नदी एक नौजवान ढीठ लड़की है

Arvind Das

अरविंद देश के उभरते हुए सामाजिक चिंतक और यात्री हैं। कई देशों की यात्राएं करने वाले अरविंद ने जेएनयू से प‍त्रकारिता पर भूमंडलीकरण के असर पर पीएचडी की है। IIMC से पत्रकारिता की विधिवत पढ़ाई भी की है। फिलहाल पेरिस में हैं। उनसे arvindkdas@ gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

♦ अरविंद दास

‘नदी एक नौजवान ढीठ लड़की है…’ केदारनाथ अग्रवाल ने ऐसा लिखा है। शायद केन नदी के बारे में। यदि वे केन के बारे में ऐसा नहीं लिखते, तो मैं सेन के बारे में यह कहता।

सेन नदी के तट पर घूमते हुए मेरे मन में लगातार यह पंक्ति गूंजती रही। पेरिस में कहीं भी चले जाएं आप घूम-फिर कर उसी के पास आने का जी चाहता है। सेन ढीठ है। वह आपका रास्ता नहीं छोड़ती…

वह आपसे लिपटना चाहती है। लिपटती है। वह आपको चूमना चाहती है। चूमती है। आप उसके कोमल और नरम हाथों की गरमाहट महसूस करते हैं।

कल कल करती हुई वह बात-बेबात हंसती रहती है… और जब आप उससे नाराज़ होने का अभिनय करते हैं, वह और हंसती चली जाती है… एक और चुंबन। उसकी सांसों की ऊष्णता आपमें गुदगुदी भरती है…

Sen River in Peris

Couples and group on bank of the Sen River

उसकी आंखों की कोर में जाड़े की सुबह का उजास और गर्मी की शाम की सुरमई चमक एक साथ डोलती है।

आप उसे फिर-फिर छूना चाहते हैं… और बलखाती, इठलाती-इतराती वो गयी। प्रेम में पगी लड़की की तरह उसका अनायास जाना भी सायास है।

सेन चिरयौवना है। उसकी वजह से पेरिस की फिजा में रोमांस है। आप कवि हो ना हो, सेन आपमें जीवन के प्रति राग पैदा करती है।

हमारे बचपन में समुद्र नहीं था लेकिन हम सौभाग्यशाली थे। हमें कमला और बलान दो नदियों का स्नेह एक साथ मिला।

सेन नदी के तट पर बैठे हुए मुझे दिल्ली की याद आने लगी। जेएनयू के सारे हॉस्टलों के नाम नदियों के नाम पर हैं… यमुना, कावेरी, ब्रह्मपुत्र… जेएनयू के अंदर जो एक जिद है, एक ढीठपन है, गर्वीली गरीबी है, कहीं इस वजह से तो नहीं।

कहते हैं दिल्ली भी यमुना के तट पर बसी है और कभी यमुना अपने उद्दाम संगीत से दिल्ली को आलोड़ित करती थी।

वर्ष 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान देश-विदेश के लाखों सैलानी दिल्ली आएंगे। यमुना के तट पर बसी दिल्ली शहर को वे ढूंढ़ेंगे। वे यमुना ढूंढ़ेगे।

(चित्र में, सेन नदी, पेरिस)

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