखिए…
अब बताइए… आपकी पहली बात। हुसैन वहां पेंटिंग बनाने गये हैं, तीन महत्वाकांक्षी सीरीज़। बेबिलोन और अन्य सभ्यताएं, मोहनजोदड़ो से मनमोहन तक और हिंदी सिनेमा के सौ साल। आप देखेंगे क्या, ये तीनों सीरीज़ बना कर हुसैन आपको दिखाएंगे।
अविनाश बाबू, आप पत्रकार जितने अच्छे हैं कला के प्रसंशक उतने ही बुरे हैं। ऐसी बदमाशियों से बाज आइये आप।
बाज आने के लिए आप कितनी मुद्रा दे रहे हैं शशि बाबू…
अविनाश जी,
खगौल जिला नहीं, बल्कि पटना जिला के अंतर्गत एक क़स्बा है. कृपया इसे सुधार दें.
सांप्रदायिक शक्तियों को बेनकाब करने के लिए आपको और आपके मित्र को सलाम.
कलापारखी अविनाशबाबू, हम गरीबों के एक सवाल का जवाब दीजिये ना…
डेनमार्क के अखबार में छपा हुआ कार्टून “कला” की श्रेणी में आता है या नहीं?
(आरके लक्ष्मण सहित सभी कार्टूनिस्टों को ध्यान में रखकर बताईयेगा कि कहीं कार्टूनिस्ट साम्प्रदायिक तो नहीं होते?)
जवाब आसान और सीधे शब्दों में दीजियेगा, हम कोई बुद्धिजीवी तो हैं नहीं।
@सुरेश चिपलूनकर : कार्टून भी कला की श्रेणी में आते हैं – लेकिन अच्छी कला और बुरी कला की भी श्रेणियां होती हैं। जैसे आप हुसैन को बुरा कलाकार मानते हैं और मैं अच्छा। डेनमार्क के अखबार में छपा मोहम्मद साहब का कार्टून बेशक कला का ही एक रूप है लेकिन यहां मंशा सही नहीं है। उन्होंने मोहम्मद साहब की पगड़ी से पटाखा बांध कर नस्लीय घृणा का एक उदाहरण पेश किया है।
MAIN SAMAJH NAHI PAA RAHA KI AAP ISKI KHILAFAT KAR RAHE HAIN YA SUBODH GUPTA KI MARKETING KAR RAHE HAIN?
क्या ये मार्केटिंग का नया तरीका है? आप सुबोध गुप्ता कि बेहूदी कलाकृतियों को क्यों दिखला रहे हो?
यार, आप लोग बेवजह दुखी क्यों हैं, सुबोध और अविनाश सही तो दिखा रहे हैं. आप दुर्गा माता को रेडीमेड कपडे पहनाके उन्हें आधुनिक मशीनी युग की पैदाइश बनाना चाहते हैं. जबकि हम सभी जानते हैं कि दुर्गा माता उस युग में थी जिसमें कपडे का आविष्कार भी नहीं हुआ था. इस बारे में फ्रेडरिक एंगेल्स की ‘परिवार, निजी संपत्ति और राज्य की उत्पत्ति’ में अच्छी तरह से जाना जा सकता है.
तुम लोगों की नजर ही खराब है. मां दुर्गा को मां की नजर से देखो. हम सब तो उसके बालक हैं.
मुझे लग रहा था कि हिन्दी ब्लॉग जगत दो-तीन साल पहले के बचपने से आगे निकल आया होगा। लेकिन मैं देख रहा हूँ, नफरत फैलाने वाले नाम आज भी बेशर्मी के साथ सक्रिय हैं। आँखों पर पट़टी बांधे। उनका हश्र क्या हुआ, यह उनसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता। एक वक्त था जब यह हिन्दी ब्लॉग के नीति नियंता थे। आज कोई पूछता नहीं होगा। बाज आओ। दिमाग की सफाई कराओ।
हुसैन विरोधियों, हमारे जैसे लोग मजहब देखकर किसी के पक्ष और विपक्ष में नहीं खड़े होते। हम हुसैन के साथ है तो तसलीमा, रुश्दी के साथ भी। हम अगर हिटलर के वंशजों के खिलाफ है तो तसलीमा, रुश्दी और डेनिश कार्टूनिस्ट के खिलाफ फतवा देने वालों के भी खिलाफ हैं। हमारे लिए अभिव्यक्ति की आजादी ज्यादा बड़ी चीज है। हम कला के मेरिट पर बात करेंगे किसी का सर कलम नहीं।
भाई जानों, हम जनेऊ और नाम देखकर विरोध या समर्थन नहीं करते। 21वीं सदी के गुण अपनाओ। बर्बर युग में क्यों जाना चाहते हो। हे प्रभु इन्हें कभी माफ मत करना, क्योंकि ये जानते हैं कि ये नफरत फैला रहे हैं। हिन्दी ब्लॉग जगत को नफरतियों से मुक्त करो। आमीन
अविनाश विचारों की टकराहट जारी रहे।
Ye mansik-vikriti ka parichayak hai jo aurato ko nagna dekhna chahte hai…!!!!! mai yah nahee jaanta ki wo khud kapde pahante jain ya nahee…agar haan to shayad aapko poochhna chahiye ki wo kyun pahante hai????
Rahee baaat Mf Hussain ki….to pata nahee unhone mahanta ka aisa koun sa karya jiya hai…..apnee beti ki to kapdo me dikhate hai…or hinduo ki devee -devatao ko nagna…ye kaisa dohra maap-dand hai…Avinash jee jara hame bataayein….ye koun see kala hai…kala ki samjh mujhe bhi hai !!!
kitne ghatiya patrakar ho tum, tumne ye neech karm karke famous hone ka jo short-cut apnaya hai, usse pata chalta hai ki tum kis tarah k journalist ho aur tumhara level kya hai. tumhare jaise log is tarah ki sasti patrakarita karke apnne aap ko to chamka lete hai magar kuch hai jo ghut-ghut ke marti hai aur vo hai PATRAKARITA. sudhar jao bhai aur vo ek machli mat bano jo pure talaab ko ganda karti hai…
Rightly said +1.
He just raise topic which can create controversy…just to get cheap popularity !!!!
Now I got the point , subodh has given huge chanda to Avinash as requested by him. In turn Avinash is obliging him by reproducing his popularity.
Good nexus between yellow journalism and psychic – painter.
Help mahalla save mohalla me Subodh ne lagta hai bahut chanda diya hai?
Income tax department plz probe this nexus
haaan ye log patrakaar evan patrakarita ke naam pe kalank hai…..!!!!!!!!!
मैं दुबिधा में हूँ क्या लिखूं क्या न लिखूं इस मुद्दे पे……….
पर किसी की भी आस्था के साथ खिलबाड़ नही करना चाहिए…..
जहा तक बात शिवसेना या उन जैसे राजनितिक पार्टी की है तो उनके बारे में क्या कहू…….उन्हें तो बस कोई मुद्दा मिलना चाहिए……जिसे वो अपनी राजनीती चमका ले…….
हुसैन साहब की तो भाई कहानी ही अलग है……अगर उन्हें लगता था की उन्होंने कोई गलत काम नही किया तो भारत आ कर उन्हें इसके खिलाफ लड़ना चाहिए था…….
उन्हें अपने देश की न्याय पद्धति पर बिसबास करना चाहिए था….हुसैन साहब की तो भाई कहानी ही अलग है……अगर उन्हें लगता था की उन्होंने कोई गलत काम नही किया तो भारत आ कर उन्हें इसके खिलाफ लड़ना चाहिए था…….
उन्होंने कहा की उनकी जान को खतरा था….
पर मैं समझता हूँ की उन्हें अपराध बोध हो गया था……पर वो उस अपराध की सजा नही पाना चाहते थे…..तो उन्होंने अपनी जन्मभूमि ही त्याग दी……..
सुबोध को भी व्ही सज़ा मिलनी चाहिए जो हुसैन को मिली थी …………..
वाह रे लेखक तेरे दिमाग का दिवालापन, मान गये……….
देवी दुर्गा की इस मूर्ति में शिल्पकार का अनाड़ीपन ही दिखाई दे रहा है, और साथ ही यह भी पता चला रहा है कि न तो उन्हें देवी दुर्गा के मिथ की समझ है, और न ही शरीर विज्ञान की। यदि हम मिथिकल एप्रोच को लेकर हम चले तो आभूषणों के बिना देवी दुर्गी की कल्पना नहीं की जा सकती। देवी दुर्गा की इस मूर्ति में उनके किसी भी कलाई या बांह पर कोई भी आभूषण नहीं है, उसी तरह कमर और गला भी बिना आभूषण के ही है। इससे स्पष्ट होता है कि देवी दुर्गा को लेकर गहन चिंतन नहीं किया है…सतही काम करके निकल गये हैं। शरीर विज्ञान के नजरिये से यदि देवी दुर्गा के पोज को देखे तो उसमें भयंकर गड़बड़ी दिख रही है। इस मूर्ति में देवी दुर्गा एक राक्षस पर भाले से हमला कर रही हैं। उनका बायां पैर राक्षस की तरफ उठा हुआ है। इस पोज में स्वाभाविक तौर पर शरीर का झुकाव राक्षस की तरफ होना चाहिये जबकि उनके वक्ष और कमर को देखकर यही प्रतीत हो रहा है कि वह सीधे तन कर खड़ी हैं। चेहरे का भाव भी राक्षसों के साथ युद्धरत देवी दुर्गा का नहीं है। यानि की शरीर रचना के साथ-साथ भाव पक्ष को भी उकेरने में यह कलाकार अक्षम साबित हुया है। मुझे नहीं लगता कि कला के नजरिये से देवी दुर्गा की इस मूर्ति के लिए कलाकार ने बारीक काम किया है। जहां कला है वहां तो न्यूडीटी होगी ही, लेकिन न्यूडीटी को इसके बारीक ग्रामर पर कसने की जरूरत है, और लिहाज से सुबोध गुप्ता कला से तो अभी कोसो दूर नजर आते हैं।
अविनाश जी, क्षमा करे, कला पर आपकी समझ पर भी मुझे तरह आ रहा है। आप हेंडिंग में लिख रहे हैं.शिवसेनावादियों इधर देखो देवी दुर्गा नंगी खड़ी हैं…..आपसे अनुरोध है कि एक बार फिर इस मूर्ति को ध्यान से देखे…यह मूर्ति अर्द्ध नग्न है। नंगी और अर्द्ध नग्न का फर्क समझाने की जरूरत मैं नहीं समझता…मुझे उम्मीद है कि दुबारा देखकर आप खुद इस अंतर को समझ जाएंगे। यदि फिर भी समझ में न आये तो अर्द्धनारीश्वर पर चिंतन किजीएगा। और हां उम्दा कला को उम्दा तरीके से प्रस्तुत करना चाहिये, न कि सतही लोकप्रियता पाने या हलचल मचाने के लिए भौंडे तरीके से।
सारे के सारे छद्म बुद्धिजीवी यहीं पर इकट्ठा होते हैं। और कहते हैं कि मोहल्ला को बचाइए, पत्रकारिता को बचाइए। अति उत्साह में यहीं पर गंभीरता खोते हुए नज़र आते हैं ये लोग।
और अगर इस तरीके को मॉडरेटर सही मानते हैं तो कल को तो ये अपनी इस तरह की तस्वीर की यहां प्रदर्शित कर देंगे। कल को पॉर्न साइट्स के फोटो यहीं छपेंगे और उसमें कला, अध्यात्म और असीम शांति ढूंढी जाएगी। दो चार टिप्पणीकार वाह-वाह करेंगे….
क्या हम अपनी जननी को इस रूप में प्रदर्शित कर सकते हैं?
तुम्हे तो आदत है ऐसी तस्वीरें छापकर टिप्पणी पाने की,हाहा तुम कम से कम पत्रकार नहीं हो सकते
haaan inka itihaas aisa hin raha hai…hai na Avinash Jee……..NDTV wala ghtna Bhoole nahee honge aap…. !!!!
Arei bhai kabhi aap apne mata pita ki aisi tasvir banakar to dekhe phir me manunga aap ek mahaan Artist hai………
So what if She’s Naked??
The beauty lies in the eyes of the beholder !!!
the image would not have seemed so offensive if Kali was potrayed-she’s nude(MahaNagni) anyway-untouched by Maya..
But isn’t She Durga and Durga is Kali??
So where’s the shame??
This is masterpiece-see with your inner eye !!!!
Leave your response!
पुराने पन्ने
Categories
Tag Cloud
abraham hindiwala anil chamadia anna hazare anurag kashyap arundhati rai arundhati roy Bahastalab bihar dalit dilip mandal gorakhpur hindi hindi cinema Hindi language Hindi Literature hindi media jansatta jawaharlal nehru university JNU Mahatma Gandhi Antarrashtriya Hindi Vishwavidyalaya mahatma gandhi international hindi university maoism maoist MGIHU mihir pandya namwar singh naxal naxalism naya gyanodaya Nirupama Pathak om thanvi prabhash joshi prabhat khabar Prakash K Ray rajendra yadav ravindra kaliya ravish kumar uday prakash vibha rani Vibhuti Narayan Rai Vice Chancellor vineet kumar vn rai women मीडिया मंडीRecent Posts
Most Commented
Recent Comments