आकाशवाणी में कलाकारों को महीनों से भुगतान नहीं!

एफएम सहित आकाशवाणी दिल्ली के विभिन्न चैनलों में काम करने वाले सैकड़ों उदघोषकों और कर्मियों में अधिकतर कलाकारों को पिछले ग्यारह महीनों से भुगतान नहीं किया गया है। कुछ तो ऐसे भी हैं, जिन्हें इससे भी अधिक समय से पैसे नहीं मिले हैं। अपना रेडियो बचाओ अभियान का मानना है कि रेडियो के निजी चैनलों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से आकाशवाणी की स्थिति बदत्तर बनायी जा रही है।
राजधानी में अपना रेडियो बचाओ अभियान में लगे श्रोताओं, कलाकारों व समाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि रेडियो की भी वैसी ही स्थिति बनायी जा रही है जैसा कि टेलीविजन के निजी चैनलों के लिए जगह बनाने के लिए वर्षों पूर्व दूरदर्शन की बनायी गयी थी। निजी चैनलों के शुरू होने से पहले मैट्रो चैनल को सबसे ज्यादा लोकप्रिय बनाने की कोशिश की गयी। उसके जरिये दर्शकों की रुचि को मसलन भाषा और विषय वस्तु आदि हर स्तर पर बदलने की पूरी कोशिश शुरू की गयी। दूरदर्शन के कर्मचारियों की भी शिकायतें उन दिनों काफी बढ़ रही थी और उन पर ध्यान देने की जरूरत सरकार महसूस नहीं कर रही थी। इन दिनों रेडियो के पर्याय के रूप में एफएम चैनलों को जाना जाता है। खासतौर से मनोरंजन के लिए श्रोताओं की बड़ी तादाद एफएम चैनलों के कार्यक्रमों को सुनती है।
लेकिन आकाशवाणी के एफएम चैनलों की जो स्थिति है, उसे देखकर आश्चर्य ही नहीं होता है बल्कि ये एक भरोसे के साथ कहा जा सकता है कि रेडियो के निजी चैनलों के विस्तार के लिए आकाशवाणी के आला अधिकारी काम कर रहे हैं। याद दिलाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए कि टेलीविजन के निजी चैनलों की शुरुआत में दूरदर्शन को छोड़कर उसके कई बड़े अधिकारी निजी चैनलों की सेवा में ऊंची तनख्वाह पर चले गये थे।
एक तरफ तो रेडियो का तेजी से विस्तार हो रहा है और दूसरी तरफ आकाशवाणी पर वर्षों से नयी नियुक्तियां नहीं हुईं हैं और यहां प्रोग्राम प्रजेंटेशन का काम आकस्मिक प्रस्तोता ही करते हैं। काम के घंटे अधिक और पारिश्रमिक कम, इस पर भी भुगतान में वर्ष भर की देरी। जबकि संसद की एक समिति ने आकाशवाणी में अस्थायी कलाकारों की बदतर स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए उनकी स्थायी नियुक्तियां करने की सिफारिश की थी।
रेडियो के सबसे लोकप्रिय एफएम चैनलों के लिए काम करने वाले कलाकारों ने दो महीने के दौरान संबंधित उच्चाधिकारियों से मिलकर इन स्थितियों से अवगत कराया है लेकिन स्थितियां जस की तस हैं। “अपना रेडियो बचाओ” मंच के तत्वावधान में लगभग बीस सक्रिय प्रजेंटरों का एक प्रतिनिधिमंडल आकाशवाणी महानिदेशक को पहले 17 फरवरी और फिर 26 अप्रैल 2010 को ज्ञापन दे चुका है। इस ज्ञापन में कार्यक्रमों के गिरते स्तर, भुगतान में अभूतपूर्व विलंब की ओर ध्यान दिलाया गया है और एफएम गोल्ड चैनल में चल रही गड़बड़ियों के लिए एफएम गोल्ड चैनल की कार्यक्रम अधिशासी रितु राजपूत को जिम्मेवार बताया गया है। लंबे समय तक यह चैनल देश के सर्वाधिक लोकप्रिय चैनेल्स में रहा है और इसके सूझबूझ से भरे मनोरंजक और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम व्यापक जनहित का काम करते रहे हैं और श्रोताओं का जीवन प्रकाशित करते रहे हैं।
अपना रेडियो बचाओ मंच इस संदर्भ में सूचना और प्रसारण मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करता है और तुरंत भुगतान कर के कैजुअल प्रजेंटरों के नियमितीकरण की प्रक्रिया आरंभ करने की भी मांग करता है। साथ ही संसदीय समिति की सिफारिशों के आलोक में तत्काल कदम उठाने का आग्रह करता है। इस मंच के सदस्यों ने इस बात पर भी जोर दिया है कि आकाशवाणी को बर्बाद करने की जो साजिश चल रही है, उसका पर्दाफाश करने के लिए मंच राजधानी और देश के दूसरे शहरों में अभियान चलाएगा। (प्रेस विज्ञप्ति)










behtareen prayas ke liye ap logon ko dhanyawaad……
bahujan hitay ka koi concept kam se kam fm channael ke adhikariyon ke paas bacha hi nahi hai,sirf apna hit aur swarth..wo bhi casual announcers ke sir pe pair rakhkar,unki qabiliyat ka nazayaz fayada uthakar….apki ya koshish bahuton ko hausla degi
shubhkamnayen!
Now many TV /News channels/FM are available .Doordarshan /Akashvani is an outdated organisation .If it is in loss ,Govt must privatise and say bye bye to it .
i am also broadcaster pls contect me
मैं ऍफ़ ऍम रेनबो 100.7 लखनऊ से जुड़ा एक मज़दूर हूँ…लम्बे अरसे से आकाशवाणी से सम्बद्ध हूँ… जब ऍफ़ ऍम का जन्म भी नहीं हुआ था. मैंने रेडियो का सुनहरा कल भी देखा है और भविष्य के सपने संजोये अतीत की बुझती हुई आँखें भी…इस लिए इस हालत पे खून के आंसू बहाने के सिवाए और कुछ नहीं सूझता. सम्बंधित पेक्स कितनी दोषी हैं लखनऊ में बैठ कर मैं फैसला नहीं कर सकता पर कहीं न कहीं कुछ ग़लत हो रहा है जिसे तत्काल प्रभाव से ठीक किया जाना ज़रूरी है न सिर्फ़ दिल्ली बल्कि हर उस स्टेशन पर जहाँ पर भी असंतोष पांव पसार रहा है. वर्ना आकाशवाणी प्रतिभाओं की हत्या के पाप से स्वंम को कभी मुक्त नहीं कर पायेगा… सच बोलने का गुनाह करता रहा हूँ … इस अपराध में मेरा सर क़लम कर दीजिये प्लीज़!
http://anwarvoice.blogspot.com
I couldn’t resist commenting.
Leave your response!
पुराने पन्ने
Categories
Tag Cloud
abraham hindiwala anil chamadia anna hazare anurag kashyap arundhati rai arundhati roy Bahastalab bihar dalit dilip mandal gorakhpur hindi hindi cinema Hindi language Hindi Literature hindi media jansatta jawaharlal nehru university JNU Mahatma Gandhi Antarrashtriya Hindi Vishwavidyalaya mahatma gandhi international hindi university maoism maoist MGIHU mihir pandya namwar singh naxal naxalism naya gyanodaya Nirupama Pathak om thanvi prabhash joshi prabhat khabar Prakash K Ray rajendra yadav ravindra kaliya ravish kumar uday prakash vibha rani Vibhuti Narayan Rai Vice Chancellor vineet kumar vn rai women मीडिया मंडीRecent Posts
Most Commented
Recent Comments